IAS पति-पत्नी के बीच हुआ तलाक, भारती दीक्षित ने पति पर कराई FIR को हाईकोर्ट ने किया रद्द

जयपुर. आईएएस आशीष मोदी और आईएएस भारती दीक्षित का अ्रंततः तलाक हो ही गया। आपसी सहमति से दोनों ने फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की थी। इसके आधार पर कोर्ट ने 15 दिसम्बर 2025 को तलाक की डिक्री जारी कर दी गयी थी। इसका खुलासा हाईकोर्ट के आदेश से मंगलवार को हुआ। आशीष मोदी ने मारती दीक्षित को तरफ से दर्ज एफआईआर को आपसी समझौते के आधार पर रद्द करने के लिये हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
इसमें उनकी तरफ से कहा गया था कि दोनों के बीच आपसी सहमति से समझौता हो गया है। वहीं आपसी सहमति से दोनों के बीच तलाक भी हो गया है। इस आधार पर जस्टिस अनिल उपमन की अदालत ने आशीष मोदी और अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को भी रद्द कर दिया है। दरअसल, भारती ने पति आशीष पर शराब पीकर धमकाने और मारपीट करने का आरोप लगाया था। उन्होंने एफआईआर में कहा था कि पति के कई महिलाओं से अवैध संबंध है। आशीष मोदी सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के निदेशक है। जबकि भारतीय दीक्षित वित्त विभाग में संयुक्त सचिव है। दोनों ही जयपुर में ही पदस्थ है। आशीष कई जिलों के कलेक्टर भी रह चुके है।
बेटी और सामाजिक स्थिति को लेकर किया समझौता
FIR रद्द करने पर भारती दीक्षित की ओर से अदालत में कहा गया उन्होंने नाबालिग बेटी, सामाजिक स्थिति और अपने पद की गरिमा को देखते हुए समझौता किया है, लेकिन दो अन्य आरोपी सुरेन्द्र विश्नोई और आशीष शर्मा से समझौते के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होने कहा कि इन दोनों ने आशीष मोदी की ना केवल सहायता की, बल्कि व्यक्तिगत रूप से मुझे धमकाया, मेरा अपहरण किया और मुझे अवैध हिरासत में रखा। इस पर कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता को यह तर्क देने की अनुमति नहीं दी जा सकती है कि उसका समझौता केवल उसके पति तक ही सीमित है। क्योंकि दोनों सह आरोपियों ने केवल पति की मदद की थी। ऐसे में इस तरह की खंडित कार्रवाई की अनुमति देना निष्पक्षता और न्याय के सिद्धांतों के विपरीत होगी। केवल दोनों सह आरोपियों के विरुद्ध FIR का जारी रहना, कानून की प्रक्रिया का स्पष्ट दुरुपयोग होगा।

