बंगाल में कुर्बानी के लिये गाय पालने वाले पछता रहे, शुभेंदु सरकार ने की सख्ती
हावड़ा. पश्चिम बंगाल में पशु-वध कानून का सख्ती से लागू किया जाने के बाद सांकराइल इलाके खटाल संचालकों के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। नयी सरकार क शपथग्रहण के तत्काल बाद वर्ष 1950 के पशु वधन कानून का सख्ती से लागू किये जाने से उन लोगों की परेशानी बढ़ गयी है जो वर्षो से गाय और भैंसों का पालन कर अपने व्यवसाय का संचालन करते रहे है। खटाल मालिकों ने बताया है कि कानून के अचानक सख्ती से लागू होने के कारण वह इसके लिये पहले से तैयार नहीं थे और अब उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सांकराइल ब्लॉक के यदुनाथ हाथी महाश्मशान इलाके आसपास लम्बे समय से कई खटाल संचालित किये जा रहे थे। यहां के संचालकों के अनुसार हर साल बकरीद से पहले ऐसे पशुओं को बेचा जाता था। जो दूध देना बन्द कर चुके होते थे या जिनकी प्रजनन क्षमता समाप्त हो चुकी होती थी। इन पशुओं की बिक्री से मिलने वाली रकम से नये पशु खरीदे जाते थे और इसी चक्र से उनका व्यवसाय चलता था।
भविष्य की संभावित समस्या और उम्मीदें
खटाल मालिकों का कहना है कि यदि सरकार इन पशुओं के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं करती और वे आर्थिक बोझ के कारण पशुओं को सड़क पर छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं, तो इससे नई समस्या पैदा हो सकती है. उनका मानना है कि इस स्थिति से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा पशुओं की समस्या बढ़ सकती है।
इसी कारण उन्होंने सरकार से विशेष व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि उन्हें आर्थिक राहत मिल सके और पशुओं के लिए भी उचित समाधान निकाला जा सके है। अब सभी की नजर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के फैसले पर टिकी हुई है कि सरकार खटाल मालिकों की इस अपील पर क्या कदम उठाती है।

