Sunday, April 26, 2026
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“विशेष जेल लोक अदालत” -सकारात्मक व्यक्तित्व को अपनाने की दिशा में प्रयासरत रहना चाहिये  – मुख्य न्यायाधिपति 

“विशेष जेल लोक अदालत” में 7 बंदियों की रिहाई के हुए आदेश 
ग्वालियर – मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के तत्वाधान में 26 अप्रैल, 2026 को पूरे मध्यप्रदेश की जेलों में विषेश जेल लोक अदालत का आयोजन किया गया, जिसका वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति व मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा द्वारा केन्द्रीय जेल, ग्वालियर में किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित बंदीगण को संबोधित करते हुये मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति व मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा द्वारा बताया गया कि बंदीगण की जेल में आने की जो भी परिस्थितियां रही हो, किंतु यहां से बाहर निकलने तक की समयावधि में बंदीगण को एक सकारात्मक व्यक्तित्व को अपनाने की दिशा में प्रयासरत रहना चाहिये, ताकि सजा अवधि पूर्ण करने के उपरांत बंदीगण समाज की मुख्यधारा में जुड सकें।  जेल में मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं के प्रति भी न्यायमूर्ति द्वारा उपस्थित बंदीगण को अवगत कराते हुये इस जेल लोक अदालत के माध्यम से लाभान्वित होने हेतु समझाईश दी गई।
उच्च न्यायालय खण्डपीठ-ग्वालियर के प्रशासनिक न्यायाधिपति न्यायमूर्ति आनंद पाठक द्वारा उपस्थित बंदीगण को अवगत कराते हुये कहा कि पक्षकारगण को न्यायालय के समक्ष आना रहता है, जबकि इस कल्याणकारी जेल लोक अदालत के माध्यम से न्यायालय पक्षकार के पास आया है और लाभान्वित होने का एक मौका प्रदान कर रहा है।   लोक अदालत का मूल उद्देश्य अपराध या विवाद को समाप्त करना नहीं है बल्कि अपराध या विवाद के कारणों को उजागर कर उसे समाप्त करने की दिषा में प्रयासरत होने का मौका देता है।  साथ ही बताया कि हम सभी को यह प्रयास करना चाहिये कि वर्ष 2047 तक हम एक विवाद विहीन समाज की स्थापना कर सके और इस लक्ष्य प्राप्ति के लिये हमारे द्वारा दिया गया योगदान ही देश हितार्थ हमारा सद्कर्म होगा।
केन्द्रीय जेल, ग्वालियर में हुई जेल लोक अदालत में निराकरण हेतु कुल 60 प्रकरण चिन्हित किये गये और उनके निराकरण हेतु कुल 03 खण्डपीठों का गठन किया गया। लोक अदालत की प्रक्रिया अनुसार किये गये प्रयासों के फलस्वरूप 06 प्रकरण का प्ली-बारगेनिंग (अपराध स्वीकारोक्ति के आधार पर) तथा 12 आपराधिक प्रकृति के प्रकरणों में उभयपक्ष के मध्य आपसी सहमति के आधार पर समझौता हो जाने से कुल 18 प्रकरणों का निराकरण किया गया तथा इनमें से 7 बंदियों के रिहाई आदेश लोक अदालत खण्डपीठ के पीठासीन अधिकारी द्वारा जारी किये गये।
कार्यक्रम में न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया, न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फडके, न्यायमूर्ति आशीष श्रोती, न्यायमूर्ति अमित सेठ, न्यायमूर्ति  आनंद सिंह बहरावत, न्यायमूर्ति राजेश कुमार गुप्ता सहित मध्यप्रदेश जेल विभाग के विषेश महानिदेशक अखेतो सेमा, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल धरमिंदर सिंह, ग्वालियर के प्रधान जिला न्यायाधीश ललित किशोर, जिला न्यायाधीश (निरीक्षण) जाकिर हुसैन, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव सुमन श्रीवास्तव, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खण्डपीठ-ग्वालियर के प्रिंसिपल रजिस्ट्रार राजीव के पाल व रजिस्ट्रार नवीन कुमार शर्मा, अतिरिक्त सचिव अरविंद श्रीवास्तव, ग्वालियर कलेक्टर रूचिका चौहान व पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह, केन्द्रीय जेल-ग्वालियर के जेल अधीक्षक विदित सिरवैया एवं अन्य न्यायाधीशगण व जेल प्रशासन के अधिकारी सम्मिलित हुये। विशेष जेल लोक अदालत के शुभारंभ अवसर पर कार्यक्रम के अंत में जेल में निरूद्ध बंदियों द्वारा तैयार किए गए स्मृति चिन्हों को जेल विभाग के अधिकारियों द्वारा भेंट किया गया।

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