Author: Mahesh Jha

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अचलेश्वर मंदिर की दानपेटी में मिले दुर्लभ चांदी के सिक्के, सोने-हीरे की ज्वेलरी मिले

ग्वालियर. शहर के नहीं ग्वालियर-चंबल संभाग के प्रसिद्ध अचलेश्वर महादेव मंदिर की दानपेटियां खोली गयी। सावन माह में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच, इन पेटियों से 6.49 लाख नगद राशि के साथ सोने, चांदी और हीरे के आभूषण भी पाये गये है। मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधक राजेश पाराशर ने बताया हैकि इस बार करीब 14-15 दानपेटियां खोली गयी थी। गिनती के दौरान कुल 6,49,740 रूपये की नगद राशि मिली है। इस बीच एक विशेष पैकेट भी प्राप्त हुआ है। जिसने सबका ध्यान खींचा है।
मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, सावन में हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती है। इस बार नकदी के साथ बहुमूल्य आभूषण और ऐतिहासिक महत्व का चांदी का सिक्का मिलना विशेष रहा। ट्रस्ट ने बताया कि सभी दान की गई वस्तुओं का विधिवत रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है और उन्हें मंदिर की संपत्ति के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा।यह दान सावन के पवित्र महीने में श्रद्धालुओं की अटूट आस्था को दर्शाता है, जहां भक्तों ने अपनी श्रद्धा के प्रतीक स्वरूप भगवान शिव के चरणों में धन और बहुमूल्य आभूषण अर्पित किए।
इस पैकेट में 22 कैरेट सोने का एक छोटा सिक्का, 18 कैरेट सोने की कान की बाली जिसमें 0.56 ग्राम का हीरा जड़ा था, प्राप्त हुई। इसके अतिरिक्त, जॉर्ज पंचम काल का एक चांदी का सिक्का, चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा और चांदी की बेलपत्री भी दान में मिली।दान के साथ एक हस्तलिखित पर्ची भी मिली, जिस पर लिखा था कि यह गुप्त दान है। पर्ची में यह भी उल्लेख था कि दान की गई वस्तुएं पूरी तरह असली हैं और उनकी शुद्धता की जांच कराई जा सकती है।

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8 अगस्त को  स्मार्ट सिटी एडवायजरी फोरम की बैठक

ग्वालियर – स्मार्ट सिटी एडवायजरी फोरम की बैठक शनिवार 8 अगस्त को बुलाई गई है। इस दिन यह बैठक सांसद भारत सिंह कुशवाह की मौजूदगी में दोपहर 12.30 बजे बाल भवन के सभागार में आयोजित होगी।
स्मार्ट सिटी कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार बैठक में सचिन तेंदुलकर मार्ग उन्नयनीकरण, मल्टीलेवल पार्किंग एवं कन्वेंशन सेंटर की प्रगति की समीक्षा की जायेगी। साथ ही अन्य प्रगतिरत व अपूर्ण कार्यों की समीक्षा भी की जायेगी। बैठक में स्मार्ट सिटी के नियमित संचालन व स्मार्ट सिटी कंट्रोल कमांड सेंटर की समीक्षा भी होगी।
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काशी में 2सेमी प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रही हैं गंगा, 9 डिग्री झुका रत्नेश्वर महादेव मंदिर

वाराणसी. केन्द्रीय जल आयोग ने बुलेटिन के मुताबिक गंगा नदी का जलस्तर 3 सेमी प्रतिघंटे की रफ्तार से लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान समय में जलस्तर 62.4 मीटर दर्ज किया गयाहै। जो चेतावनी बिन्दु 70.26 मीटर से 7.86 मीटर और खतरे के निशान 71.26 मीटर से 8.86 मीटर नीचे है। इस बढ़ते जलस्तर की वजह से पक्के घाटों की सीढि़यां और किनारे स्थित छोटे-बड़े मंदिर बाढ के पानी के डूबने लगे हैं। मणिकर्मिका तीर्थ पर स्थित 9 डिग्री एंगल पर झुका प्रसिद्ध रत्नेश्वर महादेव मंदिर भी जलमग्न हो गया है। स्थिति को देखते हुए पतवार वाली नावों पर प्रतिबंध और मोटरवोट पर सुरक्षा उपकरणों के साथ लिमिटेड सवारी की अनुमति दी गयी है।
कई मंदिर जलमग्न और पक्के घाटों से टूटा संपर्क
गंगा के बढ़ते जलस्तर ने घाटों के किनारे जगजीवन और धार्मिक गतिविधियों का प्रभावित किया है। पक्के घाटों की सीढि़यां पानी में पूरी तरह समा चुकी है। स्थानीय पुरोहित मुकेश दुबे और नाविक बाबू साहनी के अनुसार गंगा में जलस्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ना प्रारंभ हो गया है। जिससे घाटों के बीच का आपसी संपर्क कट गया है।
9 डिग्री झुका रत्नेश्वर महादेव मंदिर
मणिकर्मिका तीर्थ पर स्थित रत्नेश्वर महादेव महादेव बाढ़ के पानी में पूरी तरह से समा चुका है। 9 डिग्री के कोण पर झुका यह मंदिर अपनी अनूठी बनावट की वजह से पीसा की मीनार से तुलना के लिये जाना जाता है। लोगों के बीच आकर्षण का केन्द्र रहता है। वर्ष के अधिकांश माह में यह मंदिर पानी की चपेट में ही रहता है। तेज हवा और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये है। गंगा में पतवार से चलने वाली नावों के संचालन पर रोक लगा दी गयी है। वहीं मोटरबोट चालकों को क्षमता से कम सवारी बैठाने और पूरे सुरक्षा उपकरणों (लाइफ जैकेट आदि) का उपयोग करने के निर्देश दिये गये है।

 

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ग्वालियर के युवक की पगारा डेम से डूबने से हुई मौत, 4 दोस्त नहाने के लिये उतरे थे, एसडीआरएफ ने 2 घंटे बाद निकाला शव

मुरैना. जौरा स्थित पगारा डेम पर बुधवार की शाम पिकनिक मनाने आये दोस्तों का घूमना मातम में बदल गया। ग्वालियर से आये 6 दोस्तों में से 4 युवक डेम में नहाने उतरे थे। इनमें से 3 युवक सुरक्षित बाहर निकल आये, जबकि 30 वर्षीय त्रिलोक गुप्ता तेज बहाव में फंसकर डूब गये। डूबने की खबर मिलते ही जौरा थाना पुलिस और एसडीआरएफ की टीम भी घटनास्थल पर पहुंच गयी । अंधेरा होने की वजह से रेस्क्यू अभियान चुनौतीपूर्ण रहा। लेकिन लगभग 2 घंटे की मेहनत के बाद युवक का शव डेम से बाहर निकाल लिया गया।
स्कॉर्पियों से ग्वालियर से पहुंचे थे 6 दोस्त जौरा
ग्वालियर के मुरार इलाके से 6 दोस्त बुधवार को स्कॉर्पियो कार से पगारा डेम घूमने आये थे। दिन भर डेम इलाके में समय बिताने के बाद शाम को लगभग 5.30 बजे 4 युवक पानी में नहाने उतर गये। जिसमें से 3 युवकों को तैरना आता था। इसलिये वह कुछ देर के बाद सुरक्षित बाहर निकल आये। लेकिन त्रिलोक गुप्ता, विक्की फैक्ट्री के पीछे, मुरार गहरे पानी और तेज बहाव में फंस गये। साथियों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया। इस बीच वह देखते -देखते पानी में लापता हो गये।
बारिश के मौसम में बढ़ जाता है खतरा
स्थानीय लोगों के अनुसार, बारिश के दिनों में पगारा डेम में पानी का स्तर और बहाव दोनों बढ़ जाते हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग यहां पिकनिक मनाने और नहाने पहुंचते हैं। कई बार चेतावनी के बावजूद लोग गहरे पानी में उतर जाते हैं, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था, चेतावनी बोर्ड और निगरानी बढ़ाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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भाजपा नेता गिरफ्तार, सीए को ठगने का है आरोप

ग्वालियर. साइबर फ्रॉड के मामले में राज्य साइबर पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर 21 करोड़ रूपये से अधिक की ठगी के मामले में शाजापुर निवासी और बीजेपी से जुड़े जिला पंचायत सदस्य जगदीश कुमार मालवीय का गिरफ्तार कियागया है। जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम में से 50 लाख रूपये के आरोपी के बैंक खाते में ट्रांसफर हुए थे। फिलहाल पुलिस उसे रिमांड कर लेकर पूछताछ कर रही है।
सीए अकाउंटेंट से 218 दिन में कराये थे रकम ट्रांसफर
राज्य साइबर पुलिस के मुताबिक पीडि़त ग्वालियर निवासी 70 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) अशोक विजयवर्गीय है। उन्हें दिसम्बर 2025 में एक महिला ने फोन कर दोस्ती की और क्रिप्टोकरेंसी में निवेश पर भारी मुनाफे का लालच दिया। करीब 218 दिनों तक भरोसे में लेने के बादउनसे अलग-अलग बैंक खातों में 21 करोड़ 5 लाख 92 हजार जमा करा लिये गये। जब उन्होंने अपनी रकम वापिस निकालनी चाही तो उनसे और पैसे मांगे।इसके बाद उन्हें ठगी का अहसास हुआ और साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गयी है।
इस बहुचर्चित ठगी में कई आरोपी है शामिल
इस मामले में राज्य साइबर के निरीक्षक मुकेश नारोलिया, ने बताया कि प्रदेश की सबसे बड़ी साइबर ठगी के मामले में आरोपी के खाते में 50 लाख रुपए ट्रांसफर हुए थे। उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। पूछताछ के आधार पर अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। राज्य साइबर पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों और म्यूल अकाउंट्स की तलाश में जुटी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल साइबर फ्रॉड मामले में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
आरोपी भारतीय सेना से सेवानिवृत्त है और भाजपा से जुड़ा होने के साथ एक सामाजिक संगठन में प्रदेश स्तर का पदाधिकारी भी बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक उसके बैंक खाते में ढाई करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेनदेन मिले हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि उसका बैंक खाता अन्य साइबर ठगी के मामलों में भी इस्तेमाल किया गया। इतना ही नहीं, शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी हाल ही में बैंकॉक, थाईलैंड की यात्रा कर चुका है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि पीड़ित ने कुल 76 बैंक खातों में 106 बार ट्रांजेक्शन किए थे। इसके बाद रकम 15 अलग-अलग लेयर से गुजरते हुए 20 हजार से अधिक बैंक खातों तक पहुंची। शुरुआती जांच में करीब 35 प्रतिशत राशि दक्षिण भारत के विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर होने की जानकारी मिली है।

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भारत जल्द ही म्यांमार से जमीन की अदला-बदली करेगा? मणिपुर में सुलगने लगी विरोध की चिंगारी

नई दिल्ली. भारत और म्यांमार की सीमा रेखा तय करने का वर्षो से लंबित मामला का जल्द समाधान हो सकता है। खबरों के अनुसार इसके लिये दोनों देश जमीन की अदला-बदली पर विचार कर रहे हैं। जिसकी सीमा अभी तक तय नहीं हो पायी है। मंगलवार को नयी दिल्ली में एक पत्रकार वार्ता में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि सीमा पार कुछ ऐसे इलाके है। जिनका अभी समाधान करना बाकी है। उन हिस्सों पर बातचीत चल रही है।
अदला-बदली के लिये प्रस्तावित इलाका मणिपुर के चंदेल जिले में है। जो म्यांमार के सगाइंग इलाके में काबाव घाटी से सटा हुआ है। सीमा तय करने का काम 3 माह के अन्दर, यानी अगस्त के आसपास पूरा होने का अनुमान था। भारत और म्यांमार के बीच 1,643 किमी लम्बी अंर्तराष्ट्रीय सीमा है जो कि अरूणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम और मणिपुर से होकर गुजरती है। फिर म्यांमार के सगाइंग इलाके और चिन राज्य में आती है। सीमा का अधिकतर हिस्सा पहाड़ी, जंगली और खुला है। जो उन जातीय समुदायों के इलाकों से होकर गुजरता है जो दोनों ओर रहते आये है।
गृह मंत्रालय के मुताबिक सीमा के लगभग 1,472 किमी हिस्से को बॉर्डर पिलर के माध्यम से तय किया गया है। जबकि करीब 171 किमी हिस्सा अभी भी अनसुलझा है। जो मुख्य रूप् से अरूणाचल प्रदेश के लोहित सेक्टर और मणिपुर की काबाव घाटी में है।

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ग्वालियर में बारिश के बीच रेलवे अंडरपास बने खतरा, झांसी रेल मंडल ने बढ़ाई निगरानी

ग्वालियर. मानसून की सक्रियता के चलते ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के कारण रेलवे ट्रैक के नीचे बने वॉटर-वे ब्रिज अंडरपास लोगों के लिए खतरा बन गए है। कई अंडरपासों में पानी भरने से दुर्घटनाओं की आशंका बढ गई है। स्थिति को देखते हुए झांसी रेल मंडल ने सभी संवेदनशील अंडरपासों पर विशेष निगरानी रखने और लोगों को सतर्क करने की तैयारी शुरू कर दी है। ग्वालियर और बिरलानगर स्टेशन के बीच स्थित ग्वलियर यार्ड का वॉटर-वे ब्रिज जिसे स्थानीय लोगा गाटर वाली पुलिस के नाम से जानते है सबसे संवेदनशील स्थानों परमें शामिल है। तेज बारिश के दौरान यहां कुछ ही घंटों में पानी भर जाता है। यह अंडरपास रेसकोर्स रोड और हजीरा-तानसेन रोड को जोडता है जहां से प्रतिदिन बडी संख्या में लोग और वाहन गुजरते है। जलभराव के कारण पैदल यात्रियों, दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के लिए जोखिम बढ जाता है।


शहर में ऐसे 20 वॉटर-वे ब्रिज चिन्हित किए
झांसी रेल मंडल के अंतर्गत ऐसे करीब 20 प्रमुख वाटर-वे ब्रिज चिन्हित किए गए है। रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इन संरचनाओं का निर्माण लोगों की आवाजाही के लिए नहीं बल्कि रेलवे ट्रैक के नीचे से वर्षा जल की निकासी के उद्देश्ष् से किया गया था। इसके बावजूद कई स्थानों पर इनका उपयोग आवागमन के लिए किया जा रहा है।
अंडरपास पर बढाई जाएगी निगरानी
रेलवे अधिकारियों के अनुसार मानसून के दौरान इन सभी संवेदनशील अंडरपासों पर निगरानी बढाई जाएगी। आवश्यकता पडने पर लोगों को रोकने, चेतावनी बोर्ड लगाने और अन्य सुरक्षा उपाया भी किए जाएंगे ताकि जलभराव के दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना न हो।

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माफिया अतीक अहमद के बेटे की स़ड़क दुर्घटना मौत, बेकाबू होकर डिवाइडर से टकराई कार

झांसी हादसे की तस्वीरें रोंगटे खड़े कर देंगी. (Photo: ITG)

प्रयागराज. माफिया अतीक अहमद के बेटे की सड़क दुर्घटना में मौत हो गयी है। अबान अहमद 21, झांसी जेल में बन्द बड़े अली अहमद से मुलाकात करने के लिये जा रहा था। उसकी तेज रफ्तार कार बेकाबू होकर डिवाइडर से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह परखच्चे उड़ गये। पुलिस ने कार में सवार 5 लोगों को बाहर निकाल अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने आबान और उसके सोनू को मृत घोषित कर दिया। घायलों की पहचान अमर अहमद, मोहम्मद जैद असलम के रूप में हुई है।

हादसे से जुड़ी तस्वीरें देखिए-

अचानक जानवर आया, बचाने में हादसा
पुलिस के अनुसार, क्रेटा कार से पांचों लोग झांसी आ रहे थे। झांसी-कानपुर हाईवे पर अचानक जानवर आ गया। इसे बचाने के चक्कर में कार बेकाबू हो गई और हादसा हो गया। घायलों को तुरंत मोंठ सीएचसी लाया गया। यहां डॉक्टरों ने अतीक के बेटे अबान और सोनू को मृत घोषित कर दिया। दोनों के शव पोस्टमार्टम के लिए झांसी भेजे जा रहे हैं।

 

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ग्वालियर एयरफोर्स गेट पर पेट्रोल बम फेंकने की कोशिश, मचा हड़कंप

ग्वालियर. महाराजपुरा स्थित एयरफोर्स स्टेशन के मुख्य गेट पर पेट्रोल बम जैसी वस्तु फेंके जाने से सुरक्षा एजेंसियों में हडकंप मच गया। घटना के बाद वायुसेना, पुलिस और खुफिया एजेंसियां तुरंत अलर्ट हो गई। आरोपी को मौके पर ही पकड लिया गया। प्रारंभिक जांच में पुलिस का कहना है कि आरोपी मानसिक रूप् से अस्वस्थ प्रतीत होता है जिसके बाद उसे मानसिंक आरोग्यशाला भेजा गया है।

ग्वालियर के एयरपोर्ट स्टेशन का फाइल फोटो
सुरक्षा में तैनात जवानों ने पकडा
बता दें कि घटना देर रात की बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार आरोपी उत्तर प्रदेश के वाराणसी का रहने वाला है और आंध्र प्रदेश के एक निजी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत है। वह कुछ दिनों की छुट्टी लेकर ग्वालियर आया था। यहां एक गेस्ट हाउस में ठहरने के बाद उसने बियर की बोतलों में पेट्रोल भरकर एयरफोर्स स्टेशन के गेट के पास फेंक दिया। घटना होते ही सुरक्षा में तैनात जवानों ने उसे तत्काल पकड लिया। हाई सिक्योरिटी क्षेत्र में इस तरह की घटना के बाद इंटेलिजेंस ब्यूरो, डिफेंस इंटेलिजेंस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने आरोपी से लंबी पूछताछ की।
पुलिस ने कहा आरोपी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं
जानकरी के अनुसार पूछताछ के दौरान वह बार-बार अपने बयान बदलता रहा। कभी उसने दावा किया कि एयरफोर्स स्टेशन से उसका दिमाग हैक किया जा रहा है तो कभी जातिगत उत्पीडन की बातें करने लगा। पुलिस का कहना है कि उसकी मानसिक स्थिति सामान्य नहीं लग रही है। जांच में सामने आया कि आरोपी ने नोएडा से एमसीए और भोपाल के मैनिट से एमटेक किया है। उसने पीएचडी में भी दाखिला लिया था लेकिन पढाई बीच में ही छोड दी। इसके बाद वह आंध्र प्रदेश के एक निजी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्य करने लगा। फिलहाल पुलिस उसके पूरे बैकग्राउंड और मानसिक स्वास्थ्य से जुडे पहलुओं की जांच कर रही है।
जांच एजेंसियां जांच में जुटी
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी की हरकत केवल उसकी मानसिक स्थिति का परिणाम थी या इसके पीछे कोई और कारण भी था। एयरफोर्स स्टेशन जैसे संवेदनशील प्रतिष्ठान की सुरक्षा को देखते हुए मामले की गहन जांच की जा रही है।

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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में 27% OBC आरक्षण पर अंतिम बहस पूरी, 2.30 घंटे चली बहस, सभी पक्षों ने रखा अपना पक्ष

जबलपुर. मध्यप्रदेश में 27%  OBC  आरक्षण को लेकर लम्बे वक्त से चल रहे कानूनी विवाद में बुधवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में अंतिम सुनवाई पूरी हो गयी। सभी पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद विशेष युगलपीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब राज्य सरकार, OBC वर्ग के अभ्यर्थियों और अन्य पक्षकारों की निगाहें हाईकोर्ट के फैसलें पर टिकी है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की विशेष युगलपीठ के न्यायमूर्ति आनंद पाठक-न्यायमूर्ति विनय सराफ ने लगभग ढाई घंटे तक चली सुनवाई में सभी पक्षों की बहस सुनी। सुनवाई के बीच 27%  OBC आरक्षण की संवैधानिक वैधता, आरक्षण की 50%  सीमा, ओबीसी आबादी के आंकड़े, क्रीमिलेयर, पिछड़ेपन के आधार और सरकारी नियुक्तियों में लंबित पदों समेत विभिन्न कानूनी पहलुओं पर विस्तार से बहस हुई।
सरकारी भर्तियों पर सीधा असर
अब फैसला सुरक्षित होने के बाद प्रदेश में 27% OBC आरक्षण को लेकर लम्बे समय से बनी असमंजस की स्थिति पर अदालत के निर्णय का इंतजार है। ऐसा माना जा रहा है कि हाईकोर्ट का फैसला उन सरकारी भर्तियों और नियुक्तियों पर भी सीधा प्रभाव डाल सकता है, जो लम्बे वक्त से इस मामले की वजह से प्रभावित है।
आबादी से जुड़े आंकड़े अदालत में रखे
ओबीसी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने 27 प्रतिशत आरक्षण को बरकरार रखने की मांग की। उन्होंने अक्टूबर 2019 में तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा दाखिल 555 पृष्ठों के जवाब का हवाला देते हुए ओबीसी आबादी से जुड़े आंकड़े अदालत के समक्ष रखे। उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि सरकारी स्कूलों में कक्षा पहली से 12वीं तक पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता दी जाए। सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायमूर्ति आनंद पाठक की खंडपीठ ने सभी अधिवक्ताओं को विस्तृत और तथ्यात्मक कानूनी बहस के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि लंबी सुनवाई के दौरान सामने आए कई तर्क और कानूनी पहलू अदालत के लिए भी सीखने वाले रहे।

 

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