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सभी बैंकों और वित्तीय संस्थानों में ग्वालियर पुलिस द्वारा चेकिंग अभियान चलाया गया

ग्वालियर – सिंगरौली में हाल ही में हुई बैंक डकैती (बैंक ऑफ महाराष्ट्र) की घटना के बाद, एसएसपी धर्मवीर सिंह के कड़े निर्देश पर, थाना क्षेत्रों में स्थित सभी बैंकों और वित्तीय संस्थानों में पुलिस द्वारा गहन सुरक्षा जांच (चेकिंग) अभियान चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और बैंक कर्मियों को सुरक्षा के प्रति सतर्क करना है।
सुरक्षा जांच का विवरण
पुलिस टीमों ने बैंकों के सीसीटीवी कैमरे, अलार्म सिस्टम और सुरक्षा गार्डों की उपस्थिति की जाँच की और सुरक्षा संबंधी मापदंड की चेकलिस्ट तैयार की गई। बैंक मैनेजरों को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रखने और संदिग्ध व्यक्तियों की सूचना तत्काल देने के निर्देश दिए हैं।सभी बैंकों व वित्तीय संस्थानों को अलर्ट पर रखा गया है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

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केन्द्र सरकार ने महंगाई भत्ता 2 से बढ़ाकर 60% किया, 50 लाख कर्मचारी और 69 लाख पेंशनर्स होगा लाभ


नई दिल्ली केन्द्र सरकार ने केन्द्रीय कर्मचारियों महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में 2 प्रतिशत की वृद्धि की है। केन्द्र सरकार ने डीए-डीआर 58% बढ़ाकर 60% कर दिया गया है। यह वृद्धि 1 जनवरी 2026 से लागू की गयी है। इस फैसले से केन्द्र सरकार वार्षिक 6,671 करोड़ रूपये का खर्च बढ़ेगा। इससे पहले अक्टूबर में महंगाई भत्ते को 55 से 58 प्रतिशत किया गया था। पिछला रिवीजन 1 जुलाई 2025 से प्रभावी माना गया था। जिसके एरियर का भुगतान के साथ किया गया थां।
पीएम नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में शनिवार 18 अप्रैल को दिल्ली में कैबिनेट बैठक में इसकी घोषणा की गयी है। करीब 50,5 लाख कर्मचारियों और 58.3 लाख पेंशनर्स का लाभ होगा। केन्द्र सरकार वर्ष में 2 बार जनवरी और जुलाई में महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में बदलाव करता है। इस फैसले से कर्मचारियों की प्रति माह वेतन और पेंशनर्स की पेंशन की बढ़ोत्तरी होती है।
8वें वेतन आयोग में बेसिक सेलरी 69 हजार करने की मांग
यह फैसला ऐसे वक्त में आया है जब कर्मचारी संगठन 8वें वेतन आयोग के तहत सैलरी स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव की मांग कर रहे है। नेशनल काउंसिल ज्वॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी नेअपने ज्ञापन में 3.83 के हायर फिटमेंट की मांग की गयी है। अगर यह मांग मानी जाती है। न्यूनतम बेसिक सेलरी 18 हजार से बढ़कर लगभग 69 हजार हो सकती है। संगठन ने सैलरी कैलकुलेशन के लिये परिवार की परिभाषा में आश्रित माता-पिता को शामिल करने और वेतन विसंगतियों को दूर करने का सुझाव भी दिया है। हालांकि 8वें वेतन आयोग के लागू होने की टाइमलाइन का ऐलान अभी तक नहीं किया गया है। कयास लगाये जा रहे हैं कि यह जल्द लागू हो सकता है। लेकिन इसे पूरी तरह इम्प्लीमेंट होने में 2028 तक का इंतजार करना पड़ सकता है।

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लोकायुक्त का छापा-40 हजार की रिश्वत लेते स्थापना बाबू को लोकायुक्त की टीम ने रंगे हाथों किया गिरफ्तार, नपा के निलंबित एआरआई की बहाली के एवज में मांगे थे 40 हजार रूपये

शिवपुरी. लोकायुक्त टीम ने नगरपालिका में तैनात स्थापना बाबू भगवानलाल करोलिया को 40 हजार रूपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोचा है। बहाली के एवज में मांगी गयी रिश्वत की शिकायत पर नगरपालिका के निलंबित एआरआई हरिवल्लभ चन्दौरिया ने लोकायुक्त ग्वालियर में दर्ज कराई थी। जिसके बाद लोकायुक्त की टीम ने ट्रैप की कार्यवाही को अंजाम दिया है।
शिकायतकर्ता हरिवल्लभ चंदौरिया ने बताया है कि वह नगरपालिका शिवपुरी में एआरआई के पद पर पदस्थ थे, 14 नवम्बर 2025 को सीएमओ इशांक धाकड़ ने बिना नोटिस दिये और उन्हें निलंबित कर दिया था। निलंबन के बाद 3 माह तक बहाली के नाम पर नगरपालिका के अलग-अलग बाबुओं द्वारा उनसे रिश्वत मांगी जाती रही है। इस मामले में उन्होंने संचालनालय में भी शिकायत की थी। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई और उल्टा उनके खिलाफ आरोप पत्र जारी कर दिया गया।
चंदौरिया के मुताबिक 16 अप्रैल को स्थापना बाबू भगवानलाल करोलिया ने सीएमओ के नाम पर 60 हजार रूपये की मांग की थी। उसी दिन 20 हजार रूपये देकर बात तय की गयी और इसकी शिकायत लोकायुक्त में दर्ज करायी गयी। शनिवार का जब उन्होंने करोलिया को उनके घर के आंगन में शेष 40 हजार रूपये दिये, तभी लोकायुक्त टीम ने घटनास्थल पर ही दविश देकर आरोपी को रंगे हाथों दबोचा।
लापरवाही की वजह से हुआ निलंबन
सीएमओ इशांक धाकड़ ने बताया बताया कि एआरआई हरिवल्लभ चंदौरिया को लापरवाही के चलते निलंबित किया गया था। सीएमओ के अनुसार नामांतरण की एक फाइल को चंदौरिया ने लगभग 1 साल तक लंबित रखा। जिसकी शिकायत मिलने पर कार्यवाही की गयी। इसके अलावा टैक्स में गड़बड़ी के भी आरोप सामने आये थे। जिसके आधार पर आरोप पत्र जारी किया गया। सीएमओ धाकड़ ने यह भी दावा किया है कि उन्हें स्थापना बाबू द्वारा रिश्वत मांगने की जानकारी पहले ही मिल गयी थी। जिसके चलते 16 अप्रैल को ही उन्हें उस पद से हटाकर दूसरे बाबू की नियुक्ति कर दी गयी थी। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को बे-बुनियाद बताया है।
ऑडियो टेप में सीएमओ का नाम, जांच जारी
लोकायुक्त ग्वालियर के निरीक्षक और दल प्रभारी बलराम सिंह ने बताया कि 16 अप्रैल को शिकायत दर्ज की गई थी और आज ट्रैप कार्रवाई में आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। उनके पास मौजूद ऑडियो टेप में सीएमओ इशांक धाकड़ को पैसे देने की बात रिकॉर्ड है। फिलहाल भगवान लाल करोलिया को आरोपी बनाया गया है, जबकि ऑडियो की जांच और पुष्टि के बाद सीएमओ का नाम भी एफआईआर में जोड़ा जा सकता है।

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MP में TET परीक्षा के विरोध में भोपाल में शिक्षकों ने प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन, मांग पूरी नहीं पर जून में दी आन्दोलन की चेतावनी

भेल स्थित दशहरा मैदान में बड़ी संख्या में शिक्षक एकत्रित हुए हैं।

भोपाल. TET  परीक्षा के विरोध में शनिवार की दोपहर में अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के आव्हान पर बड़ा शिक्षकों ने प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने MP नगर SDM को ज्ञापन सौंपकर प्रदर्शन को खत्म किया। आयोजकों के अनुसार भोपाल के भेल स्थित दशहरा मैदान में ‘‘मुख्यमंत्री अनुरोध यात्र’’ के तहत प्रदेश के अलग-अलग जिलों से लगभग 50 हजार से अधिक शिक्षकों ने भाग लिया। अध्यापक संघ के अध्यक्ष भरत पटेल ने चेतावनी दी है कि अगर मांगें पूरी नहीं हुई तो जून में फिर से बड़ा आन्दोलन किया जायेगा।
सयुक्त मोर्चा के संयोजक जगदीश यादव ने कहा हैकि अगर सरकार परीक्षा ही लेना चाहती है तो शिक्षकों को पढ़ाई के लिये समय दिया जाये और उन्हें जनगणना जैसे कार्यो में नहीं लगाया जाये। संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पहले से नौकरी कर रहे शिक्षकों पुनः शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी (TET) देने के लिये मजबूर करना गलत है। उनका कहना है कि नियुक्ति के वक्त सभी जरूरी योग्यता पूरी की गयी थी। ऐसे में 20 से 25 वर्षो की सेवा के बाद नयी शर्ते थोपना न्यायसंगत नहीं है।
90-95%शिक्षक प्रभावित हुए
शिक्षकों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश से 90-95%  तक शिक्षक प्रभावित हुए है। खासकर वह शिक्षक जो पहले अध्यापक थे और बाद में शिक्षक संवर्ग में शामिल हुए है। इन शिक्षकों ने कम वेतन से नौकरी शुरू की थी और आज भी पेंशन, ग्रेच्युटी और सेवा अवधि की गणना जैसे हकों के लिये संघर्ष कर रहे है।

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सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर ने रशियन युवती के साथ आपत्तिजनक बनाई रील

महिला हिंदी नहीं समझती थी, इसका फायदा उठाकर इन्फ्लुएंसर ने अश्लील टिप्पणी कर वीडियो रिकॉर्ड किया। - Dainik Bhaskar

ग्वालियर. यू तो ग्वालियर देखने के लिये हजारों सैलानी आते है, लेकिन ऐसे में किला देखने आयी रशियन युवती के साथ एक इंफ्लूएंसर की आपत्तिजनक हरकत को देखने को मिली है। हिन्दी भाषा से अनजान इस युवती के साथ मजाक के नाम पर अश्लील टिप्पणी करते हुए वीडियो बनाया गया है। इसे ‘‘राधे गुर्जर’’ नाम की आईडी से सोशल मीडिया पर अपलोड की गयी है।
वीडियो नजर में आने के बाद लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और इन्फ्लूएंसर को ट्रोल करने लगे। इस घटना से ग्वालियर विदेशी पर्यटकों के साथ व्यवहार का लेकर चर्चाओं में रहा है। पहले भी यहां पर्यटकों के साथ ठगी और लूटपाट की घटनायें सामने आ चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाओं की वजह से पर्यटक आगरा के बाद सीधे झांसी या ओरछा चले जाते हैं और ग्वालियर में ठहरने से बचते हैं।
रूसी पर्यटकों दल आगरा से ग्वालियर किला देखने आया
ऐसा बताया जा रहा है कि रूस से आये पर्यटकों का एक दल आगरा से ग्वालियर किला घूमने के लिये आया था। दोपहर में किले पर घूमते वक्त एक स्थानीय इंन्फ्लूएंसर उनसे बातचीत करने लाग तो उसने एक विदेशी महिला को रील बनाने के लिये तैयार किया और अश्लील टिप्पणी करते हुए वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर शेयर किया जो बाद में विवाद की वजह बना।
रूसी शब्द का उपयोग कर अश्लील टिप्पणी की
शहर के एक इंफ्लूएंसर ने ग्वालियर किले पर रील बनाई, जिसमें एक विदेशी युवती को खड़ा किया। युवती हिन्दी नहीं समझती थी। इसका लाभ उठाते हुए इंफ्लूएंसर ने अश्लील टिप्पणी कर वीडियो रिकॉर्ड किया। वीडियो में इंफ्लूएंसर की बात से अनजान विदेशी युवती ने अंगूठा दिखाते हुए 2 बार यस-यस कहा। उसे अंदाजा नहीं था कि उसके साथ आपत्तिजनक बात कहीं जा रही है।

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सरकारी फाइल गायब, जानबूझ कर हटाई गयी, ग्वालियर कलेक्टर अपने कर्तव्य में विफल, प्रमुख सचिव को दिये जांच के आदेश-हाईकोर्ट

ग्वालियर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच की एकल पीठ ने कलेक्ट्रेट सरकारी जमीन की फाइल गायब होने के प्रकरण में कलेक्टर कार्यालय की कामकाज पर सवाल खड़े किये हैं। हाईकोर्ट ने कहा है कि मामले की सही जांच नहीं हुई है। जिम्मेदारी तय करने में लापरवाही बरती गयी है।
हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि या तो सरकारी अधिवक्ता कार्यालय की तरफ से लापरवाही हुई है या फिर कलेक्टर कार्यालय में किसी ने जानबूझ कर फाइलें हटाई है। इसके बावजूद, असली वजह तलाशने के बजाये जिम्मेदारी इधर-उधर डाली गयी है। हाईकोर्ट ने कलेक्टर को अपने कर्तव्य पालन में विफल बताया है और कहा कि अब पूरे प्रकरण की जांच प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग द्वारा कराये जाने की आवश्यकता है। हाईकोर्ट ने जांच के लिये 2 माह का समय दिया है।
पूरे कलेक्ट्रेट कार्यालय उपलब्ध नहीं है फाइल हाईकोर्ट में सुनवाई के बीच सामने आया है वर्ष 2000 से जुड़े एक सिविल सेकेंड अपील से संबंधित पूरी फाइल ग्वालियर के कलेक्टर कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। केवल आउटवर्ड रजिस्टर में एक एंट्री मिली है जिसमें भी यह संकेत मिलता है तत्कालीन एसडीओ ने अपील दायर करने की अनुमति के लिये मांगी थी। हालांकि, अनुमति दी गयी या नहीं, इसका कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
हाईकोर्ट ने यह भी पाया है कि अपील 2 दिसंबर 2006 को दायर की गयी थी। इसमें तत्कालीन एसडीओ बीबीएस तोमर ने स्वयं को ओआईसी बताते हुए वकालतनामा पर हस्ताक्षर किये थे। जबकि उनके ओआईसी नियुक्त होने का कोई आदेश उपलब्ध नहीं है। कलेक्टर द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में भी कई खामियां सामने आयी है। जिन अधिकारियों पर जिम्मेदारी डाली गयी। उनके बारे में यह तक रिकॉर्ड नहीं था कि उन्हें मामले की जानकारी थी या उन्हें ओआईसी नियुक्त किया गया था। हाईकोर्ट ने इसे सतही जांच बताते हुए नाराजगी व्यक्त की है।
ऐसे समझें मामला
कोटा लश्कर में मंदिर की 5.19 बीघा जमीन मौजूद थी। इस जमीन पर योगेश शर्मा अन्य ने दावा किया।
19 अप्रैल 2000 को योगेश शर्मा के पक्ष में फैसला हो गया। आदेश के खिलाफ शासन ने अपील दायर की। जिसे अक्टूबर 2003 में खारिज कर दिया।
2006 में आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। जो 19 फरवरी 2009 को खारिज हुई।
अपील को फिर से सुनवाई में लाने के लिए शासन ने आवेदन लगाया।
3327 दिन देर से शासन ने आवेदन लगाया। इस पूरे मामले में कौन जिम्मेदार हैं।
इन सवालों के अब जवाब देने होंंगे
क्या द्वितीय अपील दायर करने के लिए राज्य सरकार से कोई अनुमति ली गई थी या नहीं?
क्या राज्य या कलेक्टर द्वारा कभी ओआईसी की नियुक्ति का कोई आदेश जारी किया था?
जब ग्वालियर कलेक्टर को अपीलकर्ता के रूप में दर्शाया था तो तत्कालीन कलेक्टर ने उस मामले पर नजर क्यों नहीं रखी?
यदि अपील अनुमति के साथ दायर की गई थी, तो ओआईसी की नियुक्ति के आदेश क्यों जारी नहीं किए गए, और यदि जारी किए गए थे, तो उन्हें फाइल से किसने हटाया?
कलेक्टर ने गायब फाइल, नियुक्ति आदेश या राज्य की अनुमति के संबंध में जांच क्यों नहीं की?

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ब्राह्मण शास्त्र के साथ-साथ शस्त्र भी उठा सकता है –विप्रा ब्राह्मण महिला मंच

ग्वालियर – परशुराम जन्मोत्सव एवं अक्षय तृतीया की पूर्व संध्या पर विप्रा महिला मंच के द्वारा हर्षोल्लास के साथ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भगवान परशुराम का जीवन हमें सिखाता है कि आवश्यकता पड़ने पर ब्राह्मण शास्त्र के साथ-साथ शस्त्र भी उठा सकता है इस अवसर पर विप्रा महिला मंच की संस्थापिका डॉ प्रतिभा चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। कार्यक्रम के आरंभ में सभी संगीनियों द्वारा भगवान परशुराम का विधि विधान से पूजन किया गया ।
इस अवसर पर विप्रा संगिनी विभा शुक्ला के द्वारा कार्यक्रम का संचालन किया गया । सीमा दुबे द्वारा भगवान परशुराम के जीवन तथा उनसे मिलने वाली प्रेरणा पर महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई। प्रज्ञा कवीश्वर के द्वारा अक्षय तृतीया के महत्व को बताया गया तथा हमें इस दिन क्या-क्या दान करना चाहिए यह भी जानकारी दी गई। इसके बाद डॉ शैलजा मिश्रा, सपना पाराशर, मंजू शर्मा एवं सभी विप्रा संगनियों के द्वारा भगवान राम और कृष्ण के भजन की प्रस्तुति दी गई एवं कृष्णा विश्राम शर्मा के द्वारा दुर्गा स्तुति की गई। कार्यक्रम के अंत में सुमन तिवारी जी के द्वारा कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया गया। आज के कार्यक्रम में कृष्णा विश्राम शर्मा, संगीता शर्मा, ज्योति शर्मा ,आभा शर्मा , विभा शुक्ला , कल्पना पाठक , गीता शर्मा , मंजू शर्मा , सीमा दुबे, भारती शर्मा , सुमन तिवारी , प्रज्ञा कवीश्वर, सपना पाराशर, रंजना गर्ग, रजनी शर्मा तथा डॉ शैलजा मिश्रा उपस्थित हुई।

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एलिवेटेड रोड- भाजपा नेता की कंसल्टेंट जैक कम्पनी पर होगी एफआईआर, कम्पनी को निलंबन का नोटिस

गुजरात की कंस्ट्रक्शन कंपनी को भी नोटिस, ऊर्जा मंत्री बोले– एफआईआर के साथ होगी गुणवत्ता की जांच, रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई
ग्वालियर स्वर्ण रेखा पर निर्माणाधीन एलिवेटेड रोड का गर्डर गिरने का मामला ग्वालियर से भोपाल तक गूंज गया है। इस मामले में शुक्रवार को दिनभर कार्रवाई की प्रक्रिया चलती रही। लोक निर्माण विभाग (PWD) के सेतु संभाग मुख्य अभियंता और ग्वालियर में कार्यपालन यंत्री ने कंस्ट्रक्शन कंपनी श्री मंगलम बिल्डकॉन और अथॉरिटी इंजीनियर कंपनी एलएन मालवीय को निलंबन का नोटिस देकर 2 दिन में जवाब मांगा है। अथॉरिटी इंजीनियर के तौर पर काम कर रही यह कंपनी भोपाल के BJP  नेता व संत सनातन सेवा संस्थान के अध्यक्ष LN मालवीय की है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों के तहत कार्य कराने की जिम्मेदारी आपकी (एलएन मालवीय) थी, फिर भी यह हादसा हुआ है। वहीं ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्नसिंह तोमर ने कहा है कि जिस कंपनी का हाइड्रोलिक जैक फेल हुआ है उसके प्रबंधक पर एफआईआर दर्ज की जाएगी। गर्डर का सैंपल टेस्टिंग भी होगी।


1. एलएन मालवीय
भोपाल की एलएन मालवीय इंफ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड इस प्रोजेक्ट के तहत अथॉरिटी इंजीनियर के तौर पर कार्य कर रही है। देखरेख की जिम्मेदारी इन्हीं की थी। रिपोर्ट के अनुसार गर्डर स्थापित किए जाने के लिए जो जैक मशीन लगाई गई, वह तकनीकी तौर पर फेल हुई। इसके लिए इसी फर्म का दोष माना जा रहा है।
किस कंपनी को किस लिए मिला नोटिस
2- श्री मंगलम बिल्डकॉन
गुजरात की श्री मंगलम बिल्डकॉन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है कि आखिर यह हादसा क्यों और कैसे हुआ? यह कंपनी जलालपुर तिराहा से लक्ष्मीबाई समाधि स्थल तक एलिवेटेड रोड का निर्माण कर रही है। इसी के निर्माण हिस्से में यह हादसा हुआ। वहीं श्री मंगलम बिल्डकॉन इंडिया प्रा.लि. के प्रोजेक्ट मैनेजर प्रबल राजावत ने बताया कि कंपनी की तरफ से पड़ाव थाना में आवेदन दिया गया है कि जैक फटने के कारण गर्डर गिरने का मामला हुआ। मामले में जैक कंपनी मार्सल हाइड्रो वर्क्स के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
6 से अधिक लैब में होगी जांच
तोमर ने बताया कि अधिकारियों को 6 से अधिक लैबों में इसकी कोर कटिंग कराकर टेस्टिंग कराने के लिए कहा गया है, ताकि निर्माण कार्य की गुणवत्ता भी जनता के सामने आ सके। तोमर ने बताया कि जैक कंपनी के साथ-साथ दूसरी जिम्मेदार कंपनियों पर भी कार्रवाई होगी।
गर्डर लॉन्चिंग के लिए खेड़ापति मंदिर के पास की पुलिया का रास्ता 14 अप्रैल को दोनों तरफ से बंद किया गया था, जो अब भी बंद ही रहेगा। क्योंकि जो गर्डर गिरा है उसे हटाने एवं अन्य एक गर्डर को साधने में समय लगेगा। इसके अलावा पुलिया की दीवार भी क्षतिग्रस्त हो गई है जिसे सुधरवाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार इस रास्ते को खुलने में तीन से 5 दिन का समय लग सकता है।
नोटिस देकर जवाब मांगा है
मुख्य अभियंता द्वारा इस मामले में कंस्ट्रक्शन कंपनी और अथॉरिटी इंजीनियरिंग कंपनी को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई करेंगे। वहीं घटना स्थल पर क्षतिग्रस्त गर्डर हटाने का कार्य होने के बाद रास्ता खोला दिया जाएगा।
जोगिंदर यादव, कार्यपालन यंत्री, सेतु संभाग

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अवैध उत्खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, निगरानी के लिये जल्द तैनात होगा पैरामिलिट्री फोर्स, एमपी, यूपी और राजस्थान को लगाई फटकार

चंबल नदी में JCB से रेत खनन की फाइल फोटो।

मुरैना. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को चम्बल नदी में अवैध उत्खनन का लेकर सख्त रूख अपनाते हुए मध्यप्रदेश, राजस्थान और यूपी की सरकारों को कड़ी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर राज्य सरकारें अवैध उत्खनन रोकने में असमर्थ है तो अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती की जायेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि चम्बल अभ्यारण्य इलाके में जारी अवैध उत्खनन न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि यह पर्यावरण और जैव विविधता के लिये गंभीर खतरा बताया है। सुनवाई के बीच हाईकोर्ट मीडिया रिपोर्ट का भी उल्लेख किया है। जिसमें खनन के जमीनी हालत खुलासा किया गया है।

चंबल नदी में अवैध रेत खनन जारी है। (फाइल फोटो)
GPS  और CCTV कैमरे से होगी सख्त निगरानी
सुप्रीम कोर्ट ने तीनों राज्यों सरकारों को निर्देश दिये है कि अवैध उत्खनन के रास्तों और नदी के संवेदनशील इलाकों में हाई-रिजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाये जायें और साथ ही उत्खनन में उपयोग होने वाले सभी वाहनों और मशीनों में जीपीएस डिवाइस आवश्यक रूप से लगाये जायें। ताकि उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस और वन विभाग को मिलकर 24 घंटे संयुक्त गश्त करने के निर्देश दिये है। अवैध उत्खनन में लिप्त पाये जाने वाले वाहनों को तत्काल जब्त कर सख्त कानूनी कार्यवाही करने के लिये कहा गया है। इसमें अवैध गतिविधियों पर तत्काल लगाम लगाने का प्रयास किया जायेगा।
क्यों अहम है यह फैसला
चंबल क्षेत्र देश के सबसे संवेदनशील इकोसिस्टम में से एक है, जहां घड़ियाल, डॉल्फिन और कई दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं। लगातार हो रहा अवैध रेत खनन नदी के प्राकृतिक स्वरूप को बिगाड़ रहा है, किनारों का कटाव बढ़ा रहा है और वन्यजीवों के अस्तित्व पर खतरा पैदा कर रहा है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की यह सख्ती न सिर्फ कानून व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा और जरूरी कदम भी माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी भी स्तर पर अधिकारी लापरवाही करते पाए गए, तो उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में जिम्मेदारी तय होगी और जवाबदेही से बचने का मौका नहीं मिलेगा।

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पुलिस द्वारा थाना सिरोल क्षेत्र में हुए हत्या का प्रयास के मामले का किया पर्दाफाश

बागवाले हनुमान मंदिर के पुजारी पर चाकू से जानलेवा हमला करने वाले आरोपी को पुलिस ने किया गिरफ्तार
ग्वालियर। – फरियादी जोगेंद्र दास गुर्जर, निवासी ग्राम गुरेंदरी थाना नूराबाद द्वारा थाना सिरोल में रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि वह पिछले 2 वर्षों से बाग वाले हनुमान मंदिर में पुजारी एवं देखरेख का कार्य कर रहा है। 15. अप्रैल की रात्रि लगभग 10 बजे वह मंदिर परिसर में भोजन कर सो गया था। रात्रि लगभग 11बजे अज्ञात बदमाशों द्वारा उस पर जान से मारने की नीयत से धारदार हथियार से गले एवं छाती पर हमला किया गया। घटना के समय मंदिर परिसर में कुल 4-5 अज्ञात बदमाश मौजूद थे। फरियादी ने साहस दिखाते हुए पास में रखे लठ से बचाव किया, जिससे हमलावर मौके से फरार हो गए। इसके बाद वह स्वयं मर्सी होम के पास पहुंचा, जहां से डायल-112 के माध्यम से पुलिस को सूचना दी गई।
सीएसपी विश्वविद्यालय हिना खान ने थाना प्रभारी सिरोल निरीक्षक गोविंद बल्लभ बगौली ने थाना बल की तथा अन्य टीमों को लगाया गया एवं तकनीकी सेल को भी सक्रिय किया गया तथा एक टीम को घटना सील के आसपास के सीसीटीवी फुटेज चेक करने हेतु लगाया गया।
दौराने विवेचना तकनीकी साक्ष्य एवं सीसीटीवी फुटेज एवं मुखबिर के आधार पर वांछित संदेही विपिन गुर्जर उर्फ रामप्रिया दास बाबा निवासी करऊंआ छरेटा थाना गोहद हाल मुकाम शीतला माता मंदिर पारसेन को धरदबोचा। पूछताछ में आरोपी ने बताया जोगेंद्र दास बाबा के पास गाय को बेचकर प्राप्त हुए रूपयों को चोरी करने के उद्देश्य से आना बताया तथा फरियादी के जग जाने के कारण उसे जान से मारने की नीयत से चाकू मारकर घायल कर दिया था। फरियादी बाबा द्वारा अन्य लोगों पर संदेह व्यक्त किया गया था लेकिन पुलिस द्वारा की गई जांच में उनकी इस मामले में संलिप्तता नहीं पाई गई।