कर्तव्य की मिसाल पेश कर रही हैं पुलिस, कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिये कई मोर्चो पर हमारे लिये लड़ रही पुलिस

योगेश चौधरी, आईजी, स्पेशल ब्रांच, भोपाल
भोपाल. कोरोना वायरस से संक्रमित इन्दौर के थाना प्रभारी निर्मल श्रीवास को घर के बाहर उल्टी बाल्टी पर थाली रख भोजन करते हुए, दरवाजे की आड़ से देखती उनकी छोटी सी बच्ची की छवि सभी के हृदय को एक साथ व्यथित और गर्वित कर रही हैं। वर्तमान समय में पुलिस के बहुआयामी संघर्ष का यह सर्वाधिक मर्मस्पर्शी प्रतिनिधि चित्र हैं। बच्ची की भावपूर्ण आंखें, जो अपने पिता को कई दिनों तक देख भी नहीं पा रही है, देशभर के पुलिस परिवारों की कहानी दर्शाती है। इस फोटो सोशल मीडिया पर बहुत लाईक और कामेंट्स मिले हैं।

कॉन्स्टेबल दिग्विजय शर्मा से 440 किमी चलकर ड्यूटी पर पहुंचे
कॉन्स्टेबल दिग्विजय शर्मा स्नातक की परीक्षा देने अपने गृहनगर बलिया उत्तरप्रदेश गये हुए थे। लॉकडाउन के कारण परीक्षा स्थगित हुई तो उन्होंने जिला राजगढ़ में पुलिस स्टेशन पचोर तक पहुंचने के लिये 440 किमी की दूरी पैदल तय कर और जहां संभव हो, ट्रकों से लिफ्ट लेकर पूरी की और सूजे पैरों के बाद भी पहुंचते ही वह बुलंद इरादों के साथ कर्त्तव्य निभाने में जुट गये।
पिता और पुत्री एक ही थाने में नौकरी पर
इन्दौर में तैनात एसआई अशरफ अली मां की मृत्यु पर उप्र गये थे। लॉकडाउन के कारण वापिस नहीं आ पा रहे थे। इसलिये प्रदेश के सीमावर्ती जिले सीधी पहुंच गये। पीएचक्यू के निर्देशानुसार वहीं सेवा देने लगे। वह पुलिस स्टेशन मझौली में काम कर रहे हैं। जहां थाना प्रभारी और कोई नहीं बल्कि उनकी बेटी शबेरा है। जो परिवीक्षाधीन (प्रोबेशनर) उप पुलिस अधीक्षक है। गर्विता पिता और कृतज्ञ बेटी की जोड़ी लोगों की मन से सवा कर रही हैं।
कोरोना वायरस के संक्रमण की महामारी में
कोरोना वायरस के संक्रमण के इस कठिन समय में मप्र पुलिस में ऐसे कई साहसिक एवं मार्मिक वृत्तांत रोज देखने को मिल रहे हैं। पुलिस के कई अधिकारी एवं कर्मचारी अपने कर्त्तव्य निभाने के साथ गरीबों को खाना खिला रहे हैं बीमार लोगों की मदद कर रहे हैं उन्हें मास्क सैनिटाइजर प्रदान कर रहे हैं। निराश्रितों के अंतिम संस्कार में भी मदद कर रहे हैं।

मीडिया में वायरल खबरें
लेकिन इन सब के बावजूद भी पुलिस की आलोचन करती कई खबरें मीडियां में वायरल हो रही हैं। मेरे एक सोशल मीडिया सक्रिम मित्र ने कल एक वॉट्सएप्प स्टेटस डाला, जिसमें कई ऐसे वीडियों क्लिप्स शामिल थे, जिनमें पुलिस अधिकारियों को लॉकडाउन के उल्लंघनकर्त्ताओं की पिटाई करते हुए दिखाया गया था। उन्होंने उन्होंने मुझे गर्व से बताया कि इस पर बहुत सारी टिप्पणियां मिली। कुछ क्लिप्स ताजे थे, लेकिन कुछ पुराने थे और कई अन्य देशों के वीडियो दिखाकर भारतीय पुलिस द्वारा की गयी मारपीट की तुलना करते हुए प्रदर्शित किये जा रहे हैं।

अग्रणी मोर्चे पर पुलिस तथा डॉक्टर हैं
कोरोना वायरस का खतरा वर्तमान में प्रदेश में फेल चुका है। इस युद्ध में सर्वाधिक अग्रणी मोर्चे पर पुलिस तथा डॉक्टर हैं। पुलिसकर्मी उन लोगों में से हैं, जिनके संक्रमित होने का खतरा सर्वाधिक है। अस्पतालों, क्वारंटाइन सेंटर, कंटेनमेंट क्षेत्र में तैनात पुलिस कर्मियों में यह डर कहीं ज्यादा है। यह वास्तव में अत्याधिक बहादुरी की बात हैं कि एक जानते हुए भी कि उन व्यक्तियों से उसे गुस्साई निगाहें, गलियों के अलावा बहुत बुरी बीमारी भी प्राप्त हो सकती है। दूसरा विचारणीय प्रमुख मुद्दा उस पुलिसकर्मियों की मानसिक स्थिति हैं, जो लॉकडाउन में लगातार अपने कर्त्तव्य का निर्वाह कर रहा है, परंतु साथ ही अपने परिवार की स्थिति के बारे में चिंतित तथा असहाय महसूस करता है, क्योंकि वह उसके कर्त्तव्य की जगह से बहुत दूर हैं। बड़ी चुनौती बल के लिये सुरक्षा संसाधन, बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता तथा क्वारंटाइन केन्द्र की स्थापना भी हैं। इसके लिये पुलिस मुख्यालय एवं फील्ड इकाइयां लगातार काम कर रहे हैं। इसके बाद भी कुछ पुलिसकर्मी वायरस के संक्रमण से बच नहीं पाये। पुलिस और स्वास्थ्य सेवाओं की टीमों को कई स्थानों पर पथराव, हमले और प्रतिरोध का सामना करना पड़ा हैं। यह घटनायें पुलिस के मनोबल तथा मानसिक स्थिति पर विपरीत प्रभाव डालने वाली है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के लिये भी बल के साथ निरंतर संपर्क उनकी और उनके परिवारों की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, दैनिक आवश्यकतओं की पूर्ति तथा लगातार काम करने के लिये प्रेरित करना, उनकी नेतृत्व क्षमता का अब तक का सबसे कड़ा परीक्षण हैं।
इस समय सबसे जरूरी है कि मानवता के समक्ष प्रस्तुत इस अभूतपूर्व संकट में हम सभी को एक जुट होना होगा। कुछ लोगों की लापरवाही, गैरजिम्मेदाराना कृत्य, मौकापरस्त लोगों के साथ अपनी जिम्मेदारी से भागने वाले या वर्दी में होकर आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग करने वाले राह में बाधा भी बनेंगे। लेकिन हमें इन सब से पार पाकर विजय प्राप्त करनी है। इस युद्ध में अधिकांश लोगों को अपना योगदान कुछ दिनों तक केवल घरों में रह कर ही देना पर्याप्त हैं।

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