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8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट 18 महीने में आयेगी-केन्द्रीय राज्यंमंत्री

नई दिल्ली. 8वें वेतन आयोग को लेकर सरकार ने एक बड़ा अपडेट जारी किया है। इससे लाखों कर्मचारियेां और पेंशनर्स के लिये सरकार ने 8वें वेतन आयोग का लेकर कुछ स्पष्टता के संकेत दिये है। लेकिन अभी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है। संसद में केन्द्र सरकार ने बताया है कि कब तक 8वॉ वेतन आयोग लागू किया जा सकता है। वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने कहा है कि सरकार 3 नवंबर 2025 को औपचारिक रूप से 8वें केन्द्रीय वेतन आयोग की स्थापना की थी।
उन्होंने आगे कहा है कि आयोग को केन्द्रीय सरकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्ते ओर पेंशन पर अपनी सिफारिशें रिपोर्ट पेश करने के लिये 18 माह का वक्त दियागया है। उन्होंने 8वें वेतन आयोग कब लागू होगा, इस सवाल का उत्तर देते हुए कहा है कि यह तभी पता चल पायेगा। जब रिपोर्ट पेश की जायेगी। उसे एक्सेप्ट किया जायेगा और इसके बाद तय हो सकेगा कि इस आयोग को कब से लागू किया जाये, खैर अभी आयोग इस पर रिपोर्ट तैयार करने में जुटा हुआ है। 8वेंतन आयोग को लेकर आयोग एक तरह से काम नहीं कर रहा है। यह अलग-अलग कैटेगरी से एक्टिव तरीके सुझाव पाने का प्रयास कर रहा है। माईगांव पोर्टल पर 18 तरह के सवाल अपलोड किये गये है। मंत्रालयों, विभागों, राज्य सरकारों के कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, कर्मचारी संगठनों, शिक्षाविद्ों और यहां तक कि लोगों में भी फीडबैक मांगा गया है। फीडवैक देने की अंतिम तारीख 31 मार्च है। सिर्फ ऑनलाइन तरीके से ही फीडबैक लिया जायेगा। वेतन का लेकर कहा गया है।
संशोधित वेतन का भुगतान भले ही बाद किया जायेगा। लेकिन इसका कैलकुलेशन 1 जनवरी 2026 से की जायेगी। इसी दिन से 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल समाप्त हो गया है।
जिसमें पूर्व आयोग का कार्य और आज की अर्थव्‍यवस्‍था शामिल है।  6वें वेतन आयोग के तहत करीब 40 फीसदी सैलरी बढ़ी थी, जबकि 7वें वेतन आयोग के तहत 23 से 25 फीसदी के आपास बढ़ोतरी देखी गई थी, जिसमें 2.57 फिटमेंट फैक्‍टर है। इसी बात पर 8वां वेतन आयोग के तहत भी सैलरी निर्भर करती है।  एक्‍सपर्ट ने कहा कि यह सिर्फ अनुमान है, अंतिम फैसला कई आंकड़ों पर निर्भर करता है। उन्‍होंने समझाया कि 8वें आयोग के लिए ज्‍यादातर अनुमानां में 20 से 35 फीसदी की बढ़ोतरी की बात कही गई है, जिसमें फिटमेंट फैक्‍टर 2.4 से 3 के बीच और बेसिक सैलरी शामिल है।  लेकिन अंतिम आंकड़ा अगले 12 से 18 महीनों में महंगाई, टैक्‍स की उपलब्‍धता और राजनीतिक इच्‍छा पर निर्भर करता है।

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1 अप्रैल से नया कानून होगा लागू-नये इनकम टैक्स में बदलाव एचआरए, वेतन और टैक्स में होगा बदलाव

ग्वालियर. नये फायनेंशिल ईयर शुरू होने के साथ ही 1 अप्रैल से नया आयकर अधिनियम (न्यू टैक्स लॉ 2025) लागू होने जा रहा है। सैलरी टेक्सपेयर्स के लिये एक बड़ा बदलाव है। जिसमें एचआरए, सैलरी स्ट्रक्चर और टैक्स डिडक्शन सहित कई बदलाव हो रहे हैं। इस बदलाव के पीछे सरकार का उद्देश्य दशकों से अधिक जटिल हो चुके टैक्स सिस्टम को सरल बनाना है।
सैलरी और एचआरए में बदलाव
वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिये मकान किराया भत्त (एचआरए) टैक्स बचाने के लिये सबसे खास साधनों में से एक माना जाता है। लेकिन नयी व्यवस्था के तहत इसमें एक खास तरह का बदलाव किया गया है। बेंगलुरू, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे शहरों का ेअब 50प्रतिशत एचआरए छूट का लाभ मिलेगा। जिससे वह महानगरों के समान फायदा ले सकते है। लेकिन वहीं, दिल्ली एनसीआर में निवासरत लोगों को 40 प्रतिशत तक ही एचआरए के तहत टैक्स डिडक्शन का फायदा दिया जायेगा। यह बदलाव अर्बन सैलरी कर्मचारी के लिये खास हैं क्योंकि इसमें तेजी से डवलप हो रहे शहरों में सैलरी स्ट्रक्चर्स की टैक्सण् क्षमता में बढ़ोत्तरी की गयी है। कम्पनी एचआरए के नये नियम को लागू करने के लिये वेतन फिर से तय कर सकते है। जिससे नयी व्यवस्था के तहत सैलरी स्ट्रक्चर अधिक किफायती हो सकता है नियिोक्ता द्वारा दिया जाने वाला मेडीकल ऋण पर छूट की सीमा को 20 हजार से बढ़ाकर 2 लाख रूपये का प्रस्ताव हैं जिससे स्वास्थ्य संबंधी वित्तीय नियोजन में अतिरिक्त राहत मिलेगी।
टैक्स सिस्टम को सुगम बनाना है लक्ष्य
सबसे खास बदलाव में से एक बच्चों से संबधित खर्चो के लिये दी जाने वाली छुूट में वृद्धि की गयी है। बच्चों की एज्यूकेशन अलाउंस अमांउट बढ़ाकर 3 हजार रूपये प्रतिमाह प्रति बच्चा कर दिया गया है। जबकि पहले यह मात्रा 300 रूपये थी। यह खास बदलाव का संकेत है। खासकरि मिडिल क्लास के सैलरी परिवारों के लिये जहां शिक्षा खर्च घरेलू बजट का एक बड़ा हिस्सा होता है। इस कदम से वह डिडक्शन जो पहले नहीं थे। अब टैक्स बचत में शामिल हो चुके है। नये कानून के तहत किये गये संरचानात्मक बदलावों में फायनेंशियत ईयर औरे असेसमेंट ईयर का एक ही टैक्स ईयर में बदल दिया गया है। जिसे अप्रैल से मार्च तक की 12 माह की अवधि के बीच माना जायेगा। इस बदलाव से टैक्स फाइल करना आसान हो गया है। खासकर पहली बार टैक्स रिर्टर्न फायल करने वालों के लिये यह कफ्यूजन दूर हो चुका है। इ सके अलावा सरकार ने उपयोग में सुधार लाने और परेशानियों को कम करने के उद्देश्य से आयकर रिटर्न (आईटीआर) डॉक्यूमेंट्स को नये सिरे से डिजाइन करके जारी करने की योजना बनाई है।
टैक्स स्लैब में नहीं कोई बदलाव
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट 2026 स्‍पीच में ऐलान किया कि आयकर अधिनियम, 2025 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा, लेकिन टैक्‍स स्लैब अनचेंज रहेंगे. नए कानून के तहत 2025-2026 के टैक्‍स स्लैब फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में कमाए इनकम पर लागू होंगे.
नए नियमों से कुछ अनुपालन आवश्यकताओं में भी ढील दी गई है. वाहन खरीद और कैश जमा जैसे लेन-देन में अनिवार्य पैन नंबर बताने की सीमा बढ़ा दी गई है, जिससे छोटे लेन-देनों का बोझ कम हो गया है. साथ ही कैपिटल मार्केट में नियामक निगरानी को मजबूत किया गया है. स्‍टॉक एक्‍सचेंजों को अब ये काम करने होंगे…
• 7 सालों तक ऑडिट ट्रेल बनाए रखें.
• लेन-देन के रिकॉर्ड को हटाने से रोकें.
• संशोधित लेन-देन पर मंथली रिपोर्ट जमा करें.
इससे ट्रांसपैरेंसी में सुधार होगा और निवेशकों के हितों की रक्षा होगी.

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लगातार हो रही तत्काल टिकटों की चोरी, 5वीं फेल गिरोह की करतूत, सरगना है जमानत पर, आईआईटी अधिकारियों के पास भी नहीं इसकी रोकथाम नहीं

नई दिल्ली. अवैध सॉफ्टवेयर से ट्रेनों के तत्काल टिकट बुक हो रहे है। एक आम यात्री जितनी देर में आरआईसीटीसी ऐप पर डिटेल भर पाता है उससे भी कम समय में यह साफ्टवेयर टिकट बुक कर देते है। 25-30 सेकेण्ड्स में एक टिकट बुक हो जाती है। फिर इन टिकट्स को 300-500 रूपये तक का कमीशन लेकर बेच दिया जाता है। फेस्टिवल टाइम में कमीशन 4 गुना तक हो जाता है। इस नेक्सस को चलाने वाले 5वीं फेल है। वही जिन अधिकारियों पर धांधली रोकने का दायित्व है वह आईआईटी-आईआईएम जैसे संस्थानों से पढ़ाई की है। लेकिन गड़बड़ी को बन्द नहीं में सफल नहीं हो पा रहे है।
2-3 माह में नई पहचान, ऐसे बदलते है सॉफट्वेयर, वेबसाइट और बैंक अकाउंट
कभी नेक्सस में शामिल रहे एजेंट ने बताया है कि गैंग का सरगना हर 2-3 माह में साफ्टवेयर के नाम, वेबसाइट और बैंक अकाउंट और मोबाइल नम्बर तक बदल देता है। ताकि किसी भी तरह की ट्रैकिंग से बचा जा सकता है। उपयोग किये जाने वाले नम्बर पूरी तरह से फर्जी होते हैं। जबकि पैसों के लेन-देन के लिये म्यूल अकाउंट्स यानी लालच देकर या फर्जी तरीके से बनाये गये खातों का उपयोग किया जाता है। फिलहाल टेस्ला, गदर, स्टारलिंक, स्पेसएक्स, सुपरमैन, बीएमडब्ल्यू, और थंडर जैसे नामों से साफ्टवेयर बेचे जा रहे है। जिन्हें सुपर मास्टर से लेकर यूजर तक अलग-अलग स्तर के एजेंट्स को दिया जाता है। जो टिकट बुकिंग काम संभालते है। पूरा नेटवर्क वाट्सऐप और टेलीकॉम ग्रुप्स क माध्यम से संचालित होता है। जहां सॉफ्टवेयर से जुडी जानकारी और अपडेट मैसेज के माध्यम से शेयर किय जाते हैं।
अवैध टिकट खेल के 5 कर्ताधर्ता-ऑपरेटर से लेकर सीबीआई तक ऐसे काम करता है नेटवर्क
ऑपरेटर -यही अवैध सॉफटवेयर चलाते है, डवलपर और ट्रैवल एजेंट्स के बीच की कड़ी है। एजेंटों को अवैध सॉफ्टवेयर का लॉग इन आईडी और पासवर्ड देते है। इससे एजेंट ‘‘तत्काल’’ टिकट खोलते ही तेजी से बुक कर पाते है।
टिकट ऐजेंट -अवैध सॉफ्टवेयर का उपयोग करके टिकट बुक करते है। इसके माध्यम से आईआरसीटीसी वेबसाइट को ऑटोमेटिक एक्सेस करना, कैचपा बाइपास करना और तत्काल टिकट सेकेण्ड्स में बुक कर और कमीशन वसूलते हैं।
सीआरआईएस अवैध सॉफ्टवेयर से बुकिंग रोकने में सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम यानी सीआरआईएस की तकनीकी भूमिका है। रेलवे के आईटी सिस्टम को डवलप करने, सर्वर लॉग और ट्रैफिक पैटर्न की निगरानी कर संदिग्ध गतिविधियों की पहचान, आईपी ऐड्रेस और यूजर अकाउंट को ब्लॉक करना, केपचा और ओटीपी जैसे सिक्योरिटी पुख्ता करने का जिम्मा है।
आरपीएफ रेलवे प्रॉक्टशन फोर्स यानी कि आरपीएफ पर टिकट दलालों, एजेंट नेटवर्क और अवैध बुकिंग गतिविधियों की पहचान कर कार्यवाही करना, छापे मारना और जांच करने का जिम्मा है।
सीबीआई- इस धांधली से जुडे 3 केस की जांच कर चुकी है। लेकिन अभी तक अपराध को बन्द नहीं करवा सकी। गैग के सरगनाओं को पकड़कर सलाखों के पीछे डालने की जिम्मेदारी है।
सीबीआई ने सलमान-शमशेर के नेक्सस का सरगना बताया
सीबीआई पिछले 14 वर्षो से इसकी जांच कर रही है। 2012 में पहली एफआईआर दर्ज की थी ।तब चौथी पास सलमान, अहमदाबाद के आईटी प्रोफेशनल कुलवीर सिंह, सतीश तिवारी और सीताराम निषाद को गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने चार्जशीट में यूपी के सलमान अहमद खान और शमशेर आलम को अवैध सॉफ्टवेयर से टिकट बुकिंग का किंगपिन बताया था ।सलमान को 2018 और शमशेर को 2023 में भी पकड़ा गया।इससे साबित होता है कि दोनों अभी भी नेक्सस चला रहे है। अलग-अलग मामलों में सीबीआई अभी तक 4 बार केस दर्ज कर चुकी है। लेकिन न नेक्सस बन्द हुआ और न कोई केस अंजाम तक पहूंचा है।
पैसा कैसे कमाते है
टिकट बुकिंग का नेक्सस

1. तरीका
फेक नंबर, बार-बार नाम/वेबसाइट/अकाउंट
बदलकर सिस्टम से बचते हैं2. पैसा
मूल अकाउंट्स यानी (फर्जी/दूसरों के नाम वाले
अकाउंट) में पेमेंट3. टूल
टेस्ला | गदर | स्टारलिंक | स्पेसएक्स | सुपरमैन |
BMW | थंडर4. नेटवर्क
सुपर मास्टर मास्टर एडमिन सेलर यूजर
(हर लेवल पर एजेंट टिकट बुक करता है)5. ऑपरेशन
वॉट्सएप, टेलीग्राम ग्रुप्स
यहाँ डील, बातचीत और डेटा शेयर
किसका, क्या रोलऑपरेटर
सॉफ्टवेयर + लॉगिनएजेंट
तेज बुकिंग + कमीशनCRIS
निगरानी + ब्लॉकRPF
छापा + कार्रवाईCBI
जांच + गिरफ्तारी
1. तत्काल बुकिंग की नई नीति• केवल आधार सत्यापित यूजर ही तत्काल ई-टिकट बुक कर सकेंगे
• ARP बुकिंग का समय: सुबह 8 से 10 बजे (12 अक्टूबर 2025 से)रोजाना टिकट बुकिंग का आंकड़ा
• IRCTC द्वारा औसतन 14.69 लाख ई-टिकट रोजाना बुक किए जाते हैं (सितंबर–नवंबर 2025)
• इनमें से 16.95% यानी लगभग 2.49 लाख टिकट तत्काल कोटे के होते हैं2. पेमेंट सिस्टम क्या हैफाइल के अनुसार पेमेंट लिए जाते हैं:
• UPI
• QR कोड
• Merchant scanner

उदाहरण UPI ID:
classic100@ybl3. रेलवे का सिस्टम क्या है
चेक और वेलिडेशनएजेंट बुकिंग पर रोक
• ARP यानी एडवांस रिजर्वेशन पीरियड (जनरल कोटा) के लिए सुबह 8 से 8 बजे 10 मिनट
• तत्काल (AC/Non-AC) के लिए सुबह 10 से 10 बजे 30 मिनट और 11 से 11 बजे 30 मिनट (डिफेंस को छोड़कर)
• एक यूजर आईडी से जनरल कोटा में 2 टिकट (08:00-10:00 बजे)
• एक यूजर आईडी से तत्काल में 2 टिकट (10:00-12:00 बजे)
• ARP और तत्काल समय में विदेशी IP एड्रेस ब्लॉक
• 08:00 से 12:00 बजे के बीच एक लॉग-इन में सिर्फ एक बुकिंग (रिटर्न/ऑनवर्ड को छोड़कर)
• एजेंट को एक दिन, एक ट्रेन में केवल एक तत्काल टिकट4. किसका, क्या रोलऑपरेटर
सॉफ्टवेयर + लॉगिन एजेंट
तेज बुकिंग + कमीशन CRIS
निगरानी + ब्लॉक RPF
छापा + कार्रवाई CBI
जांच + गिरफ्तारी5. टिकट बुकिंग कैसे होती हैएजेंट सॉफ्टवेयर लॉगिन करता है। सॉफ्टवेयर पहले से:
• ट्रेन • यात्री • भुगतान ऑटो-फिल कर देता हैतत्काल खुलते ही:
सॉफ्टवेयर Captcha bypass करता है मिली सेकंड में टिकट बुक

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रेलवे के नियमों में बड़ा बदलाव, रिफंड, कैंसिलेशन और बुकिंग में सब कुछ हुआ बदला

नई दिल्ली. यात्री टिकटों की कालाबाजारी को लेकर रेलवे ने यात्रियों की सुविधा, पारदर्शिता और सिस्टम की मजबूती को ध्यान में रखते हुए बड़े सुधार 1-15 अप्रैल के बीच लागू करने जा रहा हैं रेल मंत्रालय की 52 हफ्ते, 52 रिफॉर्म्स पहल के तहत इसबार कई महत्वपूर्ण फैसले लिये गये है। रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने पत्रकारवाता्र में इन बदलावों की जानकारी दी गयी। जिनका सीधा असर टिकट बुकिंग, कैसिलेशन और प्रोजेक्टस की कार्यप्रणाली पर पडेगा।
फर्जी एकाउंट पर सख्ती और होगी डिजीटल सुरक्षा मजबूत
रेलवे की टिकटिंग व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिये आईआरसीटीसी ने अहम कदम उठाया है। लगभग 3 करोड़ फर्जी एकाउंट्स को ब्लॉक किया गया है। ताकि फर्जी तरीके से टिकट बुकिंग को रोका जा सके। अब तत्काल टिकट बुकिंग के आधार आधारित ओटीपी सिस्टम लागू कर दिया गया है। इसके साथ ही एंटी-बॉट तकनीकी भी लगाई गयी है।जिससे ऑटोमेटेड और फर्जी बुकिंग पर रोक लगेगी। पहले 30 मिनट तक बुकिंग पर कुछ प्रतिबंध रहेगा ताकि सिस्टम पर दबाव कम हो सके।
टिकट कैंसिलेशन के नये नियम
रेलवे ने टिकट कैंसिलेशन को लेकर नियमों में बड़ा बदलाव किया है। जिससे रिफंड प्रक्रिया अब अधिक स्पष्ट और समयानुसार हो गयी है।
ट्रेन छूटने से 8 घंटे से कम समय में कैंसिल करने पर कोई रिफंड नही मिलेगा।
8-24 घंटे के बीच कैंसिलेशन पर करीब 50 प्रतिशत रिफंड।
24-72 घंटे के बीच कैंसिल करने पर लगभग 75 प्रतिशत रिफंड।
72 घंटे से पहले कैंसिल करने पर करीब पूरा पैसा वापिस मिलेगा। केवल मामूली शुल्क कटेगा।
यह नये नियम यात्रियों को समय पर निर्णय लेने के लिये प्रेरित करेंगे और सिस्टम को ज्यादा व्यवस्थित बनायेंगे।
पहले से नियम सरल -बोर्डिंग और मैनेजमेंट में होगी सुविधा
रेलवे यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिये कई सुविधाओं को जोड़ा गया है।
अब यात्री चार्ट बनने से 30 मिनट पहले तक अपने टिकट का बोर्डिंग प्वॉइंट बदल सकते हैं।
बोर्डिंंग प्वॉइंट बदलने की सुविधा पूरी तरह से निःशुल्क होगी।
पीआरएस काउंटर टिकट अब किसी भी स्टेशन से कैंसिल कर सकते हैं।
ई-टिकट केलिये अब टीडीआर (टिकट डिपॉजिट रीसिप्ट) भरने की जरूरत नहीं होगी। रिफंड अपने मिल जायेगा।
यह बदलाव यात्रियों के समय और मेहनत दोनों को बचायेगा और प्रक्रिया को सरल बनायेगा।
ठेकेदारों के नये और सख्त नियम
रेलवे प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता और समय पर पूरा होने को सुनिश्चित करने के लिये ठेकेदारों से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है।
अब रेलवे प्रोजेक्ट में बोली लगाने वाले ठेकेदार के पास कम से कम 20 प्रतिशत अनुभव होना जरूरी होगा।
10 करोड़ रूपये से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स केलिये 2 बिड सिक्योरिटी अनिवार्य होगी।
हर ठेकेदार को प्रोजेक्ट के साथ एक डिटेल वर्क प्लान देना होगा।
पहले ठेकेदार को सब कॉन्ट्रैक्टिंग 70 प्रतिशत तक हो सकती थी। अब इसे घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया गयाहै।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मुख्य ठेकेदार ज्यादा जिम्मेदारी लें और काम की गुणवता पर सीधा नियंत्रण रखें।

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ग्वालियर में बन रहा MP का पहला एलिवेटेड रोड, अतिक्रमण हटाने और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी जारी

ग्वालियर. शहर की ट्रैफिक समस्या को कम करने के लिए र्स्वारेखा नदी पर एलिवेटेड रोड तेजी से आकार ले रहा है। 1373.21 करोड रुपए की लागत से बनने वाला 14.2 किलोमीटर लंबा यह प्रोजेक्ट 2  चरणों में तैयार किया जा रहा है। दिल्ली की रिंग रोड की तर्ज पर बन रहा यह एलिवेटेड कॉरिडोर 293 पिलरों पर खडा होगा और इसमें 14 एंट्री-एग्जिट लूप बनाए जा रहे है जिससे शहर के प्रमुख इलाकों को सीधा फायदा मिलेगा। परियोजना का पहला चरण ट्रिपल ITM से लक्ष्मीबाई समाधि तक 6.5 किमी लंबा है जिसका करीब 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। वहीं दूसरा चरण गिरवाई पुलिस चौकी से लक्ष्मीबाई समाधि तक 7.42 किमी लंबा है जिसमें अब तक लगभग 40 प्रतिशत प्रगति दर्ज की गई है। अब तक इस परियोजना पर करीब 380 करोड खर्च किए जा चुके है।
अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया जारी
प्रोतेक्ट के लिए अतिक्रमण हटाने और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी जारी है। पहले चरण में 34 करोड रुपए का मुआवजा वितरित किया जा चुका है और रानीपुरा, मानपुर, रमटापुरा व पडाव क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाया गया है। दूसरे चरण में गिरवाई, जीवाजीगंज, छप्परवाला पुल और शिंदे की छावनी क्षेत्रों में सर्वे और कार्रवाई चल रही है।
10 लाख लोगों को मिलेगा फायदा
एलिवेटेड रोड बनने के बाद ट्रिपल आइटीएम, आइएसबीटी, डीडी नगर, फूलबाग, महाराज बाड़ा. नई सड़क, माधवगंज और गोलपहाड़िया समेत कई इलाकों के करीब 10 लाख लोगों को जाम से राहत मिलेगी। इससे शहर में यात्रा का समय कम होगा और यातायात व्यवस्था में बड़ा सुधार आएगा। परियोजना के वर्ष 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है।

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ग्वालियर में प्रशासन अलर्ट, कलेक्टर रुचिका चौहान ने दावा किया स्टॉक की कोई कमी नहीं

ग्वालियर. जहां एक तरफ मारामारी है वहीं कुछ जिलों में प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाई है। ग्वालियर कलेक्टर रूचिका चौहान ने दावा किया है कि जिले में स्टॉक की कोई कमी नहीं है। खाद्य विभाग की टीमें लगातार चेकिंग कर रही है। अफवाहों को रोकने के लिए प्रशासन ने कंट्रोल रूम भी बनाया है।

यहां हालात सामान्य होने लगे हैं। रविवार को होटल खुले रहे।
खाद्य विभाग की टीम निरंतर गैस एजेंसियों का निरीक्षण कर रही
ग्वालियर जिले में हालात सामान्य है, घरेलू गैस सिलेंड की आपूर्ति को लेकर फैली आशंकाओं के बीच कलेक्टर रूचिका चौहान ने स्पष्ट किया है कि ग्वालियर में गैस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। खाद्य विभाग की टीम निरंतर गैस एजेंसियों का निरीक्षण कर रही है। सभी संचालकों को निर्देश दिए गए है कि वे उपभोक्ताओं को सही जानकारी दें। स्टॉक व डिलीवी में पारदर्शिता बरतें। कलेक्टर ने साफ किया है कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है इसलिए नागकि घबराएं नहीं।
ग्वालियर में इंडक्शन-कोयले की मांग बढी
ग्वालियर में शादी में डीजल भटिठयों, लकडी और कोयले के दम पर खाना पक रहा है। बाजार में इंडक्शन और कोयले की मांग 20 प्रतिशत तक बढ गई है।

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5 राज्यों में चुनाव की तारीखों का आज हो सकता है एलान

नई दिल्ली. चुनाव आयोग आज शाम 4 बजे पशिचम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम औ पुडुचेरी राज्यों के विधानसभा चुनावों की तारीख का ऐलान करेगा। बंगाल, असम, तमिलनाडु में 2-2 फेज में और केरल, पुडुचेरी में सिंगल फेज में चुनाव कराए जाने के असार है। पांचों विधानसभाओं का कार्यकाल मई में खत्म हो रहा है। 2021 में इन सभी पांच राज्यों के चुनाव का ऐलान 26 फरवरी को किया गया था। पिछली बार बंगाल में 8 चरणों में चुनाव हुए थे। असम में 3 और तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में सिंगल फेज में वोटिंग हुई थी।


तमिलनाडु में सबसे ज्यादा नाम कटे
जिन पां राज्यों में चुनाव होने जा रहे है उनमें एसआईआर के बाद तमिलनाडु से सबसे ज्यादा वोटर्स के नाम कटे है। चुनाव आयोग ने बताया कि 27 अक्टूबर 2025 को एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के दौरान राज्य में कुल 64114587 वोटर थे। करीब 4 महीने चली एसआईआर में 7407207 लोगों के नाम हटाए गए है। राज्य में अब 56707380 मतदाता पंजीकृत है। वहीं पशिचम बंगाल दूसरे नंबर पर है जहां करीब 58 लाख लोगों के नाम कटे है। फि केरल में 8 लाख, असम में 2 लाख और पुडुचेरी में सबसे कम 77 हजार लोगों के नाम एसआईआर प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से हटाए गए है। असम में स्पेशल रिवीजन कराया गया था।

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ग्वालियर में LPG उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर, सॉफ्टवेयर ठीक होने तक एजेंसियों पर होगी सीधी बुकिंग

ग्वालियर. 4 दिन के बाद आखिर शहर की रसोई गैस बुकिंग सॉफ्टवेयर में सुधार आना शुरू हो गया है। यानी कुछ प्रयास के बाद उपभोक्ताओं के सिलिंडर बुक होने लगे है साथ ही प्रशासन ने भी गैस एजेंसियों से मैन्युअल बुकिंग करने के लिए कहा है। जिससे लोगों में घबराहट न फैले और उन्हें सिलिंडर समय पर मिल सके। इससे एलपीजी उपभोक्ताओं को कम ही सही कुछ तो राहत मिलेगी। बता दें कि ईरान व अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे युद्ध को देखते हुए केंद्र सरकार ने पिछले दिनों एलपीजी को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत आदेश जारी किए थे, साथ ही कमर्शियल सिलिंडर की डिलीवरी पर रोक लगाने के साथ बुकिंग के दिन भी बढा दिए थे।
सॉफ्टवेयर में सुधार की प्रक्रिया जारी
सबसे अधिक उपभोक्ता वाली इंडेन गैस के सॉफ्टवेयर में ऑनलाइन बुकिंग भी बंद हो गई इसके बाद लोगों में घबराहट फैल गई। लोग किसी तरह भी सिलिंडर लेने के लिए प्रयास करने लगे। सॉफ्टवेयर में बुकिंग तो हो रही है लेकिन कम। पिछले चार दिन से सॉफ्टवेयर में ऑनलाइन सिलिंडर की बुकिंग हो ही नहीं पा रही थी लेकिन शुक्रवार को बुकिंग होने लगी। हालांकि अभी उस तरह से सिलिंडर बुक नहीं हो पा रहा है जिस तरह से पहले होता था। गैस एजेंसियों के संचालकों का कहना है कि सॉफ्टवेयर में अुकिंग की प्रक्रिया में सुधार हो रहा है लेकिन अभी प्रक्रिया सामान्य नहीं हुई। कुछ लोगों के सिलिंडर बुक हुए है तो कुछ के नहीं, लेकिन आगामी दिनों में प्रक्रिया के सामान्य होने की उम्मीद है।
प्रशासन ने एजेंसियों पर मैन्युअल तरीके से सिलिडंर बुक करने के आदेश दिए
इधर शहर में एलपीजी सिलिंडर को लेकर मची हाय-तौबा को देखते हुए प्रशासन ने एजेंसियों को मैन्युअल तरीके से सिलिंडर बुक करने के आदेश दिए लेकिन इसमें यह कहा गया कि वे सिलिंडर बुक कराने वाले उपभोक्ता से उसकी पूरी हिस्ट्री लें मतलब उन्होंने पिछला सिलिंडर कब लिया था। इसके बाद ही सिलिंडर दें। यह प्रक्रिया एजेंसियों पर शुरू हुई है यानी फोन से ऑनलाइन सिलिंडर बुक नहीं हो रहा है तो एजेंसियों से मैन्युअल व्यवस्था के तहत जरूरतमंद उपभोक्ताओं को सिलिंडर मिल जाएंगे।

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MP के यात्रियों की राहत, ब्लाक खत्म, बहाल हुई 13 मेमू पैसेंजर ट्रेन

भोपाल. दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के नागपुर मंडल में गर्डर डी-लॉन्चिंग का कार्य निर्धारित समय से पहले पूरा हो जाने के बाद पहले से निरस्त की गई 13 मेमू ट्रेनों की सेवाएं फिर से बहाल कर दी गई है। रेलवे प्रशासन के इस निर्णय से रायपुर, डोंगरगढ और गोंदिया रूट पर सफर करने वाले यात्रियों को बडी राहत मिली है।
पूरा हुआ कार्य
रेलवे के अनुसार गर्डर डी-लॉन्चिंग का कार्य पहले 13 और 14 मार्च को ब्लॉक लेकर किया जाना था, हालांकि तकनीकी कार्य को सफलतापूर्वक पहले ही पूरा कर लिया गया। यह कार्य 6 और 7 मार्च को ही संपन्न हो गए जिसके बाद यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए निरस्त की गई मेमू ट्रेनों को दोबारा चलाने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा गोंदियां से नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी मेमू पैसेंजर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी से गोंदिया मेमू पैसेंजर, डोंगरगढ से गांदिया मेमू पैसेंजर, गोंदिया से डोंगरगढ मेमू पैसेंजर, बालाघाट से नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवरी मेमू पैसेंजर तथा नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवरी से बालाघाट मेमू पैसेंजर करी सेवाएं भी पुनः शुरू कर दी गई है।
अतिरिक्त कोच लगाने का फैसला लिया
यात्रियों की बढती संख्या और कंफर्म बर्थ की मांग को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने शलीमार-एलटीटी-शालीमार एक्सप्रेस में अस्थायी रूप् से अतिरिक्त कोच लगाने का फैसला लिया है। इस व्यवस्था के तहत ट्रेन में एक अतिरिक्त एसी-3 कोच और एक स्लीपर कोच जोडा जाएगा। इससे यात्रियों को अधिक सीटें उपलब्ध होंगी और आरामदायक यात्रा का लाभ मिलेगा।

 

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पंजाब में सिलेंडर उठाकर भाग रहे लोग, भोपाल में गैस एजेंसी के बाहर लंबी कतारें

नई दिल्ली. अमेरिका और इजराइल की ईरान से जंग की वजह से देशभर में LPG  की किल्लत हो गई है। गैस एजेंसियों के बाहर लम्बी लाइनें है। गैस सलेंडर की कालाबाजारी औ जमाखोरी भी हो रही है। कई जगहों पर 2 हजार का कॉमर्शियल सिलेंडर 4 हजार में बिक रहा है। वहीं पंजाब में लोग सिलेंडर लेकर भागते नजर आए। केरल में करीब 40%  रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर है। उध दिल्ली में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने LPG  सप्लाई की बिगडी स्थिति को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। राजस्थान में प्रदर्शन करते हुए सिलेंडर की शवयात्रा निकाली।

देशभर में LPG सिलेंडर की एजेंसियों पर लोगों की लंबी लाइन देखी जा रही है। लुधियाना में लोग हाथों में सिलेंडर लेकर दौड़ते नजर आए। - Dainik Bhaskar
रोजाना 75.7 लाख सिलेंड बुक हो रहे
सरकार की तरफ से पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटी (मार्केटिंग एवं ऑयल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने कहा कि एलपीजी एक चिंता का विषय जरूर है क्योंकि हमारा ज्यादातर इम्पोर्ट स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के रास्ते आता है जो फिलहाल बंद है। दिक्कत अफवाहों और पैनिक बुकिंग की वजह से हो रही है। आम तौर पर रोजाना 50 से 55 लाख बुकिंग होती थी जो अब बढकर 75 से 76 लाख तक पहुंच गई है।

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