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हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस भरोसे के लायक नहीं, टीआई मुरार अजय पंवार, महिला सब इंस्पेक्टर पर एफआईआर के निर्देश, एएसपी, सीएसपी मुरार और टीआई सिरोल प्रीती भार्गव की भूमिका संदिग्ध

ग्वालियर. हाईकोर्ट ग्वालियर बेंच ने दुष्कर्म पीडि़ता और उसके परिजन को मुरार थाने में आरोपी के दादा गंगासिंह भदौरिया के कहने पर पीटने और प्रताडि़त करने के मामले में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर के सख्त निर्देश दिये हैं। हाईकोर्ट ने मुरार थाना के टीआई अजय पंवार, एसआई कीर्ति उपाध्याय के खिलाफ सीधे मामला दर्ज करने के लिये कहा है।
इसके साथ ही सीएसपी मुरार आरएन पचौरी, टीआई सिरोल प्रीति भार्गव की भूमिका को संदिग्ध बताते हुए जांच के आदेश दिये है और साथ ही इन सभी पुलिस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से ग्वालियर-चम्बल अंचल से बाहर करने के निर्देश दिये गये हैं। अपने आदेश में कोर्ट ने कहा है कि पुलिस भरोसे के लायक नहीं है। पुलिस अधिकारियों आरोपी के दादा के कहने पर काम करते रहे। मामले की जांच सीबीआई से कराई जाये। पुलिस अधिकारियों और आरोपी के दादा के फोन कॉल्स की जांच हो।
क्या है पूरा मामला
एक लड़की ने मुरार थाना पहुंचकर घटना के संबंध में बताया था कि खुद की उम्र 15 साल बताते हुए आरोप लगाया था कि सीपी कॉलोनी निवासी गंगासिंह भदौरिया के मकान में वह झाडू पोंछा का काम करती थी। 20 दिसंबर 2020 से उसे काम पर रखा था। घर के ग्राउंड फ्लोर पर ही रहती थी। 31 जनवरी की रात 8 बजे गंगासिंह का नाती आदित्य भदौरिया और उसका एक दोस्त ने मेरे दरवाजा पर दस्तक दी। जब दरवाजा खोला तो आदित्य और उसके दोस्त कमरे में आ गए। इन्होंने मेरे साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद वहां से धमकाकर भाग गए। काफी डरी हुई थी पहले ब्ड हेल्प लाइन पर कॉल किया। जहां सूचना मिलने पर मुरार पुलिस उसे लेकर थाना पहुंची। पुलिस ने आदित्य के दोस्त पर दुष्कर्म का मामला दर्ज होने का पता चलते ही आरोपी आदित्य भदौरिया का दादा व ठेकेदार गंगासिंह भदौरिया थाने पहुंचा। उसके बाद पुलिस ने उल्टा पीड़िता को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। पीड़िता ने कहा था कि उसे थाने में रात भर झाडू और डंडे से पीटा। उसके मां.पिता को थाने में बंधक बनाकर पुलिस ने पीटा। इसमें ज्प् मुरार अजय पवारए सब इंस्पेक्टर कीर्ति उपाध्याय पर सीधा आरोप लगा था।
हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को लताड़ा, केस की सीबीआई जांच करेगी
नाबालिग दुष्कर्म पीडि़त ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्त्ता के एडवोकेट अनिल मिश्रा ने तर्क दिया कि आदित्य सिंह भदौरिया व उसके एक दोस्त ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म कर मारपीट की। मुरार थाना पुलिस के पास जब शिकायत लेकर पहुंचे तो उल्टा पुलिस नाबालिग को परेशान करने लगी। साक्ष्यों के साथ छेडछाहड़ भी की। थाने में अवैध रूप से पीडि़ता को बंधक बनाकर रखा गया। पुलिस उसे बयान बदलने के लिये पीटा और दवाब भी बनाया। नाबालिग गायब होने पर हेवियस कार्पस भी दायर की गयी।
हाईकोर्ट ने पुलिस से इस संबंध में जवाब मांगा और मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने एसपी ग्वालियर को तलब कर लिया था। 17 जून को एसपी अमित सांघी न्यायालय के सामने उपस्थित हुए। 17 जून को बहस के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था। बुधवार को इस मामले में फैसला सुनाया है। कोर्ट नेअपने 129 पेज के आदेश में कहा गया है कि मामले में आरोपी पर तो कार्यवाही नहीं कीगयी पीडि़ता व उसके परिवार को पुलिस प्रताडि़त करने में लगी रहीं। सब से लेकर एएसपी स्तर के पुलिस अधिकारी आरोपी के दादा गंगासिंह भदौरिया के कहने पर मामले को प्रभावित करते हुए पुलिस की जांच में दोष है, मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
इन अधिकारियों पर होगी कार्यवाही

ASP शहर सुमन गुर्जर को मामले की जांच दी थी, पर आरोपी पर कोई कार्रवाई न करते उल्टा उनकी मदद की। भूमिका की जांच हो। अंचल से बाहर भेजा जाए।
CSP आरएन पचौरी ने आरोपियों की मदद की, कोर्ट को गलत जानकारी देकर गुमराह किया, इसलिए भूमिका की जांच हो। अंचल से बाहर ट्रांसफर किया जाए
मुरार थाने से मामला सिरोल भेजा गया। यहां जांच सिरोल थाना प्रभारी प्रीति भार्गव कर रही थीं। पांच महीने तक कुछ नहीं किया। भूमिका की जांच हो
मुरार थाना TI अजय पवार व सब इंस्पेक्टर कीर्ति उपाध्याय ने नाबालिग को अवैध रूप से थाने में बिठाए रखा। नाबालिग के वीडियो बनाकर और कुछ अहम CCTV वाट्सएप पर शेयर भी किए। इन दोनों अफसरों पर मामला दर्ज किया जाए।

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