9 डॉक्टरों को पद्मश्री दिलाने वाली जेएएच बिल्डिंग बनेगी मेडीकल म्यूजियम, प्रस्ताव भोपाल भेजा गया

ग्वालियर. गजराराजा मेडीकल कॉलेज के जयारोग्य चिकित्सालय (जेएएच) के स्टोर में ऐसे दुर्लभ उपकरण और मशीनों को सुरक्षित रखा गया है। इन मशीनों पर अभ्यास कर गजराराजा मेडीकल कॉलेज के 9 चिकित्सकों ने पद्मश्री सम्मान तक पाया है। वक्त के साथ इन उपकरणों का उपयोग भले ही बन्द हो गया हो। लेकिन यह चिकित्सालय शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के स्वण्रिम इतिहास के साक्षी है। कॉलेज प्रबंधन ने इन धरोहरों (विरासत) को संहजने एवं संरक्षित रखने के लिये शासन का जेएएच की पत्थर वाली इमारत को मेडीकल म्यूजियम के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भेजा है। ऐसा अधिकारियों का कहना है कि पत्थर वाला भवन अब मरीजों के उपर्युक्त नहीं है। बड़ी तादाद में लोगों के आवागमन के लिहाज से सुरक्षित नहीं है। मेडीकल म्यूजियम बनाने के लिये जेएएच प्रशासन ने लगभग 20 करोड़ रूपये प्रस्ताव बनाकर भोपाल भेजा गया है। जबकि लगभग 10 वर्ष पूर्व पुरात्तव विभाग ने भवन का सर्वे किया था और संरक्षण के लिये 14 करोड़ रूपये अनुमानित राशि बताई थी।

इन चिकित्सकों को मिला पद्मश्री
चिकित्सकों को पद्मश्री मिलने की श्रृंखला में सबसे पहला नाम डॉ. बीएन राव जो अभी आन्दोलन अभी-अभी सामने आया है। दूसरा नाम डॉ. लीला फाटक, डॉ. आरएस धारकर, डॉ. एमजी देव, डॉ. एमएन पासी, डॉ. पीबी बुचके, डॉ. एके हेमल, डॉ. एलसी गुप्ता, डॉ. नरेन्द्रप्रसाद मिश्रा है।
अभी खाली हैं भवन
वर्तमान में जयारोग्य चिकित्सालय (जेएएच) का पत्थर वाला भवन खाली-बंद पड़ा है। इस वजह से अब इस भवन का मेंटेनेंस भी नहीं हो पा रहा है। इसलिये यह भवन जर्जर होता जा रहा है।
शासन को प्रस्ताव भेजा, मंजूरी का है इंतजार
जेएएच के पत्थर वाले भवन के रिनोवेशन और इसे संग्रहालय के रूप में विकसित करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है। इससे छात्र 50 साल से पहले तक की विधा जान सकेंगे की पहले डॉक्टर कैसे इलाज करते थे। साथ ही उस समय के उपकरण, ऑपरेशन में प्रयोग होने वाले औजार, किताबों के प्रदर्शित होंगी।
डॉ.आरकेएस धाकड़, डीन,जीआरएमसी

