जीवाजी विश्वविद्यालय में लॉकडाउन के बीच फर्जीवाड़ा, कलकत्ता एजेंसी से काम छीनकर नागपुर एजेंसी को 80 लाख रु. भुगतान की तैयारी
ग्वालियर. जीवाजी विश्वविद्यालय के परीक्षा व गोपनीय का काम संभालने वाली नागपुर की माइक्रो प्रो एंड सॉल्यूशन एजेंसी को अवैध रूप से करीब 80 लाख रुपए भुगतान करने की तैयारी कर ली गई है। इस संबंध में चेक भी बन चुका है और बैक डेट पर हस्ताक्षर कर भुगतान की तैयारी कर ली है ताकि कुलपति की चहेती एजेंसी को फायदा पहुंचाया जा सके हालांकि एजेंसी से काम वापस लेकर पहले ही उसका बोरिया-बिस्तर बंद किया जा चुका है।
कुलपति की चहेती एजेंसी को फायदा पहुंचाया
जीवाजी विवि प्रशासन ने कलकत्ता की एजेंसी से काम छीनकर नागपुर की उक्त एजेंसी को काम सौंपा गया। विवि के तत्कालीन कुलाधिसचिव उक्त एजेंसी को लेकर आए। जब से एजेंसी ने काम संभाला है तभी से वह विवादों में है। विवि के कुलपति की चहेती एजेंसी होने की वजह से अग्रिम रूप से भुगतान भी किया गया। एजेंसी से कोई भी काम नहीं संभल रहा है। परीक्षा परिणाम में गड़बड़ी से लेकर चार्ट तक गलत भेजे गए जिससे हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया।
हर स्तर पर एजेंसी का विरोध हुआ
परेशान छात्रों की विवि में भीड़ लगने लगी है यहां तक कि परेशान छात्रों ने आत्हत्या करने जैसे कदम उठाया। हर स्तर पर एजेंसी का विरोध हुआ। तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक ने लिखकर दिया कि उक्त एजेंसी से कोई काम नहीं कराया जा सकता। यह एजेंसी छात्रहित में कोई काम नहीं कर रही। छात्रों व अधिकारियों के विरोध के बाद एजेंसी से काम छीन लिया। कार्यपरिषद ने भी इस पर मुहर लगाई और एजेंसी को किसी तरह का भुगतान करने पर रोक लगा दी उसके बाद भी विवि के अधिकारी चहेती एजेंसी को करीब 80 लाख रु. भुगतान करने की तैयारी कर ली है। जानकारी के अनुसार बैक डेट पर यह भुगतान किया जा रहा है इस संबंध में चेक भी बन गया है।
