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लंदन म्यूजियम वाली भोजशाला की मां वाग्देवी की प्रतिमूर्ति ओरिजनल मूति की हूबहू 15 वर्षो से ग्वालियर में है

ब्रिटिश म्यूजियम ग्रेट रसल स्ट्रीट में मां वाग्देवी की यह प्रतिमा रखी हुई है।
ग्वालियर. मध्यप्रदेश के धार स्थिति ऐतिहासिक भोजशाला के गर्भगृह में स्थापित करने के लिये अष्टधातू वांग्देवी की प्रतिमा ग्वालियर के स्टूडियों में 15 वर्षो वालियर कास्ट की गयी थी। वाग्देवी (सरस्वती)की प्रति को वर्ष 2011 में बसंत पंचमी के मौके पर मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा होना तय थी। लेकिन उस वक्त हुए सांप्रदायिक और प्रशासनिक विवाद के चलते इसे ग्वालियर में ही रोक दिया गया था। अब हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद मूर्तिकार के घर में भी उम्मीद का दीया जल उठा है।


मूर्तिकार स्वर्गीय प्रभातराय के सुपुत्र अनुज ने बताया है कि वर्ष 2011 में राष्ट्रीय स्वयं संघ (आरएसएस) के सीनियर नेता नवलकिशोर जी ने उन्हें इस मूर्ति को बनाने का ऑर्डर दिया था। वर्ष 2011 जब मूर्ति बन कर तैयार हुई थी। इसे धार भेजने की तैयार थी। तभी वहां धार्मिक और प्रशासनिक विवाद भड़क गया था, जिससे प्रशासन ने सुरक्षा वजहों से मूर्ति को ग्वालियर में ही रोकने का आदेश दिया था। उस समय विवाद इतना बढ़ा कि करीब 2 हफ्तों तक 2-5 पुलिसकर्मी हमारे निवास पर सुरक्षा में तैनात रहे। इसके बाद भी वर्ष 2011-2015 तक हर बसंत पंचमी पर पुलिस प्रोटेक्शन के साये में ही 2-3 दिन के मूर्ति रखी जाती थी।
अब मौन धारण किया नवल किशोर ने
ग्वालियर आरएसएस पदाधिकारी लोकेंद्र मिश्रा ने बताया कि 2011 के बाद आरएसएस प्रचारक नवल किशोर अब वर्तमान में चेतनदास जी महाराज बन गए हैं और अभी महेश्वर में है। उन्होंने अब मौन धारण कर लिया हैं। ऐसे में मूर्ति का अब आगे क्या होगा इसके बारे में से नवल किशोर ही बता सकते थे लेकिन अब मूर्ति का क्या होगा इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता।

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