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निगम -मंडलों में राजनैतिक नियुक्तियां, अब यह विधानसभा के टिकट दावेदार नहीं,प्राधिकरणों में बैलेंस, मोहन, सिंधिया सबके करीबी फिट

भोपाल/ग्वालियर- राज्य सरकार ने प्राधिकरणों और निगम-मंडलों में नई नियुक्तियों के माध्यम से सियासी संतुलन साधने की कोशिश की है। जारी आदेशों में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्रसिंह तोमर व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े नेताओं के नजदीकी चेहरों को जगह मिली है। मधुसूदन भदौरिया को जीडीए व साडा का अध्यक्ष, अशोक शर्मा को नियुक्त किया है। महेंद्र यादव को अपेक्स का जिम्मा सौंपा है। वहीं उज्जैन विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष रवि सोनी को बनाया है। उपाध्यक्ष मुकेश यादव और रवि वर्मा होंगे। ये तीनों सीएम के करीबी माने जाते हैं।

राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक)
BJP  नेता महेंद्र सिंह यादव को राज्य सहकारी अपेक्स बैंक का प्रशासक नियुक्त किया गया है। वे भी सीएम के करीबी माने जाते हैं।
ग्वालियर विकास प्राधिकरण
मधुसूदन भदौरिया अध्यक्ष, सुधीर गुप्ता और वेद प्रकाश शिवहरे उपाध्यक्ष होंगे। भदौरिया संघ से जुड़े हैं। गुप्ता को सिंधिया व वेद प्रकाश को तोमर का करीबी माना जाता है।
ग्वालियर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा)
अशोक शर्मा अध्यक्ष बने हैं। सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद ये भी भाजपा में गए। उपाध्यक्ष हरीश मेवाफरोश संगठन से जुड़े हैं।
ग्वालियर संभाग से दक्षिण चेहरे ज्यादा
नियुक्तियों में जयभान सिंह पवैया को राज्य वित्त आयोग, मधुसूदन भदौरिया को जीडीए, अशोक जादौन को ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण और केशव भदौरिया को महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है।
प्राधिकरणों में बैलेंस
अमरकंटक विकास प्राधिकरण: राजेंद्र भारती अध्यक्ष। संघ के पुराने कार्यकर्ता रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान व तोमर के निकट माने जाते हैं। कुक्कुट विकास निगम के अध्यक्ष बने केशव सिंह भदौरिया को भी तोमर खेमे का करीबी माना जाता है।
इंदौर-भोपाल में नियुक्तियां अटकीं
इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) और भोपाल विकास प्राधिकरण (बीडीए) में अभी नियुक्तियों पर सहमति नहीं बन पाई है। इंदौर में हरिनारायण यादव और भोपाल में चेतन सिंह के नाम चर्चा में हैं, लेकिन अंतिम फैसला बाकी है।

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अगर मुरैना-सबलगढ़ के चम्बल पुल शुरू हो जाये तो ग्वालियर से कैलादेवी की यात्रा 3 घंटे में संभव 

मुरैना. सबलगढ़ और मुरेना इलाके के लाखों श्रद्धालुओं के लिये केलादेवी की राह आज भी परेशानी भरी बनी हुई है। चम्बल नदी पर पक्कापुल बने 2 वर्ष बीत चुके है। लेकिन अभी तक सीधी बस सेवा शुरू नहीं हो पायी है। इसके अभाव में यात्रियों को महज 85 किमी का सफर तय करन में 5 घंटे का वक्त लग रहा है। मुरैना, जौरा और केलारस से आने वाले यात्रियों को सबलगढ़ और चम्बली पुल (मंडरायल) पर बार-बार बसें बदलनी पड़ती है। इससे न केवल समय बर्बाद होता है। बल्कि जेब पर भी अतिरिक्त बोझ पढ़ता है।
सीधी बस सेवा से नहीं होने के नुकसान
जो यात्रा 2-3 घंटे में पूरी हो सकती है। उसमें वर्तमान में 5 घंटे लग रहे हैं। सीधी बस नहीं होने पर यात्रियों को धौलपुर-सरमथुरा होकर जाना पड़ता है जिससे दूरी 150 किमी से बढ़कर 225 किमी हो जाती है। सबलगढ़ से जयपुर के लिये रात मे ंतो बसें हैं। लेकिन दिन के वक्त सीधी बसों का अभाव है। इससे लोगों को जरूरी कार्यो के लिये भी रात की यात्रा करने पर मजबूर होना पड़ता है।
विकास और राजस्व की संभावना
स्थानीय लोगों का मानना हैकि यदि सरकार सीधी बस सेवा शुरू करती है तो यात्री टैक्स के रूप् में बड़ा राजस्व प्राप्त होगा। इससे इलाके में पर्यटन और रोजगार के नये अवसर मिलेंगे। विशेषकर नवदुर्गा और अन्य त्यौहारों के समय श्रद्धालुओं को घंटों बसों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। जिम्मेदारों का रुख बस कंडक्टर बंटी रावत ने बताया कि वर्तमान में बसें केवल चंबल नदी तक ही जाती हैं, जिससे यात्रियों को असुविधा होती है।
जिम्मेदार क्या बोले?
इस गंभीर मुद्दे पर जब आरटीओ मुरैना स्वीटी पाठक से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। वहीं, क्षेत्रीय विधायक सरला रावत ने आश्वासन दिया है कि वे इस समस्या को लेकर आरटीओ से बात करेंगी और जल्द ही सीधी बस सेवा शुरू कराने का प्रयास करेंगी ताकि जनता को इस परेशानी से निजात मिल सके।

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“विशेष जेल लोक अदालत” -सकारात्मक व्यक्तित्व को अपनाने की दिशा में प्रयासरत रहना चाहिये  – मुख्य न्यायाधिपति 

“विशेष जेल लोक अदालत” में 7 बंदियों की रिहाई के हुए आदेश 
ग्वालियर – मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के तत्वाधान में 26 अप्रैल, 2026 को पूरे मध्यप्रदेश की जेलों में विषेश जेल लोक अदालत का आयोजन किया गया, जिसका वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति व मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा द्वारा केन्द्रीय जेल, ग्वालियर में किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित बंदीगण को संबोधित करते हुये मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति व मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा द्वारा बताया गया कि बंदीगण की जेल में आने की जो भी परिस्थितियां रही हो, किंतु यहां से बाहर निकलने तक की समयावधि में बंदीगण को एक सकारात्मक व्यक्तित्व को अपनाने की दिशा में प्रयासरत रहना चाहिये, ताकि सजा अवधि पूर्ण करने के उपरांत बंदीगण समाज की मुख्यधारा में जुड सकें।  जेल में मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं के प्रति भी न्यायमूर्ति द्वारा उपस्थित बंदीगण को अवगत कराते हुये इस जेल लोक अदालत के माध्यम से लाभान्वित होने हेतु समझाईश दी गई।
उच्च न्यायालय खण्डपीठ-ग्वालियर के प्रशासनिक न्यायाधिपति न्यायमूर्ति आनंद पाठक द्वारा उपस्थित बंदीगण को अवगत कराते हुये कहा कि पक्षकारगण को न्यायालय के समक्ष आना रहता है, जबकि इस कल्याणकारी जेल लोक अदालत के माध्यम से न्यायालय पक्षकार के पास आया है और लाभान्वित होने का एक मौका प्रदान कर रहा है।   लोक अदालत का मूल उद्देश्य अपराध या विवाद को समाप्त करना नहीं है बल्कि अपराध या विवाद के कारणों को उजागर कर उसे समाप्त करने की दिषा में प्रयासरत होने का मौका देता है।  साथ ही बताया कि हम सभी को यह प्रयास करना चाहिये कि वर्ष 2047 तक हम एक विवाद विहीन समाज की स्थापना कर सके और इस लक्ष्य प्राप्ति के लिये हमारे द्वारा दिया गया योगदान ही देश हितार्थ हमारा सद्कर्म होगा।
केन्द्रीय जेल, ग्वालियर में हुई जेल लोक अदालत में निराकरण हेतु कुल 60 प्रकरण चिन्हित किये गये और उनके निराकरण हेतु कुल 03 खण्डपीठों का गठन किया गया। लोक अदालत की प्रक्रिया अनुसार किये गये प्रयासों के फलस्वरूप 06 प्रकरण का प्ली-बारगेनिंग (अपराध स्वीकारोक्ति के आधार पर) तथा 12 आपराधिक प्रकृति के प्रकरणों में उभयपक्ष के मध्य आपसी सहमति के आधार पर समझौता हो जाने से कुल 18 प्रकरणों का निराकरण किया गया तथा इनमें से 7 बंदियों के रिहाई आदेश लोक अदालत खण्डपीठ के पीठासीन अधिकारी द्वारा जारी किये गये।
कार्यक्रम में न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया, न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फडके, न्यायमूर्ति आशीष श्रोती, न्यायमूर्ति अमित सेठ, न्यायमूर्ति  आनंद सिंह बहरावत, न्यायमूर्ति राजेश कुमार गुप्ता सहित मध्यप्रदेश जेल विभाग के विषेश महानिदेशक अखेतो सेमा, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल धरमिंदर सिंह, ग्वालियर के प्रधान जिला न्यायाधीश ललित किशोर, जिला न्यायाधीश (निरीक्षण) जाकिर हुसैन, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव सुमन श्रीवास्तव, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खण्डपीठ-ग्वालियर के प्रिंसिपल रजिस्ट्रार राजीव के पाल व रजिस्ट्रार नवीन कुमार शर्मा, अतिरिक्त सचिव अरविंद श्रीवास्तव, ग्वालियर कलेक्टर रूचिका चौहान व पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह, केन्द्रीय जेल-ग्वालियर के जेल अधीक्षक विदित सिरवैया एवं अन्य न्यायाधीशगण व जेल प्रशासन के अधिकारी सम्मिलित हुये। विशेष जेल लोक अदालत के शुभारंभ अवसर पर कार्यक्रम के अंत में जेल में निरूद्ध बंदियों द्वारा तैयार किए गए स्मृति चिन्हों को जेल विभाग के अधिकारियों द्वारा भेंट किया गया।
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ऋषि गालव विश्वविद्यालय का भूमिपूजन समारोह 4 मई को मुख्यमंत्री के  प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल का DM एवं SSP ने किया अवलोकन 

ग्वालियर – मुख्यमंत्री 4 मई को ग्वालियर में ऋषि गालव विश्वविद्यालय ग्वालियर के भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल होंगे। प्रस्तावित कार्यक्रम की तैयारियों का रविवार को कलेक्टर रुचिका चौहान एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने कार्यक्रम स्थल का अवलोकन किया।  उल्लेखनीय है कि ग्वालियर में ऋषि गालव विश्वविद्यालय का भूमिपूजन समारोह 4 मई को शीतला माता मंदिर, शिवपुरी लिंक रोड पर आयोजित किया जा रहा है।
कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्थाओं के लिये दिशा-निर्देश दिए। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने सुरक्षा, यातायात प्रबंधन के संबंध में पुलिस अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान एएसपी सुमन गुर्जर, एसडीएम अतुल सिंह, एसडीएम नरेन्द्र बाबू यादव, अपर आयुक्त नगर निगम मुनीष सिकरवार, अपर संचालक उच्च शिक्षा डॉ. रत्नम सहित विभागीय अधिकारी एवं विश्वविद्यालय से जुड़े पदाधिकारी उपस्थित थे।
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रामजानकी मंदिर पर पुजारी ने हक की याचिका का हाईकोर्ट ने किया खारिज, मंदिर सरकारी है, पुजारी सिर्फ प्रबंधक है मालिक नहीं

ग्वालियर. चावड़ी बाजार स्थित रामजानकी मंदिर को लेकर लम्बे समय से चल रहे विवाद में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। चावड़ी बाजार स्थित इस प्राचीन मंदिर पर मालिकाना हक को लेकर दावा करने वाले पुजारी की याचिका खारिज कर दी गयी है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह मंदिर किसी की निजी संपत्ति नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश सरकार के माफी औकाफ विभाग की शासकीय जमीन पर स्थित है।
पंडित कैलाशनारायण दीक्षित ने हाईकोर्ट में दावा किया था मंदिर स्थित संपत्ति उनके पूर्वजों के समय से उनके स्वामित्व में है। उन्होनंे नगरनिगम के टैक्स रजिस्टर और मतदाता सूची के आधार पर स्वयं को मालिक बताया है।
मंदिर श्रीराम जी दर्ज हैं पुराने रिकॉर्ड में
हाईकोर्ट ने जब पुराने रिकॉर्ड तलब किये तो सामने आया कि 1960-1978 तक के कागजातों में संपत्ति के मालिक के रूप में सिर्फ ‘‘मंदिर श्री रामजी’’ ही दर्ज था। उस पर टैक्स भी माफ था और बाद में पुजारी का नाम रिकॉर्ड में कैसे जुड़ा है। इसका कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया जा सका।
सरकार का पक्ष मजबूत, दावा खारिज
शासन की ओर से अतिरिक्त शासकीय अधिवक्ता मृत्युंजय गोस्वामी ने तर्क दिया कि यह मंदिर शासकीय भूमि पर है और इस पर कोई निजी दावा नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए पुजारी का दावा खारिज कर दिया।
सुनवाई के दौरान ऐसे दस्तावेज पेश किए गए, जिनसे साबित हुआ कि वादी के दादा बाबूलाल दीक्षित को मंदिर में पूजा-अर्चना के बदले 15 रुपए प्रतिमाह वेतन मिलता था।कोर्ट ने कहा कि जो व्यक्ति वेतनभोगी पुजारी है, वह संपत्ति का स्वामी नहीं हो सकता।
मामला तब सामने आया जब पुजारी परिवार मंदिर में मरम्मत और तोड़फोड़ का काम कर रहा था, जिसे 14 मार्च 2005 को तहसीलदार ने रोक दिया था। कोर्ट ने इस कार्रवाई को मप्र भू-राजस्व संहिता की धारा 248 के तहत पूरी तरह वैध माना। अदालत के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि धार्मिक स्थल की सेवा करने वाला पुजारी उसका मालिक नहीं होता, बल्कि वह केवल प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाता है।

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वॉशिंगटन में डिनर के बीच हुई फायरिंग, मौके से डोनाल्ड ट्रम्प को सुरक्षित निकाला, चश्मदीद ने बताया कि 7 राउंड फायर किये, गेस्ट टेबिल के नीचे छिपे, हमलावर को भी दबोचा

वॉशिंगटन. अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में सालाना व्हाइट हाउस कॉरस्पॉन्डेंट डिनर के बीच फायरिंग हो गयी। शनिवार की शाम के इस कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, पत्नी मेलानियां और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस सहित बड़े अधिकारी मौजूद थे। न्यूज एजेंसी एपी के अनुसार हमलावर ने होटल के बॉलरूम के बाहर फायरिंग की है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और गेस्ट बॉलरूम के अन्दर थे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बताया है कि हमलावर को पकड़ लिया गया है। पहले खबर आयी थी। हमलावर का मार गिराया गया है। हमले के लगभग 1.30 घंटे के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पत्रकारों को संबोधित किया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका के संविधान पर ह मला हुआ है। सीक्रेट सर्विस ने मेरी जान बचाई। सुरक्षाकर्मियों ने बहादुरी से काम किया है। जिस अधिकारी को गोली लगी वह सुरक्षित है। उसने बुलेटप्रूफ जैकेट पहनी थी। हमलावर के पास पॉवरफुल गन थी।


डिनर के बीच गोली चलाने वाला शख्स कौन
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसारन हमलावर की पहचान 31 साल के कोल टोंमस एलन के रूप में हुई है। वह अमेरिका के कैलीफोर्निया का है। पब्लिक रिकॉर्ड्स के अनुसार एलन पार्ट-टाइम टीचर और वी्िरडयो गेम डवलपर था। उसकी प्रोफाइल के अनुसार वह दिसम्बर 2024 में टीचर ऑफ द मंथ चुना गया था। उसरे कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेकनोलॉजी से 2017 में मैकेनिकल इंजीनियर में ग्रेजुएशन किया। पिछले साल कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी डोमिंगुएज हिल्स में कम्प्यूटर साइंस में मास्टर्स डिग्री हासिल की थी।

 

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ग्वालियर-झांसी हाईवे पर टायर फटने से बस में लगी आग, यात्रियों ने कांच तोडकर खिडकी से कूदकर जान बचाई

ग्वालियर. ग्वालियर-झांसी हाईवे पर रविवार सुबह एक बडा हादसा हो गया। यहां झांसी रोड थाना गेट के सामने एक वोडियो कोच बस का टायर फटने के बाद अचानक आग लग गई। बता दें कि घटना सुबह करीब 5 बजे की है, उस समय बस में सवार यात्री गहरी नींद में थे लेकिन समय रहते पुलिस की वजह से और यात्रियों कि सूझबूझ से सभी की जान बच गई।

झांसी रोड थाना के सामने जलती वीडियो कोच बस। सभी यात्री हैं सुरक्षित। - Dainik Bhaskar
पुलिस ने तुरंत यात्रियों को कांच तोडकर यात्रियों को बाहर निकाला
बता दें कि बस से धुआं और आग की लपटें निकलते देख मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी तुरंत हरकत में आई। उन्होंने बस के कांच तोडकर अंदर घूस गए और सो रहे यात्रियों को बाहर निकाला। वहीं कई यात्रियों ने खुद खिडकियों से कूदकर जान बचाई जिसके बाद कुछ ही देर में बस पूरी तरह आग लग गई।
बस जयपुर से बागेशवर धाम जा रही थी
जानकारी के अनुसार बस क्रमांक एलएल07 बी-0899 राजस्थान के जयपुर से बागेशवर धाम छतरपुर जा रही थी। बस राजस्थान के जयपुर से शनिवार रात करीब 9 बजे रवाना हुई थी। रविवार सुबह नाका चंद्रवदनी पर 15 यात्री उतर गए थे इसके बाद बस जैसे ही करीब 200 मीटर आगे बढी तो झांसी रोड थाना के सामने अचानक टायर फट गया और उसमें आग लग गई। उस समय में 16 यात्री बस में सवार थे। वहीं बस में बेठे यात्रियों ने बताया कि हादसे से कुछ ही मिनट पहले उन्हें हल्की बदबू और धुंआ दिखने लगा। इससे पहले कि वे कुछ समझ पाते आग तेजी से फैल गई। उसी समय पुलिस ने आकर यात्रियों को बताया जिसके बाद अफरा-तफरी मच गई और सभी लोग बाहर निकलने लगे।
बस में आग लगने के कारण हाईवे पर लंबा जाम लगा
घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और आग बुझाने का शुरू कर दिया लेकिन तब तक बस पूरी तरह जल चुकी थी। बस में आग लगने के कारण हाईवे पर लंबा जाम भी लग चुका था। पहले से पाइपलाइन कार्य के चलते सडक संकरी थी जिससे स्थिति और बिगड गई। पुलिस ने पहले यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला उसके बाद यातायात व्यवस्था को संभालते हुए जाम खुलवाया। बस ड्राइवर संजय सिंह, सहायक चालक बृजेश सिकरवार और हेल्पर अजय कुमार ने घटना की सूचना बस मालिक को दी, फिलहाल मामले की जांच चल रही है।

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दिल्ली-टेकऑफ के दौरान स्विस प्लेन का इंजन फेल, आग लगी, 6 यात्री घायल

नई दिल्ली. दिल्ली एयरपोर्ट में टेकऑफ के दौरान स्विस प्लेन का इंजन फेल हो गया। स्विस एयरलाइंस की एलएक्स147 फ्लाइट शनिवार देर रात 1.08 बजे टेकऑफ करने वाली थी तभी उसका एक इंजन फेल हो गया और उसमें आग लग गई। इसके बाद पायलट ने तुरंत विमान रोक दिया। अधिकारियों ने बताया कि रनवे पर इमरजेंसी स्लाइड का इस्तेमाल करके सभी यात्रियों को बाहर निकाला गया। बताया जा रहा है कि 6 यात्री घायल हो गए। फ्लाइट स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख जाने वाली थी।

दिल्ली एयरपोर्ट पर यह घटना शनिवार रात एक बजे की है। हादसे के बाद एयरपोर्ट पर फुल इमरजेंसी घोषित कर दी गई थी। - Dainik Bhaskar
स्विस एयरलाइन ने एक बयान में कही कि हमें दिल्ली में फ्लाइट एलएक्स147 से जुडी घटना के बारे में जानकारी मिली है। जिस विमान में खराबी आई वह एयरबस ए330 है। घटना भारतीय समय के अनुसार रात 1 बजे के बाद की है। जैसे ही विमान टेकऑफ करने के लिए रनवे में आया। विमान के बाई ओर लैंडिंग गियर से धुआं निकलता देख गया इसके बाद तुरंत फ्लाइट को रोक दिया गया। एयरलाइन ने कहा हमारी स्थानीय टीमें मौके पर मौजूद हैं और यात्रियों की देखभाल कर रही है। हम स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर इस मामले पर काम कर रहे है। इस घटना के कारणों को पूरी तरह से समझने के लिए हमारी टीम जल्द ही दिल्ली जाएगी।

विमान से नीचे उतरने के दौरान भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

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नो वर्क नो पे -कर्मचारी की गलती नहीं होने पर लागू नहीं किया जा सकता-हाईकोर्ट

हाईकोर्ट का फैसला-जल संसाधन विभाग में 14 साल पुराने प्रकरण में 1990 से वेतन निर्धारण कर पेंशन संशोधन के निर्देश
ग्वालियर- मप्र हाई कोर्ट ने जल संसाधन विभाग से जुड़े एक विवाद में महत्वपूर्ण आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि यदि कर्मचारी की कोई गलती नहीं है और उसे उच्च पद पर कार्य करने से वंचित रखा गया, तो ‘नो वर्क नो पे’ का सिद्धांत लागू नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति आनंद सिंह बरारावत की सिंगल बेंच ने रघुराज शर्मा एवं अन्य की 2012 से लंबित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
दरअसल, याचिकाकर्ता वर्ष 1979 से दैनिक वेतनभोगी पंप ऑपरेटर के रूप में कार्यरत थे और 1987 में उन्हें नियमित किया गया। वर्ष 1990 में कनिष्ठ एवं समान स्थिति वाले कर्मचारियों को उच्च वेतनमान वाले ट्यूबवेल ऑपरेटर पद पर नियमित कर दिया गया, जबकि याचिकाकर्ताओं को लाभ से वंचित रखा गया।न्यायालय के पूर्व आदेश के पालन में विभाग ने 2012 में याचिकाकर्ताओं को 24 मार्च 1990 से ट्यूबवेल ऑपरेटर पद का लाभ तो प्रदान कर दिया, लेकिन ‘नो वर्क नो पे’ सिद्धांत लागू करते हुए उन्हें उस अवधि के वेतन-एरियर से वंचित रखा।
न्यायालय ने इसे विधि अनुरूप नहीं माना। आदेश में सुप्रीम कोर्ट के के.वी. जानकीरमन प्रकरण सहित अन्य निर्णयों का उल्लेख कर कहा कि जहां कर्मचारी की कोई त्रुटि नहीं हो और विभागीय कारणों से उसे उच्च पद पर कार्य करने से रोका गया हो, वहां ‘नो वर्क नो पे’ लागू नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता अपने कनिष्ठ कर्मचारियों के समान स्थिति में थे और उन्हें भी 24 मार्च 1990 से ही ट्यूबवेल ऑपरेटर के पद का लाभ मिलना चाहिये था। ऐसे में केवल ‘‘नो वर्क नो पे’’ के आधार पर मौट्रिक लाभ से वंचित रखना गलत है। इसी आधार पर न्यायालय ने याचिका का स्वीकार करते हुए राज्य शासन को निर्देशित किया है कि याचिकाकर्ताओं का वर्ष 1990 से ट्यूबवेल ऑपरेटर पद के अनुसार वेतन निर्धारण किया जाये तथा उत्पन्न एरियर का भुगतान किया जाये। चूंकि याचिकाकर्ता सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसलिये उनके पीपीओ एवं जीपीओ का पुनरीक्षण कर पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति का लाभ भी संशोधित किया जाये।

 

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आगरा धर्मान्तरण के प्रकरण में भोपाल में दाऊद अहमद की प्रॉपर्टी कुर्क, कनाडा से भारत की तैयारी शुरू

आगरा-भोपाल। यूपी के आगरा से शुरू हुए धर्मान्तरण सिंडिकेट मामले में पुलिस ने अभी तक की सबसे बड़ी कार्यवाही की है। सिंडिकेट के मुख्य आरोपी और फडिंग के स्त्रोत दाऊद अहमद पर शिकंजा कसते हुए आगरा पुलिस ने भोपाल स्थित उसकी संपतित को कुर्क कर लिया हे। अभी पुलिस उसे विदेश से भारत लाने की तैयारी में जुट गयी है। इस पूरे मामले में अब इंटरनेशनल कनेक्शन ओर फंडिंग नेटवक्र की जांच भी तेज कर दी गयी है।
आगरा पुलिस ने भोपाल के गांधीनगर थाना इलाके स्थित रिलायबल हाईटेक सिटी में दाऊद अहमद के घर पर पहुंचकर कुर्की की कार्यवाही पूरी की है। इससे पहले सीआरपीसी की धारा 82 के तहत नोटिस चस्पा किया गया था। लेकिन अदालत में पेश नहीं होने पर अभी तक धारा 83 के तहत संपत्ति कुर्क कर दी गयी है।
दाऊद कनाड़ा में छिपा
आगरा पुतिलस का मकसद साफ है कि आरोपी या उसका परिवार अभी संपत्ति बेचकर फरार न हो सके। पुलिसिया सूत्रों के अनुसार पिछले 3 वर्षो से दाऊद अहमद में कनाड़ा में मौजूद है। उसे भारत लाने के लिये आगरा पुलिस यूपी सरकार के गृह विभाग से पत्राचार कर रही हे। ताकि सीबीआई के माध्यम इंटरपोल से रेडकॉर्नर नोटिस जारी कराया जा सके।
इसके साथ ही एमएलएटी यानी म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी के तहत भी कार्यवाही की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इस पूरे मामले में एक बड़ा इंटरनेशनल कनेक्शन भी सामने आ रहा है। दाऊद अहमद का संबंध कनाड़ा के ब्राम्पटन इस्लामिक सेंटर बताया जा रहा हे।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, इस पूरे सिंडिकेट का खुलासा जुलाई 2025 में हुआ था. जब आगरा के सदर क्षेत्र से दो सगी बहनें लापता हो गई थीं. । जांच में सामने आया कि दोनों एक संगठित गिरोह के संपर्क में आ गई थीं. पुलिस ने उन्हें कोलकाता से बरामद किया, जिसके बाद इस बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ.इस मामले में अब तक 14 से ज्यादा आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. गिरोह का मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान दिल्ली में सक्रिय था, जबकि उसकी सहयोगी आयशा गोवा से नेटवर्क चला रही थी.पूछताछ में खुलासा हुआ कि इस सिंडिकेट को विदेशों खासतौर पर कनाडा और यूएई से फंडिंग मिल रही थी. जांच में दाऊद अहमद को इस फंडिंग का अहम स्रोत बताया गया. पुलिस ने दाऊद अहमद की गिरफ्तारी के लिए भोपाल में दबिश भी दी, लेकिन वह हाथ नहीं आया. अदालत के आदेश के बावजूद पेश न होने पर अब सख्ती बढ़ा दी गई है. थाना सदर बाजार में उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 209 के तहत एक और मुकदमा भी दर्ज किया गया है.इस पूरे ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने कई लड़कियों को इस गिरोह के चंगुल से मुक्त भी कराया है. यानी साफ है कि पुलिस आयुक्त दीपक कुमार के नेतृत्व में आगरा से हुए खुलासे के बाद अब यह मामला इंटरनेशनल नेटवर्क और फंडिंग तक जा पहुंचा है. फिलहाल, आगरा पुलिस इस सिंडिकेट को जड़ से खत्म करने के लिए आगे भी बड़ी कार्रवाई की तैयारी में हे।