अलापुर बांध जमीन घोटाले की सुई विभागीय अधिकारियों की ओर, डूब इलाके में प्लॉट-मकान की सूची तैयार होगी, दस्तावेजों की जांच-पड़ताल
ग्वालियर. अलापुर बांध के डूब इलाके की जमीन के अधिग्रहण व मुआवजा दिये प्रक्रिया के दस्तावेज से जल संसाधन के अधिकारियों के लापरवाही की भूमिका तय होगी। सूत्रों के अनुसार जल संसाधन विभाग के अधिकारियों द्वारा जमीन के मामले एनओसी दिये जाने की खबर सुनने को मिल रही है। लेकिन अधिकारियों ने विभाग से एनओसी दिये जाने की फाइलें गायब कर दी है। जिससे कोई भी आरटीआई के माध्यम से जानकारी नहीं ले सकें। अलापुर बांध बनने के बाद ही जमीन का बकाया भुगतान के लिये कब और क्या प्रक्रिया हुई है। इसके भी दस्तावेज एकत्र किये जा रहे हैं।

शहर के बीचों बीच अलापुर बांध के 22 सालों के बाद ओवरफ्लो होने और डूब इलाके में बाढ़ आने से यहां जमीन घोटाला गहराता जा रहा है। जमीन अधिग्रहण की नयी प्रक्रिया में 410 करोड़ के प्रस्ताव का खुलासा होने के बाद भी अब जमीन का मुआवजा लेकर बेचने वालों की जांच-पड़ताल की जा रही है। इस सूची में कुछ लोगों की मौत हो चुकी है। 5 गांवों कमी 70 एकड़ जमीन अधिग्रहण के लिये भुगतान का 410 करोड़ का प्रस्ताव पहुंचने के बाद अब मुख्यालय ने जमीन का मुआवजा वितरण सूची मांगी है। बांध के लिये जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया के दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा रही है। प्रस्ताव में के साथ नयी व पुरानी अधिग्रहण प्रक्रिया के दस्तावेज मुख्यालय भेजने के बाद मुआवजा और अधिग्रहण प्रक्रिया की अलग से रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है।
बांधों की शिकायतों की जांच राजस्व विभाग करेगा
मुख्यालय को दस्तावेज मिलने के बाद दस्तावेजों की जांच में दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी कार्यवाही की जायेगी। अलापुर बांध के डूब इलाके की जमीन का अधिग्रहण में भुगतान रोककर घोटाले का मामला खुलने के बाद अब जिले में शहर के पास के अन्य बांधों के आसपास की डूब की जमीन से संबधित शिकायतें भी खोली जा रही है। शहर के नजदीक रमौआ और जडेरूआ बांध में भी जमीन से संबंधित शिकायतों में जांच चल रही है। वीरपुर और हनुमान बांध पर भी जमीन अतिक्रमण की कई शिकायतें है। राजस्व विभाग के पास भी ऐसी शिकायतें जांच में है। बांधों के आसपास की जमीन की जल संसाधन विभाग अलग रिपोर्ट तैयार करेगा।
खेतों में प्लॉट काटकर बस गईं अवैध कॉलोनियां
अलापुर बांध के डूब क्षेत्र के पांच गांव की लगभग 70 हैक्टेयर जमीन के नए मालिकों का सर्वे भी कराया जाएगा। जिस समय बांध बनकर तैयार हुआ था उस समय बांध के डूब क्षेत्र के खेत थे, लेकिन वर्तमान में अब वहां पर खेतों में प्लॉट काटकर अवैध कॉलोनियां बस गई हैं। इनमें कई मकान भी बन गए हैं। डूब क्षेत्र में नए मकान और जमीन मालिकों के नामों का सर्वे कर सूची बनाई जाएगी।

