शिवराज मंत्रिमंडल का विस्तार- डॉ. नरोत्तम मिश्रा और सिलावट बनेंगे उप मुख्यमंत्री
भोपाल. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पदग्रहण के बाद अब उप मुख्यमंत्री के लिए 2 नाम को फाइनल करने पर निर्णय किया गया है। सूची में शिवराज मंत्रिमंडल का जल्द विस्तार के साथ डॉ. नरोत्तम मिश्रा और तुलसी सिलावट को उप मुख्यमंत्री बनाने की चर्चा की है। ऐसा कहा जा रहा है कि शिवराज कैबिनेट में लगभग 2 दर्जन से अधिक मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी।
2 दर्जन से अधिक विधायकों को मंत्री बनाया जाएगा
शिवराजसिंह चौहान द्वारा चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही मंत्रिमंडल विस्तार की कवायद शुरू हो गई है। मंत्रिमंडल में काफी सोच समझकर मौका दिया जाएगा। जानकारी के अनुसार समीकरणों को साधने के लिए इस बार मंत्रिमंडल में 2 उप मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है वहीं लगभग 2 दर्जन से अधिक विधायकों को मंत्री बनाया जाएगा इसके लिए आलाकमान के साथ चर्चा का दौर चल रहा है।
सिंधिया समर्थक पूर्व मंत्रियों को भी मंत्रिमंडल में मौका मिलना तय
वर्तमान राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए इस बार डॉ. नरोत्तम मिश्रा और तुलसी सिलावट को उप मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। कांग्रेस सरकार गिराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सिंधिया समर्थक पूर्व मंत्रियों को भी मंत्रिमंडल में मौका मिलना तय है यहीं नहीं कांग्रेस से भाजपा में आए वरिष्ठ आदिवासी विधायक बिसाहूलाल सिंह, एंदल सिंह कंसाना और हरदीप सिंह डंग को भी मंत्रिमंडल में लिया जाना तय है। मंत्रिमंडल के गठन के लिए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा व अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ ही कांग्रेस से भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी चर्चा करेंगे।
शिवराज मंत्रिमंडल में यह मंत्री बनेंगे
गोपाल भार्गव, भूपेन्द्र सिंह, रामपाल सिंह, यशोधरा राजे सिंधिया, विजय शाह, आज विश्नोई, राजेन्द्र शुक्ला, गौरीशंकर बिसेन, संजय पाठक, पारस जैन, हजूर से विधायक रामेश्वर शर्मा, जगदीश देवड़ा, विश्वास सारंग, हरिशंकर खटीक, मीना सिंह, प्रदीप लारिया, अरविंद भदौरिया, ओम प्रकाश सकलेचा, बृजेन्द्र प्रताप सिंह, रमेश मेंदोला, जालम सिंह पटेल, मालिनी गौड़, गोपीलाल जाटव, नीना वर्मा, कुंवर सिंह टेकाम, यशपाल सिंह सिसोदिया, केदार शुक्ला, रामोलावन पटेल, मोहन यादव, पंचूलाल, दिव्यराज सिंह आदि को मौका मिल सकता है। यदि पार्टी में 50 साल की उम्र का फार्मूला लागू नहीं हुआ तो नागेन्द्र सिंह नागौद या नागेन्द्रसिंह गुढ़ को मौका मिल सकता है। ऐसी स्थिति में कुछ युवा विधायकों के नाम कट सकते हैं।
