Newsमप्र छत्तीसगढ़

इंडियन स्कीमर धौलपुर से 12 हजार किमी दूर तेलंगाना में दिखाई दी, पैर में लगी रिगिंग से पता चला

धौलपुर. इंडियन स्कीमर चम्बल का मोती को तेलंगाना के मिड मानौर डेम में देखा गया है कि इस की पुष्टि धौलपुर में इंडियन स्कीमर को पहनाई गयी रिंगिंग फ्लैगिंग से की गयी है। उल्लेखनीय है कि धौलपुर में चम्बल नदी के किनारों पर जिस इंडियन स्कीमर पक्षी को शोध के उद्देश्य से रिंग पहनाई गयी थी। वह अब धौलपुर से 1 हजार किमी दूर तेलंगाना के करीम नगर जिले में सिथत मिड मानैर डेम में देखा गया है। आईयूसीएन के मेम्बर डा. दाऊलाल बोहरा ने बताया है कि तेलंगाना के पक्षी प्रेमी श्यामसुन्दर पौटूरी ने मिड मानैर जलाश्य में पक्षियों एक समूह को देखा । दूरबीन और हाई रेजोल्यूशन कैमरों की सहायता से यह साफ हुआ है कि इंडियन स्कीमर के पैर में विशिष्ट नम्बर वाली रिंग और टैग लगा है।
डेटाबेस से मिलान करने पर पुष्टि हुई है कि पक्षी की बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी की टीम ने धौलपुर चम्बल में टैग किया था। चम्बल में ब्रीडिंग, तेलंगाना में विंटर सीजन प्रवास, इंडियन स्कीमर का मुख्य भोजन तापमान पर निर्भर रहता है। मिड मानैर डेम पर यह दिखी है। वह एक छिछली झील है। जहां इसका पसंदीदा भोजन पानी के सतह पर छोटी मछली व मछली के लार्वा भरपूर है। यह वहां 100 से अधिक पहुंची है। जिसमें कईयों के टैगिंग है।
वैज्ञानिकों ने इनके पैरों में रिंग इसलिए पहनाई थी ताकि यह पता चल सके कि प्रजनन काल के बाद ये पक्षी चंबल छोड़कर कहां जाते हैं। इस खोज से यह स्पष्ट हो गया है कि चंबल में ब्रीडिंग करने के बाद ये पक्षी दक्षिण भारत के जलाशयों, विशेषकर तेलंगाना के मिड मानैर जैसे बड़े बांधों को अपना नया ठिकाना बनाते हैं। बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी और वन विभाग के विशेषज्ञों ने धौलपुर में चंबल किनारे इनके प्रजनन और प्रवास के रास्तों को समझने के लिए कलर फ्लैगिंग और रिंगिंग अभियान चलाया था। यह पता लगाना था कि मानसून के दौरान जब चंबल का जलस्तर बढ़ता है, तो ये पक्षी सुरक्षित ठिकाने के लिए दक्षिण भारत के किन हिस्सों में जाते हैं।
ब्रीडिंग सेंटर चंबल है और तेलंगाना प्रवास स्थल बना हुआ है। क्योंकि ये इनका सर्वाधिक विंटर सीजन तेलंगाना में बीतता है। .दुर्लभ है जिला पक्षी इंडियन स्कीमर… इंडियन स्कीमर दुर्लभ जलपक्षियों में शामिल है। इसकी सबसे बड़ी वजह इसका सीमित और विशिष्ट आवास है। यह पक्षी चंबल सहित केवल बड़ी नदियों के रेतीले टापुओं पर ही घोंसला बनाता है। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर ने इसे संकटग्रस्त श्रेणी में रखा है। जिला पक्षी बनाने की पीछे इस पक्षी का संरक्षण शामिल है। इंडियन स्कीमर की चोंच सरौता जैसी होती है जो पानी को चीरकर मछली पकड़ने का काम करती है। शिकार करने की खास शैली देश-विदेश के बर्ड वॉचर्स को आकर्षित करती है। दुनियां भर में ये सिर्फ 2 हजार से भी कम बची है। दुनिया भर की 80 फ़ीसदी इंडिया स्कीमर चंबल में हर साल आती है और प्रजनन के बाद लौटती हैं। इंडियन स्कीमर एक संकटग्रस्त प्रजाति है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *