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स्मार्ट सिटी की 41वीं बोर्ड बैठक मे विभिन्न विकास कार्यो पर हुए अहम फैसले

ग्वालियर. स्मार्ट सिटी डवलपमेंट कॉर्पोरेशन की 41वीं बोर्ड बैठक में स्मार्ट सिटी कॉर्पोरेशन द्वारा शहर के अधोसंरचना और सौंदर्यीकरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कलेक्टर एवं बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती रुचिका चौहान ने सचिन तेंदुलकर रोड के निर्माण कार्य को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही इस सड़क के सौंदर्यीकरण की कार्ययोजना की सराहना करते हुये उसे मूर्तरूप देने के लिये निर्देशित किया। निर्भया कैफे के लिये जगह चयन कर इसके शीघ्र कार्य शुरू करने, मल्टीलेवल पार्किंग के डीवाटरिंग व संचालन को लेकर तथा विवेकानंद नीडम पुल के नीचे सौन्द्रीयकरण कर उपयोगी बनाने की परियोजना को लेकर निर्देश भी बैठक में दिए गए।
मंगलवार को मोतीमहल स्थित स्मार्ट सिटी सभागार में आयोजित बैठक में स्मार्ट सिटी परियोजनाओं एवं डिपॉजिट वर्क की शेष राशि से प्रस्तावित नई परियोजनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में आईएसबीटी पर प्रस्तावित कमर्शियल कॉम्पलेक्स, कन्वेंशन सेंटर के ओएंडएम कार्य, नगर निगम म्यूजियम के थीमेटिक गैलरी प्लान, जल संरक्षण और ट्रैफिक सुधार जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
सचिन तेंदुलकर रोड के निर्माण कार्य पर चर्चा के दौरान कलेक्टर ने निर्देश दिए कि इस रोड के निर्माण कार्य को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा पूर्ण किया जाये वही ठेकेदार द्वारा किये जा रहे निर्माण कार्य की गुणवत्ता की समय समय पर जांच कराई जाये, यदि निर्माण कार्य मे किसी भी तरह की लापरवाही मिले तो ठेकेदार और संबंधित पर सख्त कार्यवाही की जाये। बैठक मे सचिन तेंदुलकर मार्ग को क्रिकेट और सचिन तेंदुलकर की थीम पर तैयार करने को लेकर एक प्रजेन्टेशन भी दिखाया गया जिसे बोर्ड द्वारा सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई। कलेक्टर ने निर्देशित किया की थीम आधारित सौन्द्रीयकरण मे क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के जीवन और उनकी उपलब्धियो को दिखाने के साथ मार्ग के डिवाइडर पर ग्रीनरी के प्रावधान के साथ फुटपाथ पर आम जनता के बैठने के लिए लगाई जाने वाली बेंच को छाया मे लगाये ताकि आम नागरिको के लिये वह उपयोगी हो सके। वही उन्होने मार्ग के जो निचले क्षेत्र है वहां पर जल निकासी सहित सभी आवश्यक प्रावधान शामिल करने के लिये भी निर्देशित किया।
बैठक मे निगमायुक्त श्री संघ प्रिय ने जानकारी देते हुये बताया की मल्टीलेवल कार पार्किंग के संचालन एवं रख-रखाव की एजेंसी आ चुकी है और जूलाई माह से इसके दो तलो पर प्रारम्भिक पार्किंग शुरु कर दी जायेगी जिसको लेकर कलेक्टर ने निर्देशित किया कि संचालन एवं रख-रखाव संबंधित ठेकेदार से पार्किंग शुरु होने से पहले सभी उचित व्यवस्था करवाई जाये साथ ही पार्किंग से डीवाटरिंग के कार्य को भी शीघ्र शुरु करवाया जाये।
वही बैठक मे स्मार्ट सिटी की वित्तीय सहायता से निगम द्वारा कराये जा रहे कार्यो सहित अन्य नई परियोजनाओ को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई। चर्चा के दौरान पूर्व विधानसभा मे प्रस्तावित इंडोर स्पोर्ट काँम्पलेक्स व विवेकानंद नीडम पुल के नीचे सौन्द्रीयकरण कार्य को लेकर भी प्रजेन्टेशन बोर्ड को दिखाया गया जिसे लेकर बोर्ड ने अगली बैठक मे विस्तार से इनके पूरे प्लान को प्रस्तुत करने के लिये निर्देशित किया।
बैठक में नगर निगम आयुक्त एवं स्मार्ट सिटी सीईओ श्री संघप्रिय, नगर निगम अपर आयुक्त श्री टी. प्रतीक राव, बोर्ड के अन्य सदस्य एवं संयुक्त संचालक नगर एवं ग्राम निवेश श्री कृष्णकांत कुशवाह सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद थे। बोर्ड के सदस्य श्री प्रशांत मेहता वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

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मोदी कैबिनेट में दिल्ली बुलाए जा सकते हैं MP के दिग्गज

भोपाल. अगले कुछ दिन भाजपा और राष्ट्रीय राजनीति के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम वाले माने जा रहे है। मोदी कैबिनेट में संभावित फेरबदल से मध्य प्रदेश की राजनीति में कई बदलाव देखने को मिल सकते है। राष्ट्रीय स्तर पर चल रही राजनीतिक हलचल के बीच मध्य प्रदेश से नए चेहरे को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। मध्य प्रदेश से जातिगत समीकरण, क्षेत्रीय संतुलन और राज्यों के आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन स्तर पर कई प्रमुख चेहरों के नामों की चर्चा चल रही है।
मप्र से वीडी शर्मा को केंद्र में मिल सकता है पद
जानकारी के अनुसार खजुराहो से लगातार दूसरी बार सांसद बने विष्णुदत्त शर्मा को केंद्र में बडी संगठनात्मक भूमिका (राष्ट्रीय महासचिव) या मंत्री का पद मिल सकता है। वह लंबे समय तक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और एबीवीपी पृष्ठभूमि के होने के कारण उनकी संगठन पर मजबूत पकड है।
केंद्र में राज्य के प्रतिनिधित्व में बदलाव का सीधा असर मंत्रालय से लेकर प्रदेश भाजपा संगठन तक में देखने को मिलेगा। इस फेरबदल के जरिए भाजपा मध्य प्रदेश में अगली पीढी के नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रशासनिक अनुभव देना चाहती है। मध्य प्रदेश से शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया और वीरेंद्र कुमार जैसे दिग्गज नेता पहले से ही मोदी कैबिनेट में है।

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MP के 2 लाख से अधिक कर्मचारियों को बड़ा झटका, नए सिरे से होगी प्रमोशन में आरक्षण पर सुनवाई

जबलपुर. मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति का बहुचर्चित मामला अदालत की चौखट पर एक बार फिर शुरूआती बिंदु पर लौट आया है। लाखों कर्मचारियों को जिस फैसले का इंतजार था वह अब नहीं आएगा। फैसला सुरक्षित रखने वाली खंडपीठ के दोनों न्यायाधीशों के स्थानांतरण के बाद अब पूरी सुनवाई नई पीठ के समक्ष नए सिरे से होगी। इसका अर्थ है कि बहस, दस्तावेज और कानूनी तर्क, सब कुछ फिर से दोहराया जाएगा।
फिर से सुनवाई होगी
दरअसल मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति में आरक्षण का विवाद फिलहाल किसी कानूनी निष्कर्ष तक पहुंचने के बजाय फिर से प्रक्रिया के शुरूआती चरण में लौट गया है। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव कुमार सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने सभी पक्षों की विस्तृत सुनवाई के बाद 17 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि वर्षों पुराना विवाद अब समाप्त होगा लेकिन दोनों न्यायाधीशों के स्थानांतरण ने पूरी स्थिति बदल दी।
पक्षकारों को फिर से अपने कानूनी तर्क रखने होंगे
इसका सीधा असर दो लाख से अधिक कर्मचारियों और अधिकारियों पर पडेगा जिनकी पदोन्नतियां वर्षों से अटकी हुई है। सपाक्स, अजाक्स और अन्य पक्षकारों को फिर से अपने कानूनी तर्क रखने होंगे। इससे अंतिम निर्णय में और विलंब तय माना जा रहा है।

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सिंधु जल समझौते पर पाकिस्तान की फिर धमकी, हमारे हिस्से के पानी को छुआ तो हाथ काट देंगे

इस्लामाबाद. जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल समझौते को स्थगित किए जाने का असर अब भी पाकिस्तान में राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। इस बीच पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने भारत को लेकर विवादित बयान दिया है। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पाकिस्तानी के मुसादिक मलिक ने कहा कि पाकिस्तान पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर चुका है। उन्होंने कहा, जो भी पाकिस्तान के हिस्से के पानी को छुएगा, उसके हाथ काट दिए जाएंगे। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच जल विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
सूचना मंत्री ने भी भारत पर साधा निशाना
उधर, पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने भी सिंधु जल समझौते को लेकर भारत पर अप्रत्यक्ष हमला बोला। पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार, उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश का नेतृत्व यह कह रहा है कि पाकिस्तान को पानी की एक बूंद भी नहीं दी जाएगी। साथ ही उन्होंने दावा किया कि सिंधु जल समझौते को कोई भी पक्ष एकतरफा समाप्त या निरस्त नहीं कर सकता।
पहलगाम हमले के बाद भारत ने उठाए थे कड़े कदम
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कई सख्त फैसले लिए थे। इन्हीं में सिंधु जल समझौते को स्थगित करने का निर्णय भी शामिल था। भारत ने स्पष्ट किया था कि सीमा पार आतंकवाद जारी रहने की स्थिति में सामान्य द्विपक्षीय संबंध संभव नहीं हैं।

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ट्रम्प बोले- पेट्रोल बेचने वाली कंपनियां तुरंत दाम घटाएं, तेल सस्ता फिर भी ग्राहकों से ज्यादा पैसे वसूले जा रहे

नई दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पेट्रोल बेचने वाली कंपनियों से तुरंत पेट्रोल के दाम घटाने को कहा है। ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि कच्चे तेल की कीमत घटकर 68 डॉलर प्रति बैरल रह गई है, लेकिन इसका फायदा ग्राहकों तक नहीं पहुंच रहा। उन्होंने कहा कि लोग अब भी जरूरत से ज्यादा कीमत चुका रहे हैं, जबकि तेल लगातार सस्ता हो रहा है। उन्होंने कंपनियों से पेट्रोल की कीमत करीब 2.50 डॉलर प्रति गैलन तक लाने की अपील की।


तेल कंपनियों की जांच के आदेश भी दे चुके
ट्रम्प ने कहा कि ग्राहकों से जरूरत से ज्यादा पैसे वसूलना गैरकानूनी है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कंपनियों ने जल्द दाम नहीं घटाए तो उन्हें बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। इससे पहले ट्रम्प अमेरिकी न्याय विभाग को बड़ी तेल कंपनियों की जांच के आदेश भी दे चुके हैं। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद तेल की कीमतों में उछाल आया था। अब कच्चे तेल की कीमतें घट गई हैं, लेकिन पेट्रोल-डीजल अब भी महंगा बिक रहा है।

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1 जुलाई से खत्म होंगी पेट्रोल-डीजल खरीद पर लगी पाबंदियां

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की बिक्री को लेकर लागू अस्थायी पाबंदियां हटाने का फैसला किया है। 1 जुलाई से औद्योगिक, संस्थागत और ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुडे कमशियल ग्राहक अब सामान्य तरीके से पेट्रोल पंपों से तेल खरीद सकेंगे। सरकार के इस फैसले के बाद उन ग्राहकों को राहत मिलेगी जिन पर कुछ समय के लिए तेल खरीद को लेकर सीमाएं लगाई गई थी। अब पेट्रोल पंपों से पेट्रोल और डीजल खरीदने पर कोई मात्रा सीमा लागू नहीं रहेगी।
12 जून को नियम लागू किया था
सरकार ने 12 जून को मोटर स्पिरिट एंड हाई-स्पीड डीजल (टेम्पररी रेगुलेशन ऑफ सप्लाई थ्रू रिटेल आउटलेट्स) ऑर्डर 2026 के तहत कुछ अस्थायी नियम लागू किए थे। इन नियमों के तहत औद्योगिक और कमर्शियल ग्राहकों को रिटेल पेट्रोल पंपों से तेल खरीदने पर रोक लगाई गई थी। वहीं डीजल की खरीद को भी सीमित किया गया था। एक ग्राहक या वाहन के लिए प्रतिदिन 200 लीटर तक डीजल खरीद की सीमा तय की गई थी। अब इन नियमों को हटाने के बाद ट्रांसपोर्ट कंपनियां, उद्योग और अन्य व्यावसायिक ग्राहक पहले की तरह पेट्रोल और डीजल खरीद सकेंगे।
रिटेल और बल्क डीजल कीमतों में अंतर बना वजह
सरकार के अनुसार, कुछ बड़े उपभोक्ताओं ने बल्क डीजल खरीदने के बजाय रिटेल पेट्रोल पंपों से खरीदारी शुरू कर दी थी। इसका बड़ा कारण रिटेल और बल्क डीजल की कीमतों में अंतर था। मंत्रालय के मुताबिक रिटेल डीजल की कीमत बल्क डीजल से करीब 40 रुपये प्रति लीटर कम थी। इसी वजह से कई उद्योग और संस्थान रिटेल आउटलेट्स की ओर बढ़े। अब पाबंदियां हटने के बाद कमर्शियल ग्राहकों को दोबारा सामान्य व्यवस्था के तहत ईंधन मिलने लगेगा।
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ग्वालियर रेलवे स्टेशन में 1.46 करोड़ की हाईटेक परियोजना शुरू, अब इंजन मरम्मत के लिए झांसी पर नहीं रहना होगा निर्भर

ग्वालियर. भारतीय रेलवे ने ग्वालियर रेलवे स्टेशन को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल की है। अब रेल इंजनों के महत्वपूर्ण विद्युत उपकरणों की मरम्मत और ओवरहॉलिंग का काम स्थानीय स्तर पर ही किया जाएगा। करीब 1 करोड़ 46 लाख रुपये की लागत वाली इस आधुनिक परियोजना के शुरू होने से अब ग्वालियर को तकनीकी कार्यों के लिए झांसी वर्कशॉप पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
झांसी पर निर्भरता खत्म, डाउनटाइम में आएगी कमी
इस नई व्यवस्था के तहत रेल इंजनों में लगे 180 केवीए स्टैटिक इन्वर्टर और हिंद रेक्टीफायर सिस्टम की रिपेयरिंग, मेंटेनेंस और नवीनीकरण का काम ग्वालियर में ही सुचारू रूप से होगा। इससे पहले इन महत्वपूर्ण उपकरणों की मरम्मत के लिए इंजनों को झांसी भेजना पड़ता था, जिससे वे लंबे समय तक वर्कशॉप में खड़े रहते थे। इस देरी के कारण कई ट्रेनें प्रभावित होती थीं और आपातकाल में दूसरे स्टेशनों से इंजन मंगवाने पड़ते थे। अब स्थानीय स्तर पर मरम्मत होने से इंजनों का डाउनटाइम (खराब रहने का समय) काफी कम हो जाएगा।
समयपालन में होगा सुधार
स्टैटिक इन्वर्टर रेल इंजन का एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो इंजन के सहायक सिस्टम को लगातार और स्थिर बिजली की आपूर्ति करता है। ग्वालियर में ही इसकी हाईटेक मरम्मत होने से तकनीकी खराबियों की संभावना न्यूनतम हो जाएगी।

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MP में 2 लाख कर्मचारियों के प्रमोशन की तैयारी

भोपाल. प्रदेश में पदोन्नति की तैयारी है इसके लिए पदोन्नति के पदों का निर्धारण किया जाना है लेकिन पुराने नियमों के आधार पर ही आरक्षित वर्ग को दोहरा लाभ देने की तैयारी की जा रही है। अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 16 और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 20 प्रतिशत पद आरक्षित रहेंगे। शेष पद अनारक्षित श्रेणी में रहेंग लेकिन मेरिट में अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी भी आ सकते है। यदि ऐसा होता है तो संबंधित श्रेणी का एक पद कम हो जाएगा। इसका आशय ये हुआ कि अनारक्षित सामान्य वर्ग नुकासन में रहेगा क्योंकि उसका कोटा कम हो जाएगा। इसका ही विरोध सामान्य वर्ग के कर्मचारी कर रहे है। मंत्रालय सहित कई विभाग ऐसे है जहां उच्च स्तर पर आरक्षित वर्ग का कब्जा हो गया है।
मंत्रालय में बडी बैठक
पदोन्नति नियम का पूरा मामला देखने वाले अपर सचिव अजय कटेसरिया ने सभी विभागों के स्थापना से जुडे अधिकारियों के साथ मंत्रालय में बैठक की। इसमें बताया गया कि नए नियम के अनुसार भी कुल 36 प्रतिशत पद पदोन्नति के लिए आरक्षित रहेंगे यानी चिह्नित पदों पर केवल अनुसूचित जाति या जनजाति वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी की पदेान्नति हो सकेगी। यदि किसी संवर्क में पदोन्नत के लिए आरक्षित वर्ग का अधिकारी-कर्मचारी पात्र नहीं पाया जाता है तो वह स्थान रिक्त रहेगा। उसे किसी दूसरे वर्ग से भरा नहीं जाएगा।
2 साल के पदों के हिसाब से होगी पदोन्नति
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पदोन्नति दो साल के हिसाब से होगी। एक बार की बैठक में आगे के पदों के लिए भी व्यवस्था कर ली जाएगी। पदोन्नति के पद पांच के लिए एक बार निर्धारित हो जाएंगे। इसके फिर कोई परिवर्तन नहीं होगा। यदि किसी संवर्ग में पहले से ही पदोन्नति से पद भरे हुए हैं तो वहां पदोन्नति नहीं होगी।

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ग्वालियर हाईकोर्ट ने नगर निगम को फटकार लगाते हुए कहा 15 दिनों में अवैध होर्डिंग हटाएं

ग्वालियर. ग्वालियर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने शहर में लगे सभी अवैध होर्डिंग्स और यूनिपोल को 15 दिनों के भीतर हटाने का निर्देश दिया है। यह निर्देश अवैध यूनिपोल और होर्डिंग्स के बढते जाल को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए गए। ग्वालियर नगर निगम ने अदालत के समक्ष 10 बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।
सुनवाई के दौरान नगर निगम ने स्वीकार किया कि शहर में 100 से अधिक अवैध यूनिपोल और होर्डिंग्स लगे है। निगम ने अदालत को बताया कि इन्हें हटाने के लिए एक विशेष टीम कार्रवाई कर रही है और अभियान जारी है। हालांकि हाईकोर्ट ने इस कार्रवाई को अपर्याप्त मानते हुए इसे तेज गति से पूरा करने पर जोर दिया। एडवोकेट अनिल श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि खंडपीठ ने उन अधिकारियों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया है जिनकी लापरवाही या संरक्षण के कारण ये अवैध होर्डिंग्स लगाए गए। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल होर्डिंग्स हटाना ही काफी नहीं है बल्कि इसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
हाईकोर्ट ने विशेष रूप से उन यूनिपोल और होर्डिंग्स को तत्काल हटाने का आदेश दिया जो शहर के ट्रैफिक सिग्नलों और यातायात व्यवस्था में बाधा डाल रहे है। अदालत ने जोर देकर कहा कि सडक सुरक्षा और नागरिकों की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है और कोई भी अवैध विज्ञापन सामग्री यातायात को प्रभावित नहीं कर सकती।

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PLA ने अरुणाचल प्रदेश के बड़े हिस्से पर कब्जा किया, सड़कें और कैम्प बनाए

अरूणाचल प्रदेश. चीन भारतीय सीमा पर तनाव पैदा करने से बाज नहीं आ रहा है। पीएलए ने भारत से लगती चीन की अरूणाचल प्रदेश सीमा पर अपर सुबनसिरी जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास घुसपैठ पर ली है। चीन के हौसले इतने बुलंद है कि पीएलए ने भारतीय इलाके में सडकें और कैम्प बना लिए है। रिपोर्ट के अनुसार ड्रेगन ने भारतीय सीमा के अंदर 6 बरसों के दौरान धीरे-धीरे चराई, शिकार और खेती की जमीन के एक बडे हिस्से पर कब्जा कर लिया है। नेशनल सिक्योरिटी का कहना है कि पिछले 10 से 15 बरसों के दौरान चीन भारीतय सीमा के अधिक से अधिक क्षेत्र पर कब्जा करने के मकसद से तुक्सिंग बॉर्डर इलाके में बहुत अंदर तक आ गया है।
कब्जे के खिलाफ नाह समुदाय ने आवाज उठाई
ड्रेगन की इस घुसपैठ और कब्जे के खिलाफ नाह आदिवासी समुदाय ने आवाज बुलंद की है। नाह वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष केरू चादर ने अपर सुबनसिरी के डिप्टी कमिश्नर को दिए गए एक ज्ञापन में कहा कि हमारी पुश्तैनी कुद साल पहले तक हमारे शिकार के इलाके की जमीनें अब चीनी पीएलए के कब्जे में है जहां हम आजादी से घूमते थे और जंगल की उपज इकट्ठा करते थे वहां हमारे मवेशियों के चरने की जगहें भी थीं।

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