MP सरकार ने कर्मचारियों का 7 माह का महंगाई भत्ता रोका
भोपाल. वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य सरकार ने 44.42 करोड़ रुपये राजस्व अधिक रहने का अनुमान जताया है। जब बजट प्रस्तुत किया गया था, तब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थितियां सामान्य थीं लेकिन आज जो हालात बने हैं, वे अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ रहे हैं। कमजोर मानसून ने भी चुनौती बढ़ा दी है। वित्त विभाग का अनुमान है कि 10 हजार करोड़ रुपये का राजस्व प्रभावित हो सकता है। इससे राजस्व अधिक के स्थान पर घाटे की स्थिति आ सकती है। इसे देखते हुए सरकार ने खर्च नियंत्रित करने के कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
18 अगस्त से आंदोलन प्रारंभ कर दिया जाएगा
वित्तीय स्थिति को देखते हुए कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते (डीए) व राहत (डीआर) में वृद्धि सात माह से रोककर रखी गई है। उधर, महंगाई बढ़ती जा रही है, जिससे कर्मचारी भी परेशान हैं और सरकार को चेतावनी दे दी है कि 10 अगस्त तक यदि महंगाई राहत में वृद्धि का निर्णय नहीं किया गया तो 18 अगस्त से आंदोलन प्रारंभ कर दिया जाएगा। प्रदेश के कर्मचारियों को वर्तमान में 58 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है।
10 हजार करोड़ रुपये की आय सरकार की प्रभावित हो रही
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए 4,38,317 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया। आय की तुलना में व्यय कम रहने के कारण 44.42 करोड़ रुपये आय-व्यय के अनुपात में अधिक रहने की संभावना है। हालांकि, इस बार प्रदेश को झटके बड़े भी लगे हैं। पहले तो राज्य को सालाना करीब 7,500 करोड़ रुपये का घाटा छठवें वित्त आयोग की अनुशंसा के कारण उठाना पड़ा। यह आगामी पांच साल तक बढ़ता जाएगा। वहीं, जीएसटी में तीन से चार प्रतिशत की कमी है। कुल मिलाकर लगभग दस हजार करोड़ रुपये की आय सरकार की प्रभावित हो रही है। एक प्रतिशत महंगाई भत्ता व राहत बढ़ाने पर लगभग 570 करोड़ रुपये का वार्षिक भार आता है। जनवरी 2026 से यदि महंगाई भत्ता व राहत 50 से बढ़ाकर 60 प्रतिशत किया जाता है तो लगभग 1,100 करोड़ रुपये लगेंगे।

