शनि मंदिर की बदलेगी सूरत, पर्यटन विकास निगम ने जारी किया 28.43 करोड़ रुपये का टेंडर
ग्वालियर. चंबल अंचल के मुरैना जिले के प्रसिद्ध शनिचरा मंदिर को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके सुंदरीकरण और विकास कार्यों पर 28.43 करोड रुपये खर्च किए जाएंगे। मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने मंदिर परिसर में सुंदरीकरण, स्थल विकास तथा आंतरिक और बाहरी विद्युतीकरण के कार्यों के लिए टेंडर जारी कर 18 महीने में काम पूरा करने का समय निर्धारित किया है। इसमें सिविल कार्यों के अलावा बाहरी विद्युतीकरण भी शामिल है।
प्रवेश और पार्किंग की व्यवस्थाएं बदलेंगी
मंदिर के कायाकल्प के कार्यों के लिए पर्यटन विकास निगम द्वारा मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच सुरक्षित तरीके से विकास कार्य किए जा सकें। निगम के कार्यपालन यंत्री अनिल कुमार पाटीदार ने बताया कि मंदिर में प्रवेश और निकास की व्यवस्था बदली जाएगी। पार्किंग की व्यवस्था अलग तरीके से की जाएगी। मंदिर परिसर में भोजनशाला भी तैयार की जाएगी। पास ही एक सत्संग हाल ही तैयार किया जाएगा। इस सत्संग हाल में भजन-कीर्तन की सुविधा रहेगी।
इस लिए यह मंदिर ऐतिहासिक है
मुरैना के ऐंती गांव स्थित शनिचरा मंदिर देश का सबसे प्राचीन शनि मंदिर माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार त्रेतायुग में हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के सिंहासन के नीचे से कैद मुक्त कराया तब वह कमजोर होने के कारण चल नहीं पा रहे थे। हनुमान जी ने उन्हें लंका से उठाकर भारत भूमि की ओर फेंक दिया था। मान्यता है कि शनिवेव ऐंती पर्वत पर आकर गिरे थे यहीं तपस्या कर शक्ति वापस पाई। इसी वजह से इस पर्वत को शनि पर्वत कहते हैं। यहां मूर्ति की स्थापना सम्राट विक्रमादित्य ने कराई थी। मूर्ति तांत्रिक रूप जनेऊ, नीलमणि, रूद्राक्ष माला, एक हाथ में सुमिरनी और दूसरे में दंड के साथ है। महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर की शिला भी यहीं स ेले जाई गई थी। हर शनिचरी अमावस्या और शनि जयंती पर विशाल मेला लगता है।
