ग्वालियर की डीआरडीई में होगी एडवांस वर्जन एन-99 मास्क की जांच
ग्वालियर. कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिये आवश्यक मास्क 95 के एडवांस वर्जन मास्क 99 और डॉक्टरों का दी जाने वाली पीपीई किट का परीक्षण डीआरडीई ग्वालियर में ही की जायेगी। डीआरडीई की तकनीकी मदद से मुंबई और कोलकाता में दो कम्पनियों ने मास्क एन-99 और टाटा संस, महिन्द्रा और भेल ने पीपीई किट बनाने का काम शुरू कर दिया है। इन म्पनियों के उत्पादन की जांच भी डीआरडीई की ग्वालियर लैब में होगी। इसके लिये निर्मित सामग्री को ग्वालियर लाना होगा। लैब में सैनिटाइजर बनाने का काम पहले से ही चल रहा है।
देश में 1 मास्क एन-99 की जरूरत
डीआरडीई के अधिकारियों ने बताया कि इस समय देश को 1 करोड़ एन-99 मास्क की आवश्यकता है। लेकिन मुम्बई और कोलकाता की जो कम्पनियां इन्हें 5बना रही हैं, वह सप्ताह भर में इतनो मास्क नहीं बना पायेंगी। इसके चलते देश के अन्य उद्यमियों से इस काम केलिये आगे आने की अपील की है।
नैनो तकनीक पर आधारित 5 लेयर्ड मास्क -99
पांच लेयर वाला और नैनो तकनीक पर आधारित एन-99 मास्क वायरस को नाक और मुंह में जाने से रोकता है। यह एन-95 मास्क की तुलना में 95 से 99 प्रतिशत तक अधिक सुरक्षित हैं।
पीपीई किट के लिये कम्पनियों से मांगे ऑफर
डॉक्टरों को दी जाने वाली पीपीई किट के निर्माण के लिये भी निजी कम्पनियों से ऑफर मांगे गये हैं। शुरूआत में 30 से 40 हजार किट तैयार करने का काम महेन्द्रा, टाटा और भेल को दिया गया है। देश में लगभग एक लाख पीपीई किट की आवश्यकता होगी। जबकि यह कम्पनियां कम समय में इसकी पूर्ति कर सकेगी।
केन्द्र से दिलायेंगे विशेष अनुमति
पीपीई किट और एन-99 मास्क की जांच डीआरडीई ग्वालियर में होगी। इन्हें ग्वालियर लाने के लिये इन कम्पनियों को सरकार से विशेष अनुमति दिलायेंगे। देश को बड़े पैमाने पर पीपीई किट, सैनिटाइजर, एन-99 मास्क और बेंटिलेटरों की आवश्यकता है। इसके लिये हम निजी कम्पनियों को मुफ्त तकनीकी देने को तैयार हैं।
डॉ. डीके दुबे, डायरेक्टर, डीआरडीई
