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हमीरपुर में निर्माणाधीन का स्लैब गिरने से 6 मजदूरों की मौत, अधिकारी बोले -आंधी -बारिश की वजह से गिरा स्लैब

पुल हमीरपुर जिले में बेतवा नदी पर बन रहा था। तड़के जब हादसा हुआ, उस वक्त कुछ मजदूर ऊपर काम कर रहे थे, जबकि कुछ पुल के नीचे सो रहे थे। - Dainik Bhaskarहमीरपुर. उत्तरप्रदेश के हमीरपुर में बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल का स्लैब गुरूवार-शुक्रवार की देर रात 2 बजे गिरने से घटनास्थल पर 6 श्रमिकों की मौत हो गयी। स्टेट डिजास्टर रिस्पॉस फोर्स ने मलबे में 3 मजदूरों को निकाला। 7.30 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चला है। यूपी ब्रिज कार्पोरेशन के एमडी धर्मवीर सिंह ने बताया है कि आंधी बारिश की वजह से स्लैब गिर और नीचे सो रहे मजदूर दब गये। हादसे के बाद सहायक अभिंयता गजेन्द्र चौधरी को निलंबित कर दिया गया है। डीपीएम दिलीप कुमार पर विभागीय कार्यवाही शुरू की गयी है।
मौसम विभाग के अनुसार हमीरपुर में देर रात 70-80 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से आंधी चली थी। हादसा शहर से 25 किमी दूर ललपुरा इलाके में हुआ है। मृतकों में 4 बांदा और 2 हमीरपुर के निवासी है। एसडीआरएफ के अधिकारी ने बताया है कि रात 2.30 बजे से शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा हो चुका है।
प्रत्यक्षदर्शी सुरेक्ष कुमार ने बताया है कि पुल पर 2 शिफ्ट में काम चल रहा था। जिस समय आंधी आई पहली शिफ्ट के लोग पुल के नीचे थे। जबकि दूसरी शिफ्ट के 7 मजदूर पुल पर काम कर रहे थे। उनमें मैं भी, आंधी से बचने के लिये हम लोग पुल पर लेट गये। इस दौरान हादसा हो गया। उत्तरप्रदेश राज्य सेतु निगम पुल का निर्माण करवा रहा है। इसकी लागत 90 करोड़ रूपये है। 700 मीटर लम्बा 2 लेन का ब्रिज मोराकांड से कुरारा गांव के बीच बनाया जा रहा है। इसका निर्माण मार्च 2024 में शुरू हुआ था। दिसम्बर 2026 तक इसे पूरा किया जाना है।

 

 

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बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग के लिये हिन्दू दान दे रहे हैं जमीन

नई दिल्ली. भारत और बांग्लादेश की सीमा पर घेराबंदी का काम तेजी से चल रहा है। कूच बिहार जिले के माथाभंगा आई ब्लॉक के सतग्राम मानबारी इलाके 3 निवासियों ने भारत -बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी के काम का आसान करने के लिये स्वेच्छा से 33 डेसिमल जमीन दान की हैं।
इनका कहना है कि बॉर्डर की घेराबंदी नहीं होने के कारण से यहां लगातार घुसपैठ और तस्करी होती रही है। इससे उनके फसलों को भी नुकसान होता है। जमीन देने वाले विकास रॉय ने कहा है कि उन्होंने गांव की भलाई और देश की सुरक्षा के लिये जमीन दान की है। उन्होंने जोर देकर कहा हैकि बाड़ लगाने से घुसपेठिये सीमा पार नहीं कर पायेंगे। केन्द्र सरकार की इस पहल की और तारीफ करते हुए उन्होंने कहा है किबाड़ का काम पूरा होने के बाद गांव और देश दोनों सुरक्षित हो जायेंगे।

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भारतीय वायुसेना को जल्द ही मिलेगा 5वीं पीढ़ी का स्टेल्थ फायटर एमका, 3 कंपनियों को दिया प्रपोजल

नई दिल्ली. रक्षा मंत्रालय ने भारत के सबसे महात्वाकांक्षी स्वदेशी लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) को नयी गति दे दी है। रक्षा मंत्रालय ने आज 3 चुनिंदा कम्पनियों को रिक्वेस्ट फॉर प्रोपोजल (आरएफपी) जारी कर दिया है। यह कदम भारत को अपनी पहली 5वी के स्टेल्थ फायटर जेट बनाने की दिशा में बड़ा और ठोस कदम माना जा रहा है। ंएमका भारत का पहला स्वदेशी 5वीं पीढी का मल्टीरोल स्टेल्थ लड़ाकू विमान है। यह ट्विन इंजन वाला, बेहद एडवांस्ड विमान होगा जो दुश्मन के रडार में आसानी से पकड़ा नहीं जायेगा। इसका डिजायन एयरोनॉटिकल डवलपमेंट एजेंसी (एडीए)ने डीआरडीओ के तहत तैयार कर किया है। यह विमान भारतीय वायुसेना के पुराने लड़ाकू विमनों की जगह लेगा। क्षेत्र में हवाई श्रेष्ठता बनाये रखने में मदद करेगा। एमका में स्टेल्थ टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड एवियोनिक्स, सेंसर फ्यूजन और नेटवर्क -सेंट्रिक वॉरफेयर जैसी आधुनिक सुविधायें होंगी।
प्रोजेक्ट का महत्व
AMCA प्रोजेक्ट भारत के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक है…
मेक इन इंडिया अभियान को मजबूती मिलेगी.
यह भारत को पांचवीं पीढ़ी की फाइटर टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बनाएगा.
देश में हाई-टेक एयरोस्पेस इंडस्ट्री का विकास होगा और हजारों कुशल रोजगार पैदा होंगे.
स्टेल्थ तकनीक, सुपरक्रूज क्षमता और उन्नत सेंसर जैसी विश्व स्तरीय सुविधाएं भारतीय विमान में आएंगी.
तीन कंपनियों को दिया गया RFP
रक्षा मंत्रालय ने निम्नलिखित तीन कंसोर्टियम को RFP जारी किया है…
लार्सेन एंड टूब्रो- भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड (L&T-BEL) कंसोर्टियम
टाटा एडवांस सिस्टम्स
भारत फोर्ज- बीईएमएल कंसोर्टियम
इन तीनों में से एक विजेता कंपनी को चुन लिया जाएगा. विजेता कंपनी ADA और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ मिलकर AMCA के प्रोटोटाइप विकसित करेगी और बाद में बड़े पैमाने पर उत्पादन भी करेगी.

 

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केरल के पूर्व सीएम पिनारई विजयन के घर ईडी के अधिकारियों पर किया पथराव

ED की 12 सदस्य की टीम विजनय के घर पर रेड डालने पहुंची। तब उस पर हमला हुआ। - Dainik Bhaskarनई दिल्ली. केरल के पूर्व सीएम के तिरूवनंतपुरम स्थित बंगले से ED अधिकारियों के बाहर निकलने के दौरान हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला है। कन्नूर में पिनाराई विजयन के घर चली ED की छापेमारी समाप्त होने के बाद अधिकारी बाहर निकलने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन पार्टी कार्यकर्त्ताओं ने गेगट पर उन्हें रोक लिया।

रेड और हमले की 6 तस्वीरें…

ED की 12 सदस्यीय टीम बुधवार सुबह 7 बजे विजयन के घर और अन्य ठिकानों पर रेड डालने पहुंची।
ED की 12 सदस्यीय टीम बुधवार सुबह 7 बजे विजयन के घर और अन्य ठिकानों पर रेड डालने पहुंची।
अधिकारियों के अलावा सुरक्षाबल भी रेड के दौरान विजनय के घर पर मौजूद थे।
अधिकारियों के अलावा सुरक्षाबल भी रेड के दौरान विजनय के घर पर मौजूद थे।
दोपहर में जब टीम रवाना होने लगी तो सीपीआई समर्थकों ने ED अफसरों की कारों को घेर लिया।
दोपहर में जब टीम रवाना होने लगी तो सीपीआई समर्थकों ने ED अफसरों की कारों को घेर लिया।
समर्थकों ने कारों को रोकने के लिए उन पर लाठी-डंडा, बोतल, पत्थर हमला किया। पुलिसकर्मियों लोगों को दूर हटाते दिखे।
समर्थकों ने कारों को रोकने के लिए उन पर लाठी-डंडा, बोतल, पत्थर हमला किया। पुलिसकर्मियों लोगों को दूर हटाते दिखे।
सीपीआई समर्थकों ED अफसरों की कार के गेट पर लात मारते दिखे। विंड शील्ड पर ईंट मारी गई, जिससे वह टूट गई।
सीपीआई समर्थकों ED अफसरों की कार के गेट पर लात मारते दिखे। विंड शील्ड पर ईंट मारी गई, जिससे वह टूट गई।
पत्थर के कारण कार का पीछे का ग्लास टूट गया। पुलिसकर्मियों ने कार को भीड़ से बचाकर आगे निकाला।
पत्थर के कारण कार का पीछे का ग्लास टूट गया। पुलिसकर्मियों ने कार को भीड़ से बचाकर आगे निकाला।

कार्यकर्त्ता नारेबाजी करते हुए ED अधिकारियों से सवाल पूछने लगे और गेट के बाद तनावपूर्ण माहौल निर्मित हो गया। स्थिति को संभालने के लिये पार्टी के सीनियर नेता और स्थानीय पदाधिकारी समर्थकों को शांत कराने में जुटे रहे। काफी देर तक अफरा-तफरी और धक्का-मुक्की जैसे हालात बने रहे। जिसके बाद अधिकारियों को बाहर निकालने का प्रयास किया गया।
केरल के पूर्व सीएम और मौजूदा नेता प्रतिपक्ष पिनाराई विजयन के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय की काय्रवाही को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। इस मामले में CPI (M) के महासचिव MA बेबी ने केन्द्र सरकार और ED पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि यह पूरी कार्यवाही राजनीतिक मकसद से प्रेरित है। विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने की रणनीति का हिस्सा है। एमए बेबी ने कहा है कि हम अच्छी तरह से जानते हैं कि देश के अलग-अलग हिस्सों में दिल्ली सहित कई जगहों पर बड़े राजनीतिक नेताओं, मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों के खिलाफ मनगढं़त आरोप लगाकर गिरफ्तारियां की गयी है। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के मामले में भी हमने देखा है कि ट्रायल कोर्ट ने उन्हें राहत दी है। इसलिये यह भाजपा-आरएसएस की राजनीतिक रणनीति का विस्तार है।

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TMC 100 से अधिक पार्षदों ने दिया इस्तीफा, BJP की बैठक में 6 विधायकों के साथ पहुंची सांसद काकोली

कोलकाता. बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के अन्दर हलचल जारी है। टीएमसी सांसद काकोली घोष ने खुलकर असंतोष जताना शुरू कर दिया है। जबकि TMC  नियंत्रित नगर निकायों में चल रही अंदरूनी कलह के कारण से सामूहिक इस्तीफों का दौर शुरू हो गया है। इस दौरान मंगलवार को काकोली समेत पार्टी के 6 विधायकों ने बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में हिस्सा लिया है।
बंगाल क राजनीतिक गलियारों में इसके कई मायने निकाले जारहे है। काकोली ने हालही में जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। ऐसे वक्त में राज्य की भाजपा सरकार के अधिकारिक मंच पर उनकी मौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है। काकोली के अलावा इस बैठक में देगंगा से टीएमसी विधायक अनीसुर रहमान विश्वास, स्वरूपनगर की बीमा मंडल, हरौआ के मोहम्मद अब्दुल मतीन और बसीरहाट इलाके के 3 अन्य विधायक भी शामिल हुए है।
बता दें कि बीते कुछ दिनों में विभिन्न नगरपालिकाओं के करीब 100 पार्षद इस्तीफा दे चुके है।  इस राजनीतिक उथल-पुथल ने बीजेपी के लिए उन नगर निकायों में अपनी पकड़ मजबूत करने का मौका खोल दिया है, जो अब तक बड़े पैमाने पर टीएमसी के नियंत्रण में रहे है।
ये संकट इतना गंभीर हो गया है कि अगले साल होने वाले नगर निकाय चुनावों से पहले ही कई नगरपालिका बोर्ड भंग किए जा सकते है। ऐसी अटकलें तेज हैं कि ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी और कोलकाता के मेयर फिरहाद हाकिम ने भी पद छोड़ने की इच्छा जताई है. हालांकि हाल ही में ममता बनर्जी ने पार्षदों से इस्तीफा न देने की अपील की थी लेकिन बंगाल के नगर निकायों में उथल-पुथल के संकेत लगभग हर दिन सामने आ रहे है।  बता दें कि 1998 में कांग्रेस से अलग होकर पार्टी बनाने के बाद से यह तृणमूल कांग्रेस के सामने आया सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है।  पहले भी कई मौकों पर ममता बनर्जी पार्टी को एकजुट रखने वाली मजबूत कड़ी साबित हुई थीं, लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग दिखाई दे रही है।

 

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चंबल रेत खनन पर MP, UP को चेतावनी, राजस्थान पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी

चंबल सेंक्चुरी में मौजूद घड़ियाल।

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने चम्बल अभ्यारण्य में अवैध रेत खनन के मामले में 26 मई को आदेश जारी किया है। जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने राजस्थान सरकार की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई है। जबकि मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की कार्यवाही को भी नाकाफी बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अवैध उत्खनन अभी भी बेलगाम चल रहा हैं प्रशासनिक लापरवाही साफ दिखाई दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 मई को रिजर्व रखे गये मामले में आज विस्तृत फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने तीनों राज्यों (एमपी, यूपी और राजस्थान) को नयी सख्त दिशा-निर्देश दिये और कहा है कि पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा अब और टाल-मटाल बर्दाश्त नहीं की जायेगी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को आगे भी निगरानी में रखा है। राज्यों में नये कॉम्पलायंस एफिडिवेट मांगे है।
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार की कार्यवाही को बहुत खराब अनुपालन बताते हुए कहा है कि 2-17 अप्रैल के आदेशों का पालन लगभग नहीं हुआ है। सीसीटीवी और जीपीएस औेर निगरानी व्यवस्था अभी भी प्रारंभिक चरण में है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कई महत्वपूर्ण फैसले केवल कोर्ट के सख्त आदेश के बाद लिये गये है। जो प्रशासनिक लापरवाही दशा्रता है।
मप्र सरकार ने अनरजिस्टर्ड व्हीकल्स पर कुछ कार्रवाई बताई (मुरैना में 1641 वाहन चालान), लेकिन कोर्ट ने कहा कि केवल चालान काटकर जुर्माना वसूलना पर्याप्त नहीं। बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों को जब्त करने, मालिकों के खिलाफ कार्रवाई और मास्टरमाइंड तक पहुंचने की व्यवस्था अभी भी कमजोर है।
कोर्ट ने जो प्रमुख बातें कहीं- राजस्थान सरकार पर टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि राजस्थान में अनुपालन की स्थिति बेहद खराब है। कई महत्वपूर्ण कदम (CCTV, सर्विलांस सिस्टम) 18 से 36 महीने बाद पूरे होने वाले हैं, जो स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वीकार्य नहीं। कोर्ट ने प्रशासनिक आलस्य और लापरवाही पर गहरी चिंता जताई।
मध्य प्रदेश पर टिप्पणी
कोर्ट ने मप्र की कार्रवाई को अपर्याप्त बताया। अनरजिस्टर्ड और बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों पर केवल चालान काटना और छोटा जुर्माना वसूलना पर्याप्त नहीं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे वाहनों की जब्ती, मालिकों के खिलाफ मुकदमा और किंगपिन्स तक पहुंचना जरूरी है, अन्यथा अवैध खनन जारी रहेगा।
अनरजिस्टर्ड वाहनों पर चिंता
कोर्ट ने कहा कि बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों का खुलेआम चलना अवैध खनन को बढ़ावा दे रहा है। केवल जुर्माना वसूलकर छोड़ देने से माफिया प्रभावित नहीं होते। कोर्ट ने सख्त कार्रवाई (जब्ती, ब्लैकलिस्टिंग, प्रॉसेक्यूशन) के निर्देश दिए।

सभी तीनों राज्यों (राजस्थान, मप्र, यूपी) को दिए यह आदेश
फॉरेस्ट गार्ड्स और फील्ड स्टाफ की भर्ती तुरंत पूरी करें।
अनरजिस्टर्ड और बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों पर जब्ती और मुकदमा की सख्त कार्रवाई की जाए।
CCTV, GPS ट्रैकिंग और जॉइंट पेट्रोलिंग को जल्द पूरा करें।
स्थानीय लोगों के लिए वैकल्पिक रोजगार योजनाएं बनाएं।
नई कॉम्पलाइंस एफिडेविट अगली सुनवाई में दाखिल करें।
NHAI को यह आदेश दिया
NH-44 के मोरेना-धौलपुर पुल की सुरक्षा के लिए CCTV लगाने और नियमित निगरानी करने के निर्देश।
पुल के आसपास 1 किमी ऊपर और 0.5 किमी नीचे खनन पूरी तरह रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन से समन्वय।

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जल्दी-जल्दी भागो अवैध बांग्लादेशियों को सीएम शुभेंदु ने चेताया

नई दिल्ली. पश्चिम बंगाली की शुभेंदु सरकार अवैध बांग्लादेशियों का लेकर एक्शन मोड में आ गयी है। सीएम शुभेंदू अधिकारी ने अवैध बांग्लादेशियों को कड़ी चेतावनी दी है। शुभेंदु सरकार की तरफ से इस संबंध में पश्चिम बंगाल के सभी जिलाधिकारियों को लिखित निर्देश और गाइडलाइंस जारी की गयी थी। सरकार ने सभी जिला अधिकारियों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में इन होल्डिंग सेंटरों का बनाने के लिये सही जगह की पहचान करने और आगे की कार्यवाही जल्द से जल्द शुरू करने के लिये कहा है।
शुभेंदु अधिकारी ने अवैध बांग्लादेशियों को चेताते हुए कहा है कि जल्दी-जल्दी भागों। हमें इन्हें जेल में रखकर खिलाना नहीं चाहते हैं। हमें अपना पैसा इन्हें जेल में रखकर खिलाने में क्यों बर्बाद करना चाहिये। हमने पुलिस से इन्हें सीधे बांग्लादेश भेजने के लिये कह दिया है। इससे पहले पश्चिम बंगाल सरकार न राज्य में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को लेकरबहुत बड़ा कदम उठाया था। राज्य सरकार ने अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को उनके देश वापिस भेजने क लिये विशेष होल्डिंग सेंटर बनाने के निर्देश जारी किये थे।
क्या है बंगाल की ‘डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट’ नीति?
बंगाल में बीजेपी सरकार की नई ‘डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट’ नीति के बीच स्टेट बॉर्डर के कई पॉइंट्स पर कथित तौर पर अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के बड़े-बड़े समूह इकट्ठा होने लगे है।  उत्तरी 24 परगना और मालदा से आ रही तस्वीरों और वीडियो से पता चलता है कि राज्य का घुसपैठ रोधी अभियान अब सिर्फ सियासी बयानबाजी से आगे बढ़कर प्रशासनिक कार्रवाई का रूप ले चुका है।  बता दें कि बीजेपी ने इस साल हुए बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान राज्य से अवैध प्रवासियों को निकालने का वादा किया है। अमित शाह ने अपने एक संबोधन में साफ तौर पर कहा था कि जिस तरह बीजेपी ने असम में घुसपैठ को पूरी तरह से खत्म किया, उसी तरह पार्टी बंगाल में भी अवैध घुसपैठ पूरी तरह से खत्म कर देगी. अब राज्य में बीजेपी की सरकार कायम होने के बाद, पार्टी अपने उस वादे को पूरा करने में जुट गई है।
उत्तरी 24 परगना के बशीरहाट सब-डिवीजन में स्थित हकीमपुर चेकपॉइंट पर मंगलवार सुबह 100 से ज्यादा बांग्लादेशी पुरुष और महिलाएं इकट्ठा है।   ये सभी अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके वापस अपने देश लौटना चाहते थे। ये लोग कथित तौर पर बंगाल के अलग-अलग इलाकों में अवैध रूप से रह रहे थे। विदेशी नागरिकों को देश से निकालने और उनके लिए होल्डिंग सेंटर बनाने के संबंध में सरकार की हालिया घोषणाओं के बाद वे चेकपॉइंट पर पहुंचे ।

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धर्मेन्द्र को मरणोपरांत मिला पद्म विभूषण सम्मान, हेमा ने ग्रहण किया  तो रो पड़ी बेटी अहाना

नई दिल्ली. 25 को लेजेंडरी अभिनेता धर्मेन्द्र को मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। हीमैन का यह पुरस्कार उनकी पत्नी हेमामालिनी ने ग्रहण किया है। यह पल उनके लिये बेहद भावुक रहा। हेमा अपनी बेटी अहाना संग राष्ट्रपति भवन पहुंची थी। पुरस्कार लेते समय वह भावुक दिखाई दी। वहीं, बेटी अहाना अपने आंसुओं को रोक नहीं पायी। वह पिता के लिये तालियां बजाते हुए रोने लगी। यह पल धर्मेन्द्र के फैंस को भावुक कर गया है।
रोक नहीं पायी आंसू अहाना
अहाना के पति वैभव वोहरा भी मौजूद दिखे। वह पत्नी अहाना को संभालते हुए दिखाई दिये। हेमामालिनी अवॉर्ड समारोह में पिंक साड़ी में दिखाई दी। जैसे ह ीवह पति धर्मेन्द्र का मरणोपरांत पद्म विभूषण लेने राष्ट्रपति के पास पहुंची। वह भावुक दिखी। उनके चेहरे पर धर्मेन्द्र को खोने का गम साफ दिखाई दिया। हेमा ने अपने आंसुओं को रोकते हुए। राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू से यह अवॉर्ड ग्रहण किया। पिता को मरणोपरांत पद्म विभूषण मिलता देख अहाना रोने लगी। यह पल धर्मेन्द्र के सभी फेंस के दिलों को छू गया है।

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अभिषेक बनर्जी के बंगले पर पहुंची कोलकाता पुलिस, अवैध निर्माण का दिया गया था नोटिस

कोलकाता. तृणमूल कांग्रेस पार्टी के नेता और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के आवास पर कोलकाता पुलिस पहुंची है। भारी तादाद में पुलिस अभिषेक बनर्जी के आवास पर तैनाती दिखाई दी। अभिषेक बनर्जी के 188ए हरीश मुखर्जी रोड स्थित आवास पर सोमवार को पुलिस पहुंची। ऐसा कहा जा रहा है कि यह कार्यवाही अवैध निर्माण को लेकर कोलकाता नगरनिगम की तरफ से जारी किये गये एक नोटिस के बाद हुई है। हालांकि पुलिस के वहां पहुंचने का आधिकारिक कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।
पुलिस की टीम लगभग एक घंटे तक अभिषेक के आवास पर रहने के बाद शाम तकरीबन पांच बजे लौट गई।  इस मामले पर ना तो अभिषेक बनर्जी और ना ही TMC  की ओर से किसी तरह का बयान जारी किया गया है।  इससे पहले राज्य की शुभेंदु सरकार ने अभिषेक बनर्जी की Z+ सिक्योरिटी वापस ले ली थी।  इसके अलावा कालीघाट स्थित उनके आवास और कैमैक स्ट्रीट पर उनके ऑफिस कैंपस के बाहर तैनात पुलिसबल को भी वापस बुला लिया गया था।
बता दें कि इससे पहले बंगाल विधानसभा के चुनाव प्रचार के दौरान कथित भड़काऊ भाषण देने के मामले में बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ FIR  दर्ज की गई थी.यह FIR सामाजिक कार्यकर्ता राजीव सरकार की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी. पुलिस में दर्ज की गई शिकायत के मुताबिक, आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी ने 27 अप्रैल से 3 मई के बीच हुए कई चुनावी कार्यक्रमों के दौरान भड़काऊ बयान दिए. इन भाषणों से दुश्मनी को बढ़ावा मिला, सार्वजनिक शांति भंग हुई और इनमें केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को सीधे तौर पर धमकियां भी दी गईं।

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ग्वालियर कलेक्टर सहित 46 -IAS 10 जून से मिड करियर ट्रेनिंग के लिये मसूरी के लिये रवना होंगे

ग्वालियर. शहरवासियों की परेशानियों, स्कूल संचालक की मनमानी हो या बच्चों के स्कूल की किताबों और ड्रेसों तत्काल समाधान के तौर पर सभी स्कूल संचालकों को ग्वालियर व्यापार मेला लगाने से चर्चा में ग्वालियर कलेक्टर रूचिका चौहान और बेहतर प्रशासन चलाने और सुशासन की ट्रेनिंग लेने के लिये मसूरी जाने वाली है। वही, दूसरी ओर ब्राहम्णों की बेटियों को लेकर विवादित बयान देने वाले आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा सामाजिक विरोध झेल रहे इस अधिकारी को 5 माह से अधिक समय से सरकार ने बिना काम के बैठा रखा है। मसूरी में सुशासन और बदलते दौर व बदलती तकनीक के साथ कदमताल करते हुए सुशासन की ट्रेनिंग लेने के लिये 46 आईएएस अधिकारी रवाना होने वाले है।
10जून से 10 जुलाई तक मसूरी में होने वाले चौथे फेज की मिड करियर ट्रेनिंग के लिये यह अधिकारी चिन्हित किये गये है। जिसके लिये सामान्य प्रशासन विभाग ने करियर ट्रेनिंग पर जाने के निर्देश भी जारी किये जा चुके है। इसमें कलेक्टर ग्वालियर, रीवा, धार, पन्ना, सागर और संभागायुक्त उज्जैन के भी नाम शामिल है। इन अधिकारियों ने अभी तक मिड करियर ट्रेनिंग में भाग नहीं लिया है।
2012 बैच के ये अफसर जाएंगे
2012 बैच के जिन अफसर को मसूरी भेजा जाएगा उसमें सीईओ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन हर्षिका सिंह, अपर सचिव सामान्य प्रशासन विभाग अजय कटेसरिया, आयुक्त महिला और बाल विकास निधि निवेदिता, अपर सचिव वित्त विभाग, रोहित सिंह, ओएसडी सह आयुक्त आर्थिक एवं सांख्यिकी स्वरोचिष सोमवंशी, प्रबंध संचालक राज्य भंडार गृह निगम अनुराग वर्मा, सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल, धार कलेक्टर राजीव रंजन मीणा शामिल हैं। इसके अलावा सीईओ एमपी ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण दीपक आर्य, अपर सचिव गृह आशीष भार्गव, ओएसडी सह आयुक्त तकनीकी शिक्षा अवधेश शर्मा, एमडी राज्य कृषि विपणन बोर्ड कुमार पुरुषोत्तम, अपर सचिव सामान्य प्रशासन विभाग सुभाष कुमार द्विवेदी, अपर आयुक्त राजस्व उज्जैन रत्नाकर झा, अपर सचिव विमानन धरर्णेन्द्र कुमार जैन, कलेक्टर रीवा नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी, अपर सचिव वाणिज्यिक कर विभाग राजेश ओगरे, अपर सचिव मुख्यमंत्री अरुण कुमार परमार, उप सचिव संतोष कुमार वर्मा, अपर सचिव वन विभाग राजेश बाथम शामिल हैं।

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