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MP के परिवहन सचिव को सुप्रीम कोर्ट ने किया तलब, बिना नम्बर प्लेट के दौड़ रहे ट्रैक्टर पर विभाग ने क्या कार्यवाही की

कुछ इस तरह बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों से लगातार रेत उत्खनन जारी है।
मुरैना. चम्बल नदी में अवैध रेत उत्खनन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए मध्यप्रदेश के परिवहन सचिव (पीएस परिवहन) को तलब किया है। 20 मई बुधवार को होने वाली सुनवाई में पीएस परिवहन को कोर्ट में पेश होकर अपना जवाब देना होगा। सर्वोच्च न्यायालय ने सख्त लहजे में पूछा है कि अवैध खनन में लगे वाहनों पर नम्बर प्लेट और रजिस्ट्रेशन ही नहीं होता तो परिवहन विभाग इस मामले में क्या कर रहा है और उसकी क्या भूमिका है।
DFO  हरिश्चन्द्र बघेल ने बताया है कि इस मामले में पिछली सुनवाई 11 मई का होनी थी। हालांकि इसे आगे बढ़ाकर 20 मई तय कर दिया गया है। इसी सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने परिवहन सचिव को जवाबदेही के लिये बुलाया है। मंगलवार को होने वाली सुनवाई के बाद ही मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश सामने आयेंगे।
कलेक्टर के निर्देशों के बाद भी नदारद रहा परिवहन विभाग
सुप्रीम कोर्ट से पहले स्थानीय प्रशासन भी परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा चुका है। 17 मई को ही कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने परिवहन विभाग को एक आधिकारिक पत्र जारी किया था। इसमें जिले भर में बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। इन स्पष्ट निर्देशों के बावजूद परिवहन विभाग मैदानी स्तर पर कार्रवाई करता नजर नहीं आया। कलेक्टर ने अवैध उत्खनन को रोकने के लिए जिले के प्रमुख हाईवे और संवेदनशील क्षेत्रों को चिह्नित कर चेकिंग के निर्देश दिए थे। इनमें मुख्य रूप से नेशनल हाईवे 44, नेशनल हाईवे 552 और नेशनल हाईवे 719 शामिल हैं। इसके अलावा मुरैना, बानमौर, देवगढ़, रछेड़ तिराहा, कैलारस, रामपुर, पोरसा, अटेर तिराहा और बरही जैसे क्षेत्रों में भी कार्रवाई के लिए पॉइंट्स बनाए गए थे।

 

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