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MP में कैबिनेट विस्तार की सुगबुगाहट, CM के पास पहुंचे 12 महकमे

भोपाल. मध्य प्रदेश में जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार की भ्अटकलें तेज हो गई है। मध्य प्रदेश सरकार ने मंत्री लखन पटेल से पशुपालन एवं डेयरी विभाग का प्रभार वापस ले लिया। यह विभाग अब मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास रहेगा। उनके पास गृह, सामान्य प्रशासन सहित 11 विभाग है। पिछले कुछ दिनों स ेचल रही अटकलों के बीच सिर्फ एक ही मंत्री के विभाग में फेरबदल किया गया है। सूत्रों के अनुसार जल्द ही विस्तार किया जाएगा। जैास की पिछले कुछ निों पहलं सीएम मोहन यादव ने भी मंत्रिमंडल विस्तार की बात कही थी। जिसमें नए चेहरों को भी मौका देने की बात कही गई थी।
बताया जा रहा है कि किसानों की आय बढाने के लिए इस विभाग के जरिए सरकार कई योजनाएं संचालित कर रही है। गोशालाओं के विस्तार के साथ दुग्ध उत्पादन बढाने के लिए सहकारी समितियों के विस्तार के साथ कई कदम उठाए जा रहे है। लखन पटेल ने इस बारे में मीडिया से कहा कि कौन सा विभाग किसे देना है यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। मुझसे यह विभाग वापस क्यों लिया गया यह मुझे नहीं पता है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है।
मुख्यमंत्री के पास रहेगा विभाग
सीएम मोहन यादव के पास अब पशुपालन एवं डेयरी विभाग भी रहेगा। इससे पहले सीएम मोहन यादव के पास सामान्य प्रशासन, गृह, जेल, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, जनसंपर्क, नर्मदा घाटी विकास, विमानन, खनिज साधन, लोक सेवा प्रबंधन, प्रवासी भारतीय और ऐसे सभी विभाग है जो किसी मंत्री को नहीं दिए गए है।

 

 

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MP में प्रमोशन की प्रक्रिया तेज, जल्‍द जारी होगी लिस्‍ट

भोपाल. हाईकोर्ट द्वारा पदोन्नति नियमों पर रोक लगाने से इनकार के बाद प्रदेश में पदोन्नति प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी क्रम में जनजातीय कार्य विभाग में हजारों शिक्षकों को पदोन्नति मिलने वाली है। विभाग ने उच्च माध्यमिक और माध्यमिक शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया शुरू कर दी है। जल्द ही 400 उच्च माध्यमिक शिक्षकों और करीब 11 हजार माध्यमिक शिक्षकों की वरिष्ठता सूची जारी की जाएगी। इसके बाद पदोन्नति आदेश दिए जाएंगे। इस मुद्दे को लेकर जनजातीय कार्य आयुक्त तरूण राठी के साथ ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन की बैठक हुई। इसमें लंबित पदोन्नति, वरिष्ठता सूची, सीआर, ट्राइबल भत्ता और एचआरए पर चर्चा हुई।
विभाग ने प्रक्रिया जल्द पूरी करने का आश्वासन दियाहै। उधर सहकारिता विभाग ने पदोन्नति नियम-2025 के तहत 15 संवर्गों के 613 अधिकारियों-कर्मचारियों को पदोन्नति दी है। इसमें प्रथम श्रेणी के 41, द्वितीय के 84, तृतीय के 486 और चतुर्थ श्रेणी के 2 कर्मचारी शामिल है। प्रमुख रूप् से 22 संयुक्त आयुक्त, 19 उप आयुक्त, 13 सहायक आयुक्त, 71 अंकेक्षण अधिकारी, 196 वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक आश्र 106 सहकारी निरीक्षक प्रमोट हुए है। अधिकारियों का कहना है कि इससे कर्मचारियों का मनोबल बढेगा और विभागीय कामकाज में गति आएगी।

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ग्वालियर में देर रात हादसा, चलती कार में लगी आग, चालक ने कूदकर बचाई जान

ग्वालियर. गोला का मंदिर थाना क्षेत्र स्थित सूर्य मंदिर रोड पर बुधवार देर रात एक चलती कार में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरी कार को अपनी चपेट में ले लिया। कुछ ही देर बाद कार में जोरदार धमाका हुआ जिससे आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। घटना के कारण कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ। प्रत्यक्षदशियों के अनुसार कार से धुआ उठता देख चालक ने तुरंत वाहन रोक्कर बाहर छलांग लगा दी जिससे उसकी जान बच गई। इसके बाद आग तेजी से फैल गई और पूरी कार धू-धूकर जलने लगी।

इस तरह जल गई कार।
पुलिस ने घटना की जांच शुरू की
जानकारी के अनुसार सूचना मिलते ही गोला का मंदिर थाना पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची। दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाया। प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी मानी जा रही है। जली हुई कार का नंबर एमपी-07-टीएच-1239 है जो प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ऋषभ राजपूत के नाम पर पंजीकृत बताई जा रही है। पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है। वहीं हादसे का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

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अब कॉलोनियों में खुल सकेंगे अस्पताल, होटल और उद्योग, MP सरकार मिक्स्ड लैंड यूज नियमों में बदलाव करने की तैयारी

भोपाल. मध्य प्रदेश सरकार अपने लैंड यूज नियमों में एक बडा और महत्वपूर्ण बदलाव करने की तैयारी में है। नए नियमों के तहत अब केवल प्रतिबंधित गतिविधियांे की एक लिस्ट जारी की जाएगी जिसका मतलब है कि जिन कामों पर रोक नहीं है उन सभी को आवासीय क्षेत्रों में संचालित करने की अनुमति मिल सकेगी। इस नए ड्राफ्ट फ्रेमवर्क के लागू होने से नए प्रोजेक्ट्स की आवासीय कॉलोनियों में अस्पताल, होटल, कोचिंग सेंटर और रेस्त्रां के साथ प्रदूषण न फैलाने वाले छोटे उद्योगों को भी स्थापित किया जा सकेगा।
यह बदलाव केवल नए विकसित होने वाले क्षेत्रों ग्रीन फील्ड एरिया पर ही प्रभावी होगा और पहले से बसे हुए इलाकों या पुरानी कॉलोनियों के स्वीकृत लेआउट में कोई फेरबदल नहीं करेगा। हालांकि शहरी योजनाकारों ने इस नीति पर चिंता जताई है। इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर्स इंडिया, मप्र के सचिव सुमित गोठी ने चेतावनी दी है कि बिना किसी स्पष्ट और कडे मानकों के आवासीय क्षेत्रों में व्यावासयिक गतिविधियों की अनुमति देने से शहरी अव्यवस्था बढेगी, कॉलोनियों की शांति भंग होगी और नियोजित विकास पर बुरा असर पडेगा।

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MP में मेडिकल नियमों में बड़ा फेरबदल, एनआरआई सीटों के लिए दिखाना होगा कानूनी गार्जियन होने का सबूत

भोपाल. मध्य प्रदेश सरकार चिकित्सा शिक्षा प्रवेश प्रक्रिया में एक बडा बदलाव करने जा रही है। शैक्षणिक सत्र 2026 से एमबीबीएस और पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अलग-अलग नियम लागू किए जाएंगे। इस नए बदलाव का मुख्य उद्देश्य एनआरआई कोटे के गलत इस्तेमाल को रोकना और पात्रता शर्तों को कडा करना है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के आधार पर अब राज्य में एनआरआई कोटे के लिए ब्लड रिलेशन को स्पष्ट रूप से परिभाषित कर दिया गया है।
एनआरआई रिश्तेदार के नाम का हवाला देकर इस कोटे का लाभ नहीं उठा सकेगा
अब कोई भी छात्र महज किसी एनआरआई रिश्तेदार के नाम का हवाला देकर इस कोटे का लाभ नहीं उठा सकेगा। नए नियमों के तहत उम्मीदवारों को यह कानूनी रूप से साबित करना होगा कि संबंधित एनआरआई व्यक्ति ही उनका वास्तविक अभिभावक है। इसके लिए छात्रों को एक शपथ पत्र के साथ गार्जियन एंड वाडर््स एक्ट 1890 के तहत कानूनी अभिभावक होने का प्रमाण पत्र भी जमा करना होगा। न्यायिक गाइडलाइन के अनुसार इस कोटे का लाभ केवल उन्हीं उम्मीदवारों को मिलेगा जिनके माता-पिता, सागे भाई-बहन, दादा-दादी, चाचा-चाची, मामा-मामी या प्रथम श्रेणी के चचेरे-ममेरे भाई-बहन वास्तविक रूप् से एनआरआई है और विदेश में रहते है।
सीएम से मिल चुकी है मंजूरी
चिकित्सा शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव को राज्य के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला की सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है और फिलहाल इसे कानूनी समीक्षा के लिए भेजा गया है। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी आगामी नीट-यूजी और पीजी काउंसलिंग सत्र 2026-27 से इस नई व्यवस्था को प्रभावी बनाने की तैयारी में है। इसके साथ ही प्रशासन शुरूआती दो चरणों के बाद बचने वाली सीटों के लिए होने वाली कॉलेज लेवल काउंसलिंग को भी ऑनलाइन मोड में आयोजित करने की योजना बना रहा है। काउंसलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और सीटों को बेवजह ब्लॉक करने या बीच में कोर्स छोडने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए सीट लीविंग बॉण्ड के तहत जुर्माने के नियमों को भी और अधिक स्पष्ट किया जाएगा।

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​ग्वालियर में स्थापित होगा टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन

ग्वालियर. जिले में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की पहल पर औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से एक बड़ा निर्णय लिया गया है। जिले में ‘टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन’ की स्थापना के लिए विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) के अधिपत्य वाली 100 एकड़ (40.468 हेक्टेयर) भूमि को वापस लेकर राजस्व विभाग के नाम दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। यह आदेश कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्रीमती रुचिका चौहान द्वारा जारी किया गया है।
विकास योजनाओं के लिए शासकीय भूमि आवंटित की गई
अधिकारिक जानकारी के अनुसार, पूर्व में साडा (माधवराव काउंटर मैग्नेट सिटी) को विकास योजनाओं के लिए शासकीय भूमि आवंटित की गई थी। म.प्र. इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन और औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग की मांग पर इस भूमि में से औद्योगिक उपयोग के लिए जमीन हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। मध्यप्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा इस संबंध में अनापत्तिप्रदान किए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है।
इन गांवों की भूमि होगी हस्तांतरित
कलेक्टर न्यायालय द्वारा जारी आदेश के तहत, ग्राम कुलैथ के विभिन्न सर्वे नंबरों की 32.422 हेक्टेयर और ग्राम सौजना के विभिन्न सर्वे नंबरों की 13.529 हेक्टेयर भूमि (कुल रकबा 45.951 हेक्टेयर) में से मार्ग (रास्ते) की भूमि को छोड़कर शेष 40.468 हेक्टेयर (100 एकड़) भूमि को साडा से वापस लिया जा रहा है। इस भूमि को पुनः मध्य प्रदेश शासन के राजस्व विभाग के नाम पर दर्ज किया जाएगा, जिसके बाद इसे ‘टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन’ की स्थापना के लिए औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग को हस्तांतरित कर दिया जाएगा।
रिकॉर्ड दुरुस्त करने के निर्देश
कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व ) और नजूल अधिकारी ग्वालियर सिटी को निर्देशित किया है कि वे तत्काल उक्त भूमि को राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज कर खसरे की प्रति कलेक्टरेट कार्यालय को भिजवाना सुनिश्चित करें। साथ ही संबंधित क्षेत्र के नायब तहसीलदार और पटवारी को भी राजस्व अभिलेखों में आवश्यक प्रविष्टि व संशोधन करने के आदेश दिए गए हैं। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के धरातल पर उतरने से ग्वालियर क्षेत्र में टेलीकॉम क्षेत्र से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

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MPRDC शुरू करेगा मल्टीलेन फ्री फ्लो टोलिंग सिस्टम, 6-लेन हाइवे पर बिना रुके कटेगा टोल टैक्स

भोपाल. इंदौर-उज्जैन सिक्स लेन मार्ग पर आने वाले समय में टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत खत्म हो सकती है। मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) इस मार्ग पर मल्टीलेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) टोलिंग सिस्टम लागू करने की तैयारी कर रहा है। इस योजना के तहत वाहन चालक बिना बैरियर और बिना टोल बूथ पर रुके 80 किमी. प्रति घंटे या उससे अधिक की रफ्तार से टोल प्लाजा पार कर सकेंगे। टोल राशि स्वत: उनके फास्टैग खाते से कट जाएगी। एमपीआरडीसी से मिली जानकारी के अनुसार प्रबंध संचालक भरत यादव ने हाल ही में मेट्रो इन्फ्रासिस और एफईटीसी इंटरनेशनल कंपनी लिमिटेड के तैयार एमएलएफएफ टोलिंग सिस्टम की विस्तृत प्रस्तुति की समीक्षा की। यह अत्याधुनिक, इंटेलिजेंट और बैरियर-फ्री टोलिंग तकनीक है, जिसे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण भी अपने प्रमुख कॉरिडोर पर लागू कर रहा है।
शुरुआती क्रियान्वयन के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प माना जा रहा
निगम अब अपने आगामी सड़क प्रोजेक्ट्स में इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी कर रहा है। इंदौर-उज्जैन छह लेन अपग्रेडेशन प्रोजेक्ट को इसके शुरुआती क्रियान्वयन के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प माना जा रहा है। बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि उपलब्ध ट्रैफिक डेटा और विस्तृत यातायात विश्लेषण के आधार पर दूसरे मार्गों की पहचान की जाए, जहां इस तकनीक को प्रभावी, सुरक्षित और निर्बाध तरीके से लागू किया जा सके।
कैसे करेगा काम यह सिस्टम
एमएलएफएफ प्रणाली में सड़क के ऊपर ओवरहेड गैन्ट्री बनाई जाती है, जिस पर हाईरिजॉल्यूशन कैमरे और अत्याधुनिक सेंसर लगाए जाते हैं। जैसे ही कोई वाहन इसके नीचे से गुजरता है, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) तकनीक उसकी नंबर प्लेट को स्कैन करती है। साथ ही वाहन पर लगे फास्टैग को भी तुरंत पढ़ लिया जाता है और कुछ ही सेकंड में टोल राशि संबंधित बैंक खाते से स्वत: कट जाती है। पूरी प्रक्रिया के दौरान वाहन को कहीं भी रुकना नहीं पड़ता।
सिस्टम के प्रमुख फायदे
टोल प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ेगा, यात्रा तेज और आसान होगी।
लंबी कतारों और ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी।
समय और ईंधन की बचत होगी।
बार-बार ब्रेक और एक्सीलेरेशन नहीं होने से कार्बन उत्सर्जन कम होगा।
टोल वसूली अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित होगी।
यात्रा का औसत समय घटेगा और सड़क की क्षमता बढ़ेगी।
टोल संचालन की लागत कम होने और यातायात प्रबंधन बेहतर होने की संभावना रहेगी।

 

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MP में UCC लागू करने की तैयारी पूरी, 18 जुलाई की कैबिनेट बैठक के बाद विधानसभा में आएगा विधेयक

भोपाल. मोहन कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बैठक में समान नागरिक संहिता, निवेश, रोजगार, 2027 युवा वर्ष और पौधरोपण अभियान समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके बाद जगदीशपुर में होने वाली कैबिनेट बैठक में यूसीसी के प्रस्ताव को मंजूरी के लिए रखा जाएगा। इसके बाद 20 जुलाई से चलने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में विधेयक के रूप में लाया जाएगा।
मुख्यमंत्री जल्द से जल्द यूसीसी प्रदेश में लागू कराने के लिए संकल्पित
कैबिनेट के फैसलों की जानकारी मंत्री चैतन्य कश्यप ने मीडिया को दी। उन्होंने बताया कि यूसीसी को लेकर बनी समिति की अंतिम रिपोर्ट सीएम को सौपी जा चुकी है। रिपोर्ट तैयार करने से पहले राज्य के विभिन्न वर्गों, संगठनों से सुझाव लिए गए। दूसरे राज्यों के कानूनों का भी अध्ययन किया गया। कश्यप ने बताया कि मुख्यमंत्री जल्द से जल्द यूसीसी प्रदेश में लागू कराने के लिए संकल्पित हैं। इसलिए जगदीशपुर में आयोजित विशेष कैबिनेट बैठक की जा रही है। इसके बाद विधानसभा में विधेयक प्रस्तुत कर दिया जाएगा।
युवा वर्ष होगा 2027
कश्यप ने बताया कि सरकार यूथ के लिए भी अनेक अभियान चलाती है। सीएम ने घोषणा की है कि 2027 को युवा वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। मंत्रियों से भी उन्होंने आग्रह किया है कि नवंबर से दिसंब तक युवाओं के लिए क्या-क्या किया जा सकता है, इसके लिए सुझाव दें। जिससे रोजगार, कौशल विकास और नवाचार से जुड़ी नई योजनाएं तैयार की जा सकें।

 

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MP में पुलिस विभाग में प्रमोशन सूची आते ही हड़कंप, जूनियरों के नाम शामिल होने पर भड़के पुलिसकर्मी

इंदौर. पुलिस विभाग में थोकबंद पदोन्नति के बाद हडकंप मच गया। सूची में गडबडी का आरोप लगाकर दर्जनों पुलिसकर्मियों ने अफसरों को घेर लिया। एडिशनल सीपी मयंक अवस्थी ने रिकॉर्ड देखकर संशोधन करने का आश्वासन दिया और एडी. डीसीपी (मुख्यालय) सीमा अलावा ने पुलिसकर्मियों को नेतागिरी न करने की नसीहत दी। पुलिस मुख्यालय से मिले निर्देशों के बाद आयुक्त कार्यालय से पदोन्नति सूची जारी की गई है। आरक्षक से प्रधान आरक्षक और प्रधान आरक्षक से एएसआई बनाया जा रहा है।
मंगलवार को 50 से ज्यादा पुलिसकर्मी आयुक्त कार्यालय पहुंचे और कहा कि वरिष्ठता सूची में भी जूनियर पुलिसकर्मियों को प्राथमिकता दी गई है। प्रधान आरक्षक महेंद्र सिंह के अनुसार वह साल 2015 से प्रधान आरक्षक है। वरिष्ठता सूची में 265 नंबर पर उनका नाम था लेकिन सहायक उप निरीक्षक एएसआई की सूची से नाम कट गया। एडिशनल पुलिस कमिश्नर मयंक अवस्थी ने लिखित आवेदन लेकर संशोधन का आश्वासन दिया है। एडी. सीपी के अनुरास सैकडों की संख्या में पदोन्नति दी गई है। रिकॉर्ड और एसीआर से त्रुटि हो सकती है। नाराज पुलिसकर्मियों के अनुसार मुख्य गडबडी दूसरे जिलों से तबादला करवाने वाले पुलिसकर्मियों को लेकर हुई थी। पात्र न होने के बाद भी उनका नाम वरिष्ठता सूची में जोडा गया है।
पांच निरीक्षक पदोन्नत होकर डीएसपी बने, पुलिस मुख्यालय से जारी पदोन्नति सूची में शहर के पांच निरीक्षकों को उप पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। इसमें आरडी कानवा, सोमा मलिक, तारेश सोनी, संजू कामले और आरआई दीपक पाटिल का नाम है। इस सूची को लेकर भी सवाल उठ रहे है। सूची में एक नाम ऐसा है जिसे निधन के बाद भी पदोन्नति में जोडा गया।

 

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शताब्दी एक्सप्रेस में एक्सपायरी ब्रेड परोसने पर आईआरसीटीसी ने कैटरिंग वेंडर पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, मैनेजर समेत स्टाफ हटाया

भोपाल. नई दिल्ली-रानी कमलापति शताब्दी एक्सप्रेस मंे यात्रियों को एक्सपायरी डेट वाली ब्रेड परोसने के मामले में आईआरसीटीसी ने सख्त कार्रवाई करते हुए संबंधित कैटरिंग वेंडर पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जांच में लापरवाही सामने आने पर मैनेजर समेत जिम्मेदार कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है, लेकिन इस कार्रवाई के बाद भी रेलवे की खानपान व्यवस्था पर गंभीर सवाल बने हुए है। यात्रियों का कहना है कि जब रोजाना भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आ रही है तो ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों हो रही है।
एजेंसी को दिए सख्त निर्देश
आईआरसीटीसी नार्थ जोन, नई दिल्ली के मैनेजर विवेक रावत के अनुसार, मामले को बेहद गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने बताया कि कार्रवाई केवल आर्थिक दंड तक सीमित नहीं रखी गई है। जिम्मेदार कर्मचारियों को भी हटाया गया है। भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो इसके लिए संबंधित एजेंसी को सख्त निर्देश दिए गए है।
नाश्ता दिल्ली से लोड हुआ था
आईआरसीटीसी के अनुासर शताब्दी, एक्सप्रेस का नाश्ता दिल्ली स्थित बेस किचन से लोड किया गया था। भोजन की गुणवत्ता जांचने के लिए सुबह दो बार निरीक्षण और ट्रेन में लोडिंग के समय भी जांच की जाती है। इसके बावजूद एक्सपायरी ब्रेड यात्रियों तक कैसे पहुंच गई इसकी जांच अभी जारी है। शुरूआजी जांच में किसी पैकेट की जांच छूट जाने की आशंका जताई गई है।

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