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101 रेलवे कर्मचारी फ्लैटों में नही कर रहे हैं शिफ्टिंग, रेलवे के इजीनियर फ्लैटों में अलमारी बनवाना भूले

ग्वालियर. रेलवे स्टेशन पुनर्विकास का कार्य 24 महीने में पूर्ण होने वाला था। लेकिन अभी तक यह काम 36 महीने में पूरा किया जायेगा। जिस रफ्तार से काम चल रहा है। उससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि यह कार्य तय समय में भी पूरा नहीं हो पायेगा। अब रेलवे स्टेशन पुर्नविकास के तहत कर्मचारियों-अधिकारियों के निवास के लिये बनाये गये 3 टॉवर में बड़ी खामियां मिली है। रेलवे के इंजीनियरों ने फ्लैट तो बनवा दिये। लेकिन इनमें अलमारी बनाने की व्यवस्था नहीं की गयी। न कमरों में और न ही रसोई में कहींे भी अलमारी नहीं है।इससे कर्मचारी शिफ्ंिग के लिये राजी नहीं है।
कर्मचारियों का कहना है कि जरूरी सामान वह फ्लैट में कहां रखें और साथ ही किराये के फ्लैट में 5 से 65 लाख रूपये फर्नीचर बनवाने में क्यों खर्च करें। क्योंकि ट्रांसफर होने के बाद उधर फर्नीचर किसी काम का नहीं रहेगा। कर्मचारियों ने केपीसी कम्पनी के अधिकारियों से बात की और फर्नीचर लगवाने के लिये कहा है। लेकिन केपीसी के अधिकारियों ने साफतौर पर इंकार कर दिया है। उनका कहना था कि टेंडर में फ्लैट में फर्नीचर या अलमारी बनाने का कोई प्रावधान नहीं था। इस तरह की परेशानी सामने आने के बाद 101 कर्मचारियों ने फ्लैट में शिफ्टिंग से मना कर दिया है।
फ्लैट तैयार है महूर्त का इंतजार
आपको बताते चलें कि नवम्बर 2025 में डीआरएम अश्विनी कुमार ने रेलवे स्टेशन का निरीक्षण किया था, तब उन्होंने पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा था कि फ्लैट बनकर तैयार है। लेकिन कर्मचारी अभी मुहूर्त का इंतजार कर रहे है। हालांकि हकीकत यह है कि फ्लैट में सामान रखने के लिये अलमारी नहीं होने की वजह से कर्मचारियों ने शिफ्टिंग से मना कर दिया है।
अश्विनीकुमार, डीआरएम
शिफ्टिंग में देरी की वजह रेलवे का लाखों रूपये का नुकसान
रेलवे हर कर्मचारी को 8 से 15 हजार रूपये हर माह किराया दे रहा है। 101 कर्मचारियों पर यह लाखों रूपये का मासिक बोझ बन चुका है। फ्लैट तैयार होने के बाद भी जब कर्मचारियों ने श्फ्टििंग नहीं हो पा रही है ता किराया जारी है। इस पूरे प्रकरण में रेलवे इंजीनियरों की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। करोड़ों की लागत से बने फ्लैट खाली पड़े हैं। कर्मचारी परेशान है। रेलवे को लगातार राजस्व नुकसान उठाना पड़ रहा है। पुर्नविकास के नाम पर यह लापरवाही अब जवाब मांग रही है। लेकिन जिम्मेदार इंजीनियर कुछ भी बोलेने के लिये तैयार नहीं है।
सुविधा का ध्यान रखा जाएगा
“कर्मचारियों की सुविधा का ध्यान रखा जाएगा। यदि फ्लैट में कोई कमी रह गई है, तो उसमें प्रावधान कराया जाएगा।”
सुभाष चंद्र त्रिपाठी, सीपीआरओ

 

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