केन्द्रीय मंत्रिमंडल विस्तार-ड्रीम टीम में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ेगा, 18-25 जनवरी के बीच मंत्रिमंडल विस्तार संभव, कैबिनेट मंत्रियों को संगठन में लगायेंगे

नई दिल्ली. केन्द्र सरकार के मंत्रालयों में इन दिनों बेचैनी साया है। पार्टी मुख्यालय से पीएमओ तक उच्चस्तरीय बैठकों के दौरान गहमागहमी मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल का संकेत दे रही है। केन्द्र सरकार और पार्टी सूत्रों ने बताया है कि यह मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का अंतिम पुर्नगठन होगा। यही टीम इस वर्ष 10 राज्यों के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी का मोर्चा संभालेगी। कौन हटेगा, कौन शामिल होगा, इस मुद्दे पर पार्टी में खामोशी है। हर किसी का यही कहना है कि इस संबंध में सिर्फ एक शख्स (प्रधानमंत्री मोदी) को ही मालूम हैं।
वर्ष 2023 में 10 राज्यों में हैं विधानसभा और लोकसभा चुनाव की तैयारी
इस वर्ष कर्नाटक, तेलंगाना, एमपी-छत्तीसगढ़, राजस्थान, मेघालय, नागालैण्ड, मिजोरम, त्रिपुरा में चुनाव हैं। जम्मू-कश्मीर में भी उम्मीद है। पार्टी के सामने इनमें से 6 राज्यों में सरकार बचाने की चुनौती हैं। ऐसे में मंत्रिमण्डल में वहां के नेताओं को प्रतिनिधित्व देने पर जोर रहेगा। सरकार की तरफ से स्पष्ट संकेत हैं कि नॉन परफार्मिंग मंत्रियों को ही ड्रीम टीम में जगह नहीं मिलेगी। एक पूर्व मंत्री ने इशारा किया कि गुजरात चुनाव से पहले वहां पूरी टीम को झकझोरा गया था। जिसके सकारात्मक परिणाम दिखाई दिये है। इसलिये समझा जा रहा है कि इस बार भी बड़े बदलाव किये जा सकते हैं।
लोकसभा की 436 सीटों पर रहेंगे केन्द्रीय मंत्री
आम चुनाव की तैयारियों में जुटी भारतीय जनता पार्टी 20 जनवरी से उन 436 लोकसभा सीटों परद केन्द्रीय मंत्रियों की तैनात करेगी। जहां पर पिछला चुनाव लड़ी थी। केन्द्रीय मंत्री वहां रोटेशन आधार पर तीन दिन रूकेंगे और केन्द्रीय योजनाओं की समीक्षा करेंगे। सूत्रों के अनुसार हर मंत्री के जिम्मे 7-8 सीटें होंगी। उन्हें केन्द्र की कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और उसके असर की जानकारी जुटाकर रिपोर्ट बनानी होगी। जानकारी एकत्र करने के लिये लोकसभा सीट के लिये एक ट्विटर हैण्डल बनाकर उससे कम से कम 50 हजार फॉलोअर जोड़े जायेंगे। सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं, धार्मिक गुरूओं और समुदायों से संवाद स्थापित किया जायेगा।

नई टीम के लिए ये समीकरण बन सकते हैं
संगठन में अनुभवी, तेजतर्रार नेताओं की कमी। इसलिए कम से कम 3 कैबिनेट मंत्री संगठन में लाए जा सकते हैं।
एक पूर्व ब्यूरोक्रेट कैबिनेट मंत्री को हटाए जाने की चर्चा है।
महिला प्रतिनिधित्व बढ़ेगा।
कर्नाटक, मप्र-छग, राजस्थान से नुमाइंदगी बढ़ना भी संभव।
5 मंत्रियों का अतिरिक्त प्रभार कम किया जा सकता है।
ओबीसी, अनुसूचित जाति और आदिवासी को तरजीह दी जाएगी।
अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय गैर मुस्लिम अल्पसंख्यक प्रतिनिधि को दिया जाएगा।
गुजरात की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले पुरस्कृत होंगे।
हिमाचल-दिल्ली एमसीडी चुनाव में हार का असर दिखेगा।
पुनर्गठन में शिवसेना के शिंदे गुट को एक स्थान दिया जा सकता है।
जेडीयू के हटने से खाली हुई जगह भी भाजपा को मिलेगी।
केन्द्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार कब
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 16-17 जनवरी को प्रस्तावित है। 23 जनवरी को नड्उा कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। बजट सत्र 31 जनवरी से है। ऐसे में नयी टीम 18 से 25 जनवरी के बीच बन सकती है।

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