MP के 2 लाख से अधिक कर्मचारियों को बड़ा झटका, नए सिरे से होगी प्रमोशन में आरक्षण पर सुनवाई
जबलपुर. मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति का बहुचर्चित मामला अदालत की चौखट पर एक बार फिर शुरूआती बिंदु पर लौट आया है। लाखों कर्मचारियों को जिस फैसले का इंतजार था वह अब नहीं आएगा। फैसला सुरक्षित रखने वाली खंडपीठ के दोनों न्यायाधीशों के स्थानांतरण के बाद अब पूरी सुनवाई नई पीठ के समक्ष नए सिरे से होगी। इसका अर्थ है कि बहस, दस्तावेज और कानूनी तर्क, सब कुछ फिर से दोहराया जाएगा।
फिर से सुनवाई होगी
दरअसल मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति में आरक्षण का विवाद फिलहाल किसी कानूनी निष्कर्ष तक पहुंचने के बजाय फिर से प्रक्रिया के शुरूआती चरण में लौट गया है। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव कुमार सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने सभी पक्षों की विस्तृत सुनवाई के बाद 17 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि वर्षों पुराना विवाद अब समाप्त होगा लेकिन दोनों न्यायाधीशों के स्थानांतरण ने पूरी स्थिति बदल दी।
पक्षकारों को फिर से अपने कानूनी तर्क रखने होंगे
इसका सीधा असर दो लाख से अधिक कर्मचारियों और अधिकारियों पर पडेगा जिनकी पदोन्नतियां वर्षों से अटकी हुई है। सपाक्स, अजाक्स और अन्य पक्षकारों को फिर से अपने कानूनी तर्क रखने होंगे। इससे अंतिम निर्णय में और विलंब तय माना जा रहा है।

