सरकारी जमीनों के मामले में अब मुख्य सचिव का हलफनामा लगाना होगा अनिवार्य-हाईकोर्ट
ग्वालियर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच की एकल पीठ ने सरकारी जमीन से जुड़े प्रकरणों में राज्य शासन और अधिकारियों की लगातार लापरवाही पर कड़ा रूख अपनाया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अब सरकारी जमीन से संबंधित किसी भी मामले में राज्य सरकार द्वारा दाखिल किये जाने वाले आवेदन मुख्य सचिव के शपथ पत्र के बिना स्वीकार नहीं किये जायेंगे। न्यायालय ने सरकारी मामलों की पैरवी में गंभीरता की कमी और अधिकारियों की निष्क्रियता से निजी पक्षों को अनुचित लाभ मिलने पर गहरी चिंता व्यक्त की हे। न्यायालय ने मुख्य सचिव से यह भी पूछा है कि क्या वह लापरवाह या संदिग्ध भूमिका निभाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करना चाहते हैं।
यह आदेश जिला एवं प्रशिक्षण केन्द्र दतिया द्वारा माया बलवानी के खिलाफ दायर सेकेण्ड अपील पर सुनवाई के दोरान गुरूवार को दिया गया। प्रक्षिण केन्द्र ने जिला न्यायाधीश दतिया के 2 दिसम्बर 2003 के फैसले के खिलाफ न्यायालय में अपील दाखिल की थी। जिसमें 2800 स्क्वायर फीट जमीन को सरकारी बताया गया था।
अपील दाखिल करने में हुई गंभीर चूक
न्यायालय ने पाया कि अपील दाखिल करने की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती गयी है। शुरूआत में अपील राज्य सरकार द्वारा विधिवत रूप से दाखिल न होकर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण केन्द्र और राज्यशिक्षाकेन्द्र के माध्यम से प्रस्तुत की गयी। जबकि नियमानुसार राज्य सरकार को कलेक्टर दतिया के माध्यम से अपीलकर्ता होना चाहिये था।
राज्य को अपीलकर्ता बनाया गया। लेकिन तब भी देरी के लिये कोई संतोषजनक वजह या शपथ पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया। सेकेण्ड अपील के लिये आवश्यक -‘‘लीव टू अपील’’ का आवेदन भी विधिवत रूप से तैयार नहीं किया गया। जिससे वर्ष 2014 में खारिज कर दिया गयां इसके बाद बहाली का आवेदन दाखिल किया गया। जो लगभग 10 वर्ष तक लंबित रहा और दिसम्बर 2025 में जाकर अपील बहाल हो सकी। इसके बावजूद आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं का पालन नहीं किया गया। न्यायालय ने कहा है कि ऐसी स्थिति में देरी माफी या विधिवत अनुमति के अभवा में अपील खारिज करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है।
मुख्य सचिव का शपथपत्र अनिवार्य
कोर्ट ने निर्देश दिए कि सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में राज्य सरकार का हर आवेदन मुख्य सचिव के शपथपत्र के साथ दाखिल होगा।
मुख्य सचिव को शपथपत्र में यह स्पष्ट करना होगा कि लापरवाह या संदिग्ध भूमिका वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी या नहीं, और यदि कार्रवाई हो चुकी है तो उसका पूरा विवरण देना होगा।
सामान्यतः मुख्य सचिव से हलफनामा नहीं मांगा जाता, लेकिन सरकारी जमीन मामलों में गंभीर लापरवाही और संभावित मिलीभगत को देखते हुए यह कदम आवश्यक है, ताकि शीर्ष स्तर पर निगरानी सुनिश्चित की जा सके।

