Author: Vishal Jha

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एलिवेटेड रोड के लूप में मुआवजा की कहानी, पोल खुली तो वापिस लिया दोषी कौन, इस पर चुप्पी

ग्वालियर-एलीवेटेड रोड के लूप निर्माण के लिए किए जा रहे भूमि अधिग्रहण में मुआवजा वितरण की प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। गोलेपुरा के सर्वे नंबर-202 की जमीन के अधिग्रहण में एक पक्ष को 40 लाख 63 हजार 350 रुपए का अतिरिक्त भुगतान कर दिया गया। बाद में आपत्ति और जांच के बाद यह राशि वापस सरकारी खाते में जमा करा ली गई, लेकिन भुगतान में हुई चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही अब तक तय नहीं हो सकी है।
गोलेपुरा में 665 वर्गमीटर भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है, जहां करीब 20 दुकानें बनी हुई हैं। अन्य प्रकरणों की तरह यहां भी संयुक्त टीम ने सर्वे और मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी कर मुआवजा अवॉर्ड जारी किया था। इसी दौरान विवेक गुप्ता को 36.20 वर्गमीटर भूमि और संपत्ति के एवज में भुगतान किया गया।
तहसीलदार की भूमिका पर उठे सवाल
जांच में पीडब्ल्यूडी के उपयंत्री, निगम के क्षेत्रीय अधिकारी, पटवारी और राजस्व निरीक्षक को प्रथम दृष्टया जिम्मेदार माना है। वरिष्ठ अफसरों का मानना है कि मुआवजा प्रक्रिया में तहसीलदार की भूमिका भी अहम रही। अब लश्कर एसडीएम से पूछा है कि मामले से जुड़े तहसीलदार का नाम रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से क्यों नहीं बताया गया।
3.61 हेक्टेयर भूमि चाहिए
कुल 3.61 हेक्टेयर निजी जमीन अधिग्रहित की जानी है।
पहला चरण: छह गांवों की 1.90 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण पूरा।
दूसरा चरण: चार क्षेत्रों की 1.72 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी।
भूमि अधिग्रहण इसलिए
13.3 किमी लंबा एलीवेटेड रोड बनाया जा रहा है।
10.48 किमी लंबा लूप, 552 पिलर तैयार होंगे।
परियोजना लागत करीब 1373 करोड़ रुपए।
प्रोजेक्ट 2 चरणों में पूरा होगा।
8 हेक्टेयर भूमि की जरूरत।
भुगतान पर 5 लोगों की आपत्ति, तब जांच
कुछ समय बाद 5 लोगों ने भुगतान पर आपत्ति दर्ज कराई तो नायब तहसीलदार स्तर पर जांच कर रिपोर्ट कलेक्टर को भेजी। जांच में सामने आया कि विवेक गुप्ता के खाते में 40.63 लाख रुपए अतिरिक्त ट्रांसफर हो गए थे। तब राशि वापस लेने की कार्रवाई की और संबंधित पक्ष ने चेक द्वारा पूरी रकम सरकारी खाते में जमा करा दी।
किसने गड़बड़ी की, रिपोर्ट मांगी है
“अतिरिक्त भुगतान की पूरी राशि वापस जमा हो चुकी है। यह गड़बड़ी कैसे हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, इसकी विस्तृत रिपोर्ट एसडीएम से मांगी गई है।”
रुचिका चौहान, कलेक्टर

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ग्वालियर में एलिवेटेड रोड निर्माण के कारण बदले गए रूट में पहले ही दिन लगा भीषण जाम

ग्वालियर. एलिवेटेड रोड निर्माण के चलते फूलबाग चौराहे से गुरूद्वारा तक के मार्ग पर ट्रैफिक अगले दो महीने के लिए बंद कर दिया गया है और वैकल्पिक रास्तों से वाहनों को निकाला जा रहा है। शुक्रवार को इस व्यवस्था का पहला दिन था इसलिए कइ लोगों को पता ही नहीं था। यही कारण था पहले ही दिन लोग सीधे गुरूद्वारा मार्ग तक पहुंचे फिर यहां से वाहनों को वापस मोडना पडा। इसके चलते इस पूरे रूट पर ट्रैफिक व्यवस्था मार्ग तक पहुंचे फिर यहां से वाहनों को वापस मोडना पडा। इसके चलते इस पूरे रूट पर ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई और वाहन रेंग-रेंगकर चले। ट्रैफिक पुलिस भी सिर्फ एडवाइजरी जारी करने तक ही सीमित रही और चौराहों से नदारद रही। जब जाम लगने लगा तब पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे।
लक्ष्मीबाई समाधि से वाहनों की आवाजाही रोकी गइ
गुरूद्वारा से रास्ता बंद कर दिया गया है, वहीं रेलवे स्टेशन की तरफ से आने वाले वाहनों के लिए लक्ष्मीबाई समाधि से वाहनों की आवाजाही रोकी गई है। नदीगेट से मोती तबेला तिराहे से वाहन सीधे जा रहे थे। यहां से वापस लौट रहे थे। यहां कई वाहन जब आगे नहीं जा सके तो शिंदे की छावनी की तरफ घुस गए इससे जाम लगने लगा। सुबह यहां न तो ट्रैफिक पुलिस थी और न ही इंदरगंज थाने का फोर्स लगा था।
जब जाम लगने लगा तो दारोगा और आरक्षक पहुंचे फिर पुलिस द्वारा मोती तबेला तिराहे पर स्टॉपर लगा दिया गया जिससे वाहन गुरूद्वारा की ओर न जा सकें। इसके बाद वाहन चालक सडक के दूसरी तरफ से गुरूद्वारे की तरफ जाने लगे। यहां कुछ कार व लोडिंग वाहन गलत दिशा में प्रवेश कर गए।
यहां से वापस आना संभव नहीं था इसलिए शिंदे की छावनी वाले रास्ते पर फिर गलत दिश में घुसे। यहां से नौगजा रोड होते हुए पडाव की तरफ जाने के लिए वाहन चालक गलत दिशा में प्रवेश कर गए और आमने-सामने फंस गए। अर्जी वाले गणेश मंदिर के सामने से लेकर शिंदे की छावनी तिराहे तक जाम लगा। गलत दिशा में प्रवेश करने वाले वाहन चालकों को पुलिसकर्मियों ने समझाइश देकर लौटाया।

 

 

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MP में कैंसर की दवाएं 50% तक महंगी

भोपाल. मध्य प्रदेश में अब कैंसर मरीजों के इलाज का खर्च 50 प्रतिशत तक बढ़ गया है। इससे एक कीमो का खर्च 2 से 3 हजार रुपए ज्यादा लगेगा। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने कैंसर के इलाज में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली दो प्रमुख कीमोथेरेपी दवाओं कार्बोप्लाटिन और सिस्प्लाटिन के दाम बढ़ा दिए हैं। एक्सपर्ट की माने तो यह दोनों दवाएं ओवरी, फेफड़े, स्तन, सिर-गर्दन समेत कई प्रकार के कैंसर के इलाज में उपयोग होती हैं। कई मरीजों को 4 से 6 या उससे अधिक कीमो साइकिल लगती हैं, ऐसे में पूरे इलाज पर हजारों रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। हालांकि, कंपनियों ने दवाओं का प्रोडक्शन शुरू कर दिया है, लेकिन करीब एक महीने मांग अनुरूप सप्लाई करने में लगेगा। दूसरी ओर, शहर के कैंसर अस्पतालों में कीमो की दवाएं पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं। युद्ध के चलते सप्लाई चैन बाधित हुई थी। घाटे के चलते दवा कंपनियों ने प्रोडक्शन पूरी तरह बंद कर दिया था।


7 प्रकारों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं महंगी हुई
पेट्रोल-डीजल और क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों से जुड़ी खबरें इन दिनों लगातार सुर्खियों में हैं, लेकिन अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर अब सिर्फ तेल बाजार तक सीमित नहीं रहा। इसने भारत में कैंसर के इलाज को भी मुश्किल बना दिया है। स्थिति ऐसी है कि कैंसर के 7 प्रमुख प्रकारों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली जरूरी दवाओं की कमी से हर 100 में से करीब 70 मरीज प्रभावित हो सकते हैं।

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अलापुर बांध-विभागीय अधिकारी ही दोषी है डूब इलाके में 100 मकान बनते रहे और अधिकारी अनदेखी करते रहे, अधिकारियों के परिजनों के नाम प्लॉट है

ग्वालियर. मानसून दस्तक देने वाला है। अगर बरसात पिछले वर्ष की तरह हुई तो शहर के आसपास के बांध लबालध होना तय है। इसके बाद भी अभी तक प्रशासन ने बांध में बनी कॉलोनियों को लेकर कोई प्लानिंग नहीं की है। यही वजह है कि शहर के पास अलापुर बांध की कॉलोनी में 100 से ज्यादा मकानों में निवास कर रहे परिवारों के लिये फिर से खतरा पैदा हो सकता है। पिछले साल अलापुरा बांध के डूब इलाके में 70 हेक्टर जमीन और उस पर बने मकानों में बांध का ओवरफ्लो पानी भर गया था। ऐसा बांधबनने के 22 साल के बाद हुआ था। इसके बाद जल संसाधन विभाग ने जमीन के मुआवजे के लिये 410 करोड़ रूपये का प्रस्ता शासन के पास भेजा था जिस अभी को निर्णय नहीं हो पाया है।
इस बांध की स्थिति को जल संसाधन विभाग ने मानसून पहले निरीक्षण रिपोर्ट में ठीक बतायास है। बांध में कहीं कोई टूट-फूट नहीं यानी की पानी भरने के लिये उपयुक्त है। लेकिन पानी ओवरफ्लो हुआ तो डूब इलाके के निवासियों का क्या हो इस पर कोई विचार नहीं किया है।
इन गांव की यह जमीन डूब क्षेत्र में
अलापुर -10.64 हेक्टे.
हबीपुर – 25.72 हेक्टे.
भाटखेड़ी – 22.59 हेक्टे.
दंगियापुरा – 8.78 हेक्टे.
बरऊआ (पिछोर) 2.90 हेक्टेयर
1987 में योजना बनी थी और 2004 में बांघ बना था
अलापुर बांध बनाने की परियोजना 1987 में बनी थ्राी। अलापुर बांध के लिये 2000 में जमीन अधिग्रहण व भुगतान की प्रक्रिया पूरी हुई और 2004 में बांध बनकर तैयार हुआ था। बांध के लिये 30 प्रतिशत जमीन का पूर्ण भुगतान किया गया था। जबकि 70 प्रतिशत जमीन का शासन ने 80प्रतिशत भुगतान किया गया था। 70 हेक्टर जमीन का पूर्ण भुगतान नहीं होने से यह जमीन विभाग के नाम पर नहीं चढ़ सही।
80% भुगतान के बाद भी बनते गये डूब क्षेत्र में बनते गये मकान
डूब इलाके की जमीन पर 80प्रतिशत भुगतान केबाद भी खेतों प्लॉटिंग कर मकान बनते रहे। इसके लिये जल संसाधन विभाग की अनदेखी और मिलीभगत से मकान बने है। सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि जल संसाधन के विभाग के अधिकारी जेब गर्म करके कॉलोनी बसाने के लिये एनओसी दी है। आज भी आप प्लॉट खरीदने जाये तो कॉलोनाइजर आपको एनसीओ दिखाते है। इसके बाद ही प्लॉट की रजिस्ट्री हो पाती है। इन अवैध कॉलोनियों में विभागीय अधिकारियों के परिजनों के नाम प्लॉट है। इसकी गहनता से जांच हो इसका खुलासा हो सकता है। यही वजह है कि डूब इलाके में आज भी प्लॉटिंग हो रही है। लेकिन जल संसाधन से लेकर प्रशासन व नगरनिगम किसी भी विभाग के अधिकारी ने जमीन का 80 प्रतिशत पैसा लेने वाले लोगों पर कोई कार्यवाही नहीं की है। अब जब समस्या खड़ी हो गयी है तब नये-नये बहाने बना रहे है।
बांध बनने के समय 9 से 15 लाख थी गाइड लाइन
अलापुर बांध की डूब क्षेत्र की जमीन अधिग्रहित करने के प्रक्रिया के दौरान वर्ष 2002 में 5 गांवों में जमीन की गाइड लाइन 9 से 15 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर तक की थी। यह गाइड लाइन वर्तमान में बढ़कर 1.25 करोड़ रुपए से 4 करोड़ रुपए प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई। अब इसी क्षेत्र में 100 से अधिक मकान भी बन गए हैं। अलापुर बांध के डूब क्षेत्र के पांच गांव की जमीन 70 हेक्टेयर जमीन का मुआवजा वितरण के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक मंजूरी के बाद इस जमीन के नए मालिकों का सर्वे कराया जाएगा। जिस समय बांध बनकर तैयार हुआ उस समय डूब क्षेत्र के ‌खेत थे और अब वहां पर खेतो‌ं में प्लॉट काटकर मकान बन गए हैं।

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ग्वालियर में 5 हजार की रिश्वत लेते पकड़ाई पटवारी

ग्वालियर. लोकायुक्त पुलिस ने ग्वालियर में शुक्रवार शाम तहसील तानसेन के हल्का गूंधारा मे पदस्थ महिला पटवारी रेखा शाक्य को किसान से रिश्वत की दूसरी किस्त लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। पटवारी जमीन के सीमांकन और नामांतरण दाखिल-खारिज की फाइल आगे बढाने के नाम पर रिश्वत की मांग कर रही थी। लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है, साथ ही संबंधित विभाग को भ्रष्ट पटवारी पर कार्रवाई के लिए लिखा है।
15000 रुपए की रिश्वत मांग रही थी
लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक निरंजन शर्मा ने बताया कि सिरसौद मुरार निवासी मंशाराम ने 16 जून 2026 को लोकायुक्त कार्यालय ग्वालियर में एक लिखित श्किायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि ग्राम गूंधारा में उसकी बहन गुड्डी की जमीन का सीमांकन होना था। उसकी पत्नी सावित्रीबाई के नाम पर जमीन का नामांतरण होना था। इस कार्य को करने के एवज में हल्का पटवारी रेखा शाक्य पत्नी कृष्णकांत शाक्य लगातार चक्कर कटवा रही थी और 15000 रुपए की रिश्वत मांग रही थी।
शिकायत मिलते ही लोकायुक्त एसपी ने मामले की सत्यता जांचने के लिए प्राथमिक सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान जब पीड़ित मंशाराम पटवारी से मिला, तो आरोपी रेखा शाक्य ने सौदेबाजी करते हुए शिकायतकर्ता से एडवांस के रूप में 3,500 रुपए ले लिए। वॉयस रिकॉर्डर और लोकायुक्त की जांच में रिश्वत मांगने की पुष्टि शत-प्रतिशत सही पाई गई, जिसके बाद शुक्रवार को ट्रैप की रणनीति तैयार की गई।

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MP में सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, फाइनल पेमेंट की व्यवस्था बदली

भोपाल. सेवानिवृत्त या मृत्यु की स्थिति में कर्मचारियों को किए जाने वाले अंतिम भुगतान की व्यवस्था में प्रदेश सरकार ने परिवर्तन किया है। अब अंतिम भुगतान के प्रकरणों के निराकरण के लिए कोषालयीन कंप्यूटर प्रणाली के माध्यम से ऑनलाइन प्र्रक्रिया निर्धारित की गई है। संचालक पेंशन, भविष्य निधि एवं बीमा को भुगतान सहित अन्य सभी प्रक्रियाओं के लिए अधिकृत किया गया है।
भविष्य निधि कटौती का सत्यापन और समय-सीमा
वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी द्वारा जारी किए गए निर्देश के अनुसार भविष्य निधि कटौती का विवरण कर्मचारी प्रति माह कोषालयीन कंप्यूटर प्रणाली के माध्यम से देख सकेंगे। कोई गडबडी नजर आने पर अभ्यावेदन आहरण एवं संवितरण अधिकारी को देंग। सेवानिवृत्ति से चार माह पूर्व जब अंशदान की कटौती बंद कर दी जाती है तब कर्मचारी ब्याज की गणना का सत्यापन करेंगे। चार माह पहले ही अपना अंतिम भुगतान आवेदन प्रस्तुत करेंगे।
बैंक खाते में बदलाव पर रोक व ओटीपी की सुरक्षा
ऑनलाइन आवेदन जमा होने और वास्तविक भुगतान प्राप्त होने तक अपने वेतन से संबद्ध बैंक खाते में किसी प्रकार का कोई परिवर्तन रने की अनुमति नहीं रहेगी। ऑनलाइन आवेदन के समय ओटीपी प्राप्त होगा, जिसे सुरक्षित रखने का दायित्व कर्मचारी का होगा। कर्मचारी से प्राप्त आवेदन का मिलान विभाग में संधारित निधि की पासबुक एवं सेवा पुस्तिका से होगा और उसकी प्रविष्टि कराई जाएगी। सत्यापित पृष्ठों को स्कैन कर कोषालयीन कंप्यूटर प्रणाली पर अपलोड किया जाएगा।
छह माह के वेतन वाले खाते में ही ट्रांसफर होगी राशि
आहरण एवं संवितरण अधिकारी से प्राप्त प्रकरणों का परीक्षण करने के बाद संचालक पेंशन के द्वारा भुगतान संबंधी आदेश जारी किए जाएंगे। भुगतान की राशि सीधे कर्मचारियों के उसी खाते में अंतरित की जाएगी, जहां सेवानिवृत्ति से पूर्व निरंतर छह माह का वेतन जमा किया गया हो।
कर्मचारी की मृत्यु होने पर भुगतान के नियम
कर्मचारियों की मृत्यु होने की स्थिति में संबंधित कार्यालय द्वारा नाम, जन्मतिथि, बैंक खाते का सत्यापन किया जाएगा। विवरण अपूर्ण होने पर स्वजन से जानकारी प्राप्त कर उसे अद्यतन किया जाएगा। नामांकित व्यक्ति के बैंक खाते में भुगतान होगा। नामांकित व्यक्ति के अल्पायु होने पर वैध संरक्षक के साथ संयुक्त बैंक खाते में राशि जमा कराई जाएगी।

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15000 करोड़ की लागत से बनेगा नया इमरजेंसी ऑयल रिजर्व

नई दिल्ली. अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान हुए तेल संकट के बाद केंद्र सरकार ने नया इमरजेंसी ऑयल रिजर्व बनाने का फैसला लिया है। यह रिजर्व ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन बनाएगी। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इस पूरे प्रोजेक्ट में करीब 15000 करोड खर्च होने का अनुमान है। यह अंडरग्राउंड इमरजेंसी तेल भंडार कर्नाटक के मंगलुरू में बनाया जाएगा। इसमें 1.28 लाख बैरल तेल रखा जा सकेगा।

-इमेज AI जनरेटेड - Dainik Bhaskar
अभी भारत की कुल स्ट्रेटेजिक क्रूउ स्टोरेज क्षमता करीब 3.9 करोड बैरल है जिसे आपात स्थिति में इस्तेमाल किया जाता है। भारत रोजाना करीब 50 लाख बैरल तेल खपत करता है। इसलिए यह ऑयल रिजर्व देश की जरूरतें लगभग 8 से 9 दिन तक पूरी कर सकता है। 1.28 लाख बैरल का नया रणनीतिक तेल भंडार का प्रोजेक्ट पूरा होने पर यह क्षमता करीब 33 प्रतिशत यानी करीब 3 दिन बढ जाएगी। फिर देश में युद्ध या तेल संकट में करीब 11 दिन का तेल रिजर्व रहेगा।

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व्यापार मेला प्राधिकरण के संचालक मंडल की बैठक में मेला परिसर में लगेगा श्रावण मेला,वृहद वृक्षारोपण भी किया जायेगा 

ग्वालियर -ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण द्वारा इस वर्ष श्रावण मेले का आयोजन किया जायेगा। यह मेला 20 जुलाई से 31 अगस्त 2026 तक निर्धारित किया गया है। ग्वालियर व्यापार मेले के संचालक मंडल की 50वी बैठक शुक्रवार को मेला प्राधिकरण में आयोजित हुई। प्राधिकरण के अध्यक्ष अशोक जदौन की अध्यक्षता में आयोजित हुई इस बैठक में मेले के विकास के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में उपाध्यक्ष उदयवीर सिंह गुर्जर, कलेक्टर रुचिका चौहान, मेला सचिव सुनील त्रिपाठी सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
मेला परिसर में सुरक्षा की दृष्टि से राजमाता उद्यान से संस्कृति गार्डन तथा एमआईटीएस वाली रोड तक बाउण्ड्रीवॉल का प्रस्ताव अनुमोदित किया गया है। गोदाम बस्ती के पास वाली भूमि का कॉमर्शियल उपयोग करने के लिये प्रस्ताव तैयार करने एवं एलओआई जारी कर आगामी बैठक में विषय रखने का निर्णय लिया गया है। प्रशासनिक भवन तैयार करने का निर्णय भी लिया गया है। मेले के दौरान महिलाओं के लिये पृथक से शौचालय निर्माण कराने का निर्णय लिया गया। 196 नवीन दुकानों के निर्माण कराने के निर्णय का भी अनुमोदन किया गया है।
मेला परिसर में स्थित एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन सेंटर की मरम्मत एवं संधारण का कार्य कराने का भी निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही मेला परिसर में सुबह एवं शाम घूमने आने वाले लोगों के लिये वॉकिंग ट्रैक निर्माण कराने का भी निर्णय लिया गया। इसके लिये प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं।
उपाध्यक्ष उदयवीर सिंह ने बैठक में पर्यावरण को दृष्टिगत रखते हुए मेला परिसर में बड़े स्तर पर वृक्षारोपण कराने का प्रस्ताव रखा। कलेक्टर ने वृहद वृक्षारोपण हेतु प्रस्ताव तैयार करने की बात कही। मेला परिसर में सौर ऊर्जा विकास के माध्यम से सोलर प्लांट लगाने का निर्णय भी लिया गया।
मेला आयोजन के संबंध में सुझाव लिए
ग्वालियर मेला प्रांगण में व्यापारिक संघ के साथ चर्चा कर आगामी मेले को और व्यवस्थित करने के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में व्यापारी संघ द्वारा मेला अवधि 2 माह रखने, मीना बाजार को व्यवस्थित बनाने, मेला परिसर में महिला शौचालय, मेला अवधि में पार्किंग व्यवस्था बेहतर बनाने, साफ-सफाई व्यवस्था बेहतर बनाने के लिये अपने अमूल्य सुझाव दिए गए। मेला व्यापारी संघ की ओर से महेन्द्र भदकारिया, बलवीर सिंह, अनिल पुलियानी, उमेश उप्पल, अनुज गुर्जर, जगदीश उपाध्याय एवं पं. विजय कब्जू उपस्थित थे।
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प्रधानमंत्री ने ग्वालियर सहित देशभर के कर्मचारियों व नियोक्ताओं के खातों में पहुँचाई 2400 करोड़ रुपए की धनराशि 

ग्वालियर -युवाओं के लिये रोजगार सृजन, उन्हें औपचारिक रोजगार से जोड़ने और सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने के उद्देश्य से “प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना” के तहत शुक्रवार 19 जून को देशभर में 200 स्थानों पर हुए कार्यक्रमों के साथ ग्वालियर में भी आयोजन हुआ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित हुए मुख्य कार्यक्रम से इस योजना के तहत देशभर के लाभार्थियों के खातों में 2400 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि अंतरित की। जिसमें कर्मचारी भविष्य निधि संगठन क्षेत्रीय कार्यालय ग्वालियर से जुड़े कर्मचारियों एवं नियोक्ताओं के खातों में पहुँची लगभग 4 करोड़ रुपए की धनराशि शामिल है। प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ग्वालियर सहित देश भर में 200 स्थानों पर आयोजित हुए कार्यक्रमों में मौजूद लाभार्थियों व नियोक्ताओं को संबोधित किया।
विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर के मुख्य आतिथ्य में ग्वालियर में राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में क्षेत्रीय भविष्य निधि संगठन के तत्वावधान में प्रोत्साहन राशि वितरण कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में सांसद भारत सिंह कुशवाह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर कलेक्टर रुचिका चौहान, क्षेत्रीय आयुक्त कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ग्वालियर सत्यवर्धन गौतम, नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय मंचासीन थे। प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के तहत आयोजित हुए प्रोत्साहन राशि वितरण कार्यक्रम में लाभार्थी कर्मचारियों एवं विभिन्न औद्योगिक संगठनों व नियोक्ताओं ने भाग लिया।
प्रधानमंत्री ने मजबूत आधार दिया है – विधानसभा अध्यक्ष
विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री दूरदृष्टि के धनी है। प्रधानमंत्री ने आज के साथ देश के उदयीमान कल का निर्माण करने के लिये प्रभावी कदम उठाए हैं। उन्होंने विकसित भारत के निर्माण को क्रांतिकारी योजनाओं के माध्यम से मजबूत आधार दिया है।
हर पात्र कर्मचारी को दिलायेंगे योजना का लाभ – कलेक्टर 
कलेक्टर रुचिका चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना ने कर्मचारियों के हितों का संरक्षण करने के साथ-साथ नियोक्ताओं को भी अपने कामगारों को इनसेंटिव देने के लिये प्रोत्साहित किया है। अब नियोक्ताओं का दायित्व है कि वे अपने शतप्रतिशत कर्मचारियों को इस योजना का लाभ दिलाएं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वर्ष 2027 तक योजना का लक्ष्य प्राप्त करने में जिला प्रशासन का हर संभव सहयोग मिलेगा।
क्षेत्रीय आयुक्त कर्मचारी भविष्य निधि संगठन सत्य वर्धन गौतम ने स्वागत उदबोधन दिया। साथ ही जानकारी दी कि ग्वालियर के भविष्य निधि संगठन कार्यालय में लगभग 2 हजार संस्थान पंजीकृत हैं। इन संस्थानों द्वारा 18 हजार नए रोजगार दिए गए हैं। साथ ही 35 हजार कामगारों को पुन: रोजगार प्रदान किया गया है। आज के आयोजन में प्रधानमंत्री द्वारा ग्वालियर कार्यालय से जुड़े कर्मचारियों एवं नियोक्ताओं के खातों में कुल मिलाकर लगभग 4 करोड़ रुपए की धनराशि पहुंचाई गई है।  आरंभ में विधानसभा अध्यक्ष सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना से लाभान्वित हितग्राहियों एवं नियोक्ताओं ने भी इस अवसर पर अपने अनुभव साझा किए।
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प्रभारी कार्यपालन यंत्री जनकार्य एवं प्रभारी सहायक यंत्री जनकार्य को कारण बताओ सूचना पत्र जारी

ग्वालियर – दिए गए कार्यों में लापरवाही बरतने पर प्रभारी कार्यपालन यंत्री जनकार्य सुरेश अहिरवार एवं प्रभारी सहायक यंत्री जनकार्य रजनीश गुप्ता को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया।
नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय द्वारा वार्ड क्रमांक 61 अंतर्गत सिरोल चौराहा से सुंदरम गार्डन, कलेक्ट्रेट रोड़ तक डामरीकरण का कार्य निगम निधि से कराये जाने के लिये जनकार्य विभाग अंतर्गत प्रकरण संधारित किया गया है। प्रकरण में भुगतान हेतु नस्ती निगमायुक्त को प्रस्तुत की गई है। नस्ती में भुगतान की स्वीकृति दी जाने से पूर्व निगमायुक्त द्वारा कार्य की भौतिक स्थिति का जायजा लिये जाने के लिए भ्रमण किया गया। भ्रमण के दौरान पाया गया कि प्राक्कलन अनुसार कार्य पूर्ण नहीं किया गया है। प्राक्कलन अनुसार कार्य पूर्ण होने के उपरांत ही नस्ती को भुगतान हेतु प्रस्तुत किया जाना चाहिए था। उक्त कृत्य आर्थिक रूप से अनियमितता की जाना दर्शाता है। जिस कारण प्रभारी कार्यपालन यंत्री जनकार्य सुरेश अहिरवार एवं प्रभारी सहायक यंत्री जनकार्य रजनीश गुप्ता को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया।

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