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TMC में फूट और DMK रूठी, BJP परिसीमन बिल को पास कराने की बना रही रणनीति

नई दिल्ली. देश की राजनीति एक बार फिर ऐसे मोड़ पर आकर खड़ी हो गयी हे। एक ओर जहां विपक्षी एक जुटता ताश के पत्तों की तरह बिखर रहा तो दूसरी ओर केन्द्र की सत्ताधारी भाजपा अपने सबसे महत्वाकांक्षी मिशन -परिमीशन विधेयक 2026 को पास कराने के चक्रव्यूह को भेदने के बेहद करीब पहुंचती नजर आ रही है।
पश्चिम बंगाल की सत्ता से बाहर होते ही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के अंदर अंदरूनी कलह और बगावत की चिंगारी सुलग रही है। वहीं, दक्षिण भारत में विपक्ष का सबसे मजबूत स्तंभ मानी जाने वाली ‘‘द्रमुक’’ (डीएमके) ने कांग्रेस से धोखे का आरोप लगाते हुए इंडिया गठबंधन सेा किनारा कर लिया है। आम आदमी पार्टी में पहले ही बगावत हो चुकी है। विपक्ष के बिखरते कुनबे के बीच भाजपा अलग की रणनीति पर काम कर रही है। भाजपा क्या अपने सियासी मंसूबे में कामयाब हो पायेगी?
डीएमके इंडिया ब्लॉक से रूठ गयी
तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद दक्षिण की राजनीति में आये भूचाल ने इंडिया ब्लॉक की चूलें हिला दी है। राज्य की सत्ता की डीमके बाहर होते ही और थलपति विजय के राजनीति उदय से केन्द्र की राजनीति पूरी तरह बदल गयी है। कांग्रेस ने तमिलनाडु में डीएमके का साथ छोड़कर अभिनेता विजय की पार्टी ‘तमिझगा वेत्री कड़गम’ (टीवीके) के साथ गठबंधन सरकार में शामिल हो गयी। जिसने डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन को पसंद नहीं आया।
राज्यसभा में जाने के लिये एनडीए को दो तिहाई बहुमत
राज्यसभा में एनडीए के लिये दो-तिहाई बहुमत जुटाने का रास्ता आसान होती दिखाई दे रही हैं हाल ही में आम आदमी पार्टी ‘‘आप’’ के सांसदरों के पाला बदलकर भाजपा का दामन था मिलया है। आम आदमी के 7 सांसदों के बीजेपी में विलय को राज्यसभा अध्यक्ष द्वारा मंजूरी मिल गयी है। इसके बाद उच्च सदन में भाजपा की व्यक्तिगत संख्या 106 से बढ़कर 113 हो गयी है एनडीए की ताकत 145 तक पहुंच गयी है।
परिसीमन बिल को पास कराने की भाजपा की रणनीति
केन्द्र सरकार 2029 से पहले हरहाल में परिसीमन बिल पास कराना चाहती है। लेकिन दो-तिहाई बहुमत नहीं होने से कामयाब नहीं हो पा रही है। परिसीमन बिल के देश के राजनीतिक भूगोल को बदलने वाला है।इसके तहत लोकसभा सीटों की संख्या को 543 से बढ़ाकर 850 (816 राज्यों के लिये) करने का प्रस्ताव है। दरअसल, यह एक संविधान संशोधन बिल है। इसलिये इसे संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई (2/3) विशेष बहुमत से पास कराना अनिवार्य है। सरकार के पहले प्रयास में विपक्ष की एकजुटता के चलते पास नहीं हो सका। लेकिन बदले हुए सियासी हालात में भाजपा ने नया गुणा-गणित तैयार कर लिया है। विपक्ष में बिखराब का लाभ उठाकर भाजपा दो -तिहाई बहुमत का नम्बर जुटाने में लग गयी है।
सांसद में दो-तिहाई बहुमत क्यों हैं जरूरी
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत किसी भी बड़े संविधान संशोधन विधेयक को पास कराने के लिये संसद के दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई (विशेष) बहुंमत की आवश्यकता होती है। हाल ही में (अ्रप्रैल 2026में) लोकसभा में दो-तिहाई बहुंमत नहीं होने की वजह से महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने और सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करने से जुड़ा 131वां संविधान विधेयक गिर गया था। मोदी सरकार के आगामी बड़े एजेंडे जैसे एक देश एक चुनाव और देशव्यापी परिसीमन बिल को बिना दो-तिहाई बहुमत के नम्बर जुटाये उसको पारित कराना असंभव है। यही वजह है कि भाजपा विभिन्न क्षेत्रीय दलों और असंतुष्ट सांसदरों को जोड़कर इस आंकड़े को सुरक्षित करने की कोशिशों में तेजी से जुटी है। अब देखना है कि भाजपा कितनी कामयाब होती है।

 

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युद्ध के लिये मच्छरों को बना रहा है किलर है अमेरिका, सैनिकों पर सीक्रेट टेस्टिंग

America killer mosquitoes

नई दिल्ली. एक बेहद चौंकाने वाला और ऐतिहासिक खुलासा किया गया है। पेंटागन के कुछ ऐसे गुप्त दस्तावेज सार्वजनिक हुए हे। जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि कोल्डवॉर के बीच अमेरिका ने संक्रामक बीमारियों से लैस मच्छरों को जैविक हथियार के रूप में उपयोग करने के खतरनाक प्रयोग किये है।
न्यूज डेली मेल द्वारा खोजी गयी 69 पन्नों की एक डिटेल रिपोर्ट जिसे 1़977 में डीक्लासिफाई कर दिया गया था। पेंटागन की आधिकारिक लायब्रेरी डिफेंस टेक्नीकल इंफॉर्मेशन सेंटर की वेबसाइट पर डल दिया गया था। आज पूरे विश्वभर में चर्चा हो रही है। इस रिपोर्ट ने यह साबित कर दिया है कि अमेरिकी सेना ने प्रोजेक्ट बेलवेदर नाम से एक गुप्त कार्यक्रम चलाया था। जिसके तहत भीषण गर्मी और रेगिस्तानी परिस्थितियों में मच्छरों के इंसानों को काटने की क्षमता का परीक्षण किया गया था। सितम्बर और अक्टूबर 1959 के बीच किये गये इन परीक्षणों का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या इन कीड़ों को दुश्मन के सैनिकों याआम आबादी के खिलाफ घातक हथियार के रूप में छोड़ा जा सकता है।
इस रिपोर्ट ने यह साबित कर दिया है कि अमेरिकी सेना ने ‘‘प्रोजेक्ट बेलवेदर’’ नाम से एक गुप्त कार्यक्रम चलाया था। जिसके तहत भीषण गर्मी और रेगिस्तानी परिस्थितियों में मच्छरों के इंसानों को काटने की क्षमता का परीक्षण किया गया था। सितम्बर और अक्टूबर 1959 के बीच किये गये इन परीक्षणों का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या इन कीड़ों को दुश्मन के सैनिकों या आम आबादी के खिलाफ घातक हथियार के रूप में छोड़ा जा सकता है। इस गुप्त और संवेदनशील मिशन के लिये सैन्य शोधकर्ताओं ने विशेष रूप एडीज एजिप्टी प्रजाति के मच्छरों का चयन किया था। यह वही प्रजाति है जो इंसानों को अपना शिकार बनाती है और जीका वायरस, डेंगू , चिकनगुनिया और यलो फीवर जैसी जानलेवा बीमारियां फैलाने के लिये जानी जाती है।
इस बेहद अमानवीय परीक्षण का एकमात्र उद्देश्य यह जांचना था कि क्या ये मच्छर आसमान से गिराए जाने के बाद भी जीवित रह सकते है।   अपने टारगेट को ढूंढकर काट सकते है।  यलो फीवर एक ऐसी खतरनाक बीमारी है जिसमें तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी और ब्लीडिंग होती है।   इलाज न मिलने पर संक्रमित लोगों में से 50% की मौत हो सकती है।  डेंगू भी शरीर को तोड़कर देता है।  सही समय पर इलाज न मिलने पर यह मरीज को इंटरनल ब्लीडिंग और शॉक के जरिए मार डालता है।
कोल्ड वॉर के उसी दौर में अमेरिकी सेना ने ऑपरेशन ड्रॉप किक को भी अंजाम दिया, ताकि यह देखा जा सके कि क्या मच्छरों को जैविक हथियारों की डिलीवरी सिस्टम के रूप में पूरी तरह विकसित किया जा सकता है।  इस कार्यक्रम के तहत करोड़ों मच्छरों का कृत्रिम रूप से प्रजनन कराया गया. उन्हें खुले मैदानों में छोड़कर शोधकर्ताओं ने उनके सफर करने की दूरी, विपरीत परिस्थितियों में जीवित रहने की अवधि और इंसानों को ढूंढकर काटने की उनकी आदतों का बारीकी से अध्ययन किया है।

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होटल अग्निकांड में एक -दूसरे की बांहों में मिले कपल के शव, लाइबेरियाई महिला की हुई पहचान, पति अस्पताल में भर्ती

नई दिल्ली. मालवीय नगर इलाके में स्थित फ्लरिश स्टे होटल में 3 जून का लगी आग में जवान गंवाले 21 लोगों में एक अफ्रीकी कपल भी शामिल था। बचाव दल को उनके शव बाथरूम में मिले, जहां देानों एक-दूसरे की गले लगाये हुए थे। महिला टायलेट सीट पर बैठकी थी। जबकि उसका पति पास रखी कुर्सी पर बैठा हुआ था। दोनों एक -दूसरे को कसकर पकड़े हुए थे। महिला का सिर पति के कंधे पर टिका हुआ था। दोनों की दम घुटने से मौत हो गयी। स्थानीय लोगों के अनुसार यह कपल के पास के ही अस्पताल में इलजा करा रहे थे।
आग में जान गंवाने वाली 61 वर्षीय लाइबेरियाई महिला जेनजे एन रौलेंड के शव की पहचान हुई है। महिला के बीमार पति पहले से मैक्स अस्पताल में भर्ती थे। एक रिश्तेदार ने एम्स मोर्चरी में पहुंचकर महिला के शव की पहचान की।
हादसा होने की 5 बड़ी वजह
खिड़कियां बंद थीं। वेंटिलेशन नहीं था। आने-जाने का सिर्फ एक रास्ता था। जगह काफी सकरी थी। बाहरी फायर एस्केप (आपातकालीन निकास) की कोई व्यवस्था नहीं थी। ऐसी इमारतें ‘चिमनी’ जैसी बन जाती हैं, धुआं-गर्मी कुछ ही सेकंड में ऊपर पहुंच जाती है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, सेंसर आधारित मुख्य गेट बंद हो गया था। इसकी वजह से लोग बाहर ही नहीं निकल पाए।
स्मोक डिटेक्टर, फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम जैसे जरूरी फायर सेफ्टी उपकरण काम नहीं कर रहे थे।
ग्राउंड फ्लोर पर कई भारी एलपीजी सिलेंडर रखे गए थे, जिनके लिए कोई फायर-आइसोलेशन सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी।

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8th Pay Commission-8वें आयोग पर आया बड़ा अपडेट, बढ़ गयी डेडलाइन

नई दिल्ली. 8th Pay Commission  (CPC ) के तहत एक बड़ा अपडेट सामने आया है। 8वें वेतन आयोग ने सुझाव और मांग रखने की डेडलाइन बढ़ाकर 15 जून तक कर दी है। इससे केन्द्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनर्स और अन्य कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और अलाउंस में संशोधन पर विचार करने के लिये एकस्ट्रा समय मिल गया है। यह विस्तार ऐसे वक्त में हुआ है कि जब कर्मचारी यूनियनों और पॉलिसी मेकर्स के बीच लम्बे वक्त से इंतजार किये जा रहे फिटमेंट फैक्टर पर चर्चा तेज हो गयी है। नये नोटिफिकेशन में 8वें वेतन आयोग ने ऐलान किया है कि हितधारकों द्वारा अपने ज्ञापन और सिफारिशें प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 15 जून होगी। इससे पहले आयोग द्वारा दी गयी समय सीमाको 31 मई तक बढ़ा दिया गया था। अब यह दूसरी बार है कि जब समय सीमा बढ़ाई गयी है।
8वें वेतन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि सुझाव केवल उसकी आधिकारिक वेबसाइट 8बचबण्हवअण्पद के माध्यम से ही स्वीकार किये जायेंगे। परामर्श प्रक्रिया के दौरान फिजीकल डॉक्यूमेंट्स, ईमेल, हार्डकॉपी और पीडीएफ लेटर स्वीकार नहीं की जायेंगे। इस विस्तार का मतलब आयोग द्वारा अपवनी सिफारिशों का अंतिम रूप देने से पूर्व कर्मचारी यूनियनों, पेंशनर्स ग्रुप, डिफेंस इम्पलाई के प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों की व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।
सिफारिशें कौन-कौन कर सकता है
केन्द्र सरकार के कर्मचारी, पेंशनर्स, रक्षाकर्मी, अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी, केन्द्र शासित प्रदेश के कर्मचारी और सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य पात्र अपनी मांग रख सकते हैं। इस पैनल से उम्मीद की जाती है कि वह अपने चयन के 18 महिनों के अन्दर अपनी रिपोर्ट पेश कर देगा। हालांकि जरूरत पड़ने पर अंतरिम रिपोर्ट भी जारी की जा सकती है।
फिटमेंट फैक्टर
8वें वेतन आयोग के सबसे अधिक ध्यान से देखे जाने वाले पहुलओं में से एक है। फिटमेंट फैक्टर, जो वेतन संशोधनों की लिमिट तय करता है। यह संशोधित बेसिक सैलरी और पेंशन के कैलकुलेशन में उपयोग किया जाने वाला एक फैक्टर है। हाईफिटमेंट फैक्टर से सैलरी और रिटायरमेंट प्रॉफिट में अधिक बढ़ोत्तरी होती है।
8वें वेतन आयोग के तहत क्या हैं मांगे
कई यूनियनों का तर्क है कि बढ़ती महंगाई, आवास की बढ़ती लागत, हेल्थ खर्च और बेहतर पेंशन व्यवस्था की आवश्यकता एक व्यापक संशोधन को उचित ठहराती है। कई कर्मचारी ग्रुप 3.0 से 4.0 के बीच फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं। जिससे न्यूनतम बेसिक लेवल पर को उचित पर बड़ी बढ़ोत्तरी हो सकती है। अगर 3.8 से 4.0 की लिमिट में फिटमेंट फैक्टर को मंजूरी मिल जाती है तो हितधारकों के साथ परामर्श के दौरान चर्चा किये गये अनुमानों के अनुसार, न्यूनतम मूल वेतन संभावित रूप से 69,000 -72 हजार के बीच बढ़ सकता है।
उदाहरण के लिए
छठा वेतन आयोग (2006): फिटमेंट फैक्‍टर 1.86,
सातवां वेतन आयोग (2016): फिटमेंट फैक्‍टर 2.57
सातवें वेतन आयोग के फार्मूले के तहत न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 तय किया गया था. 2.57 के फिटमेंट फैक्टर को लागू करने से पिछले सैलरी स्‍ट्रक्‍चर की तुलना में वेतन में काफी बढ़ी हुई है.

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UP  में 10%  अब बिजली महंगी नहीं होगी, नियामक आयोग ने UPPCL के प्रस्ताव पर लगाई रोक

लखनऊ. उत्तरप्रदेश विद्युत नियामक आयोेग ने राज्य के करोड़ो बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। यूपी पॉवर कार्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) द्वारा जून माह के बिलों में प्रस्तावित 10 प्रतिशत अतिरिक्त बिजल टैरिफ वसूली पर रोक लगा दी है। विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस अतिरिक्त वसूली को नियमों के विरूद्ध बताते हुए नियामक आयोग में याचिका दाखिल की थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए आयोग ने यूपीपीसीएल से इस मामले में स्पष्टीकरण मांग लिया है। निर्देश दिया है कि अंतिम फैसला आनेतक बिलों में कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं जोड़ा जायेगा। उपभोक्ता परिषद की इस पहल से उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला बड़ा आर्थिक बोझ फिलहाल टल गया है।
गौरतलब है कि बिजली दरों में वृद्धि का फैसला ऐसे वक्त आया था। जब प्रदेश के कई हिस्सों में बिजली कटौती और आपूति संबंधी शिकायतें लगातार सामने आ रही है। गर्मी के मौसम में बढ़ती मांग के बीच उपभोक्ता पहले से ही बिजली संकट और अनियमित आपूर्ति की समस्या से जूझ रहे है। ऐसे में बिजली बिल में 10 प्रतिशत अतिरिक्त भार पड़ने से आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ता है। हालांकि इस प्रस्ताव पर रोक लग गयी है। जिससे ग्राहकों ने राहत की सांस ली है।

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बंगाल में TMC के कल्याण बनर्जी पर हमला, BJP बोली- वह नाटक कर रहे

कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि चंडीतला थाने में ज्ञापन देने जाते समय उन पर हमला किया गया. (Photo: ITG)

कोलकाता. पश्चिम बंगाल के हुगली स्थित चंडीतला पुलिस थाने के सामने तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी पर हमले की जानकारी सामने आयी है। टीएमसी सांसद ने आरोप लगाया है कि भाजपा कार्यकर्त्ताओं ने उन पर हमला किया और उनके सिर पर पत्थर या गेंद जैसी चीज मारकर चोट पहुंचाई है। जबकि भाजपा का कहना है कि वह घायल नहीं हुए हैं। सिर्फ नाटक कर रहे हैं। कल्याण बनर्जी, अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले के मामले में गिरफ्तार टीएमसी नेता, कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग को लेकर चंडीतला थाना ज्ञापन सौंपने के लिये पहुंचे थे। इस बीच ज्ञापन सौंपने से पहले ही तृणमूल और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नारेबाजी शुरू हो गयी।
टीएमसी-भाजपा के बीच नोंकझोंक
ऐसा बताया जा रहा है कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने तृणमूल समर्थकों के खिलाफ चोर-चोर के नारे लगाये। जिसके बाद माहौल और गर्म हो गया। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिये मौके पर भारी पुलिस बल और केन्द्रीय सुरक्षाबल तैनात किये गये।
सिर पर भीगा हुआ रूमाल रखे कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि चंडीतला थाने में डिपुटेशन (ज्ञापन) देने जाते वक्त उन पर हमला किया गया. उन्होंने घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने जा रहे लोगों पर हमला किया गया.
ध्यान भटकाना चाहते हैं कल्याण -BJP
वहीं, बीजेपी ने कल्याण के खुद के चोट लगने के दावों को झूठा करार दिया है. बीजेपी का कहना है कि वह (कल्याण बनर्जी) ड्रामा कर रहे हैं. उन्हें चोट नहीं आई है. वो अभिषेक बनर्जी के मामले से ध्यान भटकाना चाहते हैं

 

 

 

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सूर्या की हत्या का मुख्य आरोपी को गाजियाबाद पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया

लखनऊ. गाजियाबाद के खोड़ा में बकरीद पर 17 वर्षीय सूर्या चौहान की हत्या कर दी गयी थी। अब इस मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने एनकाउंटर के बाद मुख्य आरोपी असद को पकड़ लिया था।हालांकि, एनकाउंटर के दौरान लगी गोली की वजह अस्पताल में उपचार के दौरान असद की मौत हो गयी।
पुलिस को बीती देर रात एक पुख्ता खबर मिली थी। इस हत्याकांड का मुख्य आरोपी असद अपने किसी दोस्त से पैसे लेने के लिये खोड़ा इलाके में आने वाला था। पैसे लेने के बाद उसका शहर छोड़कर भागने का था। खबर मिलते ही गाजियाबाद पुलिस ने असद को दबोचने के लिये इलाके में एक जाल बिछाया और घेराबंदी की तो कुछ समय बाद असद एक दूसरे व्यक्ति के साथ मोटरसाईकिल पर सवार होकर वहां पहुंचा तो पुलिस ने दबोच लिया।

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अभिषेक बनर्जी पर हमला- के कपड़े फाड़े, कच्चे अंडे फेंके, हेलमेट पहनाकर बचाई जान

अभिषेक बनर्जी शनिवार को सोनारपुर में चुनावी हिंसा के पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे थे। - Dainik Bhaskar

कोलकाता. पश्चिम बंगाल के सोनारपुर में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर हमला हुआ है। चुनाव के बाद हुई हिंसा के बीच पीडि़तों से मिलने पहुंचे टीएमसी नेता पर प्रदर्शनकारियों ने कच्चे अंडे फेंके और उनके साथ मारपीट की है। स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षाकर्मियों ने मुस्तैदी दिखाई दी। उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिये तत्काल हेलमेट पहनाया गया। इसके बाद सुरक्षा घेरे के बीच वहां से बाहर निकाला गया।
यह पूरी घटना सोनारपुर के कमराबाद इलाके की है। टीएमसी सांसद शनिवार की शाम को अपनी पार्टी के एक मृतक कार्यकर्त्ता के घर पहुंचे थे। वह लगभग 4.30 बजे कमराबाद पहुंचे। इस बीच भाजपा के नेता-कार्यकर्त्ता के साथ बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी पहले से मौजूद थे। इस प्रदर्शन में महिलाओं को आगे रखा गया था। जिनके हाथों में कच्चे अंडे थे।
अभिषेक के खिलाफ क्यों फूटा गुस्सा?
स्थानीय लोगों के मुताबिक, वहां सड़कों का हाल बुहत खराब है. करीब 1 किमी तक सड़क की स्थिति बेहद खराब है. बारिश के दौरान यहां पानी भर जाता है।  लोगों का कहना है कि जब ममता बनर्जी मुख्यमंत्री थीं, तब कई बार उनसे गुजारिश की गई, आवेदन दिए गए।   सड़कें ठीक कराने और पानी की सप्लाई व्यवस्था सुधारने की मांग की गई. लेकिन किसी ने कभी ध्यान नहीं दिया।  किसी ने उनके बारे में नहीं सोचा।  इसी वजह से जब सांसद होने के नाते अभिषेक बनर्जी यहां पहुंचे, तो लोगों ने सवाल उठाया कि 15 साल से सत्ता में रहने के बावजूद इस इलाके का विकास क्यों नहीं हुआ।  इन्हीं मुद्दों को लेकर लोगों में गुस्सा था । उनके खिलाफ लगातार नारेबाजी की गई और उन पर अंडे भी फेंके गए।

 

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राजस्थान में उठा रेत का बवंडर, दिन में ही रात हुई तो गाडि़यों की जलानी पडी हेड लाइट

चुरू. राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में शनिवार की दोपहर को प्रकृति का एक अद्भुत और डरावना रूप में सामने आया है। चूरू में दोपहर लगीाग 2 बजे और श्रीगंगानगर में अचानक मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदल गया है। आसमान में धूल और रेत का इतना विशाल गुबार कि उसने पूरे सूरज को अपने आगोश में ले लिया।
धूल का यह बवंडर इतना घना था कि देखते-देखते दोपहर के समय ही चारों ओर घनघोर अंधेरा छा गया। बिजिविलटी (दृश्यता) घटकर शून्य के लगभग पहुंच गयी। सड़कों पर चल रहे वाहनों के पहिये जहां के तहां थम गये और वाहन चालकों को मजबूरन अपनी हेडलाइट्स जलानी पड़ी ताकि वह कुछ मीटर की दूरी तक देख पायें।
70 किमीप्रति घंटे की रफ्तार, 30 मिनट का तांडव
मौसम विभाग और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक चक्रवात मामूली आंधी नहीं था। इस बवंडर के दौरान हवाओं की रफ्तार करीब 70 किमी प्रतिघंटा मापी गयी है।

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गर्मी के दिनों में पहाड़ों पर लगा महाजाम, हिमाचल से उत्तराखंड तक 50 किमी का रास्त तय करने में लग रहे हैं 8 घंटे

मनाली-रोहतांग से नैनीताल और चारधाम तक भीषण जाम. (Photo: Screengrab)

नई दिल्ली. उत्तरभारत के मैदानी इलाकों में पड़ रही भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। कई शहरों में तापमान 45-50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। ऐसे में गर्मी से राहत पाने के लिये लाखों लोग पहाड़ों की तरफ रूख कर रहे है। हिमाचल प्रदेश के मनाली और रोहतांग से लेकर उत्तराखंड के नैनीताल, बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब, ओली और जोशीमठ तक इस वक्त पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की रिकॉर्ड भीड़ देखने को मिल रही है।
पहाड़ों में मौसम सुहावना है। कहीं हल्की बारिश हो रही है तो कहीं बर्फबारी के नजारे देखने को मिल रहे हैं। यही कारण है कि लोग लम्बा सफर और घंटों का यातायात जाम झेलने के बावजूद पहाड़ों का रूख कर रहे हैं। हालांकि बढ़ती भीड़ अब प्रशासन के लिये बड़ी चुनौती बनती जा रही है। कई पर्यटन स्थलों पर होटल हाउसफुल है। पार्किंग की जगह कम पड़ रही है। सड़कों पर कई किलोमीटर लम्बे जाम लग रहे हैं।
चारधाम यात्रा ने बढ़ाया दबाव, जोशीमठ में 20 किलोमीटर तक जाम
उत्तराखंड के चमोली जिले में चारधाम यात्रा अपने चरम पर पहुंच चुकी है. बद्रीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब की यात्रा के साथ-साथ बड़ी संख्या में पर्यटक औली, नीति-माणा घाटी और अन्य पर्यटन स्थलों का रुख कर रहे हैं। इस समय जोशीमठ क्षेत्र सबसे ज्यादा दबाव झेल रहा है. मारवाड़ी से गोविंदघाट तक और जोशीमठ से सेलंग तक कई जगहों पर 15 से 20 किमी लंबा जाम देखने को मिल रहा है. सुबह से लेकर देर रात तक सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहती हैं।
हालांकि प्रशासन ने वन-वे ट्रैफिक सिस्टम लागू किया हुआ है, लेकिन भारी भीड़ के कारण यह व्यवस्था भी पूरी तरह प्रभावी साबित नहीं हो पा रही. कई लोगों को 2 से 3 घंटे तक गेट खुलने का इंतजार करना पड़ रहा हैं।
बारिश और बर्फबारी के बीच भी नहीं कम हो रही आस्था
चमोली जिले के ऊंचाई वाले इलाकों में अभी भी बारिश और बर्फबारी का दौर जारी हैं।  इसके बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हैं। बद्रीनाथ धाम में अब तक 7.25 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जबकि चारधाम यात्रा में कुल यात्रियों की संख्या 24 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी हैं।

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