वकील आत्महत्या केस में सब इंस्पेक्टर को हाईकोर्ट नहीं मिली जमानत
ग्वालियर. मप्र हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ की एकल पीठ ने एडवोकेट मृत्युंजय सिंह चौहान की आत्महत्या केस में आरोपी मुरैना मेुं पदस्थ सब इंस्पेक्टर प्रीति जादौन की अग्रिम जमानत को लेकर लगाई गयी याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने सब इंस्पेक्टर को आत्म हत्या के लिये उकसाने के गंभीर मामले में अग्रिम जमानत देने से साफ मना कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा हैकि प्रथम दृष्ठया यह केवल टूटा हुआ रिश्ता या भावनात्मक तनाव का मामला नहीं है। बल्कि लगातार धमकी भय और कथित हमले का सिलसिला सामने आता है।
घटना के कुछ ही दिनों बाद आत्महत्या होना अभियोजना के पक्ष मजबूती देता है।आरोपी एक सेवारत पुलिस अधिकारी है। ऐसे में उस पर कानून के पालन की अधिक जिम्मेदारी है। पद का दुरूपयोग, गवाहों को धमकाने के आरोप और कथित हथियार की बरामदगी न होना, जांच के लिये हिरासत में पूछताछ को जरूरी बनाता है।
क्या है घटनाक्रम
मुरैना के सिविल लाइन थाने में पदस्थ महिला एसआई प्रीति जादौन के मंगेतर ग्वालियर निवासी वकील मृत्युंजय सिंह चौहान ने 14-15 दिसंबर 2025 की रात गोला का मंदिर थाना क्षेत्र स्थित आदर्शपुरम में अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। वकील के आत्महत्या का पता 15 दिसंबर की दोपहर चला था। वकील द्वारा आत्महत्या का कारण 12 दिसंबर को मुरैना पुलिस लाइन के सरकारी क्वार्टर में हुए एक घटनाक्रम को बताया गया है। वकील के रूम से मिला सिविल लाइन थाने को लिखा गया एक आवेदन जिसे अघोषित सुसाइड नोट भी माना जा सकता है उसके अनुसार 12 दिसंबर की रात जब वह अपनी प्रेमिका एसआई प्रीति जादौन के शासकीय क्वार्टर पहुंचा तो प्रीति और क्वार्टर में छिपे आरक्षक अराफात ने उसके साथ मारपीट की थी।
इस घटना के बाद उसने अपनी मंगेतर के पदस्थी थाने सिविल लाइन और सिटी कोतवाली पहुंचकर शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन कहीं भी उसकी बात नहीं सुनी गई। वकील ने महिला एसआई के मोबाइल से मुरैना जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों… एसपी, एएसपी और सीएसपी को वॉट्सऐप के माध्यम से पूरे मामले की जानकारी दी। वकील की सुनवाई तो नहीं हुई, उल्टा एसआई प्रीति जादौन के रौब के चलते सिटी कोतवाली में वकील के ही खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई थी। इसी से आहत होकर उसने सुसाइड जैसा कदम उठाया।

