मप्र में 17 दिन चले ड्रामे के सिंधिया हीरो, दिग्विजय विलेन और नरोत्तम मिश्रा रहें चाणक्य

भोपाल. मप्र में पिछले 17 दिनों से चले रहे सियासी ड्रामा आज लगभग खत्म हो गया। इस पूरे ड्रामे के 7 बड़े किरदार हैं, जिनके अपने अपने रोल हैं। इस पूरे ड्रामे के हीरो रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया। क्योंकि उनके कांग्रेस छोड़ते ही और बीजेपी में शामिल होते ही तय हो गया था कि मप्र में बीजेपी सरकार बनने जा रही है। इस ड्रामे से सबसे ज्यादा नुकसान में कमलनाथ और सबसे अधिक लाभ शिवराज रहें। कांग्रेस के ही दिग्विजय सिंह को विलेन के तौर पर पेश किया गया, क्योंकि कई कांग्रेस के ही नेताओं ने कहा है कि यह सब कुछ जो हो रहा है, वह राज्यसभा जाने के लिये हो रहा है। इन 4 अलावा 3 और अहम किरदार हैं, जिन्होंने परदे के पीछे से सरकार बनाने की तैयारी की है। यह किरदार हैं -जफर इस्लाम, नरोत्तम मिश्रा और नरेन्द्र सिंह तोमर।
ज्योतिरादित्य सिंधिया रहें हीरो
इस पूरे ड्रामे में सबसे बड़ा रोल ज्योतिरादित्य सिंध्यिा का रहा । उनके पार्टी छोड़ने और उनके समर्थक विधायकों के इस्तीफे के कारण था बार बार कांग्रेस की ओर से नजरअंदाज किया जाना। दरअसल, 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को आगे रखा। ऐसा माना जा रहा था कि कांग्रेस के विजय होने पर सिंधिया मुख्यमंत्री बनेंगे। लेकिन उनकी जगह कमलनाथ को मुख्यमंत्री बना दिया और उसके बाद सिंधिया के मप्र कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की भी बात चल रही थी, लेकिन उनकी इस मांग को भी कांग्रेस ने नहीं माना। आखिरकार राज्यसभा चुनाव के लिये जब सिंधिया की जगह दिग्विजय का नाम चला, तो उन्होंने 10 मार्च को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। 11 मार्च को सिंधिया बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा उम्मीदवार बना दिया।
दिग्विजय सिंह रहें विलेन
इसके दो तर्क सामने आये हैं पहला यह कि सिंधिया के बीजेपी में आने से एक हफ्ते पूर्व कांग्रेस के जिन 6 विधायकों के नाम सामने आये थे, उनमें से 2 विधायक दिग्विजय के नजदीकी माने जाते हैं। पहले थे -ऐदल सिंह कंसाना और दूसरे थे बिसाहूलाल सिंह। यह दोनों मप्र में जब दिग्विजय सिंह की सरकार थी, तब मंत्री थे। लेकिन कमलनाथ की सरकार में इन्हें जगह नहीं मिली। दूसरा तर्क कमलनाथ सरकार में मंत्री रहें उमंग सिंघार ने ही दिया था। सिंघार ने ट्वीट कर कहा था- यह राज्यसभा में जाने की लड़ाई हैं, बाकी आप सब समझदार हैं। कई बार यह बातें उठ चुकी हैं कि राज्यसभा जाने के लिये दिग्विजय सिंह ने ही पूरा राजनेतिक सियासी ड्रामा रचा।
डॉ. नरोत्तम मिश्रा रहें चाणक्य
कांग्रेस विधायकों को बेंगलुरू भेजने और फ्लाइट से आने जाने में जिस बीजेपी नेता का नाम सबसे अधिक बार सामने आया, वह था नरोत्तम मिश्रा का। कांग्रेस की ओर से जब भी बीजेपी पर हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगाया, तो जबाव देने नरोत्तम ही आगे आये। मप्र में जब सियासी ड्रामा शुरू ही हुआ था, तब नरोत्तम ने कहा था कि उनके संपर्क में कांग्रेस के 15 से 20 विधायक हैं। दिग्विजय सिंह ने भी दावा किया था कि बेंगलुरू के जिस रिसॉर्ट में कांग्रेस विधायक ठहरे थे वहां नरोत्तम मिश्रा भी थे। कांग्रेस के बागी विधायकों को संभालना हो या बीजेपी के विधायकों को एकजुट रखना हो, सारा काम नरोत्तम मिश्रा ने ही किया हैं। साथ ही नरोत्तम मिश्रा सीएम या डिप्टी सीएम बनाये जा सकते हैं।

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