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28 जूनियर डॉक्टर्स के इस्तीफा मंजूर, ग्वालियर में जूड़ा के समर्थन में सीनियर रेसीडेंट्स ने काम बंद किया

भोपाल. स्टायपेंड बढ़ाने जैसी 6 मांगों को लेकर 5 दिन से हड़ताल कर रहे प्रदेश के जूनियर डॉक्टर्स हाईकोर्ट की फटकार के बावजूद काम पर नहीं लौटे है। शुक्रवार को दिनभर सरकार, कॉलेज प्रबंधनों से उनकी बातचीत चलती रही और सभी ने मनाने की कोशिश की लेकिन जूड़ा नहीं माने इसलिए सरकार भी एक्शन में आ गई है। 3500 जूनियर डॉक्टर्स ने इस्तीफे दिए थे उनमें से 28 जूनियर डॉक्टर्स को गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल ने नोटिस भेज दिए है उनसे कहा है कि आपके इस्तीफे स्वीकार कर रहे है इसलिए आप 10 से 30 लाख रु. तक का बॉन्ड राशि भरें।
सीएमई निशांत वरवड़े की ओर से बताया गया कि मप्र चिकित्सा शिक्षा प्रवेश नियम-2018 और संशोधन 2019 के तहत अगर जूड़ा सीट छोड़ते है तो उनको बॉन्ड राशि एकमुश्त जमा करनी होगी। यह राशि 2018 और 2019 में एडमिशन लेने वाले जूड़ा के 10 लाख और 2020 में एडमिशन लेने वालों के लिए 30 लाख है। यह राशि कॉलेज की सीट छोड़ने पर संस्था में चलाए जा रहे पाठ्यक्रम में पूरी अवधि का शैक्षणिक शुल्क है जो जूड़ा को कॉलेज में ही जाम करना होगा।
ग्वालियर में जूड़ा के समर्थन में सीनियर रेसीडेंट्स ने काम बंद किया
वहीं ग्वालियर के जीआरएमसी के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के समर्थन में सीनियर रेसीडेंट भी आ गए है। जूनियर डॉक्टरों के साथ सीनियर रेसीडेंट के हड़ताल पर जाने से ओपीडी में आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई मरीज बिना इलाज के लौट गए। मप्र चेप्टर इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएसन के अध्यक्ष एवं जेएएच के अधीक्षक डॉ. आरकेएस धाकड़ ने कहा कि अलग-अलग राज्यों के 50 संगठन जूड़ा की हड़ताल के समर्थन में आगे आ गए है उन्होंने सरकार को पत्र लिखकर मांगे मानने की अनुरोध किया है।

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