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48 वर्षो के बाद खुला सोने-चांदी का खजाना, 3डी मैपिंग से गणना जारी

नई दिल्ली. ओडिशा के पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ के रत्नभंडार की गणना शुरू हो चुकी है। पहले चरण में बाहरी खजाने की गिनती की गयी। अब मंदिर के आंतरिक खजाने की गिनती की जायेगी। चलित खजाने में भगवान के दैनिक श्रृंगार के आभूषण रख जाते है। बाहरी खजाने में भगवानके उत्सव श्रृंगार से जुड़े आभूषण रखे जाते हैं। जबकि भीतरी खजाने में बेशकीमती आभूषण संरक्षित होते हैं खजाने की गिनती के लिय अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। खजाने की इस गणना पर पूरी दुनिया नजर टिकाये बैठी है।
इस बीच सिर्फ गणना से जुड़ी समिति के सदस्यों का ही रत्न भंडार में जाने की अनुमति है। अब भक्तों को उस पल का इंतजार है। जब रत्न भंडार के रहस्य दुनिया के सामने आयेंगे। इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिये हाईटैक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। गणना के लिये 3डी मेपिंग, वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की जा रही है। 13 अप्रैल से आतंकिर रत्न भंडार की गणना शुरू हो चुकी है। इसके बाद 16-18 अप्रैल केक बीच गणना का काम जारी रहेगा। आंतरिक र्भंडार की गणना कैसे होगी। इससे जुड़े नियम तय करने के लिये रविवार को महत्वपूर्ण बैठक भी हुई है। दरअसल, भीतर का रत्न भंडार काफी सेंसिटिव इलाका है। मंदिर परिसर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के बहुमूल्य रत्न और दुर्लभ आभूषण मौजूद है। सदियों से पुरी जगन्नाथ धाम भक्तों की अटूट आस्था का केन्द्र रहा है।
48 साल बाद खुला भीतरी रत्न भंडार
आज जिस भीतरी भंडार की गिनती का काम हो रहा है, ये सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जाती है। सूत्रों के अनुसार, जगन्नाथ के भीतरी रत्न भंडार को पूरे 48 साल बाद खोला गया है।  इससे पहले इसे साल 1978 में खोला गया था।  ऐसे में भक्त इसे लेकर काफी उत्साहित हैं कि 48 साल बाद इसके अंदर से क्या निकलेगा ऐसा बताया जाता है कि मंदिर के प्रांगण में आज भी ऐसे कितने ही खुफिया चेम्बर मौजूद हैं, जहां खजाना होने का दावा किया जाता है । मंदिर में मौजूद एक खुफिया सुरंग का जिक्र भी पुजारियों के वंशज करते हैं. इतिहास में जिक्र मिलता है कि जिस तरह सोमनाथ मंदिर को विदेशी आक्रमणकारियों ने 17 बार लूटा था, ठीक उसी तरह जगन्नाथ मंदिर को लूटने का प्रयास भी 18 बार किया गया था।  हर बार मंदिर के सेवकों ने ठाकुर जी की प्रतिमा को उन आक्रमणकारियों से बचाया था. जब-जब आक्रमण होता था तब-तब सेवक प्रतिमा को लेकर किसी अज्ञात स्थान पर छिप जाते थे।

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कर्मचारियों का उग्र प्रदर्शन, नोएडा की सड़कों पर जगह-जगह लगा जाम, वेतनवृद्धि को लेकर कर्मचारी कर रहे थे जाम

नई दिल्ली. मजदूर यूनियन के वेतनवृद्धि को लेकर जारी प्रदर्शन की वजह से दिल्ली-नोयडा सीमा पर आज सोमवार की सुबह से भारी यातायात जाम लगा हुआ है। स्थिति को काबू में करने के लिये यातायात पुलिस ने कई जगहों पर यातायात का डायवर्ट किया है। नोएडा यातायात पुलिस ने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर जानकारी दी गयी है चिल्ला बॉर्डर की तरफ जाने वाले सभी वाहनों को डीएनडी टोल की तरफ डायवर्ट किया जा रहा है। पुरी स्क्वायर रूट परद भी यातायात डायवर्जन किया गया है ताकि आवाजाही सुचारू रूप से चल सके।
सुबह-सुबह यातायात का लम्बा जाम
नोएडा के फेज-2 इलाके में वेतनवृद्धि की मांग को लेकर हजारों कर्मचारियों का प्रदर्शन सुबह से जारी है। अब यह प्रदर्शन उग्र रूप ले चुका है। कर्मचारियों ने कई जगहों पर सड़कें जाम कर दी है। कुछ जगहों पर पथराव और आगजनी की घटनायें भी हुई है। इससे नोएड़ा में यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई है। दफ्तर जाने वाले लोगों को घंटों यातायात जाम का सामना करना पड़ा है।
कर्मचारियों के प्रदर्शन के कारण कहां-कहां लगा जाम?
नोएडा फेज-2 और सेक्टर-62: मुख्य सड़क पूरी तरह बंद है. होजरी कॉम्प्लेक्स के आसपास भारी भीड़ है।
दादरी रोड और सूरजपुर रोड: नोएडा से ग्रेटर नोएडा जाने वाले रास्ते ब्लॉक है।
NH-9 (नेशनल हाईवे-9): लालकुआं से इलेक्ट्रॉनिक सिटी तक जाम है।
सेक्टर-60 और 62 के आसपास: फिल्म सिटी-मायामाया फ्लाईओवर पर जाम.
DND फ्लाईवे और चिल्ला बॉर्डर: दिल्ली-नोएडा आने-जाने वाले रास्तों पर भी असर देखने को मिल रहा है।
अक्षरधाम-नोएडा रूट: कई जगह यातायात ठप है।

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वेतनवृद्धि -इंक्रीमेंट को नोएडा का उग्र प्रदर्शन करते हुए पुलिस की गाडि़यां भी की आगजनी की शिकार

 

नोएड़ा. वेतनवृद्धि की मांग को लेकर नोएडा में कई कम्पनियों के कर्मचारी सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे है। गुस्साये कर्मचारियों ने कई इलाकों में रोड पर चक्काजाम कर दिया है। फेज 2 में प्रदर्शनकारियों ने गाडि़यों में आग लगाने के साथ-साथ पुलिस की गाडि़यों पर भी पथराव कर दिया है।
वेतनवृद्धि की मांग को लेकर सड़कों उतरे कर्मचारी पिछले 3-4 दिनों से जारी इस विरोध प्रदर्शन ने सोमवार की सुबह उग्र रूप ले लिया है। जब गुस्साये कर्मचारियों ने कई प्रमुख सड़कों पर चक्काजाम कर दिया है। यातायात व्यवस्था को ठप कर दिया। फेज 2 में चल रहे प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया है। प्रदर्शनकारियों ने गाडि़यों में आग लगा दी है। पुलिस पर भी पथराव कर आक्रोशित भीड को काबू में करने के लिये पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी दागे है।
प्रशासन ने की शांति बनाए रखने की अपील
इससे एक दिन पहले जिला प्रशासन, पुलिस और प्राधिकरण के अधिकारियों ने कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में उनकी मांगों पर विचार करने और समाधान निकालने का आश्वासन दिया गया था। इसके बावजूद उनका गुस्सा शांत नहीं हुआ और आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया है। फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी प्रकार की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ।
इससे पहले योगी सरकार ने कर्मचारियों के हित में लिया था बड़ा फैसला
इससे पहले योगी सरकार ने प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए कई अहम फैसले लिए है। इन फैसलों के तहत गौतम बुद्ध नगर में काम करने वाले श्रमिकों के लिए दोगुना ओवरटाइम भुगतान, समय पर सैलरी और बोनस सीधे बैंक खाते में जमा करना जरूरी कर दिया गया है. यह फैसला नोएडा में लगातार कंपनी मालिकों की मनमानी और सैलरी में देरी व अनियमितताओं के विरोध में तीन दिनों से काम बंद कर सड़कों पर उतरे कर्मचारियों के प्रदर्शन को देखते हुए लिया गया है। हालांकि इसके बाद भी कर्मचारी सोमवार की सुबह से नोएडा के फेज 2 इलाके में प्रदर्शन कर रहे है।
वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बाद गौतम बुद्ध नगर प्रशासन ने औद्योगिक इकाइयों के लिए नए दिशानिर्देश लागू किए हैं. प्रशासन का कहना है कि इन नियमों के जरिए श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी और जिले को श्रम सुधारों के मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है. जिलाधिकारी मेहा रूपम ने औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर इन नियमों की जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रमिकों से ओवरटाइम काम लेने पर उन्हें नियमित मजदूरी की तुलना में दोगुना भुगतान करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही ओवरटाइम भुगतान में किसी भी तरह की कटौती की अनुमति नहीं होगी । प्रशासन ने साप्ताहिक अवकाश को लेकर भी निर्देश जारी किए है। सभी औद्योगिक प्रतिष्ठानों को अपने कर्मचारियों के लिए सप्ताह में एक दिन की छुट्टी सुनिश्चित करनी होगी. यदि किसी कर्मचारी से रविवार को काम लिया जाता है, तो उसे दोगुनी दर से मजदूरी दी जाएगी ।

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महिला आरक्षण बिल को लेकर भाजपा ने सांसदों के लिये जारी किया 3 लाइन का ब्हिप

नई दिल्ली. संसद का बजट सत्र 2 अप्रैल तक चलना था। 2 अप्रैल को कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिये रोक दी गयी थी। ऐसा हुआ नहीं, स्पीकर ओम बिरला ने संसदीय कार्य मंत्री की तरफ से मिले अनुरोध का उल्लेख करते हुए कहा कि हम फिर से बैठेंगे। उन्होंने कार्यवाही को 16 अप्रैल तक के लिये स्थगित करने की ऐलान कर दिया था। अब 16 अप्रैल की तारीख नजदीक आ गयी हे। सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की अगुआई कर रही भाजपा सक्रिय हो गयी है।
भाजपा सांसद के दोनों सदनों, लोकसभा‘-राज्यसभा के अपने सदस्यों को 3 लाइन का व्हिप जारी कर 16, 17 और 18 अप्रैल को सदन में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। सांसदरों को इस व्हिप का सख्ती से पालन करने के लिये कहा गया है। पार्टी की तरफ से जारी किये गये व्हिप के अनुसार सभी सांसदों को सदन में उपस्थिति सुनिश्चित करनी होगी। भाजपा की तरफ से यह भी स्पष्ट कहा गया है कि इन तीनों दिनों की अवधि में किसी भी सांसद को किसी भी तरह की छुट्टी नही दी जायेगी। भाजपा ने अपने सभी सदस्यों से व्हिप का कड़ाई से पालन करने के लिये कहा है। गौरतलब है कि लोकसभा और राज्यों की विधानसभा में महिलाओं के लिये आरक्षण लागू करने को केन्द्र सरकार ‘‘महिला आरक्षण बिल’’ में संशोधन का प्रस्ताव लायेगी। सविंधान संशोधन प्रस्ताव भी आयेगा। जिसे पारित कराने के लिये दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। ऐसे में भाजपा अब यह बिल पारित कराने के लिये अभी से ही कमर कस ली है।
सरकार परिसीमन की जानकारी दे-विपक्ष
विपक्षी दलों की मांग है कि सरकार परिसीमन जैसे मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट करें। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन पर चर्चा कर के लिये सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी। विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया था कि विपक्ष को विश्वास में ले बिना बैठक बुलाई गयी है। टीएमसी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने संसद को गंभीरता से लेने की बजाय राजनीतिक नाटक किया जा रहा है।

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प्रख्यात सिंगर आशा भोसले ने 92 साल की आयु में निधन

आशा भोसले ने 8 सितंबर 2025 को अपना 92वां जन्मदिन मनाया था। - Dainik Bhaskarमुंबई. सिंगर आशा भोसले का 92 साल की आयु में निधन हो गया है। रविवार की दोपहर मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली है। उन्हें शनिवार की शाम को यहां भर्ती किया गया था। ब्रीच कैंडी अस्पताल में के डॉ. प्रतीत समदानी ने न्यूज एजेंसी ने बताया है कि आशा भोंसले को कई मेडीकल की समस्यायें थी। मल्टी ऑर्गन फेल्योर की वजह उनका निधन हो गया है।
डॉ. प्रतीत समदानी ने बताया है कि आशा भोंसले की मल्टी ऑर्गन फेल्योर हुआ है। यानी उनके कई अंगों ने काम करना बन्दर कर दिया था। आशा भेंसले के बेटे आनंद भोंसले ने बताया है कि जो लोग अंतिम दर्शन करना चाहते है। वह कल सुबह 11 बजे उनके घर आ सकते है। अंतिम संस्कार सोमवार की शाम 4 बजे शिवाजी पार्क में किया जायेगा।

सिंगर आशा भोसले  ने 40 के दशक में अपने करियर की शुरुआत की थी । उन्होंने लेजेंडरी डायरेक्टर बिमल रॉय, राज कपूर के साथ-साथ लेजेंडरी म्यूजिक कम्पोजर OP नय्यर, सरदार मलिक, सज्जाद हुसैन, एस मोहिंदर, ए आर रहमान संग काम किया था। उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर 40 और 50 के दशक की सबसे बड़ी गायिकाओं में से एक थीं।  मंगेशकर परिवार से आईं आशा भी अपनी बहन की ही तरह सुरीली आवाज वाली थीं. आशा ने अपनी आवाज का जादू बॉलीवुड में 1950 के दशक में चलाया।  हालांकि उन्होंने बड़ी फिल्मों में अपनी आवाज देने से पहले कई लो बजट फिल्मों में गाना गाकर पहचान पाई।  1952 में आई फिल्म ‘संगदिल’ में उन्होंने गाने गाए थे. म्यूजिक कम्पोजर सज्जाद हुसैन की इस एल्बम ने आशा को फेम दिलाया. उस जमाने के जाने माने डायरेक्टर बिमल रॉय ने 1953 में आई फिल्म ‘परिणीता’ में आशा भोसले को साइन किया था।  इसके बाद राज कपूर ने उनकी अपनी 1954 की फिल्म ‘बूट पोलिश’ में काम दिया. लेजेंडरी म्यूजिक कम्पोजर OP  नय्यर के साथ आशा ने 1952 से लेकर 1956 तक कई गानों पर काम किया था।  मगर 1957 में आई बी आर चोपड़ा की फिल्म ‘नया दौर’ के साथ आशा भोसले ने सफलता का असली स्वाद चखा. इस फिल्म के गाने भी नय्यर ने ही कम्पोज किए थे।

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प्रधानमंत्री मोदी की 6 गारंटी: सरकार बनी तो बंगाल में 7वां वेतनमान देंगे- नरेंद्र मोदी

हल्दिया- पश्चिम बंगाल के हल्दिया की चुनावी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि यदि भाजपा जीती तो 6 गारंटी तुरंत लागू होंगी। पहली- भरोसे का माहौल। दूसरी- अफसर जनता के प्रति जवाबदेह होंगे। तीसरी- भ्रष्टाचार से जुड़े अपराधों की फाइलें फिर खोलेंगे। चौथी- टीएमसी के गुंडे नहीं बचेंगे। 5वीं- घुसपैठियों को देश में नहीं रहने देंगे। 6ठी- राज्य कर्मचारियों, शिक्षकों व अन्य के लिए बंगाल में 7वां वेतनमान तुरंत लागू किया जाएगा। राज्य सरकार अभी इसमें भेदभाव कर रही है।
ममता बनर्जी बोलीं- रैली में आने के लिए 500 रु. दे रही भाजपा
उत्तर, उत्तर 24 परगना जिले के पलटा की रैली में तृणमूल चीफ और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा रैली में भीड़ को लाने के लिए 500-500 रुपए दे रही है। फिर भी तृणमूल जीतेगी। अगस्त 2026 से भाजपा का अंत तय है। खराब मौसम के बावजूद इतनी संख्या में लोगों का पहुंचना आने वाले तूफान का संकेत है। इस बीच, टीएमसी नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एक कथित वीडियो दिखाया। इसमें आम जनता उधयन पार्टी के संस्थापक हुमायूं कबीर नजर आ रहे हैं।
मोदी की 6 गारंटी: सरकार बनी
टीएमसी ने आरोप लगाया कि ममता को हराने के लिए कबीर ने भाजपा नेताओं और प्रधानमंत्री कार्यालय से संपर्क किया। इस वीडियो में कबीर एक हजार करोड़ रु. की डील की बात कर रहे हैं। तृणमूल ने यह भी दावा किया कि कबीर वीडियो में डील के तहत 200 करोड़ रुपए एडवांस में लेने की बात करते दिख रहे हैं। हालांकि हुमायूं ने वीडियो को एआई जनरेटेड बताया।

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वृंदावन घटना में 10 लोगों की मौत, एक ही परिवार के 7 सदस्यों की मौत, बांके बिहारी के दर्शन करने आये थे

Mathura Boat Accident Video from Just Before the Tragedy

लुधियाना. यूपी के वृंदावन में यमुना नदी में नाव पलटने से एक बड़ी दुर्घटना हो गयी,जिसमें 410 श्रद्धालुओं की मौत हो गयी। मृतकों में एक ही परिवार के 7 सदस्य शामिल बताये गये हैं। सभी श्रद्धालु शुक्रवार की सुबह ही लुधियाना और जगराओं से वृंदावन पहुंचे थे। घटना में जान गंवाने वाले श्रद्धालु लुधियाना और जगराओं के निवासी बताये जा रहे है। हादसे के बाद इलाके में शोक का मातम छाया हुआ है परिजनों में भी शोक पसरा हुआ है।
क्या है घटनाक्रम
छरअसल, गुरूवार 9 अप्रैल को जगराओं के श्री बांकेबिहारी क्लब की तरफ से 2 बसों में लगभग 130 श्रद्धालुओं को वृंदावन यात्रा के लिये ले जाया गया था। इनमें से लगभग 90 श्रद्धालुओं जगराओं के थे। जबकि बाकी अन्य शहरों से शामिल किये गये थे। यह 4 दिवसीय धार्मिक यात्रा पर आये थे। बांके बिहारी के दर्शन करने आये थे। लेकिन वृंदावन में नाव पलटने से एक ही परिवार के 7 लोगों की मौत हो गयी थी। घटना में एक ही परिवार केक 7 सदस्यों की मौत की खबर सामने आयी है। मृतकों में जगराओं निवासी मधुर बहल, उनकी मां कविता बहल, चाचा चरणजीत, चरणजीत की पत्नी पिंकी बहल, मधुर की बुआ आशारानी, दूसरी बुआ लुधियाना निवासी अंजु गुलाटी और फूफा राकेश गुलाटी के नाम सामने आये है। हालांकि लुधियाना स्थित राकेश गुलाटी के घर मौजूद रिश्तेदारों ने कहा है कि पूरी सूची मिलने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पायेगी।
विधायक ले रहे हैं जानकारी
हादसे की खबर मिलते ही विधायक कुलवंत सिद्धू भी पीडि़त परिवार के पास पहुंचे। उन्होंने कहा है कि घटना की जानकारी ले रहे हैं। घटना के बाद मृतकों के परिजनों में मातम का माहौल है। पूरे में शोक व्याप्त है। आपको बता दें कि वृंदावन के के केशी घाट के पास यमुना नदी में पर्यटकों से भरी नाव पोंटून पुल से टकराकर कर पलट गयी थी ।नाव में 30 से ज्यादा लोग सवार थे। जो नदी में गिर गये। जिनमें से 10 लोगों की मौत हो गयी। जबकि 22 को बचा लिया गया है। वहीं पीएम नरेन्द्र मोदी ने ऐलान किया है कि वृृंदावन घटना में प्रत्येक मृतक के परिजनों को पीएमएनआरएफ से 2 लाख रूपये की अनुग्रह राशि प्रदान की जायेगी। घायलों को 50 हजार रूपये दिये जायेंगे।

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7वें वेतन आयोग -क्यों हो रही महंगाई भत्ते में देरी और कितनी बढ़ेगा वेतन

नई दिल्ली. केन्द्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स जनवरी 2026 में महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) में वृद्धि का बेसब्री से इतजार कर रहे है। अप्रैल माह शुरू हो चुका है अभी तक कोई अधिकारिक घोषणा नहीं की गयी। जिससे कई लोगों को लग रहा है कि जल्द ही इसका ऐलान होने वाला है।
महंगाई भत्ता (डीए) में वृद्धि से मासिक वेतन और पेंशन में सीधे तौर पर वृद्धि होती है।इसलिये एक छोटा सा बदलाव भी लाखों परिवारों के लिये महत्व रखता है। अभी केन्द्र सरकार ने 8वां वेतन आयोग भी लागू नहीं किया है। जिस वजह से इन कर्मचारियों का 7वें वेतन आयोग के तहत ही डीए और डीआर में वृद्धि का अनुमान है। केन्द्र सरकार साल में 2 बार महंगाई भत्ता में वृद्धि करती है। पहली बढ़ोत्तरी जनवरी से लागू होती है। जिसका ऐलान मार्च या अप्रैल में किया जाता है। जबकि दूसरी वृद्धि जुलाई से लागू होती है। जिसका ऐलान सितम्बर -अक्टूबर में लागू किया जाता है। सरकारी कर्मचारी अभी जनवरी वाले भत्ते का इंतजार कर रहे है।
महंगाई भत्ते के आने में क्यों हो रही देरी
मार्च में डीए की वृद्धि का ऐलान नहीं होने की वजह से चिन्ता पैदा हुई है। लेकिन एक्सपर्टस का कहना है कि यह असामान्य हो सकता है। कर्मा मैनेजमेंट ग्लोबल कंसल्टिंग सॉल्यूशंस प्रायवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर और मुख्य विजन अधिकारी प्रतीक वैद्य बताते हैं। कि यह प्रॉसेस एक तय समय समय सीमा का पालन करती है। उन्होंने कहा है कि आमतौर पर जनवरी के लिये एग्रीकल्चर खर्च संबंध ऐलान मार्च के आसपास पूरी हो जाती है। जब महंगाई के आंकड़े जारी होते हैं। इसलिये समय के लिहाज से देखें तो इसमें कोई खास बदलाव नहीं हो रहा है। उन्होंने आगे कहा है कि जिसे कई लोग देरी कह रहे है। वह असल में मंदी से अधिक उम्मीदों से जुड़ी है। वैद्य ने कहा है कि जिस देरी को ‘‘देरी’’ के रूप में देखा जा रहा है। वह वास्तविकता से कहीं अधिक अपेक्षाओं पर आधारित है। यह दिसम्बर तक पूरे वर्ष के एआइ्रसीपीआई आंकड़ों पर निर्भरकरता है। उसके बाद एक प्रॉसेंस है। फाईल की आवाजाही, वित्तीय जांच, कैबिनेट की मंजूरी, फिर डीए में बढ़ोत्तरी का ऐलान हो सकता है।
क्‍यों लग रहा इतना समय?
नियमित अप्रूवल के अलावा, व्यापक आर्थिक स्थिति भी समय तय करने में भूमिका निभा सकती है।  वैद्य ने कहा कि सरकार जल्‍दी से ऐलान करने के बजाय उनमें अंराल रखना पसंद करेगी। इससे पता चलता है कि सरकार अपने फैसलों को जल्‍दबाजी में लेने के बजाय धीरे-धीरे ले ही है, भले ही कैलकुलेशन पहले से ही की जा चुकी हो ।जहां तक संभावित बढ़ोतरी की बात हैं तो शुरुआती अनुमान मामूली वृद्धि की ओर इशारा करते है।   एक्‍सपर्ट का कहना है कि अनुमानित बढ़ोतरी लगभग 3% से 4% के आसपास होगी, जिससे महंगाई भत्ता 50 फीसदी से ऊपर चला जाएगा और 53 से 54 फीसदी हो सकता है।

 

 

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नालंदा के शीतला माता मंदिर में मची भगदड से 9 की मौत, इनमें 8 महिलायें, 25 हजार श्रद्धालुओं की सुरक्षा एक भी पुलिस कर्मी नहीं

नालंदा. बिहार के नालंदा जिले में मंगलवार की सुबह शीतला माता मंदिर में भगदड़ मच गयी। भगदड़ की घटना में 9 लोगों की मौत हो गयी है। 8 महिलाओं की भीड़ में दबने से घटनास्थल पर मौत हो गयी थी। जबकि एक पुरूष ने अस्पताल में दम तोड़ दिया है। चैत्र माह के आखिरी मगलवार का भारी तादाद में श्रद्धालु इस मंदिर में पहुंचे थे। वहां मेला भी लगा था। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि भीड़ का काबू में करने के लिये इंतजाम नहीं थे। दर्शन करने की जल्द में धक्का-मुक्की मच गयी। अफरातफरी के बीच कई लोग भीड़ में दब गये। बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए हैं। हादसे के बाद मंदिर और मेला को बन्द करवा दिया गया है। आज नालंदा यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति ने भी हिस्सा लिया था। उनकी सुरक्षा में 8 जिलों के 2500 जवानों का लगाया गया था। जबकि मंदिर मंे जुटी 25 हजार की भीड़ के लिये एक भी पुलिस वाले की तैनाती नहीं थी।
हादसे के बाद पटना कमिश्नर को बिहार शरीफ भेजा गया है। मुख्यमंत्री ने मुख्यसचिव का जांच के निर्देश दिये हैं। दीपनगर थाने के एसएचओ राजमणि को निलंबित कर दिया गया है। सरकार ने मृतकों के आश्रितों को 6 लाख रूपये मुआवजा देने का ऐलान किया है। वहीं केन्द्र सरकार ने 2 लाख के मुआवजे की घोषणा की है।

हादसे के बाद की 4 तस्वीरें देखिए…

हादसे के बाद मंदिर परिसर में अफरा-तफरी का माहौल रहा।
हादसे के बाद मंदिर परिसर में अफरा-तफरी का माहौल रहा।
ई-रिक्शा से घायल महिला को अस्पताल लाया गया।
ई-रिक्शा से घायल महिला को अस्पताल लाया गया।
हॉस्पिटल में घायल को सीपीआर देते डॉक्टर।
हॉस्पिटल में घायल को सीपीआर देते डॉक्टर।
पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर लोगों की भीड़ है।
पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर लोगों की भीड़ है।

हादसे से जुड़ी बड़ी बातें
चैत्र महीने के आखिरी मंगलवार के चलते पटना, आसपास के इलाकों से भी दर्शन के लिए पहुंचे थे। वजह भीड़ बहुत बढ़ गई। मंदिर परिसर छोटा था। भीड़ को कंट्रोल करने के इंतजाम नहीं थे। लोगों में पहले दर्शन करने की होड़ लग गई। लोग कतार में लगने की जगह आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे।  भगदड़ की स्थिति बन गई। कई लोग भीड़ के नीचे दब गए। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि हादसे के बाद पुलिस और एंबुलेंस को पहुंचने में भी देर हुई।

 

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देश की सीमा से ISI का आतंकी गुर्गा गिरफ्तार

नई दिल्ली- दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़ी कार्रवाई में लश्कर ए तैयबा के कमांडर शब्बीर अहमद लोन को गिरफ्तार कर लिया है। इसकी गिरफ्तारी बांग्लादेश बॉर्डर के पास से की गई। यह लश्कर के एक मॉड्यूल का संचालन कर रहा था और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI  इसे अपने इशारों पर नचा रही थी। भारत में तबाही मचाने के लिए तैयार कर रही थी। इसके मंसूबों की जैसे ही भारतीय खुफिया एजेंसियों को भनक लगी, खुफिया एजेंसियों ने इसका पीछा करना शुरू कर दिया था।
2 महीने लगे
ऐसा बताया जा रहा है कि खुफिया एजेंसियों का यह ऑपरेशन करीब 2 महीने चला। इस दौरान कैट एंड माउस गेम काफी देखने को मिली। दिल्ली पुलिस के आयुक्त सतीश गोलचा खुद पूरे ऑपरेशन की निगरानी कर रहे थे।
पीछा कब से
दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम इसके पीछे तभी से लग गई थी जब खबर मिली थी कि शब्बीर अहमद लोन दिल्ली, कोलकाता और तमिलनाडु में आतंकी गतिविधियों के लिए युवाओं की भर्ती कर रहा है। इसके बाद हर पल इस पर नजर रखी जाने लगी।
पाक से कंट्रोल
दिल्ली पुलिस को जांच में पता चला कि शब्बीर अहमद लोन पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर आतंकी घटनाओं को अंजाम देता था। इस समय वह सीमा पार से मिल रहे निर्देशों का पालन करते हुए भारत में किसी मिशन को अंजाम देने की फिराक में था।
सिर दर्द बन गया था यह
लश्कर ए तैयबा के कमांडर शब्बीर अहमद लोन को दिल्ली पुलिस ने साल 2007 में भी गिरफ्तार किया था। यह 12 साल तक जेल में रहा और जैसे ही इसे जेल से जमानत मिली 2019 में यह बांग्लादेश भाग गया। इसके बाद यह ढाका में रहते हुए लश्कर और ISI के लिए आतंकी सेल स्थापित की। इसके बाद से ही इसने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए मुश्किल खड़ी करनी शुरू कर दी थी। यह मूलतः श्रीनगर का रहने वाला है और उस आतंकी मॉड्यूल का सरगना था जिसका हाल ही में भंडाफोड़ किया गया था। दिल्ली से दक्षिण भारत तक फैले इस मॉड्यूल ने दिल्ली-कोलकाता और कई स्थानों पर भारत विरोधी पोस्टर चिपकाए थे।

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