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अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ट्रक के ड्राइवर और हेल्परों तक कार्यवाही सीमित नहीं रखे, बड़ी मछलियों को भी पकड़ो

भोपाल. राष्ट्रीय चम्बल घडि़याल अभ्यारण में अवैध रेत खनन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मप्र सरकार को सख्त संकेत दिये है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कार्यवाही सिर्फ ट्रकों के चालकों और हेल्परों तक सीमित नहीं रहनी चाहिये। बल्कि अवैध खनन में शामिल बड़ी मछलियों तक पहुंचना आवश्यक है।
दरअसल, अवैध रेत खनन के मामले में सुप्रीम कोर्ट स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है। बुधवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने एमपी, राजस्थान और यूपी की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों के पालन पर सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखने के लिये कहा है कि 26 मई को विस्तृत आदेश जारी किया जायेगा। मप्र सरकार की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि जंगल इलाके में बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों की निगरानी बढ़ाई है। कई वाहनों के चालान काटे गये हैं। अवैध खनन रोकने के लिये कार्यवाही की जा रही है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ ड्रायवरों और हेल्परों पर कार्यवाही पर्याप्त नहीं है। बल्कि अवैध खनन में शामिल बड़ेे नेटवर्क और मुख्य आरोपियों तक पहुंचना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट को बताया गया है कि तनों राज्यों ने जीपीएस सिस्टम और हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाने का रोडमैप पेश किया है। अमिकस क्यूरी सीनियर एडवोकेट निखिल गोयल ने कहा है कि राज्यों ने अनुपालन रिपोर्ट दाखिल कर दी है। लेकिन निगरानी और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिये कुछ और वक्त चाहिये।
राजस्थान सरकार पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले राजस्थान में वन विभाग में फॉरेस्ट गार्ड की भारी कमी पर भी चिंता जताई। अदालत ने कहा कि प्रशिक्षित वनकर्मियों की जगह होमगार्ड से काम लिया जा रहा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि उसे जानकारी मिली है कि होमगार्ड वन विभाग की गाड़ियां तक चला रहे हैं।राजस्थान सरकार ने कोर्ट को बताया कि अवैध रेत खनन में इस्तेमाल होने वाले 40 संवेदनशील रास्तों की पहचान कर ली गई है। वहां हाई-रिजॉल्यूशन CCTV कैमरे लगाने के लिए फंड मंजूर हो चुका है। राज्य सरकार के मुताबिक यह काम एक साल में पूरा करने का लक्ष्य है। कैमरों की लाइव फीड ‘अभय कमांड कंट्रोल सेंटर’ से जोड़ी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को फॉरेस्ट गार्ड भर्ती प्रक्रिया तेजी से पूरी करने के निर्देश भी दिए।
मुरैना बॉर्डर पर पुल को लेकर NHAI से भी सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को भी पक्षकार बनाया है। कोर्ट ने NHAI से मुरैना-धौलपुर बॉर्डर के पास बने पुल की सुरक्षा पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है, क्योंकि उसके आसपास लगातार अवैध खनन हो रहा है।

 

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