कब मिलेगा न्याय महावीरसिंह तोमर के परिजनों, कलेक्टर ने दिये मजिस्ट्रियल जांच के आदेश
ग्वालियर. मुरैना के पोरसा क्षेत्र के अमोलपुरा गांव में बेमौत मारे गये ग्रामीण महावीरसिंह तोमर को कब न्याय मिलेगा। यह सवाल आज भी उस गांव के लोगों की जुबान पर है। महावीरसिंह तोमर की मौत उस वक्त हुई थी। ज बवह नित्य क्रिया के लिये गांव के बाहर जा रहे थे। उसी वक्त एक अवैध रेत की भरी ट्रेक्टर- ट्रॉली का पीछा करते हुए वन विभाग की टीम पहुंची और उसके द्वारा चलाई गयी गोली से उनकी मौत हो गयी थी। इस मामले में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश कलेक्टर ने दिये थे।
एसडीएम राजीव समाधिया कर रहे हैं जांच
अभी तक डॉक्टरों के बयान नहीं लिये जा सके हैं। जिसकी जांच एसडीएम राजीव समाधिया कर रहे हैं। जिसके कारण से जांच पुरी नहीं हुई जहै। इस घटना में 9 फारेस्ट गार्डो को आरोपी बनाया है। यहां पर आपको बता दें कि चम्बल के अवैध रेत से भरी ट्रेक्टर- ट्रॉली को लेकर एक ट्रेक्टर चालक जा रहा था। उसी बीच गश्त पर निकले वन विभाग के अमले की उस पर नजर पड़ी तो फिर क्या था वन विभाग का अमला उसके पीछे लग गया। अपने को पकड़ता देख ट्रेक्टर चालक ने बेहताशा ट्रेक्टर भगाना शुरु कर दिया। भागते हुए उसे जब कोई रास्ता नहीं मिला तो रास्ते में अमोलपुरा गांव में उसने ट्रेक्टर मोड़ दिया। वह ट्रेक्टर अमोलपुरा गांव में घुस गया था। वन अमले ने उसे ललकारा और जब वह नहीं रुका तो अंधाधुंध फायरिंग शुरु कर दी। एक गोली ट्रेक्टर के टायर में लगी जिससे वह बीच खेत में ही खड़ा हो गया। इसी दौरान एक गोली सीधे महावीर सिंह तोमर के लगी। महावीर सिंह तोमर उसी गांव के थे तथा वह सुबह अपने दुधारू जानवरों को सानी लगाकर नित्य क्रिया के लिए खेत की तरफ जा रहे थे। जैसे ही गोली उनके गोली वह जमीन पर गिर पड़े और तड़फड़ाते हुए उनके प्राण निकल गए।
पुलिस का कहना है कि़
मजिस्ट्रियल जांच के तहत हमारे सबके बयान हो चुके हैं, हमारी ओर से तो पूरी कार्यवाही की जा चुकी है।
धमेन्द्र मालवीय, टीआई
जांच पूरी हो चुकी है
जांच करीब पूरी हो चुकी है। केवल डॉक्टरों के बयान होना शेष रह गये हैं। डॉक्टर अवकाश पर चले गये थे जिस कारण से उनके बयान नहीं हो सके है। जैसे ही वह अवकाश पर से वापिस आ जायेंगे। हम उनके बयान लेकर जांच कलेक्टर साहब को सौंप देंगे।

