भारत जल्द ही म्यांमार से जमीन की अदला-बदली करेगा? मणिपुर में सुलगने लगी विरोध की चिंगारी
नई दिल्ली. भारत और म्यांमार की सीमा रेखा तय करने का वर्षो से लंबित मामला का जल्द समाधान हो सकता है। खबरों के अनुसार इसके लिये दोनों देश जमीन की अदला-बदली पर विचार कर रहे हैं। जिसकी सीमा अभी तक तय नहीं हो पायी है। मंगलवार को नयी दिल्ली में एक पत्रकार वार्ता में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि सीमा पार कुछ ऐसे इलाके है। जिनका अभी समाधान करना बाकी है। उन हिस्सों पर बातचीत चल रही है।
अदला-बदली के लिये प्रस्तावित इलाका मणिपुर के चंदेल जिले में है। जो म्यांमार के सगाइंग इलाके में काबाव घाटी से सटा हुआ है। सीमा तय करने का काम 3 माह के अन्दर, यानी अगस्त के आसपास पूरा होने का अनुमान था। भारत और म्यांमार के बीच 1,643 किमी लम्बी अंर्तराष्ट्रीय सीमा है जो कि अरूणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम और मणिपुर से होकर गुजरती है। फिर म्यांमार के सगाइंग इलाके और चिन राज्य में आती है। सीमा का अधिकतर हिस्सा पहाड़ी, जंगली और खुला है। जो उन जातीय समुदायों के इलाकों से होकर गुजरता है जो दोनों ओर रहते आये है।
गृह मंत्रालय के मुताबिक सीमा के लगभग 1,472 किमी हिस्से को बॉर्डर पिलर के माध्यम से तय किया गया है। जबकि करीब 171 किमी हिस्सा अभी भी अनसुलझा है। जो मुख्य रूप् से अरूणाचल प्रदेश के लोहित सेक्टर और मणिपुर की काबाव घाटी में है।

