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पश्चिम बंगाल से घुसपैटियों का डिपोर्ट करने वाली प्रक्रिया शुरू, शुभेंदु सरकार ने किया लागू CAA

कोलकाता. पश्चिम बंगाल सरकार ने बुधवार से राज्य में नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act- CAA) लागू करने का फैसला किया है। सीएम शुभेंदु अधिकारी ने इसके साथ ही CAA के तहत अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ तत्काल डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू करने का ऐलान किया है।
मुख्यमंत्री शुभेंदू ने कहा है कि पिछली सरकार ने CAA  का विरोध किया था। हमने आज बुधवार 20 मई से इस कानून का लागू कर दिया है। CAA  के मुताबिक 6 समुदायों या धर्मो के लोगों को नागरिकता मिलेगी। जो लोग इसके दायरे में नहीं आयेंगे। उन्हें राज्य की पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया जायेगा। उन्हें BSF के हवाले कर दिया जायेगा। BSF उन्हें वापिस भेजने की व्यवस्था करेगी। CM  ने कहा है कि पता लगाओ, हटाओ, वापिस भेजो यानी कि Detect, Delete, Deportation  फ्रेमवर्क का हिस्सा है।

 

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बंगाल में कुर्बानी के लिये गाय पालने वाले पछता रहे, शुभेंदु सरकार ने की सख्ती

हावड़ा. पश्चिम बंगाल में पशु-वध कानून का सख्ती से लागू किया जाने के बाद सांकराइल इलाके खटाल संचालकों के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। नयी सरकार क शपथग्रहण के तत्काल बाद वर्ष 1950 के पशु वधन कानून का सख्ती से लागू किये जाने से उन लोगों की परेशानी बढ़ गयी है जो वर्षो से गाय और भैंसों का पालन कर अपने व्यवसाय का संचालन करते रहे है। खटाल मालिकों ने बताया है कि कानून के अचानक सख्ती से लागू होने के कारण वह इसके लिये पहले से तैयार नहीं थे और अब उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सांकराइल ब्लॉक के यदुनाथ हाथी महाश्मशान इलाके आसपास लम्बे समय से कई खटाल संचालित किये जा रहे थे। यहां के संचालकों के अनुसार हर साल बकरीद से पहले ऐसे पशुओं को बेचा जाता था। जो दूध देना बन्द कर चुके होते थे या जिनकी प्रजनन क्षमता समाप्त हो चुकी होती थी। इन पशुओं की बिक्री से मिलने वाली रकम से नये पशु खरीदे जाते थे और इसी चक्र से उनका व्यवसाय चलता था।
भविष्य की संभावित समस्या और उम्मीदें
खटाल मालिकों का कहना है कि यदि सरकार इन पशुओं के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं करती और वे आर्थिक बोझ के कारण पशुओं को सड़क पर छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं, तो इससे नई समस्या पैदा हो सकती है. उनका मानना है कि इस स्थिति से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा पशुओं की समस्या बढ़ सकती है।
इसी कारण उन्होंने सरकार से विशेष व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि उन्हें आर्थिक राहत मिल सके और पशुओं के लिए भी उचित समाधान निकाला जा सके है। अब सभी की नजर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के फैसले पर टिकी हुई है कि सरकार खटाल मालिकों की इस अपील पर क्या कदम उठाती है।

 

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह हैं गद्दार-राहुल गांधी

नई दिल्ली. पीएम नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पर संसदीय क्षेत्र रायबरेली में पार्टी कार्यकर्त्ताओं और समर्थकों को संबोधित करते हुए गद्दार कहा है। इस बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इसे बंेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अराजकतावादी मानसिकता का प्रतीक बताया है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को रायबरेली के धुलवारी गांव में वीरापासी की मूर्ति का अनावरण किया है। इस बीच एक आमसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा है कि आरएसएस कार्यकर्त्ता आपनके सामने आयेंगे। वह प्रधनमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह की बात करेंगे तो उनसे आप उसने खुलकर कहियेगा कि आपका प्रधानमंत्री गद्दार है। आपका गृहमंत्री गद्दार है। आपका संगठन गद्दार है। आपने हिन्दुस्तान को बेचने को काम किया। आपने संविधान पर हमला करने का काम किया है। आपने अंबेडकर पर हमला किया है।
राहुल गांधी चुनावी हार के हताश-नितिन नवीन
बीजेपी अध्यक्ष ने राहुल से सवाल करते हुए कहा कि क्या देश की जमीन सुरक्षित रखना और नक्सलवाद खत्म करना गद्दारी है?. राहुल गांधी आपके पूर्वजों ने इस देश की जमीन को हमेशा गिरवी रखने का काम किया, कभी हमारे सैनिकों के मनोबल को बढ़ाने का काम नहीं किया, लेकिन हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस देश की जमीन भी सुरक्षित हुई है और देश की जमीन भी मजबूत हुई है. आपके शासन काल में देश की पूरी तरह से अखंड हो गई।
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी इस तरह के बयान देकर राजनीतिक विरोधियों से नहीं, बल्कि सीधे भारतीय राज्य और लोकतंत्र से लड़ रहे है।  भंडारी के अनुसार, ऐसी भाषा केवल पाकिस्तान या उसके द्वारा समर्थित आतंकवादी ही बोल सकते हैं। राहुल गांधी के इस कृत्य से साफ होता है कि वे देश के सभी 140 करोड़ नागरिकों का अपमान कर रहे है।

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लंदन म्यूजियम वाली भोजशाला की मां वाग्देवी की प्रतिमूर्ति ओरिजनल मूति की हूबहू 15 वर्षो से ग्वालियर में है

ब्रिटिश म्यूजियम ग्रेट रसल स्ट्रीट में मां वाग्देवी की यह प्रतिमा रखी हुई है।
ग्वालियर. मध्यप्रदेश के धार स्थिति ऐतिहासिक भोजशाला के गर्भगृह में स्थापित करने के लिये अष्टधातू वांग्देवी की प्रतिमा ग्वालियर के स्टूडियों में 15 वर्षो वालियर कास्ट की गयी थी। वाग्देवी (सरस्वती)की प्रति को वर्ष 2011 में बसंत पंचमी के मौके पर मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा होना तय थी। लेकिन उस वक्त हुए सांप्रदायिक और प्रशासनिक विवाद के चलते इसे ग्वालियर में ही रोक दिया गया था। अब हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद मूर्तिकार के घर में भी उम्मीद का दीया जल उठा है।


मूर्तिकार स्वर्गीय प्रभातराय के सुपुत्र अनुज ने बताया है कि वर्ष 2011 में राष्ट्रीय स्वयं संघ (आरएसएस) के सीनियर नेता नवलकिशोर जी ने उन्हें इस मूर्ति को बनाने का ऑर्डर दिया था। वर्ष 2011 जब मूर्ति बन कर तैयार हुई थी। इसे धार भेजने की तैयार थी। तभी वहां धार्मिक और प्रशासनिक विवाद भड़क गया था, जिससे प्रशासन ने सुरक्षा वजहों से मूर्ति को ग्वालियर में ही रोकने का आदेश दिया था। उस समय विवाद इतना बढ़ा कि करीब 2 हफ्तों तक 2-5 पुलिसकर्मी हमारे निवास पर सुरक्षा में तैनात रहे। इसके बाद भी वर्ष 2011-2015 तक हर बसंत पंचमी पर पुलिस प्रोटेक्शन के साये में ही 2-3 दिन के मूर्ति रखी जाती थी।
अब मौन धारण किया नवल किशोर ने
ग्वालियर आरएसएस पदाधिकारी लोकेंद्र मिश्रा ने बताया कि 2011 के बाद आरएसएस प्रचारक नवल किशोर अब वर्तमान में चेतनदास जी महाराज बन गए हैं और अभी महेश्वर में है। उन्होंने अब मौन धारण कर लिया हैं। ऐसे में मूर्ति का अब आगे क्या होगा इसके बारे में से नवल किशोर ही बता सकते थे लेकिन अब मूर्ति का क्या होगा इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता।

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शुभेंदु ने ‘‘चिकन नेक’’ इलाका केन्द्र सरकार को सौंपा, एक फैसला 8 राज्यों के लिये बना खुश खबरी

नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘‘चिकन नेक’’ एक बार फिर से चर्चाओं में आ गया। राज्य की नयी भाजपा सरकार ने इस संवेदनशील इलाके के लगभग 120 एकड़ जमीन केन्द्र सरकार को सौंपने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि इस जमीन का उपयोग सीमा सुरक्षा, फेंसिंग, राष्ट्रीय राजमार्ग और अन्य रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिये किया जायेगा।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिये बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। क्योंकि यही संकरा भूभाग के 8 राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता हैंइस कॉरिडोर की चौड़ाई लगभग 22 किमी और लम्बाई 60 किमी बताई जाती है। इसकी सीमायें नेपाल और बांग्लादेश से भी लगती है। इसलिये इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील इलाका माना जाता है। भाजपा का आरोप है कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों को इस इलाके में पर्याप्त अधिकार और जमीन उपलब्ध कराने में रूचि नहीं दिखाई। यही टीएमसी ने ऐसे आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया हे। इस बहसके बीच 2020 दिल्ली दंगों के आरोपी शरजील इमाम का पुराना बयान भी फिर चर्चाओं में है। जिसमें उन्होंने चिकन नेक कॉरिडोर को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। इस बयान के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गयी थी।
वर्ष 2020 में दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों के आरोपी शराजील इमाम ने कहा था कि अगर 5 लाख मुसलमान भी इकट्ठा हो जाये तो चिकन नेक को बन्द करके भारत को नॉर्थ ईस्ट के राज्यों से पूरी तरह काटा जा सकता है। शरजील इमाम यह बात इसलिये कह रहा था। क्योंकि चिकन नेक के इलाके को मुस्लिम अक्सरियत माना जाता है। मुस्लिम अक्सरियत का मतलब है कि यहां मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक है। अब यह बात इनती खतरनाक थी। इसकी वजह शरजील इमाम को आज तक जमानत नहीं मिल पायी है। जबकि केन्द्र सरकार सरकार ने भी ऐसी कई कोशिशें की। जिससे चिकन नेक का इलाक उसकी एजेंसियों और बीएसएफ को पूरी तरह मिल जाये। ममता बनर्जी को इसके लिये कइ्र प्रस्ताव भेजे गये। लेकिन वह ऐसा करने के लिये तैयार नहीं हुई थी।
पश्चिम बंगाल में सरकार बदली और CM  शुभेंदु अधिकारी ने चिकन नेक कॉरिडोर की 120 एकड़ जमीन केंद्र को सौंप दी।  BJP  का कहना है कि कॉरिडोर के आसपास के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना जरूरी है, ताकि घुसपैठ और किसी भी संभावित खतरे को रोका जा सके।  अब ये जमीन बॉर्डर फेंसिंग, नेशनल हाइवे और सुरक्षा से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए इस्तेमाल होगी और भी सरल शब्दों में कहें तो यहां बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ को रोकने के लिए बीएसफ सीमा पर बाड़ लगाएगी।
इलाके में अंडरग्राउंड रेल नेटवर्क का है प्लान
भारत सरकार इस इलाके में अंडरग्राउंड रेल नेटवर्क बना रही है ताकि भविष्य में अगर किसी आपातकालीन स्थिति में सड़क मार्ग अवरुद्ध भी हो जाए, तब भी सेना की आवाजाही जारी रहे और नॉर्थ ईस्ट के राज्यों का भारत से संपर्क टूटे नहीं।  पार्टी का दावा है कि नई सरकार बनने के बाद इस दिशा में तेजी से फैसले लिए जा रहे हैं। वहीं विपक्षी दलों का आरोप है कि इस मुद्दे को धार्मिक और वोटबैंक की राजनीति से जोड़कर पेश किया जा रहा है. उनका कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले सभी समुदायों के लोग देशभक्त हैं और सुरक्षा के सवाल को सांप्रदायिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
इस बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि राज्य सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हर मुद्दे पर केंद्र के साथ मिलकर काम करेगी. उन्होंने यह भी कहा कि सीमा क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने और अवैध घुसपैठ रोकने के लिए कई कदम उठाए जाएंगे. राजनीतिक हलकों में यह मुद्दा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल में अवैध कब्जों और कथित अतिक्रमण के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई, पुनर्मतदान और चुनावी हिंसा जैसे मुद्दों पर भी बीजेपी और टीएमसी आमने-सामने हैं.
चिकेन नेक पूरे देश की सुरक्षा के लिए अहम
सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकेन नेक) सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सामरिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।  इसलिए इस क्षेत्र में सुरक्षा, विकास और सामाजिक सौहार्द- तीनों के बीच संतुलन बनाए रखना वर्तमान और पूववर्ती सभी सरकारों के लिए बड़ी चुनौती रही है. पश्चिम बंगाल के CM  शुभेंदु अधिकारी ने भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर फेंसिंग के लिए बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) को जमीन देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।  भारत, बांग्लादेश के साथ 4,097 किमी लंबी सीमा साझा करता है।   पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ लगभग 2,216 किमी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक लगभग 3,240 किमी की सीमा पर बाड़ लगाई जा चुकी है और करीब 850 किमी सीमा की बाड़बंदी होनी बाकी है, जिसमें 175 किमी का दुर्गम भूभाग भी शामिल है।  इस 175 किमी में से 127 किलोमीटर सीमा की फेंसिंग होनी है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि ममता बनर्जी की सरकार में इस खंड में सिर्फ 8 किलोमीटर हिस्से की फेंसिंग हो पाई थी।
केंद्र सरकार ने बंगाल के सीमावर्ती जिलों में बांग्लादेश बॉर्डर पर बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को 15 किमी से बढ़ाकर 50 किमी कर दिया था. यानी बीएसएफ 50 किमी तक के इलाके में तलाशी, गिरफ्तारी और जब्ती कर सकती है. तत्कालीन ममता सरकार ने इसे राज्य के मामलों में हस्तक्षेप बताया था. दिसंबर 2021 में बंगाल विधानसभा में इसके खिलाफ एक प्रस्ताव भी पारित किया था।

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जहांगीर खान ने चुनावी मैदान छोड़ा फलता का, प्रचार खत्म होते ही घंटे भर पहले किया ऐलान

कोलकाता. पश्चिम बंगाल के फलता से टीएमसी प्रत्याशी जहांगीर खान ने चुनावी मैदान से हटने का फैसला किया है। जहांगीर खान ने ऐलान किया था कि अब वह चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होंगे। यह ऐलान उस दिन हुई है जिस दिन चुनाव प्रचार खत्म हो रहा है। बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि चुनाव परिणाम सबको मालूम है। इसलिये कोई कैम्पेन नहीं चल रहा है। सारी गुंडागर्दी खत्म हो गयी। इनको पता है कि बुरी तरह टीएमसी की हार होगी।
फलता डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। जहां दोबारा मतदान की तैयारियों के बीच तृणमूल कांग्रेस के किसी भी बड़े नेता की मौजूदगी नहीं दिखाई दी। इस बात पर भाजपा बंगाल चीफ समिक भट्टाचार्य ने तंज कसते हुए सवाल उठाया। फलता में चुनाव प्रचार के दौरान अभिषेक कहां है। इसी तरह से पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदू अधिकारी ने भी जहांगीर खान पर निशाना साधते हुए पूछा कहा हैं पुष्पा।
‘सिंघम’ बनाम ‘पुष्पा’
पिछले कुछ दिनों से फलता का चुनाव सुर्खियों में बना हुआ है। देखते ही देखते यह चुनाव आम सियासी लड़ाई से आगे निकलकर एक्शन फिल्मों की स्क्रिप्ट जैसा हो गया है। चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा, जिन्हें यूपी की सियासत में ‘सिंघम’ के तौर पर देखा जाता है।  वहीं, TMC उम्मीदवार जहांगीर खान ने एक चुनावी जनसभा में खुलेआम चुनौती देते हुए कहा था, ‘अगर तुम सिंघम हो, तो मैं पुष्पा हूं, पुष्पराज, झुकेगा नहीं.’ इसी वक्तव्य को याद करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सवाल उठाया कि पुष्पा कहां है।

 

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सार्वजनिक जगहों से हटाये जायेंगे कुत्ते-सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने डॉग लवर्स सभी याचिका खारिज करते हुए झटका देते हुए। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने नवम्बर 2025 के उस आदेश में बदलाव करने से मना कर दिया है कि अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, बस स्टेशनों और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक संस्थानों और जगहों पर आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कड़वी सच्चाईयों के सामने आंखें नहीं बंद की जा सकती है।
अपने पिछले निर्देश का बचाव करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाये सार्वजनिक सुरक्षा के लिये एक गंभीर चिंता का विषय बन गयी है। बेंच ने गौर किया था कि देशभर में सामने आयी कई घटनाओं में छोटे बच्चों को कुत्तों ने नोच डाला, बुजुर्गो पर हमले हुए और यहां तक कि विदेशी पर्यटक भी प्रभावित हुए है।
सरकारों का ये कर्तव्य है
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘जमीन पर डार्विन का सिद्धांत- Survival of the Fittest काम करता हुआ लगता है, जहां समाज के कमजोर तबकों को प्रभावी सरकारी कार्रवाई के अभाव में अपनी सुरक्षा खुद करने के लिए छोड़ दिया जाता है.’
कोर्ट ने जोर देकर कहा कि बच्चों और बुज़ुर्गों को ऐसे खतरों से अकेले निपटने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता. सरकारों का यह कर्तव्य है कि वे जिंदगी और सार्वजनिक सुरक्षा की रक्षा सुनिश्चित करें. बेंच ने सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाकर आश्रय स्थलों में भेजने के अपने पिछले आदेश को वापस लेने या उसमें ढील देने से इनकार कर दिया है.

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पेट्रोल-डीजल के दाम 90 पैसे प्रतिलीटर बढ़े

ऑयल कंपनियों ने 90 पैसे तक बढ़ाई कीमतें (Photo-ITG)
नई दिल्ली. देश की सरकारी तेल कंपनियों ने मंगलवार की सुबह पेट्रोल-डीजल की कीमतों में करीब 90 पैसे प्रतिलीटर की और वृद्धि कर दी है। आम जनता के लिये यह दोहरा झटका है क्योंकि पिछले शुक्रवार 15 मई को ही तेल कंपनियों ने लगभग 3 रूपये प्रतिलीटर की बड़ी वृद्धि की थी। एक हफ्ते के अन्दर ईंधन की दरों में यह दूसरी बड़ी वृद्धि है।
बाजार विश्लेषकों और उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार यह वृद्धि वैश्विक स्तर पर जारी कूटनीतिक और सैन्य संकट का सीधा परिणाम है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते गतिरोध और ‘‘होॅर्मुज स्ट्रैट’’ मार्ग पर आपूर्ति बाधित होने की आशंका से अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई है।
चारों महानगरों में अब क्या हैं नए रेट्स?
दिल्ली में अब पेट्रोल 98.64 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, जिसमें 87 पैसे की बढ़ोतरी हुई है, वहीं डीज़ल की कीमत 91.58 रुपये प्रति लीटर है, जो 91 पैसे ज़्यादा है।  राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 97.77 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 98.64 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
मुंबई में पेट्रोल की कीमत 91 पैसे बढ़कर 107.59 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल की कीमत 94 पैसे बढ़कर 94.08 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
कोलकाता में पेट्रोल की कीमत में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो 96 पैसे बढ़कर 109.70 रुपये प्रति लीटर हो गई,  वहीं डीज़ल की कीमत 94 पैसे बढ़कर 96.07 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 82 पैसे बढ़कर 104.49 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल की कीमत 86 पैसे बढ़कर 96.11 रुपये प्रति लीटर हो गई है।

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शुभेंदु अधिकारी के PA की हत्या में शामिल मुख्य आरोपी CBI ने दबोचा

हरिद्वार से दिल्ली भागते समय राजकुमार को पकड़ लिया गया
नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पर्सनल असिस्टेंट (PA) चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में सीबीआई ने बड़ी कार्यवाही करते हुए मुख्य आरोपियों में शामिल राजकुमार को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी राजकुमार हरिद्वार से दिल्ली भागने का प्रयास कर रहा था। इसी बीच दिल्ली सीबीआई और मुजफ्फनगर पुलिस की संयुक्त टीम ने उसे पकड़ लिया है। गिरफ्तारी सुबह के वक्त NH-58 हाइवे स्थित छपार टोल प्लाजा से की गयी। राजकुमार यूपी के बलिया का रहने वाला बताया जा रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार वह इस हत्या के मामले में मुख्य आरोपियों में शामिल है। हालांकि अभी साफ नहीं है कि उसने हत्या क्यों की। इसके पीछे की वजह का पता अभी लगाया जायेगा।
गिरफ्तारी के बाद सीबीआई की टीम आरोपी को कोलकाता लेकर पहुंची है। उसे मंगलवार को अदालत में पेश किया जायेगा। जहां आगे की पूछताछ और रिमांड को लेकर सुनवाई हो सकती है। शुभेंदु अधिकारी के पीए की हत्या का मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। तब सीबीआई की इस गिरफ्तारी को जांच में बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।

 

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MP के परिवहन सचिव को सुप्रीम कोर्ट ने किया तलब, बिना नम्बर प्लेट के दौड़ रहे ट्रैक्टर पर विभाग ने क्या कार्यवाही की

कुछ इस तरह बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों से लगातार रेत उत्खनन जारी है।
मुरैना. चम्बल नदी में अवैध रेत उत्खनन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए मध्यप्रदेश के परिवहन सचिव (पीएस परिवहन) को तलब किया है। 20 मई बुधवार को होने वाली सुनवाई में पीएस परिवहन को कोर्ट में पेश होकर अपना जवाब देना होगा। सर्वोच्च न्यायालय ने सख्त लहजे में पूछा है कि अवैध खनन में लगे वाहनों पर नम्बर प्लेट और रजिस्ट्रेशन ही नहीं होता तो परिवहन विभाग इस मामले में क्या कर रहा है और उसकी क्या भूमिका है।
DFO  हरिश्चन्द्र बघेल ने बताया है कि इस मामले में पिछली सुनवाई 11 मई का होनी थी। हालांकि इसे आगे बढ़ाकर 20 मई तय कर दिया गया है। इसी सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने परिवहन सचिव को जवाबदेही के लिये बुलाया है। मंगलवार को होने वाली सुनवाई के बाद ही मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश सामने आयेंगे।
कलेक्टर के निर्देशों के बाद भी नदारद रहा परिवहन विभाग
सुप्रीम कोर्ट से पहले स्थानीय प्रशासन भी परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा चुका है। 17 मई को ही कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने परिवहन विभाग को एक आधिकारिक पत्र जारी किया था। इसमें जिले भर में बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। इन स्पष्ट निर्देशों के बावजूद परिवहन विभाग मैदानी स्तर पर कार्रवाई करता नजर नहीं आया। कलेक्टर ने अवैध उत्खनन को रोकने के लिए जिले के प्रमुख हाईवे और संवेदनशील क्षेत्रों को चिह्नित कर चेकिंग के निर्देश दिए थे। इनमें मुख्य रूप से नेशनल हाईवे 44, नेशनल हाईवे 552 और नेशनल हाईवे 719 शामिल हैं। इसके अलावा मुरैना, बानमौर, देवगढ़, रछेड़ तिराहा, कैलारस, रामपुर, पोरसा, अटेर तिराहा और बरही जैसे क्षेत्रों में भी कार्रवाई के लिए पॉइंट्स बनाए गए थे।

 

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