डिजिटल म्यूज़ियम के लिये “फ़्रेंड्स ऑफ़ म्यूज़ियम” ने दिये सुझाव

ग्वालियर. गोरखी स्थित स्काउट एवं गाइड भवन में ग्वालियर स्मार्ट सिटी की महत्वाकांक्षी परियोजना डिजिटल संग्रहालय और तारामंडल अपना आकार ले रही है। डिजीटल संग्रहालय में ग्वालियर के इतिहास और कला.संस्कृति सहीत अन्य विधाओ को किस प्रकार से बेहतर तरिके से जोडा जा सकता है औऱ इन विधाओ के स्थानीय कलाकार जानकार लोग इस परियोजना से जुडकर किस प्रकार सहायता कर सकते है, इन्ही सभी बातो को लेकर आज शनिवार को कंट्रोल कमांड सेंटर में ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह की अध्यक्षता में एक समिक्षा बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें ग्वालियर के संगीत, कलाए और अन्य विषयो के विषय विशेषज्ञो सहीत इस परियोजना से संबंधित अधिकारी औऱ कर्मचारीयो नें हिस्सा लिया। बैठक में उपस्थित विषय विशेषज्ञों ने कला व संस्कृति से जुड़े अहम बिन्दु साझा किये।
ग्वालियर स्मार्टसिटी सीईओ श्रीमती जयति सिंह नें बताया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा बनाया जा रहा संग्रहालय और तारामंडल परियोजना में संग्रहालय का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इस ग्वालियर की जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। श्रीमती सिंह ने बताया कि “फ़्रेंड्स ऑफ़ म्यूज़ियम”  समिति में संगीत, चित्र कला, शिल्पकला, पारम्परिक परिधान आदि के विषय विशेषज्ञों को सम्मिलित किया गया है जो शहर से जुड़ी इन अद्भुत कलाओं को प्रदर्शित करने में सहभागी बनेंगे। इन विषयों से जुड़े अन्य विषय विशेषज्ञों के साथ भी जल्द बैठक कर उन्हें सहभागी बनाया जायेगा। शहर की कला व संस्कृति से जुड़े प्रबुद्दजनों से फ़्रेंड्स ऑफ़ म्यूज़ियम मुहिम में जुड़ने का आग्रह किया जा रहा है।
इस संग्रहालय में स्थापत्य शैली, वस्तु, परिधान, जीवनशैली, वाद्य यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक परंपरा, चित्रकारी सहीत कई विधाओ को आधुनिक तरिके से डिजिटली प्रदर्शित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर संभाग की स्थानीय चितौरा कला, मधुमती कला तथा मृणुशिल्प जैसी कलाओं को प्रमुख रूप से प्रदर्शित किया जायेगा। यहां पर आकर पर्यटक 16 गैलरियों में सजे ग्वालियर के इतिहास, यंत्र, आभूषण, हस्तशिल्प और अन्य बातो को अत्याधुनिक आईटी उपकरणो का प्रयोग करके देख सकेंगे। इस संग्रहालय में वर्चुअल रियलटी का समावेश भी किया जायेगा जिसके द्वारा सैलानी इतिहास की किसी स्थल की वास्तविकता को महसूस कर सकेगे।
श्रीमती सिंह नें आज बैठक में उपस्थित संबंधित अधिकारियो को निर्देशित किया कि ग्वालियर की ऐसी प्राचीन कलाए संगीत, शिल्प इत्यादी जो कि अब लुप्त हो चुकी या लुप्त होने की कगार पर है उनके बारे में विषय विशेषज्ञयो की सहायता से पूरी जानकारी जुटाई जाये ताकि उन्हे इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। इन्होने बैठक में शामिल विषय विशेषज्ञो से भी अपील की वह अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे ताकि ग्वालियर और ग्वालियर के आसपास की कला.संस्कृति को इस संग्रहालय में शामिल किया जा सके। वही उन्होने निर्देशित किया कि स्थानीय कलाकारों को भी ज्यादा से ज्यादा इस परियोजना से जोडा जाये ताकि स्थानीय कला और कलाकारो को एक पहचान मिल सके औऱ अन्य लोग उनके बारे में जान सके।

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