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चेंबर ऑफ कॉमर्स-व्हाइट हाउस के विरोध के बावजूद दूसरी बार अध्यक्ष निर्वाचित प्रवीण अग्रवाल, रात 2 बजे तक चली मतगणना

ग्वालियर. मध्यप्रदेश चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के चुनाव में इस बार कारोबारियों ने केवल पदाधिकारी नहीं चुने, बल्कि चेंबर की सियासत के नए समीकरण भी तय कर दिए। वर्षों से आमने-सामने रहने वाले व्हाइट हाउस और क्रिएटिव हाउस के बीच हुए मुकाबले में इस बार सबसे बड़ा उलटफेर अध्यक्ष पद पर देखने को मिला, जहां व्हाइट हाउस से टिकट नहीं मिलने पर बागी हुए डॉ. प्रवीण अग्रवाल ने निर्दलीय चुनाव लड़कर व्हाइट हाउस के पारस जैन को 635 बोट से हराकर अध्यक्ष पद पर कब्जा कर लिया। चुनाव में कुल 3437 मतदाताओं में से 3189 व्यापारियों ने मतदान किया। 92.78% मतदान के साथ यह हाल के वर्षों के सबसे अधिक मतदान वाले चुनावों में शामिल रहा। 6 प्रमुख पदों के लिए 13 प्रत्याशी मैदान में थे। पांच पदों पर व्हाइट हाउस और क्रिएटिव हाउस के बीच सीधा मुकाबला हुआ, जबकि संयुक्त अध्यक्ष पद पर तीन प्रत्याशियों के कारण मुकाबला त्रिकोणीय रहा। व्हाइट हाउस ने मानसेवी सचिव पद पर दीपक अग्रवाल, संयुक्त सचिव पद पर दीपक पमनानी और कोषाध्यक्ष पद पर मनोज अग्रवाल को जिताकर तीन पद अपने नाम किए। वहीं क्रिएटिव हाउस ने संयुक्त अध्यक्ष पद पर सुरेश बंसल और उपाध्यक्ष पद पर संदीप नारायण अग्रवाल की जीत के साथ दो महत्वपूर्ण पद हासिल किए।

मतगणना के दौरान केवल निर्वाचन कार्यालय की ओर से जारी अधिकृत पहचान पत्र वाले प्रत्याशी और उनके प्रतिनिधियों को ही प्रवेश दिया गया।
प्रवीण अग्रवाल ने व्हाइट हाउस के भारी विरोध के खिलाफ जीत दर्ज की
यह चुनाव मैं नहीं लड़ रहा था, पूरा व्यापारी समाज लड़ रहा था। मैं चेहरा मात्र था। हाउस के अंदर जो तानाशाही चलती है और कुछ परिवार बैठकर चेंबर का भविष्य कौन होगा। इस बार ग्वालियर-चंबल संभाग के व्यापारियों ने उनके मंसूबे ध्वस्त कर दिए।
पिछले चुनाव में विवाद को देखते हुए प्रत्याशी और उनके समर्थकों से मोबाइल जप्त कराए
पिछले चुनाव में हुए विवाद को देखते हुए इस बार ज्यादा सख्ती की गई। इसलिए निर्वाचन अधिकारी से लेकर प्रत्याशी और उनके समर्थकों के अंदर जाने पर मोबाइल जप्त करा लिए थे। मतदान के बाद बाहर आने पर उन्हें लौटाए।
देर रात नतीजों की घोषणा के साथ ही आतिशबाजी हुई
चुनाव में 39 समूहों के लिए इस बार 221 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे, जबकि 14 समूहों में 30 प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो गए थे। दिनभर दोनों हाउस के प्रत्याशी अपने-अपने पक्ष में मतदान की अपील करते रहे। देर रात नतीजों की घोषणा के साथ ही आतिशबाजी हुई।
व्हाइट हाउस ने संयुक्त सचिव, मानसेवी सचिव, कोषाध्यक्ष और क्रिएटिव ने जीते संयुक्त अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद
अध्यक्ष जीते- डॉ. प्रवीण आम्रवाल (1896) हारे-पारस जैन (1279)
मानसेवी सचिव जीते-दीपक अग्रवाल हारे-राकेश अग्रवाल
संयुक्त अध्यक्ष जीते- सुरेश बंसल हारे-डॉ. विनोद जैन
जीत के बाद समर्थकों से घिरे डॉ. प्रवीण अग्रवाल। दूसरे चित्र में मतदान केंद्र पर समर्थन मांगते विभिन्न हाउस के प्रत्याशी।
संयुक्त सचिव जीते-दीपक पमनानी हारे-राकेश अग्रवाल
उपाध्यक्ष जीते-संदीप नारायण अग्रवाल हारे-सुनील अग्रवाल
कोषाध्यक्ष जीते-मनोज अग्रवाल हारे-अजय गोयल

3437 मतदाताओं में से 3189 ने डाले वोट
39 समूह के लिए 221 प्रत्याशी ने चुनाव लड़ा
06 पदों के लिए 13 प्रत्याशी मैदान में थे

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MP के रेल यात्रियों के लिए बड़ी राहत, रेलवे ने लाइव की बुकिंग वेबसाइट

ग्वालियर. भारतीय रेलवे ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बडा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन ने अपनी नई आधिकारिक वेबासइट का बीटा वर्जन आम जनता के लिए लाइव कर दिया है। इस नई पहले से ग्वालियर, डबरा, भितरवार सहित पूरे अंचल के उन हजारों रेल यात्रियों को बडी राहत मिलेगी, जो रोजाना दिल्ली, मुुंबई, भोपाल या अन्य शहरों के लिए ऑनलाइन टिकट बुक करते है। वर्तमान में ग्वालियर रेलवे स्टेशन से गुजरने वाली ट्रेनों के लिए आईआरसीटीसी की वेबासइट पर भारी ट्रैफिक रहता है। ऐसे में यह नया और उन्नत वर्जन यात्रियों के समय की बचत करेगा।
प्रतिदिन औसतन करीब 14.5 लाख टिकटों की बुकिंग
यात्री अब नई वेबसाइअ के बीटा वर्जन को आधिकारिक लिंक पर जाकर देख सकते है। इसके अलावा वर्तमान में चल रही पुरानी वेबसाइट के होम पेज पर भी इस नए बीटा वर्जन का सीधा लिंक दे दिया गया है। गौरतलब है कि आईआरसीटीसी की मौजूदा वेबसाइट की शुरूआत साल 2002 में हुई थी। बीते 24 वर्षों में इस पर निर्भरता इतनी बढ चुकी है कि वर्तमान में इस पोर्टल के जरिए प्रतिदिन औसतन करीब 14.5 लाख टिकटों की बुकिंग की जाती है।
नई वेबसाइट में क्या होगा खास
रेल यात्रियों को अक्सर तत्काल टिकट बुकिंग या सामान्य बुकिंग के दौरान वेबसाइट के धीमे होने या एरर आने की समस्या से जूझना पड़ता था। नई वेबसाइट को अत्यधिक आसान, तेज और पूरी तरह यूजर-फ्रेंडली बनाया गया है, जिसमें ये चार प्रमुख सुधार किए गए हैं।

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शिक्षकों के पदोन्नति पर नया विवाद, TET पास वालों की मांगी जानकारी

भोपाल. मध्य प्रदेश में शिक्षकों की पदोन्नति को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। भोपाल संभाग के संयुक्त संचालक (जेडी) द्वारा जारी एक आदेश के बाद शिक्षकों में हड़कंप मच गया। प्रदेशभर के शिक्षकों में यह आशंका गहरा गई है कि भविष्य में केवल शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण शिक्षकों को ही पदोन्नति का लाभ दिया जाएगा। हालांकि, लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश या स्पष्ट स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है। इसके बावजूद आदेश को लेकर शिक्षकों और शिक्षक संगठनों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
भोपाल संभाग के जेडी का आदेश और विवरण
गुरुवार को जारी आदेश में लिखा है कि आयुक्त अभिषेक सिंह वीडियो कान्फ्रेंसिंग के बाद मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 के तहत भोपाल संभाग के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी किया। इसमें टीईटी उत्तीर्ण सहायक शिक्षकों और प्राथमिक शिक्षकों का विस्तृत विवरण मांगा गया है। साथ ही विषयवार एवं संवर्गवार रिक्त पदों और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के रिक्त पदों की प्रमाणित जानकारी भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
शिक्षकों में बढ़ी चिंता
आदेश सामने आने के बाद शिक्षकों में यह चर्चा तेज हो गई कि कहीं पदोन्नति के लिए टीईटी को अनिवार्य पात्रता तो नहीं बनाया जा रहा। यदि ऐसा हुआ तो बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक, जिन्होंने टीईटी उत्तीर्ण नहीं किया है, पदोन्नति से वंचित हो सकते हैं। अलग-अलग जिलों में अलग तरीके से जानकारी मांगे जाने से भ्रम और अधिक बढ़ गया है।
शिक्षक संगठन ने उठाए सवाल
शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल का कहना है कि यदि पदोन्नति में टीईटी को अनिवार्य बनाया जा रहा है तो इसका कानूनी और प्रशासनिक आधार सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने यह भी पूछा है कि यह नियम किन-किन शिक्षक संवर्गों पर लागू होगा। संगठन का कहना है कि जब तक विभाग स्पष्ट आदेश जारी नहीं करता, तब तक टीईटी के नाम पर अतिरिक्त जानकारी मांगने से बचना चाहिए।

 

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CM मोहन यादव बोले एक शादी करने वाला ही MP में रहेगा, सरकार विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में पेश करेगी UCC बिल

भोपाल. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में वहीं रह पाएगा जो एक ही शादी करेगा। विधानसभा के मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता लाएंगे। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को यह ऐलान कटनी में किया। सीएम ने आगे कहा कि हिंदुओं और मुसलमानों के लिए अलग-अलग कानून क्यों हों, सबके लिए कए ही कानून होना चाहिए। अगर राम एक शादी करेगा तो रहीम दो या चार शादियां क्यों करेगा। मुस्लिम बहनें भी हमारी बहनें है और उनके अधिकारों की रक्षा जरूरी है। सीएम बोल तीन तलाक का दौर खत्म हो चुका है। अगर कोई तलाक, तलाक, तलाक कहेगा तो उसे जेल जाना पडेगा। उन्होंने बताया कि अगली कैबिनेट बैठक में यूसीसी के मसौदे को मंजूरी दी जाएगी।
विधानसभा में आएगा बिल
मुख्यमंत्री ने बताया कि भोपाल के जगदीशपुर में होने वाली अगली कैबिनेट बैठक में यूसीसी विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी जाएगी। इसके बाद सरकार इसे विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में पेश करेगी। उन्होंने कहा कि इस कानून का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान व्यवस्था लागू करना और भेदभाव खत्म करना है।
असम, गुजरात और उत्तराखंड में यूसीसी लागू
अभी देश के तीन राज्य उत्तराखंड, गुजरात और असम में ही यूसीसी लागू है। उत्तराखंड ने सबसे पहले 2024 में इसे लागू किया था। इसी साल पहले गुजरात फिर असम ने इसे लागू किया। पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी और बिहार में सम्राट चौधरी ने सीएम बनते ही यूसीसी लागू करने की बात कही थी। अब मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने भी इसी मानसून सत्र में इसे लागू करने का ऐलान कर दिया है।

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नशे से दूरी है जरूरी 2.0 अभियान के तहत प्रदेशभर में जारी व्‍यापक जनजागरूकता

भोपाल, मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संचालित राज्यव्यापी जन-जागरूकता अभियान “नशे से दूरी है जरूरी 2.0” के अंतर्गत प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर जनजागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। ग्वालियर जिले में 40 थाना क्षेत्रों के स्कूलों, कॉलेजों, शैक्षणिक संस्थानों एवं सार्वजनिक स्थलों पर 62 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी प्रकार खरगोन, छतरपुर, कटनी, खंडवा, आगर-मालवा, अनूपपुर, उमरिया सहित अनेक जिलों में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, शिक्षकों, ग्रामीणों एवं आम नागरिकों को जागरूक किया गया।अभियान का उद्देश्य युवाओं एवं आमजन को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराते हुए नशामुक्त, स्वस्थ एवं सशक्त समाज के निर्माण के लिए जनभागीदारी सुनिश्चित करना है।
अभियान के दूसरे दिन प्रदेश के विभिन्न जिलों एवं पुलिस इकाइयों द्वारा कुल 1000 से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर 2 लाख 60 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रूप से जागरूक किया गया। इनमें स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम, जनसंवाद, रैलियां, शपथ कार्यक्रम, जागरूकता फिल्म एवं शॉर्ट फिल्म प्रदर्शन, सोशल मीडिया कंटेंट, हाट-बाजारों एवं सार्वजनिक स्थलों पर जनजागरूकता, रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों एवं आमजन से संवाद तथा ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष कार्यक्रम शामिल रहे।
रेलवे परिसरों में भी चलाया गया विशेष अभियान
जीआरपी द्वारा रेलवे स्टेशनों पर आने-जाने वाले यात्रियों, विद्यार्थियों, कुलियों, वेंडरों एवं ऑटो चालकों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया गया। रेलवे स्टेशनों एवं आसपास के क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से नशामुक्त समाज के निर्माण में सभी से सक्रिय सहयोग का आह्वान किया गया।

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4 लाख पेंशनर्स को समय पर मिलेगी मंहंगाई राहत, अब छत्तीसगढ़ की मंजूरी नहीं लेना होगी, केन्द्र के बढ़ाते ही एमपी लागू करेगा

भोपाल. मध्यप्रदेश के लगभग 4 लाख पेंशनर्स के लिये बड़ी राहत है। अब केन्द्र सरकार जैसे ही महंगाई राहत (डीआर) बढ़ायेगी। मध्यप्रदेश सरकार भी उसे छत्तीसगढ़ की सहमति का इंतजार किये बिना लागू कर सकेगी। इससे सालों से चली आ रही देरी समाप्त होगी। पेंशनर्स को समय पर बढ़ी हुई महंगाई राहत का फायदा मिल सकेगा।

यह बदलाव मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकारों की आपसी सहमति से लागू किया गया है।
यह बदलाव मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ सरकारों की आपसी सहमति से लागू किया गया है। दोनों राज्यों न तय किया है कि अब महंगाई राहत बढ़ाने के लिये एक-दूसरे की मंजूरी लेना आवश्यक नहीं होगा। दोनों राज्य अपने-अपने स्तर पर केन्द्र सरकार के फैसले के बाद डीआर घोषित कर उसका भुगतान कर सकेंगे। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू हो गयी है।
पहले इंतजार 6-6 महीने तक करना पड़ता था
दरअसल, वर्ष 2000 में मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ बनने के बाद पेंशनर्स को महंगाई राहत देने के लिए दोनों राज्यों की सहमति अनिवार्य कर दी गई थी। इसी वजह से कई बार महंगाई राहत बढ़ने के बावजूद पेंशनर्स को 6-6 महीने तक इंतजार करना पड़ता था। अब यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई है।

 

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अतिक्रमण हटाने गयी टीम पर पथराव पर हुई एफआईआर दर्ज, मोबाइल तोड़ा, ईट उठाई

भोपाल. नर्मदा कॉलोनी में नाले के ऊपर अतिक्रमण हटाने पहुंची नगरनिगम की टीम पर हमला करने का प्रयास किया गया। कर्मचारियों को मारने के लिये एक युवक ने ईट उठा ली। जबकि जेसीबी का कांच फोड़ने की प्रयास भी किया। एक कर्मचारी का मोबाइल भी तोड़ दिया । मामले में शाहपुरा थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है।
ममला दोपहर 3.30 बजे का है। नगर निगम का अतिक्रमण निरोधक दस्ता गोविंदपुरा स्थित नर्मदा कॉलोनी पहुंचा। यहां पर नाले के लिये 8-10 टीनशेड़, झुग्गियां बनी हुई थी। इन्हें लगभग 4 परिवारों ने बनाया था। कार्यवाही के बीच परिवार के सदस्य विवाद करने पर उतारू हो गये। उन्होंने टीम के साथ गाली-गलौच करते हुए हमला करने का प्रयास किया। धक्का-मुक्की के साथ कर्मचारियों के साथ मारपीट करने और ईंटें मारने का प्रयास किया। अतिक्रमण अधिकारी शैलेन्द्र सिंह भदौरिया ने बताया कि शाहपुरा थाने में शासकीय कार्य में बाधा डालने वाले रामपाल के विरूद्ध केस दर्ज कराया है।

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यूएस के 3 हमलों में धाराशाई हुआ चाबहार का आइकॉनिक टॉवर, भारत को हुआ अरबों रूपये का नुकसान

नई दिल्ली. ईरान के चाबहार पोर्ट पर भीषण अमेरिकी हमले में आखिरकार इस पोर्ट का आइकॉनिक मैरीटाइम ट्रैफिक कंट्रोल टॉवर ध्वस्त हो गया। इस टॉवर को गिराने के लिये अमेरिकी ने एक नहीं 3-3 बार बार हमले किये। पहला हमला 8 जुलाई को हुआ, 15 जुलाई को अमेरिका ने इस पर फिर मिसाइल दागे। लेकिन 16 जुलाई का रात को भीषण हमले के बाद आखिकार ये टॉवर ध्वस्त हो गया। चाबहार तेहरान का मुख्य समुद्री गेटवे है जो होर्मुज स्ट्रेट से होकर नहीं गुजरता है। चाबहार का ट्रैफिक कंट्रोल टॉवर तबाह होने से शिपिंग में रूकावट आ सकती है। लागत बढ़ सकती है और खाड़ी के बाहर ईरान की बची हुई कुछ आर्थिक जीवन रेखाओं में से एक पर और दबाव पड़ सकता है।
ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक चाबहार फ्री जोन ऑर्गनाइजेशन के प्रमुख मोहम्मद सईद अरबाबी ने पुष्टि की है कि जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाला टॉवर नष्ट हो गया है। ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया है कि हमलों में बंदरगाह पर 2 समुद्री पियर्स (घाट) को भी नुकसान पहुंचा है। जिनमें शहीद बेहेश्ती डॉक भी शामिल है। यह समुद्र के किनारे विकसित एक समुद्री परिवहन सुविधा है। इसे भारत की भागीदारी से विकसित किया गया था।
क्या भारत का निवेश डूब गया?
भारत का निवेश डूब गया, ऐसा कहना ठीक नहीं होगा। अमेरिकी प्रतिबंध के बीच भारत चाबहार में अपने निवेश पर धीरे धीरे काम कर रहा है।   लेकिन अमेरिकी हमले निश्चित रूप से भारत के लिए झटका है।   भारत अपने स्तर पर लगातार अमेरिकी प्रशासन से संपर्क में है।   गौरतलब है कि चाबहार से न सिर्फ ईरान का फायदा है बल्कि अफगानिस्तान के लिए भी व्यापारिक गतिविधियों में उतरने का मौका है।
भारत के लिए असली चिंता प्रत्यक्ष वित्तीय नुकसान से ज्यादा रणनीतिक नुकसान है। चाबहार भारत की उस योजना का केंद्र है, जिसके जरिए वह पाकिस्तान को बायपास कर अफगानिस्तान, मध्य एशिया और रूस तक पहुंच बनाना चाहता है।  यदि हमलों के कारण बंदरगाह का संचालन लंबे समय तक बाधित रहता है, तो व्यापार, शिपिंग, बीमा लागत और INSTC कॉरिडोर की योजनाएं प्रभावित हो सकती है।  अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इस निवेश से अपेक्षित आर्थिक और रणनीतिक लाभ मिलने की गति काफी धीमी हो गई है, और हर नए प्रतिबंध या सैन्य तनाव के साथ परियोजना पर अनिश्चितता बढ़ जाती है।

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35 वर्षो का दंपत्तिक जीवन बिताने के बाद पत्नी ने मांगा तलाक, दिनों दिन बढ़ रहे ग्रे डिवोर्स के मामले

ग्वालियर. 52 वर्षीय मीरा (बदला हुआ नाम) ने शादी के 35 वर्षो के बाद पति से अलग होने की अर्जी दी है। कारण कोई घरेलू हिंसा या बड़ा विवाद नहीं, बल्कि अपनी अधूरी इच्छाये पूरी करने की चाह है। वह नौकरी कर आत्मनिर्भर बनना चाहती है। जबकि पति इसके खिलाफ है। यह मामला अकेला नहीं है। 40 साल साथ बिताने के बाद पति-पत्नी अलग होने की जिद पर अड़ रहे है। कभी पेंशन को लेकर विवाद है। कभी संपत्ति में बच्चों को बराबरी का हक नही ंदेने की शिकायत तो कहीं सोशल मीडिया की रील्स रिश्तों में दरार डाल रही है।


ग्वालियर में 40 वर्षो से ज्यादा उम्र के दंपत्तियों में ग्रे डिवोर्स के मामले तेजी से बढ़ रहे है। महिला थाने में 6 माह में ऐसे 25 से अधिक मामले पहुंचे हैं। जिनमें बच्चे बड़े होने या उनकी शादी हो जाने के बाद पति-पत्नी अलग होने की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया अकेलापन और वर्षो से दबे रिश्तों के तनाव अब इस उम्र में सामने आ रहे है।
डिवोर्स के 6 माह में 943 वैवाहिक विवाद
ग्वालियर महिला थाना के रिकॉर्ड के अनुसार 6 माह में कुल 943 वैवाहिक विवाद दर्ज हुए है। इनमें 25 से 30 मामले ऐसे हैं जिनमें पति-पत्नी की उम्र 40 से अधिक है। कुछ मामलों में दम्पत्ति की आयु 70 वर्ष से भी अधिक है।
क्या होता है ग्रे डिवोर्स?
40-50 वर्ष या उससे अधिक उम्र में लंबे वैवाहिक जीवन के बाद पति-पत्नी का अलग होने का फैसला ग्रे डिवोर्स कहलाता है। ऐसे मामले अकसर तब सामने आते हैं, जब बच्चों की जिम्मेदारियां पूरी हो जाती हैं और दंपती अपने रिश्ते का अलग नजरिये से मूल्यांकन करने लगते हैं।

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MP के अधिकारी-कर्मचारी घर बैठे देख सकेंगे GPF स्टेटमेंट, ऑनलाइन शिकायत निवारण की भी सुविधा

ग्वालियर -कार्यालय महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), मध्यप्रदेश, ग्वालियर ने राज्य के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सामान्य भविष्य निधि (GPF) खातों का वित्तीय वर्ष 2025-26 का वार्षिक लेखा विवरण अपनी वेबसाइट पर ऑनलाइन उपलब्ध करा दिया है। इससे अभिदाता अब घर बैठे अपने GPF खाते का वार्षिक विवरण देख एवं डाउनलोड कर सकेंगे।
कार्यालय महालेखाकार के अनुसार अभिदाता www.agmp.nic.in पर जाकर अपनी संबंधित सीरीज, सामान्य भविष्य निधि (GPF) लेखा क्रमांक तथा पासवर्ड दर्ज कर वार्षिक लेखा विवरण प्राप्त कर सकते हैं। यदि वार्षिक लेखा विवरण में किसी प्रकार की विसंगति अथवा त्रुटि पाई जाती है, तो उसके ऑनलाइन सुधार के लिए वेबसाइट पर उपलब्ध Accountant General (A&E) के अंतर्गत Online Service में जाकर Register Grievances (AG) विकल्प के माध्यम से शिकायत दर्ज की जा सकती है। कार्यालय द्वारा इन शिकायतों का निराकरण महालेखाकार की निगरानी में सामान्यतः एक माह के भीतर किया जाता है।
सामान्य भविष्य निधि से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ), विभिन्न आवेदन प्रारूप तथा अन्य आवश्यक प्रपत्र भी वेबसाइट पर उपलब्ध हैं, जिससे अभिदाताओं को आवश्यक जानकारी एवं सेवाएं एक ही मंच पर प्राप्त हो सकें। अभिदाता अपनी शिकायत दूरभाष 0751-2432457 तथा व्हाट्सएप नंबर +91-8827409410 पर भी दर्ज करा सकते हैं।
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