ग्वालियर में हो रहे अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट सख्त, नगरनिगम को लगाई फटकार
ग्वालियर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने एकल पीठ ने शहर में अवैध निर्माण के एक मामले की सुनवाई के दौरान नगरनिगम की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने इन्दौर के भागीरथपुरा हादसे का उल्लेख करते हुए कहा है कि नगरनिगम यदि अपने वैधानिक दायित्वों का पालन नहीं करेंगे तो इसके परिणाम घातक हो सकते है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि भागीरथपुरा घटना में कई लोगों की मौत हो गयी है। जिस पर इन्दौर पीठ ने संज्ञान में लिया है। यह स्थिति अपने आप बताती है कि अवैध निर्माण को समय रहते नहीं रोका गया तो बड़ी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने ग्वालियर नगरनिगम की स्थिति को भी चिंताजनक बताया है।
दो दुकानदारों के बीच का है विवाद
यह मामला दो दुकानदारों निहाल चंद और गोपालचंद के बीच अवैध निर्माण को लेकर चल रहे विवाद से जुडा है। ऐसा बताया गया है। दीवारें हटाकर 8 दुकानों को 5 दुकानों में बदल दिया गया था और दुकानों के बाहर टीनशेड का अवैध निर्माण कर दिया गया था। यह विवाद सबसे पहले जिला न्यायालय पहुंचा था। जहां छठवें अपरजिला न्यायधाधीश ने दुकानों के बाहर किये गये निर्माण को हटाने और आतंरिक दीवारों का पुनर्निर्माण कराने के आदेश दिये थे। इसके बाद निहाल चंद ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। जहां मामले पर विस्तार से सुनवाई हुई।
15 दिन में अवैध ढांचा हटाने के आदेश
हाईकोर्ट ने दुकानों के बाहर बिना अनुमति बनाए गए ढांचे को अवैध ठहराते हुए 15 दिनों के भीतर हटाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि तय समयसीमा में अवैध निर्माण नहीं हटाया गया, तो 16वें दिन नगर निगम स्वयं कार्रवाई कर ढांचा हटाएगा और उसका खर्च संबंधित दुकान मालिकों से वसूला जाएगा।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बिल्डिंग परमिशन कोई औपचारिकता नहीं है। अनुमति देते समय एफएआर, भूमि विकास नियम और मास्टर प्लान जैसे सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाना आवश्यक है। यदि कोई व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन कर निर्माण करता है, तो उसे हटवाना नगर निगम की कानूनी जिम्मेदारी है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि ग्वालियर नगर निगम ने अपने दायित्वों का समुचित निर्वहन नहीं किया, जिसके कारण शहर में अवैध निर्माण पनपते रहे।

