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रेलवे के नियमों में बड़ा बदलाव, रिफंड, कैंसिलेशन और बुकिंग में सब कुछ हुआ बदला

नई दिल्ली. यात्री टिकटों की कालाबाजारी को लेकर रेलवे ने यात्रियों की सुविधा, पारदर्शिता और सिस्टम की मजबूती को ध्यान में रखते हुए बड़े सुधार 1-15 अप्रैल के बीच लागू करने जा रहा हैं रेल मंत्रालय की 52 हफ्ते, 52 रिफॉर्म्स पहल के तहत इसबार कई महत्वपूर्ण फैसले लिये गये है। रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने पत्रकारवाता्र में इन बदलावों की जानकारी दी गयी। जिनका सीधा असर टिकट बुकिंग, कैसिलेशन और प्रोजेक्टस की कार्यप्रणाली पर पडेगा।
फर्जी एकाउंट पर सख्ती और होगी डिजीटल सुरक्षा मजबूत
रेलवे की टिकटिंग व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिये आईआरसीटीसी ने अहम कदम उठाया है। लगभग 3 करोड़ फर्जी एकाउंट्स को ब्लॉक किया गया है। ताकि फर्जी तरीके से टिकट बुकिंग को रोका जा सके। अब तत्काल टिकट बुकिंग के आधार आधारित ओटीपी सिस्टम लागू कर दिया गया है। इसके साथ ही एंटी-बॉट तकनीकी भी लगाई गयी है।जिससे ऑटोमेटेड और फर्जी बुकिंग पर रोक लगेगी। पहले 30 मिनट तक बुकिंग पर कुछ प्रतिबंध रहेगा ताकि सिस्टम पर दबाव कम हो सके।
टिकट कैंसिलेशन के नये नियम
रेलवे ने टिकट कैंसिलेशन को लेकर नियमों में बड़ा बदलाव किया है। जिससे रिफंड प्रक्रिया अब अधिक स्पष्ट और समयानुसार हो गयी है।
ट्रेन छूटने से 8 घंटे से कम समय में कैंसिल करने पर कोई रिफंड नही मिलेगा।
8-24 घंटे के बीच कैंसिलेशन पर करीब 50 प्रतिशत रिफंड।
24-72 घंटे के बीच कैंसिल करने पर लगभग 75 प्रतिशत रिफंड।
72 घंटे से पहले कैंसिल करने पर करीब पूरा पैसा वापिस मिलेगा। केवल मामूली शुल्क कटेगा।
यह नये नियम यात्रियों को समय पर निर्णय लेने के लिये प्रेरित करेंगे और सिस्टम को ज्यादा व्यवस्थित बनायेंगे।
पहले से नियम सरल -बोर्डिंग और मैनेजमेंट में होगी सुविधा
रेलवे यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिये कई सुविधाओं को जोड़ा गया है।
अब यात्री चार्ट बनने से 30 मिनट पहले तक अपने टिकट का बोर्डिंग प्वॉइंट बदल सकते हैं।
बोर्डिंंग प्वॉइंट बदलने की सुविधा पूरी तरह से निःशुल्क होगी।
पीआरएस काउंटर टिकट अब किसी भी स्टेशन से कैंसिल कर सकते हैं।
ई-टिकट केलिये अब टीडीआर (टिकट डिपॉजिट रीसिप्ट) भरने की जरूरत नहीं होगी। रिफंड अपने मिल जायेगा।
यह बदलाव यात्रियों के समय और मेहनत दोनों को बचायेगा और प्रक्रिया को सरल बनायेगा।
ठेकेदारों के नये और सख्त नियम
रेलवे प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता और समय पर पूरा होने को सुनिश्चित करने के लिये ठेकेदारों से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है।
अब रेलवे प्रोजेक्ट में बोली लगाने वाले ठेकेदार के पास कम से कम 20 प्रतिशत अनुभव होना जरूरी होगा।
10 करोड़ रूपये से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स केलिये 2 बिड सिक्योरिटी अनिवार्य होगी।
हर ठेकेदार को प्रोजेक्ट के साथ एक डिटेल वर्क प्लान देना होगा।
पहले ठेकेदार को सब कॉन्ट्रैक्टिंग 70 प्रतिशत तक हो सकती थी। अब इसे घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया गयाहै।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मुख्य ठेकेदार ज्यादा जिम्मेदारी लें और काम की गुणवता पर सीधा नियंत्रण रखें।

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