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EV खरीद 100% रजिस्ट्रेशन माफ, 2 पहिया पर 30 हजार, दिल्ली EV पॉलिसी में क्या मिलेगा

नई दिल्ली. नई EV पॉलिसी के तहत दिल्ली सरकार की नयी इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी अब राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों का नयी रफ्तार देने के लिये रफ्तार देने के लिये तैयार है। CM  रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में सोमवार को हुई दिल्ली कैबिनेट की बैठक में नयी EV पॉलिसी को मंजूरी दे दी गयी है। सरकार का दावा है कि इस पॉलिसी से इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा मिलेगा। प्रदूषण कम होगा और राजधानी में स्वच्छ परिहवन का मजबूती मिलेगी।
किस व्हीकल पर कितनी छूट
नयी पॉलिसी के तहत सरकार इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की खरीद पर पहले साल 30 हजार रूपये तक प्रोत्साहन राशि, दूसरे साल में 20 हजार रूपये और तीसरे साल में 10 हजार रूपये की इंसेटिव दिया जायेगा। वहीं पैसेंजर थ्री-व्हीलर के लिये यह राशि सालाना आधार पर क्रमशः पहले साल में 50 हजार रूपये, दूसरे साल में 40 हजार और तीसरे साल में 30 हजार रूपये की इंसेटिव दिया जायेगा। इसके अलावा एन1 कैटेगरी यानी छोटे इलेक्ट्रिक ट्रक की खरीद पर ग्राहकों को पहले साल 1 लाख रूपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जायेगी। सरकार का कहना है कि नयी पॉलिसी जिस दिन लागू होती है। उसके 3 माह के अन्दर साढे 3 टन तक के लिये एम2 कैटेगरी के ट्रक्स का नो एंट्री फ्री दी जायेगी। लेकिन यह नियम केवल पहले 1 हजार इलेक्ट्रिक ट्रक की खरीद पर ही लागू होगा।
इन गाडियों के रजिस्ट्रेशन पर प्रतिबंध
सरकार का कहना है कि आने वाले 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में केवल उन्हीं थ्री-व्हीलर और एन1 कैटेगरी के ट्रक्स तक रजिस्ट्रेशन किया जायेगा जो इलेक्ट्रिक होंगे। यानी अब पेट्रोल या सीएनजी से चलने वाले छोटे ट्रक्स और थ्री -व्हीलर के रजिस्ट्रेशन पर प्रतिबंध लगने वाला है। इसक अलावा 1 अप्रैल 2028 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स का ही रजिस्ट्रेशन किया जायेगा। यानी दिल्ली में अप्रैल 2028 से केवल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की ही बिक्री होगी।
रोड़ टैक्स और रजिस्ट्रेशन में छूट
नयी पॉलिसी के तहत प्योर इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर 100प्रतिशत रोड-टैक्स और रजिस्ट्रेशन छूट का ऐलान किया गया है।लेकिन फोर -व्हीलर वाहनों पर ये नियम केवल उन गाडि़यों पर ही लागू होगा। जिनकी एक्स-शोरूम कीमत 30 लाख रूपये तक या उससे कम होगी। यानी देश में बिकने वाले अधिक इलेक्ट्रिक पैसेंजर कार इस नियम के भीतर आ जायेंगे।

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बदल गया NPS का नियम, अब 100प्रतिशत निकासी सिर्फ 5 मिनट में होगा पूरा प्रोसेस

नई दिल्ली. नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) को लेकर आज भी आम लोेगों के बीच काफी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। विशेषकर समय से पहले फंड की निकासी को लेकर लोग परेशान दिखते हैं। नौकरीपेशा लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या 60 साल की उम्र पूरी होने से पहले एनपीएस एकाउंट पूरा पैसा निकाला जा सकता है।
आमतौर पर प्रायवेट सेक्टर के कर्मचारी ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत धारा 80सीसीडी के मिलने वाले 50 हजार रूपये के अतिरिक्त टैक्स बेनीफिट के लिये एनपीएस में निवेश करते आ रहे थे। यही कारण था कि साल 2025 तक इस सरकारी स्कीम में लोगों ने तेजी से पैसे लगाये। हालांकि जब से सरकार ने न्यू टैक्स रिजीम के तहत टैक्स छूट का दायरा बढ़ाकर 12 लाख रूपये किया है। तब से एक बड़ा वर्ग ओल्ड टैक्स रिजीम को छोड़कर न्यू टैक्स रिजीम की ओर शिफ्ट हो गया है। चूंकि नयी व्यवस्था में एनपीएस निवेश पर अलग से कोई टैक्स छूट नहीं मिलती है। इसलिये कई लोगों ने इसमें अपना योगदान बन्द कर दिया है। अब वह जमा राशि को निकालना चाहते है। लेकिन निकासी के सही नियमों की जानकारी नहीं होने की वजह से लोग परेशान है।
समय से पहले खाता बंद करने का क्या नियम है
एनपीएस का मूल रूप से एक लांग टर्म रिटायरमेंट टूल माना जाता है। जिसमें रकम 60 सालकी उम्र तक लॉक रहती है। इस कारण से कई लोग इमरजेंसी में पैसा फंसने के डर से इसमें निवेश करने से बचते है। लेकिन आपको बता दें कि आप 60 साल की उम्र से पूर्व भी अपना खाता बन्द कर सकते है। जिसे ‘‘प्री-मैच्योर एग्जिट’’ कहा जाता है।
5 लाख रूपये वाले नियम का भ्रम करे दूर
अक्सर लोग प्री-मैच्योर एग्जि के मामले में 5 लाख रूपये की लिमिट को सही मान बैठते हैं, जो कि गलत है। दरअसल, 5 लाख रूपये तक का पूरा फंड एक साथ निकालने की छूट केवल तब मिलती है। जब निवेशक की उम्रे 60 साल की जात है यानी नॉर्मल मैच्योरिटी पर समय से पहले खाता बंद करने पर यह लिमिट महल 2.5 लाख रूपये ही तय की गयी है।
2.5 लाख रूपये से ज्यादा का फंड
अगर आपका कुल फंड 2.5 लाख रूपये एक रूपया भी अधिक है। जो आप पूरी रकम कैश नहीं निकाल पायेंगे। ऐसे में नियम के तहत आपको कुल फंड का कम से कम 80प्रतिशत हिस्सा एन्युटी में डालना होगा। जिससे आपको मासिक पेंशन मिलेगी। बाकी बचा हुआ अधिकतम 20प्रतिशत हिस्सा ही आप एक मुश्त निकाल सकते हैं।
ऑनलाइन आवेदन के तरीके
– अपने CRA (Protean) के पोर्टल या ऐप पर PRAN और पासवर्ड से लॉग-इन करें।
– अगर पोर्टल पर ओपन करते हैं तो Manage Your Withdrawal पर क्लिक कर Exit from NPS पर जाकर Initiate             Request को चुनें।
– ड्रॉपडाउन से ‘Premature Exit’ के विकल्प को सेलेक्ट करें।
इसके बाद ध्यान से डिटेल भरें. आवश्यक दस्तावेज के तौर पर पैन कार्ड, आधार कार्ड और कैंसिल्ड चेक या पासबुक स्कैन करके अपलोड करें। आखिर में अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए OTP या Aadhaar e-Sign के जरिए आवेदन को वेरिफाई करके सबमिट कर दें।

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12 दिन जुलाई में बैंकों में नहीं होगा कामकाज

नई दिल्ली. आगामी माह जुलाई में अलग-अलग राज्यों के शहरों में कुल 12 दिन कामकाज नहीं होगा बैंक बन्द रहेंगे। 4 रविवार और दूसरे-चौथे शनिवार के अलावा 6 दिन अलग-अलग जगहों पर बैंक नहीं खुलेंगे। ऐसे में अगर आपको इस माह बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम हो तो इन छुट्टियों के दिनों के अलावा आप बैंक जा सकते हैं।


शनिवार को बैंक बंद रहेंगे?
11 जुलाई को महीने का दूसरा शनिवार होने की वजह से देशभर के बैंक बंद रहेंगे।
25 जुलाई को महीने का चौथा शनिवार है, इस दिन भी देश के सभी बैंकों की छुट्टी रहेगी।
रविवार की छुट्टी कब-कब रहेगी?
5 जुलाई, 12 जुलाई, 19 और 26 जुलाई
ऑनलाइन बैंकिंग के जरिए निपटा सकेंगे काम
आप बैंकों की छुट्टी के बावजूद ऑनलाइन बैंकिंग और ATM के जरिए पैसे का लेनदेन या अन्य काम कर सकते हैं। इन सुविधाओं पर बैंकों की छुट्टियों का कोई असर नहीं पड़ेगा।

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राममंदिर चढ़ावा के आरोपियों के घर पुलिस की छापेमारी

लखनऊ. अयोध्या में रामंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है। इस केस की जांच कर रही टीमों ने रविवार की सुबह तड़के अयोध्या में रहने वाले सभी आरोपियों के घरों पर छापेमारी की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अपनी जांच में तेजी ला रही है। ताकि इस पूरे मामले से जुड़े तथ्यों का पूरी तरह खुलासा हो सके। पुलिस इस मामले के हर एक पहलू का गहराई से देख रही है। जिससे सच्चाई सामने आ सके।
जांच टीम ने अपनी कार्यवाही का दायरा बढ़ाते हुए अयोध्या निवासी आरोपियेां के घरों पर कार्यवाही की है। पुलिस की अलग-अलग टीमें अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और मुख्य आरोपी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, मनीष यादव, करूणेश पांडे और रमाशंकर मिश्रा के घर पहुंच कार्यवाही शुरू की है। इन सभी के ठिकानों पर पुलिस पूरी बारीकी से तलाशी ले रही है। ताकि केस से जुड़े अहम सबूत जुटाये जा सके। जांच टीमें एक-एक घर के कोने खंगाल रही है। ताकि कोई भी सबूत छूटने नहीं पाये।
परिजनों और पड़ोसियों से पूछताछ में जुटी पुलिस
कार्रवाई के दौरान स्थानीय मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पुलिस आरोपियों के परिजनों से पूछताछ कर रही है।  आसपास रहने वाले लोगों से भी इन आरोपियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों की गतिविधियां पिछले कुछ समय में कैसी थीं और क्या मामले से जुड़ा कोई अहम सुराग मिल सकता है।
इस मामले की गहराई से जांच कर रही टीमें सिर्फ चोरी की कड़ियों को ही नहीं जोड़ रहीं, बल्कि आरोपियों की कमाई के जरियों का भी पता लगा रही है। अपराध के जरिए जो पैसा या संपत्ति जुटाई गई है, उसके सोर्स को ट्रेस किया जा रहा है. आरोपियों के पास मौजूद संपत्तियां कहां से आईं और उनके पास फंड कहां से आ रहा था, इसकी पूरी हिस्ट्री निकाली जा रही है।  पुलिस बैंकों के खातों और लेन-देन की भी जांच कर रही है, ताकि यह साफ हो सके कि पैसे को कहां-कहां भेजा गया या किस काम में इस्तेमाल किया गया है।
इस मामले में गिरफ्तार किए गए ये सभी आरोपी राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे और कैश को गिनने के काम से जुड़े हुए थे. जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि इन्होंने वहीं से पैसों का हेरफेर किया. जांच टीमों ने अब तक इस मामले में करीब 79 लाख 85 हजार रुपये बरामद कर लिए हैं. इस मामले में पुलिस ने चोरी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत केस दर्ज किया है।

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गुलमर्ग में एलओसी के नजदीक विस्फटो में 1 शख्स की मौत 4 घायल

गुलमर्ग.जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग पुलिस थाना इलाके में लाईन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) के पास सुमली वाली ढोक में आशा पोस्ट के नजदीक शनिवार को एक रहस्यमय विस्फोट हुआ है। अधिकारियों के अनुसार इस विस्फोट में एक व्यक्ति की मौत हो गयी और 4 अन्य लोग घायल हो गये। शुरूआती रिपोर्ट के अनुसार मृतक की पहचान जबीर अहमद बाजाद के तौर पर हुई है। जो मोहम्मद रफीक बाजाद का बेटा था। बारामूला के चंदूसा मेंगलीबल का रहने वाला था। विस्फोट में उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गयी।
वहीं चारो घायलों का उचार के लिये ले जाया गया है। अधिकारियों ने विस्फोट की वजह का पता लगाने के लिये जांच शुरू कर दी गयी है। एक सीनियर पुलिस अधिकारी के अनुसार यह धमाका तब हुआ जब विक्टिम ने कथित तौर पर एक पुराना शेल छुआ। हालांकि अधिकारी अभी धमाके वाली चीज की असल प्रकृति या धमाके की वजह की पुष्टि नहीं कर पाये है।

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अमेरिका ने अपनी ही नौसेना को दिया बिना आंख वाला एफ35 फायटर जेट

नई दिल्ली. अमेरिका की सबसे एडवांस स्टेल्थ फायटर जेट F35 की कहानी अब एक बड़े घोटाले और देरी की मिसाल बन गयी है। पेंटागन ने हाल ही में मरीन कॉर्प्स को 6 F35 फाइटर जेट बिना रडार के डिलीवरी कर दिये है। नया एएन/एपीजी -85 रडार सिस्टम अप्रैल 2028 तक प्रॉडक्शन शुरू नहीं होगा।
F35  ज्वॉइंट प्रोग्राम ऑफिस के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल ग्रेगरी मासिएलो ने सीनेट की सुनवाई में साफ कहा है कि बिना रडार वाले यह जेट्स पूरी तरह मिशन कैपेबल नहीं माने जा सकते। यह बात इतनी सच्ची है कि इसे कोई छिपा नहीं सकता। दुनिया का सबसे महंगा फायटर प्रोग्राम है। जो अभी तक 400 बिलियन डॉलर से अधिक खर्च कर चुका है। अब तिबना आंखों वाले विमानों को डिलीवर कर रहा है।
अगर भारत F35 खरीदता तो क्या होता
एक ओर यह इंडियन एयरफोर्स को स्टेल्थ टेक्नोलॉजी, बेहतर सेंसर और नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर देता। पाकिस्तान और चीन के एयर डिफेंस को चीरने में मदद करता है। लेकिन दूसरी तरफ बिना रडार वाले जेट्स की डिलीवरी, देरी और भारी खर्च भारत के बजट पर बोझ बन सकता था। भारत एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट AMCA जैसे अपने प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। F35  जैसी विदेशी टेक्नोलॉजी खरीदने से पहले इन समस्याओं को समझना आवश्यक है।
F35 प्रोग्राम की समस्यायें अमेरिकी डिफेंस इंडस्ट्री की कमजोरियों का खुलासा करती है। सच्चाई चेन, प्रॉडक्शन डिले और कॉस्ट कंट्रोल में परेशानी है। ट्रम्प इन मुद्दों पर ध्यान दे रहे हैं। लेकिन समाधान आसान नहीं है। भारत के लिये सबक है कि कोई भी हथियार परफेक्ट नहीं होता है। रडार सॉफ्टवेयर, इंजन और रखरखाव सब पर निर्भर रहना पड़ता है। F35  2028 तक नया रडार मिलने के बाद बेहतर हो सकता है। लेकिन फिलहाल यह प्रोग्राम चुनौतियों से भरा है। भारत को ट्रंप के ऑफर पर फिर से सोचना चाहिये। लेकिन अपनी शर्तो पर , संयुक्त उत्पादन, टेक्नोलॉजी शेयरिंग और लागत प्रभावी डील आवश्यक है।
यह मामला सिर्फ एक जेट का नहीं, बल्कि आधुनिक युद्ध और रक्षा खरीद की जटिलताओं का है। भारत जैसे देश को मजबूत एयरफोर्स चाहिये। लेकिन बिना आंखों वाला विमान नहीं है। ट्रंप की यात्रा और ऑफर ने नये द्वार खोले। लेकिन फैसला सावधानी से लेना होगा। एफ35 की कहानी जारी है। महंगा, शक्तिशाली लेकिन अभी सहीं नहीं है।

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अल-नीनो प्रभाव-केरल में कम हुआ मानसून

नई दिल्ली. केरल में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गयी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार राज्य में इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा में अभी तक 33 प्रतिशत की कमी दर्ज की गयी है। मौसम विभाग के अध्किारियों के अनुसार बारिश की सबसे अधिक कमी वायनाड जिले में देख्ने को मिली है। जहां सामान्य से 64 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इस कम वर्षा से किसानों की चिंता बढ़ गयी है। खेती किसानी पर इसका प्रभाव दिखाई देने लगा है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के डायरेक्टर वीके मिनी ने बताया है कि राज्य के सिर्फ 4 जिले तिरूवनंतपुरम, कोल्लम, पथानामथिट्टा और त्रिशूर में ही अभी तक सामान्य वर्षा हुई है। उन्होंने चेतावनी दी है यदि अगले कुछ दिनों में वर्षा नहीं हुई तो यह जिले में भी कम वर्षा वाले जिलों की कैटेगरी में आ सकते है।
आईएमडी के मानकों के अनुसार अब किसी जिले में बारिश की कमी 198 प्रतिशत से ज्यादा हो जाती है तो उसे बारिश की कम की श्रेणी में रखा जाता है। वर्तमान स्थिति में राज्य के अधिकांश जिलों में यह स्थिति बन चुकी है।

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राम मंदिर ट्रस्ट से चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा


लखनऊ. राममंदिर दान प्रकरण में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। सीएम योगी आदित्यनाथ के सख्त रूख का असर साफ देखने को मिला है। राम जन्मभूमि ट्रस्ट के 2 सदस्य चंपत राय – अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। एसआईटी की शुरूआती रिपोर्ट में कठोर संस्तुति के बाद यह बड़ा फैसला लिया गया है। एसआईटी की सिफारिश पर मामले में पहली एफआईआर पहले ही दर्ज की जा चुकी है। इस्तीफों को जांच में हुई कार्यवाही से जोड़कर देखा जा रहा है।
यह घटनाक्रम सीएम योगी आदित्यनाथ के सख्त रूख और एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के बाद सामने आया है। इससे पहली इसी मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर पहली एफआईआर दर्ज की गयी है। एफआईआर में 8 लोगों का नामजद किया गया है। जबकि कई अन्य अज्ञात लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
एसआईटी फिलहाल कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही है। जांच एजेंसी आरोपियों के बैंक खातों, संपत्तियों, मोबाइल रिकॉर्ड और कथित लेन-देन की पड़ताल में जुटी है। सूत्रों के अनुसार एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में कुछ कड़ी सिफारिशें की गयी थी। जिसके बाद जांच की रफ्तार और तेज हुई है।
लंबे समय से संघ से जुड़े रहे अनिल मिश्रा
डॉ. अनिल मिश्रा अयोध्या के सीनियर डॉक्टर हैं और लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहे हैं। वह श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के संस्थापक ट्रस्टियों में शामिल रहे. ट्रस्ट के भीतर उन्हें मंदिर में आने वाले चढ़ावे की कैश की गिनती, उसके सुरक्षित भंडारण और बैंक में जमा कराने की व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सूत्रों के अनुसार, मंदिर परिसर की साफ-सफाई और कुछ अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी भी उनके कार्यक्षेत्र में शामिल थी।
पहले विश्व हिंदू परिषद, फिर ट्रस्ट से जुड़े थे चंपत राय
चंपत राय विश्व हिंदू परिषद (VHP) के वरिष्ठ नेता रहे हैं। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दिया है। राम मंदिर आंदोलन के शुरुआती दौर से लेकर मंदिर निर्माण और उसके संचालन तक उनकी भूमिका मानी जाती रही है. ट्रस्ट के प्रशासनिक कामकाज, वित्तीय प्रबंधन, भूमि संबंधी मामलों और मंदिर की दैनिक व्यवस्थाओं की निगरानी की जिम्मेदारी उनके पास थी. सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया है कि मंदिर संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय और सूचनाएं उनके स्तर तक पहुंचती थीं। वहीं, उनके करीबी और ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव श्रद्धालुओं की दर्शन व्यवस्था के साथ-साथ चढ़ावे और दान से जुड़ी व्यवस्थाओं को संभालते थे।

 

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में 8 लोगों पर नामजद एफआईआर, एसआईटी की जांच के बाद हुई कार्यवाही

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लखनऊ. अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे में कथित घोटाले मामले में गुरूवार को एफआईआर दर्ज कर ली गयी। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ के ट्रस्ट की शिकायत और एसआईटी की सिफारिश के बाद एफआईआर दर्ज की गयी है। सूत्रों के अनुसार एफआईआर में 8 लोगों को नामजद किया गया है।
इन पर हुई एफआईआर
एफआईआर रमाशंकर यादव (टिन्नू यादव) अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष, करूणेश और लवकुश मिश्रा के खिलाफ दर्ज की गयी है।
ठनमें से 2 मुख्य आरोपी लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा को गिरफ्तार लिया गया है। अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा नोटों की गिनती का काम करते थे। वहीं अविनाश त्रिपाठी, करूणेश पांडे, मनीष यादव और सुभाष को हिरासत में लिया गया है। सुभाष काउंटिंग इंचार्ज की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
आरोप सिद्ध होने पर क्या सजा हो सकती है?
अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावे में गबन के आरोप सिद्ध होने पर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। यह एफआईआर बीएनएस की धारा 61, 306, 316 और 317 के तहत आपराधिक षड्यंत्र रचने, चोरी, विश्वासघात और चोरी की संपत्ति से जुड़े गंभीर अपराध के लिए दर्ज की गई है। इन धाराओं में अपराध का विस्तृत ब्योरा और उनके तहत मिलने वाली सजा का प्रावधान भी स्पष्ट है।
BNS की धारा 61 आपराधिक षड्यंत्र यानी आपराधिक साजिश के बारे में है यानी जब दो या दो से अधिक व्यक्ति मिलकर कोई गैरकानूनी काम करते हैं तो ये धारा लगती है। अगर षड्यंत्र के तहत किए जाने वाले अपराध की सजा मौत, आजीवन कारावास या दो वर्ष से अधिक की कठोर कैद है तो साजिश रचने वाले को उसी अपराध के मुख्य अपराधी के रूप में सजा मिलेगी जबकि इससे कम जघन्य अपराध में  6 महीने तक की कैद, जुर्माना या दोनों होगा।
ये मामला पहली बार 7 जून को राजनीतिक बहस का विषय बना था।  समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने दावा किया था कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपए के दान में गड़बड़ी हुई है। अखिलेश यादव ने अदालत से इस मामले का संज्ञान लेने की भी मांग की थी।

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1 जुलाई से पासपोर्ट बनवाना हुआ महंगा, नॉर्मल कैटेगरी पास 2,500 और तत्काल 5 हजार रूपये में बनेगा, डैमेज या खोने पर 8,500 रूपये तक होगी फीस

नई दिल्ली. विदेश मंत्रालय के एक बयान के बाद से यह सवाल खड़ा हो गया है कि भारत का नागरिक कौन है। आज भारत की अधिकांश जनता के पास ऐसाकोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं है जो साबित करे कि वह भारत का नागरिक है। क्योंकि आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर कार्ड , पासपोर्ट, ड्रायविंग लायसेंस यह सब देश के अलग-अलग कानूनों के हिसाब से बने पहचान पत्र है लेकिन यह नागरिकता की पहचान नहीं है।


1 जुलाई से पासपोर्ट बनवाना या री-इश्यू कराना महंगा हो जायेगा। केन्द्र सरकार ने पासपोर्ट की फीस बढ़ाने का फैसला किया है। 30 पनेज वाले सामान्य पासपोर्ट की फीस 1,500 रूपये से बढ़कर 2,500 रूपये हो जायेगी। वहीं, तत्काल पासपोर्ट के लिये 5 हजार रूपये देने होंगे। जो कि पहले 3,500 रूपये थी।
60 पेज वाले पासपोर्ट की फीस भी बढ़ाई गयी है। इसकी सामान्य फीस 2 हजार रूपये से बढ़ाकर 3,500 रूपये और तत्काल फीस 4 हजार रूपये से बढ़ाकर 6 हजार रूपये हो जायेगी।
विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट रूल्स 1980 में संशोधन के बाद नयी दरों का लेकर गजट नोटिफिकेशन जारी किया है। यह बढ़ोत्तरी 14 साल बाद की गयी है। इससे पहले 2012 में फीस में बदलाव किया गया था।
पासपोर्ट की वैधता में कोई बदलाव नहीं, पहले जैसे ही रहेंगे नियम
फीस बढ़ाने के साथ ही सरकार ने नियमों में वैलिडिटी की स्थिति को भी स्पष्ट किया है। वयस्क आवेदकों के लिए जारी किए गए पासपोर्ट की वैधता पहले की तरह ही अधिकतम 10 साल तक रहेगी।
वहीं, नाबालिगों को जारी किए जाने वाले पासपोर्ट की वैलिडिटी 5 साल या उनके 18 साल की आयु पूरी होने तक (जो भी पहले हो) मान्य रहेगी। इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।

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