कांग्रेस ने सरकार को घेरने बनाया रोडमैप:बिजली संकट, बेरोजगारी और पेंशन पर लगाएंगे जोर, 190 सीटों पर मंडलम सेक्टर तैयार
भोपाल. मध्यप्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। कांग्रेस पूरी तरह से चुनावी मोड में है। मिशन 2023 के मद्देनजर रविवार शाम भोपाल में पीसीसी चीफ कमलनाथ के बंगले पर बैठक हुई। इसमें कांग्रेस के बड़े नेताओं और पूर्व मंत्रियों के साथ आगामी रणनीति पर मंथन किया गया। सरकार को घेरने की रणनीति बनाई जाएगी। बैठक में एनपी प्रजापति ने जानकारी दी है।
190 सीटों पर मंडलम सेक्टर बनकर तैयार है। विदिशा, रीवा, शहडोल जैसे कुछ जिलों में दिक्कत को ठीक किया जा रहा है। कांग्रेस द्वारा मिशन-2023 के लिए रोडमैप को अंतिम रूप देने पर चर्चा हुई। इसमें बेराेजगारी, महंगाई के अलावा बिजली संकट और कर्मचारियों की ओल्ड पेंशन स्कीम OPS के मुद्दे को शामिल किया गया है। इसमें नेताओं को कमलनाथ ने जिम्मेदारी सौंपी है। इसके अनुसार नेताओं को उन पर काम करना होगा, ताकि संगठन को मजबूत बनाया जा सके। इस दौरान कमलनाथ ने नेताओं से जमीनी रिपोर्ट मांगी। बैठक में पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह, पूर्व पीसीसी चीफ सुरेश पचौरी, कांतिलाल भूरिया, अरुण यादव, नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, एनपी प्रजापति समेत कमलनाथ सरकार के पूर्व मंत्री बड़े नेता मौजूद रहे। बैठक में बिजली के मुद्दे को ग्रामीण स्तर तक पहुंचाने पर चर्चा हुई। बैठक के दौरान पूर्व सीएम कमलनाथ के बंगले पर भी दो बार बिजली गुल हुई।
कांग्रेस का कहना है कि कागज पर सरप्लस बिजली दिखाई जाती है, लेकिन हकीकत में हालात खराब हैं। हर गांव में 8 से 10 घंटे की कटौती की जा रही है। कांग्रेस का कहना है क डबल इंजन की सरकार भी पटरी से उतर गई है। केंद्र और राज्य सरकार बिजली की आपूर्ति नहीं कर पा रही हैं। पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह ने बताया कि पूर्व सीएम कमलनाथ के बंगले पर चल रही मीटिंग के दौरान दो बार बिजली गई। यह प्रदेश की राजधानी के हाल हैं।
बैठक को लेकर पूर्व मंत्री तरुण भनोट और प्रियव्रत सिंह ने बताया कि बिजली समेत महंगाई, बेरोजगारी जैसे कई कारणों से प्रदेश की जनता परेशान है। किसानों की परेशानी बढ़ती है। खाद महंगा हो रहा है। बीज महंगा हो रहा है। बिजली कम मिल रही और उसके बिल बढ़चढ़ कर आ रहे हैं। किसानों को फसल के उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। इस सब मुद्दाें को लेकर चर्चा हुई, जिनको लेकर कांग्रेस जमीनी स्तर पर लड़ेगी।
