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सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी आरक्षण में सुनवाई, 4 दिन पहले वकीलों की गैरमौजूगी में सुनवाई में हुए थे आरोप प्रत्यारोप

ओबीसी वर्ग के सीनियर वकील अनूप चौधरी।

नई दिल्ली. ओबीसी को 27प्रतिशत आरक्षण देने से जुड़े मामलों की सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हो सकती है। 4 दिन पूर्व हुई सुनवाई के दौरान सरकारी वकीलों के न पहुंचने का आरोपी ओबीसी वर्ग के वकीलों ने लगाया था। जिसका विरोध सरकार ने किया था। कहा था कि वकील उपस्थित रहें। आज होने वाले सुनवाई में सरकार और ओबीवी वर्ग के वकील कोर्ट के समक्ष अपने तर्क रखेंगे।
इसके पहले गुरूवार को सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति नरसिंह और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की खंडपीठ के समक्ष ओबीसी आरक्षण से जुड़े सभी प्रकरण नम्बर 106 पर अंतिम बहस के लिये सूचीबद्ध थे। ओबीसी वर्ग के वकील अनूप जॉर्ज चौधरी ने अपन जारी बयान में कहा था कि जैसे ही मामलों को कॉल किया गया। मध्यप्रदेश सरकार की तरफ से कोई भी वकील उपस्थित नहीं हुआ है। इसके बाद मध्यप्रदेश सरकारी की तरफ से कहा था कि सरकार ओबीसी को 27प्रतिशत आरक्षण देने के लिये प्रतिबद्ध है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एडिश्नल सॉलिसिटर जनरल केएम नरटराज, स्टेंडिग काउंसिल मृणाल, अलंकार, रूपराह और एडिश्नल एडवोकेट जनरल धीरेन्द्रसिंह परमार मौजूद थे।
आरक्षण रोकने मोहन सरकार ने 150 करोड़ वकीलों को दिए
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा है कि ओबीसी आरक्षण को लेकर आज कोर्ट में सुनवाई होने वाली है पर सरकार इसको लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि एमपी सरकार ने 150 करोड़ रुपए वकीलों को अलग-अलग समय पर दिए हैं। 25 लाख रुपए सिर्फ वकील को एपियर होने पर फीस के रूप में दिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एक तरफ कहते हैं कि आरक्षण मिलना चाहिए, दूसरी ओर वकीलों को मोटी फीस देकर आरक्षण रोकने का काम किया जा रहा है। यह राजनीतिक रूप से अय्याशी नहीं है तो क्या है? ओबीसी आरक्षण को लेकर मोहन सरकार ने गुमराह करने का काम किया है।
हाईकोर्ट से सभी केस SC ट्रांसफर
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट से ओबीसी आरक्षण से जुड़े सभी प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करा दिए थे। ओबीसी वर्ग के वकीलों का यह आरोप है कि 27% ओबीसी आरक्षण लागू करने के दबाव से बचने के लिए ऐसा किया गया है। सरकार भर्ती विज्ञापनों में ओबीसी को 27% आरक्षण देने की बात तो कर रही है, लेकिन नियमों के विरुद्ध 13% पद होल्ड किए जा रहे हैं। ओबीसी को 27% आरक्षण देने वाले कानून पर न हाईकोर्ट ने स्टे दिया है न ही सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई है। इसके बावजूद सरकार पिछले एक साल से अधिक समय से सुनवाई में केवल तारीख पर तारीख लेती आ रही है।

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