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ग्वालियर को पेयजल संकट से मिलेगी राहत, अपर ककेटो से पार्वती नदी में छोड़ा पानी

ग्वालियर. ग्वालियर शहर की पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अपर ककेटो बांध से रविवार को पार्वती नदी में लगातार पानी छोड़ा गया। सुबह आठ बजे बांध के चार गेट आधा मीटर की हाइट पर खोलकर 116.512 क्यूमेक यानी करीब 4115 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था।
पार्वती नदी के रास्ते पहले ककेटो बांध पहुंचेगा पानी
इसके बाद दिनभर पानी की निकासी की मात्रा में चरणबद्ध रूप से कमी की गई। दोपहर 12 बजे की रिपोर्ट में छोड़े जा रहे पानी की मात्रा घटाकर 110.15 क्यूमेक यानी लगभग 3890 क्यूसेक कर दी गई। वहीं शाम चार बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार पानी की निकासी में एक बार फिर कमी करते हुए इसे 103.60 क्यूमेक यानी करीब 3659 क्यूसेक कर दिया गया। इसके बावजूद अपर ककेटो बांध से पार्वती नदी के माध्यम से बड़ी मात्रा में पानी लगातार नीचे की ओर पहुंच रहा है। अपर ककेटो बांध से छोड़ा गया यह पानी पार्वती नदी के रास्ते पहले ककेटो बांध पहुंचेगा।
इसके बाद ककेटो बांध से ग्वालियर शहर के प्रमुख पेयजल स्रोत तिघरा बांध तक पानी पहुंचाया जाएगा। वर्तमान में तिघरा बांध का जलस्तर करीब 728 फीट बताया गया है। जबकि बांध की निर्धारित कुल भराव क्षमता 740 फीट है। यदि इसी तरह पर्याप्त मात्रा में पानी तिघरा बांध तक पहुंचेगा तो ग्वालियर शहर की पेयजल आपूर्ति का प्रमुख आधार तिघरा बांध अपनी निर्धारित क्षमता के करीब पहुंच सकता है और 740 फीट तक लबालब भरने की संभावना भी मजबूत होगी।

 

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₹14 करोड़ की साइबर ठगी में ग्वालियर का ‘सिम लाइन’ कनेक्शन, 12 राज्यों में 180 लोग बने शिकार

ग्वालियर. कभी डकैतों के लिए बदनाम रहा ग्वालियर-चंबल अब साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़ता नजर आ रहा है। ग्वालियर के अलग-अलग वेंडरों से जारी फर्जी सिम के जरिए 12 राज्यों में 180 लोगों से 14 करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी का खुलासा हुआ है। एनसीआरपी के डेटा ने जब इस नेटवर्क की परतें खोलीं तो पुलिस ने ऑपरेशन फास्ट शुरू कर फर्जी सिम जारी करने वाले वेंडरों पर कार्रवाई शुरू की। जांच में सामने आया कि अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच लोगों के दस्तावेज और बायोमेट्रिक लेकर उनकी जानकारी के बिना सिम जारी की गईं, जबकि इनका इस्तेमाल दिसंबर 2025 से अगस्त 2026 तक साइबर ठगी में किया गया।

साइबर थाना ग्वालियर।
ग्वालियर से जारी फर्जी सिम का इस्तेमाल देशभर में
एनसीआरपी के रिकॉर्ड के एनालिसिस में सामने आया कि ग्वालियर से जारी फर्जी सिम का इस्तेमाल देशभर में साइबर ठगी के लिए किया गया। इन नंबरों से 180 लोगों को शिकार बनाया गया और 14 करोड़ 20 लाख रुपए से ज्यादा की रकम ठगी गई। इन सिम के जरिए मध्यप्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, महाराष्ट्र, दिल्ली, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, बिहार, केरल, चंडीगढ़ और हरियाणा में ठगी की गई। यानी ग्वालियर में जारी सिम का नेटवर्क 12 राज्यों के 50 से ज्यादा शहरों तक पहुंचा।


200 से 500 रुपए में सिम बिचौलियों के जरिए साइबर ठगों के एजेंटों को देते थे
पुलिस की जांच में सामने आया कि कुछ वेंडर महज 200 से 500 रुपए में एक्टिवेटेड सिम बिचौलियों के जरिए साइबर ठगों के एजेंटों को दे देते थे। इसके बाद इन्हीं नंबरों से देशभर में ठगी का खेल चलता था। पुलिस जब फर्जी सिम के वास्तविक धारकों तक पहुंची तो कई लोगों को पता ही नहीं था कि उनके नाम पर ऐसे मोबाइल नंबर जारी हैं। पूछताछ में पता चला कि उन्होंने सिम पोर्ट कराने के नाम पर वेंडरों को अपने दस्तावेज और बायोमेट्रिक दिए थे।
मोहना-महाराजपुरा के वेंडर जांच के घेरे में
पुलिस की जांच में मोहना क्षेत्र के लाखन धाकड़ और सोनू धाकड़ तथा महाराजपुरा क्षेत्र के संदीप राजावत सहित अन्य वेंडरों के नाम सामने आए हैं। आरोप है कि इन वेंडरों ने लोगों के दस्तावेज और बायोमेट्रिक का इस्तेमाल कर उनकी जानकारी के बिना सिम जारी कीं।

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ग्वालियर में विवेक मीणा हत्याकांड में आरोपियों के घरों पर बुलडोजर की तैयारी

ग्वालियर. ग्वालियर के बहोड़ापुर में विश्व हिंदू परिषद के सह जिला मंत्री के भाई विवेक मीणा की गोली मारकर हत्या के मामले में पुलिस ने फरार आरोपियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। रविवार को पुलिस और नगर निगम की टीम आरोपियों के घर पहुंची और मकानों की नपाई की। टीम ने फीता डालकर मकानों की लंबाई-चौड़ाई के साथ निर्माण की स्थिति का जायजा लिया। इस कार्रवाई के बाद इलाके में चर्चा है कि प्रशासन आरोपियों के मकानों पर बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। हत्या के बाद परिजनों और समर्थकों ने चक्काजाम किया था। इस दौरान आरोपियों के मकानों पर बुलडोजर चलाने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई थी। इसके बाद पुलिस और नगर निगम की टीम ने आरोपियों के मकानों का भौतिक सत्यापन और नपाई शुरू की है।

आरोपियों के घर की नपती करती पुलिस व निगम की टीम। - Dainik Bhaskar
हरिहर नगर में राहुल के मकान की नपाई
रविवार को पुलिस और नगर निगम की टीम सबसे पहले हरिहर नगर में आरोपी राहुल यादव के घर पहुंची। यहां टीम ने मकान की लंबाई-चौड़ाई नापने के साथ निर्माण से जुड़ी जानकारी जुटाई। बताया गया है कि राहुल का मकान करीब 2 हजार वर्गफुट में बना है। उसका एक और मकान होने की जानकारी भी सामने आई है।
इसके बाद टीम सेवा नगर में आरोपी सौरभ यादव के मकान पर पहुंची। यहां भी मकान की नपाई की गई और निर्माण की स्थिति देखी गई। बताया गया है कि सौरभ का किले की तलहटी के नीचे भी एक मकान है। स्थानीय स्तर पर इस मकान के सरकारी जमीन पर बने होने की बात सामने आई है। अब टीम दोनों मकानों से जुड़े दस्तावेज और निर्माण की वैधता की जांच कर सकती है।

नपती करती निगम की टीम।
फरार आरोपियों की तलाश जारी
हत्या के मामले में लाला अग्रवाल, राहुल यादव और सौरभ यादव के नाम सामने आए हैं। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश कर रही है। साथ ही उनके ठिकानों और संपत्तियों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। मकानों की नपाई के बाद अब यह भी देखा जा रहा है कि निर्माण नियमों के मुताबिक है या नहीं। हालांकि बुलडोजर कार्रवाई को लेकर प्रशासन की ओर से अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

 

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MP में कर्मचारियों की पेंशन पर बड़ा फैसला, सेवा अ​वधि तय करेगी हाईकोर्ट की बड़ी बेंच

भोपाल. एमपी में कर्मचारियों की पेंशन पर बड़ा फैसला सामने आया है। जबलपुर हाईकोर्ट ने दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की पेंशन और अर्हक सेवा क्वालीफाइंग सर्विस से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी सवाल को लार्जर बेंच के समक्ष भेज दिया है। सिंगल बेंच ने इस मुद्दे पर हाईकोर्ट के पूर्व 4 निर्णयों में विरोधाभासी अभिमत सामने आने के बाद मामला बड़ी बेंच के विचारार्थ भेजने का निर्देश दिया। अब लार्जर बेंच तय करेगी कि नियमितीकरण अथवा नियमित पद पर संविलियन से पहले दैनिक वेतन भोगी के रूप में की गई सेवा अवधि को पेंशन के लिए अर्हक सेवा में शामिल किया जा सकता है या नहीं। फैसला प्रदेश के हजारों पूर्व दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। मामला नरसिंहपुर लोक निर्माण विभाग से चौकीदार पद से सेवानिवृत्त कल्याण सिंह की याचिका से जुड़ा है। सुनवाई के बाद कोर्ट के चार विरोधाभासी फैसलों और अभिमतों को देखते हुए जस्टिस दीपक खोत की सिंगल बेंच ने मामले को बड़ी बेंच के सुपुर्द करने की बात कही। अब लार्जर बेंच तय करेगी कि कर्मचारियों के नियमित पद पर हुए संविलियन से पहले दी गई सेवाएं पेंशन लाभ में जुड़ेंगी या नहीं।
1985 में बने थे दैनिक वेतन भोगी
नरसिंहपुर के लोक निर्माण विभाग से चौकीदार के पद से रिटायर हुए कल्याण सिंह गौंड़ ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। उनकी नियुक्ति एक जुलाई 1985 को दैनिक वेतन भोगी चौकीदार के रूप में हुई थी। 13 फरवरी 1997 को कल्याण सिंह गौंड़ का नियमित पद पर संविलियन कर दिया गया। वे 31 जनवरी 2018 को सेवानिवृत्त हुए।
रिटायरमेंट के बाद दाखिल की याचिका
कल्याण सिंह गौंड़ की संविलियन से पहले की सेवा अवधि को पेंशन के लिए अर्हक सेवा में शामिल नहीं किया गया। इसके खिलाफ उन्होंने 2019 में हाईकोर्ट में याचिका लगाई। कल्याण सिंह गौंड़ ने दैवेभो के रूप में दी गईं सेवाओं का लाभ पेंशन में नहीं देने पर आपत्ति जताई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राजेन्द्र कुमार पाण्डेय और राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता सुयश ठाकुर ने दलीलें दी।
जस्टिस दीपक खोत ने सुनवाई के दौरान मामले में चार फैसलों में विरोधाभासी अभिमत पाए। इस पर उन्होंने रजिस्ट्री कार्यालय को एक्टिंग चीफ जस्टिस के सामने केस प्रस्तुत करने को कहा। इसके साथ ही अब मामले में लार्जर बेंच ही फैसला सुनाएगी। लार्जर बेंच के सामने मुख्य रूप से यह तय होगा कि कामचलाऊ या आकस्मिक स्थापना और नियमित स्थापना में संविलियन के लिए दैनिक वेतन भोगी की पेंशन के लिए अर्हक सेवा क्या होगी। इसी के बाद प्रदेश के हजारों पूर्व दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के पेंशन लाभ को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।

 

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ओरछा में 14 साल बाद बीजेपी का महामंथन, मोहन यादव-सिंधिया समेत 350 प्रतिनिधि जुटे, 2028 को लेकर बन रही रणनीति

ओरछा. रामराजा सरकार की नगरी ओरछा में 14 साल बाद भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति का महामंथन रविवार से शुरू हुआ। होटल राजमहल में दो दिन चलने वाली बैठक में मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित करीब 350 प्रतिनिधि जुटे हैं। बैठक में संगठन की मजबूती, बूथ सशक्तीकरण और मिशन 2028-29 की चुनावी तैयारियों पर रणनीति बनाई जा रही है।
कार्यशैली को बेहतर बनाने की दिशा में परिणाम निकलेंगे- ज्योतिरादित्य सिंधिया
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव चित्रकूट से ओरछा पहुंचे। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित वरिष्ठ नेताओं का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। खंडेलवाल ने कहा कि पार्टी के काम को आगे बढ़ाने के लिए रामराजा सरकार की नगरी से पवित्र स्थान कोई और नहीं हो सकता। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भगवान श्रीराम यहां भगवान के साथ राजा भी हैं और रामराज्य की स्थापना भाजपा का लक्ष्य है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि कार्यसमिति से आने वाले समय के लिए नीतिगत फैसलों और कार्यशैली को बेहतर बनाने की दिशा में परिणाम निकलेंगे।
‘मन की बात’ से शुरू हुआ महामंथन
बैठक की शुरुआत ध्वजारोहण और प्रदर्शनी के उद्घाटन से हुई। इसके बाद सुबह 11 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का सामूहिक श्रवण किया गया। प्रदेश कार्यसमिति के 106 सदस्यों के अलावा सांसद, मंत्री, प्रदेश पदाधिकारी, संभाग प्रभारी, जिला अध्यक्ष और जिला प्रभारी सहित करीब 350 प्रतिनिधि इसमें शामिल हैं।
गुटबाजी की चर्चाओं को नरोत्तम ने बताया काल्पनिक
पूर्व विधायक नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा में गुटबाजी और संगठन में बदलाव की चर्चाओं को काल्पनिक बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा संगठन मजबूती से खड़ा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, नितिन नवीन तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में काम कर रहा है।
रामराजा दर्शन और सेवा संकल्प कार्यशाला
पहले दिन शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। वरिष्ठ नेता और अतिथि रामराजा सरकार के दर्शन करेंगे। सोमवार को ‘सेवा संकल्प अभियान’ कार्यशाला में सेवा, सुशासन और संगठन विस्तार पर चर्चा के साथ आगामी राजनीतिक एवं संगठनात्मक कार्यक्रमों की दिशा तय की जाएगी।

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नेपाल में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में 898 कर्मचारी फंसे, 6 इंच के पाइप से पहुंचाई जा रही हवा

नई दिल्ली. नेपाल में बाढ के बाद हाईड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिया गया है। करीब 898 कर्मचारी अब भी फंसे है जबकि 361 कर्मचारियों को अब तक बचाया जा चुका है। त्रिशूली-3 ए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन में कुछ कामयाबी मिली है। बचावकर्मी मशीनों की मदद से मिट्टी और गाद हटा रहे है। सुरंग में 6 इंच का छेद कर पाइप के जरिए हवा पहुंचाई जा रही है। अब इसे बडा कर मैनहोल बनाने की तैयारी है ताकि बचाव दल सुरंग के अंदर जाकर लोगों की तलाश कर सके। 26 अगस्त को नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशुली नदी में अचानक बाढ आ गई थी। इस आपदा में नेपाल में अब तक 734 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं तिब्बत में मरने वालों का आंकडा 16 पहुंच गया है।

नेपाल में बाढ़ के तीन दिन बाद भी रेस्क्यू और सर्च ऑपरेशन जारी रहा। लोग तबाह हुए अपने घरों को देखने भी गए। - Dainik Bhaskar
चीन ने 1950 के दशक में तिब्बत को अपने नियंत्रण में ले लिया था। तब से तिब्बत चीन के सबसे ज्यादा निगरानी वाले औश्र कडे नियंत्रण वाले इलाकों में शामिल है। बाढ की इस आपदा को चीन सरकार कितनी गंभीरता स ेले रही है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खुद राहत और बचाव के लिए निर्देश दिए है। प्रधानमंत्री ली छियांग भी गुरूवार को घटनास्थल पर पहुंचे। किसी बडी आपदा के तुरंत बाद उनका इस तरह मौके पर पहुंचना काफी दुर्लभ माना जाता है।

नेपाल के देवीघाट में त्रिशूली नदी के किनारे बाढ़ में तबाह हुए घरों का एरियल व्यू।
तिब्बत में पहुंचना विदेशी लोगों के लिए आसान नहीं है। वहां जाने के लिए विशेष वीजा की जरूरत होती है और विदेशी मीडिया के लिए वहां प्रवेश करना बेहद मुश्किल है। वहां मौजूद लोगों से सीधे संपर्क करना भी आसान नहीं है। नेपाल से तिब्बत होते हुए पवित्र कैलाश पर्वत की यात्री करने वाले तीर्थयात्रियों के लिए भी कई तरह की मंजूरियां जरूरी होती है। उन्हें कुल चार अलग-अलग परमिट लेने पडते है। यहीं वजह है कि तिब्बत में इस समय वास्तव में क्या हो रहा है इसकी स्वतंत्र जानकारी जुटाना मुश्किल है।

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TET के विरोध में दिल्ली कूच कर रहे शिक्षकों को पुलिस ने रोका, ग्वालियर-चंबल में प्रदर्शन

ग्वालियर. टीईटी परीक्षा निरस्त करने की मांग को लेकर रविवार को दिल्ली में प्रस्तावित शिक्षक आंदोलन में शामिल होने जा रहे मध्य प्रदेश के शिक्षकों को कई स्थानों पर पुलिस ने रोक दिया। कैलारस में 300 से 400 शिक्षक बसों से दिल्ली के लिए रवाना हो रहे थे जिन्हें पुलिस ने रोककर थाने में बैठा लिया। वहीं श्योपुर में पुलिस की कार्रवाई के विरोध में शिक्षकों ने गांधी चौक पर प्रदर्शन किया। भिंड, मुरैना और ग्वालियर में भी दिल्ली जा रहे शिक्षकों को रोके जाने की जानकारी सामने आई है। इससे शिक्षकों में नाराजगी है और उन्होंने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है।
भिंड, मुरैना, और ग्वालियर में भी रोके
भिंड से दिल्ली जा रहे शिक्षकों की दो बसों को बस स्टैंड और सर्किट हाउस के पास रोके जाने की जानकारी है। कुछ शिक्षक निजी वाहनों से दिल्ली के लिए रवाना हो गए। मुरैना के जौरा में भी शिक्षकों को दिल्ली जाने से रोका गया जिसके विरोध में उन्होंने नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। ग्वालियर में भी दिल्ली जाने वाले शिक्षकों को पुलिस द्वारा रोके जाने की जानकारी सामने आई है।
शिवपुरी में शिक्षकों को नजरबंद किया और ग्वालियर में रोके
शिवपुरी में भी अपनी मांगों को लेकर जिले भर से करीब 1000 शिक्षक दिल्ली के लिए रवाना होने की तैयारी में थे। जिनमें कुछ शिक्षकों को पुलिस ने घरों में ही नजर बंद कर दिया और कुछ शिक्षक ग्वालियर में रोक दिए गए। करीब 500 से ज्यादा शिक्षक मौका देख निकल गए। जो दिल्ली के नजदीक पहुंच गए है, जो अपनी गाडियों से निकले है।
शिक्षकों ने बताया कि शिवपुरी जिले से करीब 1000 शिक्षक अपनी मांगों को लेकर दिल्ली के लिए निकले लेकिन कुछ शिक्षकों को बीच में ही रोक दिया गया है। हालांकि कोतवाली पुलिस का कहना है कि कहीं किसी की कोई घर पकड नहीं की गई है और ना ही ऐसा कोई पॉइंट मिला है।
श्योपुर में गांधी चौक पर प्रदर्शन
श्योपुर में दिल्ली आंदोलन में शामिल होने के लिए रवाना हो रहे शिक्षकों को कोतवाली थाना पुलिस ने रोक दिया। इससे नाराज शिक्षक गांधी चौक पर एकत्रित हो गए और पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने नारेबाजी करते हुए दिल्ली जाने की अनुमति देने की मांग की। शिक्षकों का कहना था कि वे अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन में शामिल होने जा रहे थे। उन्हें रोकना उचित नहीं है। प्रदर्शन को देखते हुए गांधी चौक और कोतवाली के आसपास पुलिस बल तैनात रहा।

 

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भोपाल में 100 से ज्यादा संपत्तियों पर अंतिम नोटिस, 24 घंटे बाद सीलिंग की कार्रवाई

भोपाल. रहवासी इलाकों में घरों को कारोबार का ठिकाना बनाने वालों पर अब नगर निगम सीधे सीलिंग की कार्रवाई करने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शहरभर में 8264 नोटिस जारी करने के बाद निगम ने अब कार्रवाई का दूसरा चरण शुरू कर दिया है। इसके तहत 100 से ज्यादा ऐसी संपत्तियों को 24 घंटे में व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने का अंतिम नोटिस दिया जा चुका है। इसके बाद भी कारोार चलता मिला तो 31 अगस्त से इन प्रतिष्ठानों को सील किया जा सकता है।
निगम अब नोटिस के बजाय बंद कराने की तैयारी में
निगम की नजर खासतौर पर उन व्यावसायिक गतिविधियों पर है जो रहवासी क्षेत्रों में लोगों के लिए सबसे अधिक परेशानी का कारण बन रही है। इनमें फक्ट्रियों से लेकर ओयो होटल, पब, बार, रेस्टोरेंट, होटल और जिम जैसे प्रतिष्ठान शामिल है। इनसे होने वाले शोर, आने-जाने वाले लोगों की भीड और अन्य गतिविधियों के कारण रहवासियों को परेशानी की शिकायतें मिल रही है। निगम अब नोटिस देने के बजाय मौके पर गतिविधियां बंद कराने की तैयारी में है।
6 विधानसभा क्षेत्रों में एक साथ कार्रवाई
31 अगस्त को निगम की टीमें शहर सीमा में आने वाली सभी 6 विधानसभा क्षेत्रों में एक साथ कार्रवाई के लिए उतरेंगी। इस दौरान अंतिम नोटिस के बाद भी संचालित पाए जाने वाले प्रतिष्ठानों की जांच कर सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद निगम ने शहरभर में अब तक 8264 नोटिस जारी किए है। पहले चरण में नोटिस देकर दस्तावेज और स्थिति स्पष्ट करने का मौका दिया गया। अब ऐसे मामलों में कार्रवाई की तैयारी है जहां रहवासी क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां जारी है।

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ज्यादा शक्कर-तेल वाली खाने-पीने की चीजों पर लगेगी चेतावनी, FSSAI का सुप्रीम कोर्ट को प्रस्ताव

नई दिल्ली. खाने-पीने के किसी पैक सामान में अगर नमक- शकर या सैचुरेटेड फैट की मात्रा लिमिट से ज्यादा हुई तो पैकेट पर ष्षटकोण लाल निशान होगा। चेतावनी भी लिखी होगी। फूड सेफ्ट एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने यह प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट में पेश किया है। इसका मकसद ऐसे फूड आइटम को लेकर लोगों को सावधान करना है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के प्रस्ताव के अनुसार यह वार्निंग लेबल लाल रंग के षटकोण आकार का होगा। इसे पैकेट के सामने लगाया जाएगा। दरअसल 3एस एंड अवर हेल्थ सोसाइटी नाम के एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर डिब्बा बंद या पैकेट वाले खाने पर अनिवार्य वार्निंग लेबल लगाने की मांग की थी। इस मामले की पिछली सुनवाई 13 अगस्त के दौरान जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने एफएसएसएआई को नियमों में देरी के लिए फटकार लगाई थी और पूछा था कि क्या सरकार नही चाहती कि उसके लोग स्वस्थ रहें इसके बाद एफएसएसएआई ने यह हलफनामा पेश किया है।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने इसे अलग-अलग फेज में लागू करने का प्रस्ताव दिया है ताकि इंडस्ट्री को अपने प्रोडक्ट्स को सुधारने का मौका मिले।
फेज 1- उन प्रोडक्ट्स पर लाल लेबल लगेगा जिनमें फेट, शुगर या साल्ट में से कोई भी दो या दो से अधिक चीजें तय सीमा से ज्यादा होंगी। इसमें सभी अधिक मीठी कोल्ड ड्रिंक्स भी शामिल होंगी।
फेज 2- यह नियम उन प्रोडक्ट्स पर भी लागू हो जाएगा जिनमें इनमें से कोई एक चीज भी ज्यादा मात्रा में होगी।

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महाकाल लोक तक बनेगा अंडरग्राउंड कॉरिडोर, ₹91 करोड़ की 650 मीटर टनल से जाम से मिलेगी राहत

उज्जैन. सिंहस्थ 2028 में करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारू रखना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है। हाल ही में सावन सोमवार पर करीब साढ़े सात लाख श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे थे। इस दौरान इंदौर-उज्जैन हाईवे से हरिफाटक तक यातायात का दबाव बढ़ गया और कई स्थानों पर घंटों जाम की स्थिति बनी। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए हरिफाटक पार्किंग से महाकाल लोक तक भूमिगत कॉरिडोर बनाया जा रहा है। करीब 650 मीटर लंबे इस अंडरपास को 91.74 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति वाले प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है। इसे 15 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है। फिलहाल करीब 15 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
पार्किंग से सीधे महाकाल लोक पहुंचेंगे श्रद्धालु
योजना के तहत श्रद्धालु हरिफाटक क्षेत्र में वाहन पार्क करने के बाद भूमिगत रास्ते से सीधे महाकाल लोक तक पहुंच सकेंगे। दर्शन के बाद वापसी के लिए भी इसी कॉरिडोर का उपयोग किया जा सकेगा। इससे श्रद्धालुओं को मुख्य सड़क के यातायात से गुजरने की जरूरत कम होगी और हरिफाटक ब्रिज पर वाहनों तथा पैदल श्रद्धालुओं का दबाव घटाने में मदद मिलेगी।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के कारण उज्जैन में वर्षभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। सावन, महाशिवरात्रि, त्योहारी सीजन और सिंहस्थ के दौरान यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। इंदौर-उज्जैन रोड, आगर रोड और गऊघाट यानी पुराने उज्जैन-बड़नगर मार्ग से आने वाले श्रद्धालुओं का बड़ा हिस्सा हरिफाटक ब्रिज की ओर से महाकाल क्षेत्र पहुंचता है। इस कारण यह मार्ग भीड़ के समय बॉटलनेक बन जाता है।
दो बॉक्स में बनेगा भूमिगत कॉरिडोर
प्रस्तावित टनल सामान्य अंडरपास से अलग होगी। इसकी कुल लंबाई करीब 650 मीटर होगी, जिसमें लगभग 450 मीटर हिस्सा जमीन से करीब 10 मीटर नीचे बनाया जाएगा। कॉरिडोर में दो अलग-अलग बॉक्स होंगे और प्रत्येक की चौड़ाई करीब 9 मीटर रहेगी। एक बॉक्स से श्रद्धालु महाकाल लोक की ओर जाएंगे, जबकि दूसरे से वापसी होगी। दोनों दिशाओं का आवागमन अलग रहने से भीड़ प्रबंधन आसान होगा। जरूरत पड़ने पर बड़े वाहन भी इन बॉक्स से गुजर सकेंगे। डिजाइन में बैरिकेडिंग की जरूरत कम रखने का भी ध्यान रखा गया है।