उपाधियां प्रतिभा के प्रमाण के साथ राष्ट्र सेवा का संकल्प भी होती हैं – राज्यपाल 

67 स्वर्ण पदक एवं 368 उपाधियां प्रदान की गईं 
ग्वालियर – राज्यपाल ने कहा दीक्षांत समारोह हर विद्यार्थी के जीवन में अत्यंत गौरव, सम्मान और आत्म-विश्वास का क्षण होता है। दीक्षांत समारोह में कला एवं संगीत की शिक्षा के लिये मिली उपाधि हर विद्यार्थी के लिए प्रतिभा का प्रमाण तो है ही, साथ ही यह कला और संगीत से समाज एवं राष्ट्र सेवा का  संकल्प भी है। राज्यपाल श्री पटेल बुधवार को ग्वालियर में राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के सप्तम दीक्षांत समारोह को संवोधित कर रहे थे। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि आप सब भारत की गौरवशाली संस्कृति, कला व संगीत को विश्व पटल पर नई ऊँचाईयों तक ले जाने का संकल्प लें। साथ ही  भारत को वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र और विश्व गुरू बनाने में योगदान दें। उन्होंने यह भी कहा कि विद्यार्थी अपने मन में सदैव यह भाव रखें कि शिक्षा तभी शोभायमान होती है, जब उसमें संस्कृति की संवेदना हो। राज्यपाल श्री पटेल ने स्वर्ण पदक व उपाधि प्राप्त सभी विद्यार्थियों एवं उनके गुरूजनों व माता-पिता को बधाई एवं शुभकामनाऐं भी दीं।
दीक्षांत समारोह में वर्ष 2024-25 और 2025-26, दो वर्षों के कुल 67 स्वर्ण व 368 उपाधियां प्रदान की गईं। इसके अलावा अलग- अलग संकायों की कुल 14 शोध उपाधियां भी प्रदान की गईं। कार्यकम के दौरान विश्वविद्यालय की दीक्षांत स्मारिका 2026 का विमोचन भी मंच से किया गया।
 कुलगुरू प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे ने दीक्षोपदेश दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को संकल्प दिलाया कि आप सब सत्य और औचित्य का कभी परित्याग न करें। उस कर्तव्य को स्वीकार करें जो अधिकतम लोगों के लिये कल्याणकारी हो। विद्यार्थी अपना ज्ञान बढ़ाते रहें और ज्ञान का उपयोग “सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय” के लिये करें।
समारोह में 2024-25 के स्नातक की 115 व स्नातकोत्तर की 66 उपाधियां एवं वर्ष 2025- 26 के स्नातक की 113 व स्नातकोत्तर की 74 उपाधियां प्रदान की गईं। साथ ही अलग-अलग संकायों के कुल 67 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। इसके अलावा अलग- अलग संकायों की कुल 14 शोध उपाधियां भी प्रदान की गईं। जिनमें गायन की 5, तबला की 2 व चित्रकला की 7 उपाधियां शामिल हैं।
पं. अजय पोहनकर के सुमधुर गायन ने मन मोहा 
समारोह के मुख्य अतिथि एवं प्रख्यात शास्त्रीय संगीत गायक पं. अजय पोहनकर पुणे ने शास्त्रीय संगीत से ओतप्रोत सुमधुर भजन एवं ठुमरी प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। उन्होंने “गोविंद जय जय, गोपाल जय जय-राधा रमन हरि गोविंद जय जय” भजन और इसके बाद “कैसी ये भलाई कन्हाई – पनिया भरन मोरि गगरि गिराई” का गायन कर समा बांध दिया।
दीक्षांत समारोह का शुभारंभ एवं समापन राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान के गायन से हुआ। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल सहित अन्य अतिथियों ने संगीतमय सरस्वती वंदना के बीच दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
अंत में कुलसचिव डॉ. आशुतोष खरे ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला, जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत एवं राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के पूर्व कुलगुरू प्रो. साहित्य कुमार नाहर व प्रो. स्वतंत्र शर्मा, विद्या परिषद के सदस्य श्री अशोक आनंद, कार्य परिषद सदस्य श्री चंद्रप्रताप सिकरवार, श्री सुंदरलाल मालवीय सहित डॉ. मनीष करवड़े सहित डॉ. अंजना झा, डॉ. संजय सिंह, डॉ. गौरीप्रिया, डॉ. हिमांशु द्विवेदी, डॉ. पारूल दीक्षित, डॉ श्याम रस्तोगी, योगेश शर्मा सहित विश्वविद्यालय के समस्त शिक्षक, संगतकार, कर्मचारी व छात्र छात्राएं मौजूद रहे।

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