रॉड पर लटका कर मारते थे, बच्चियों से कपड़े -टॉयलेट धुलवाते थे, मदरसे से रेस्क्यू बच्चे बोले

ग्वालियर. एजी ऑफिस परिसर के नजदीक स्थित दारूल कुरूआन मदरसे से रेस्क्यू किये गये 26 बच्चों ने प्रताड़ना के आरोप लगाये है। इनमें 18 बालक -8 बलिकाएं है। बाल अधिकार संरक्षण आयोग और बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की कार्यवाही के बाद बच्चों के बयान दर्ज किये गये है। कलेक्टर रूचिका चौहान और आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा के सामने बयान देते समय बच्चे भावुक हो गये। बच्चों ने आरोप लगाया है कि मामूली गलती पर उन्हें लोहे की रॉड से लटकाकर पीटा जाता था। घंटों मुर्गा बनाकर रखा जाता था। उन्होंने अधिकारियों से कहा है िकवह अब मदरसे में नहीं रहना चाहते है, सुरक्षित माहौल में पढ़ना चाहते हैं।

स्वादिष्ट भोजन मांगने पर मना करते थे
बच्चों ने बताया है कि उन्हें सुबह-शाम 2-2 रोटियां दी जाती थी। अधिक भोजन मांगने पर मना कर दिया जाता था। बच्चियों के अनुसार, मदरसे मे आने वाली उनसे अपने घर के काम करवाती थी। उन्हें झाडू-पेंछा लगाने, बर्तन और कपड़े धोने और टॉयलेट साफ करने के लिये कहा जाता था। छत से कपडे उतारने में देर देने होने पर मारपीट की जाती थी।
हिजाब पहनने का दबाव बनाने का लगाया आरोप
बच्चियों ने आरोप लगाया है कि उन पर जबरन हिजाब पहनने का दबाव बनाया जाता था।विरोध करने पर उन्हें ‘‘शैतान आ जायेगा’’ जैसी बातें कहकर डराया जाता था। उनके अनुसार, यह नियमबाजी की अपनी बेटी पर लागू नहीं था। बच्चियों ने आरोप लगाया कि बाजी का बेटा रात में खिड़की से ताक-झांक करता था। शिकायत के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की गयी है।
10×5 में ठूंस कर भरी थी 8 बच्चियां, 10×15 के कमरे में 18 बच्चे
न खेलने की जगह न सोने को पर्याप्त जगह, बच्चे बोले- हमें घर भेज दो, जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें, आंखों में सपने -कदमों के सामने खेलने के लिये खुला मैदान होना चाहिये। उस आयु में 26 मासूमों की दुनिया 2 छोटे कमरों में सिमटी मिली है। एजी ऑफिस के पास दारूल कुरआन मदरसे में 10×15 फीट के एक कमरे में 18 लड़के रह रहे थे। यानी प्रत्येक बच्चे के हिस्से में औसतन महज 8×3 वर्गफीट जगह, दूसरी ओर 10×15 फीट के कमरे में 8 बच्चियां थी। यहां तो एक बच्ची के हिस्से में सिर्फ 6.25 वर्गफीट जगह थी। इसी सीमित जगह में उनका रहना और सोना था।
4 दरवाजों के पीछे बुर्के में मिलीं बच्चियां…
मस्जिद के पीछे 4 दरवाजे पार करने पर बुर्के पहने बच्चियां मिलीं। कुछ बच्चों के शरीर पर चोट के निशान थे। दो बच्चियों ने मारपीट की शिकायत की। कमरों के बाहर गंदगी, रोटियों पर घूमते चूहे और बिना दरवाजों के शौचालय थे। निरीक्षण टीम ने बच्चों से बात की तो वे बोले- हमें घर भेज दो।
{इस्लाम आतंक? या आदर्श, {कल्कि अवतार और मुहम्मद साहब, {नसीमे हिदायत के झोंके, {हदीस और सुन्नत, {उर्दू और अरबी की अन्य किताबें, {मुंतखब अहादीस, {तारीख़-ए-इस्लाम, {क़ुरआन मजीद (रैक में ऐसी सैकड़ों किताबें हैं।)
