8वें वेतन आयोग में सैलरी बढ़ने की उम्मीद, फिटमेंट फैक्टर से समझें नया वेतन
नई दिल्ली. आठवें वेतन आयोग की अधिसूचना जारी हुए करीब 10 महीने का समय पूरा हो चुका है, और नए वेतनमान तथा पेंशन संशोधन के लागू होने में अब महज 8 महीने का समय शेष है। ऐसे में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को जल्द ही किसी बड़े फैसले की उम्मीद है। प्राइवेट नौकरियों की तुलना में सरकारी कर्मचारियों को बेसिक पे पर हर साल 3 फीसदी की दर से ही सालाना वेतन वृद्धि दी जाती है। हालांकि, इस बार यही 3 प्रतिशत की दर आठवें वेतन आयोग की चर्चाओं में सबसे प्रमुख मुद्दा बन गई है।
विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने अपनी-अपनी मांगें आयोग के सामने रखी हैं। नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी और भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ ने ज्ञापन सौंपकर सालाना इंक्रीमेंट को 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 6 प्रतिशत करने का अनुरोध किया है। सर्वे ऑफ इंडिया की मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन ने इसे बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने का सुझाव दिया है। बीपीएमएस के अनुसार, डीए केवल बढ़ती महंगाई के असर को संतुलित करता है, जबकि कर्मचारियों का वास्तविक जीवन स्तर और क्रय क्षमता सालाना इंक्रीमेंट पर निर्भर करती है।
इंक्रीमेंट का गणित
7वें वेतन आयोग के तहत 18,000 रुपये की शुरुआती बेसिक सैलरी वाले कर्मचारी का वेतन 10 साल बाद 3 प्रतिशत दर से 24,190 रुपये तक पहुंचता है। यदि यह दर 6 प्रतिशत कर दी जाए, तो 10 साल बाद बेसिक पे 32,235 रुपये हो जाएगी। इससे कर्मचारी को हर महीने 8,045 रुपये और पूरे 10 साल में कुल 4.67 लाख रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलेगा।
दूसरी ओर 56,100 रुपये की शुरुआती बेसिक पे वाले कर्मियों के लिए 6 प्रतिशत इंक्रीमेंट का लागू होना मासिक वेतन में 25,073 रुपये तक का अंतर ला सकता है, जो 10 वर्षों की अवधि में लगभग 14.6 लाख रुपये की अतिरिक्त आय के बराबर होगा।






