Newsमप्र छत्तीसगढ़

पाक के छक्के छुड़ाने वाली मिसाइलों को भारत खरीद रहा है। भारत-फ्रांस के बीच 3200 करोड़ रूपये के सौदे पर चर्चा

नई दिल्ली. भारत और फ्रांस के बीच एक बड़े रक्षा सौदे को लेकर बातचीत चल रही है। जिसके तहत भारतीय वायुसेना (आईएएफ) ने बड़ी संख्या में स्केल्प क्रूज मिसाइलें खरीदने जा रही है। इन्हीं मिसाइलों का उपयोग पिछले वर्ष ऑपरेशन सिंदूर के बीच पाकिस्तान के भीतर जैश ए मोहम्मद और लश्कर ए तैयाब के आतंकी ठिकानों को बर्बाद करने में किया गया था।
इस मामले में फ्रांस से स्केल्प मिसाइलों की खरीद पर चर्चा चल रही है। रक्षा अधिकारियों के अनुसार इस पर जल्द ही फैसला लिये जाने की अनुमान है। स्केल्प मिसाइलों को भारतीय वायुसेना के राफेल फायटर प्लेनों से फायर किया गया था। इन हमलों में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों का भी उपयोग हुआ था। पाकिस्तान के मुरीदके और बहावलपुर जिलों में स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। जिन्हें पूरी तरह से बर्बाद कर दिया गया था। अधिकारियों ने बताया है कि हमले बेहद सटीक थे और सभी लक्ष्य पूरी तरह से नष्ट हो गये थे।
भारतीय वायुसेना अपनी मौजूदा राफेल फ्लीट के लिये इन क्रूज मिसाइलों की खरीद कर रही है। 6-7 मई की रात पाकिस्तान में आतंकी ठिकानो ंको सफलतापूर्वक नष्ट करने के बाद वायुसेना ने इन्हीं हथियारों का बड़े पैमाने पर उपयोग पाकिस्तान वायुसेना के ठिकानों पर हमले के लिये भी किया था। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान वायुसेना के 12 प्रमुख एयरबेस को निशाना बनाया और जमीन पर खड़े लड़ाकू विमानों और जासूसी विमानों सहित कई आतंकी टारगेट्स को नष्ट किया था।
इसके अलावा, भारतीय वायुसेना अपने राफेल लड़ाकू विमानों के लिए बड़ी संख्या में Meteor हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें भी खरीदने की प्रक्रिया में है. इन मिसाइलों को भारतीय नौसेना के लिए ऑर्डर किए गए 26 राफेल मरीन विमानों में भी इंटीग्रेट किया जाएगा, जिनकी डिलीवरी अगले तीन से चार वर्षों में होने की संभावना है. ऑपरेशन सिंदूर में राफेल विमानों के बेहतरीन प्रदर्शन और क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा खतरों को देखते हुए भारतीय वायुसेना अब 114 और राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद का प्रस्ताव भी आगे बढ़ाने जा रही है. इस प्रस्ताव को अगले कुछ दिनों में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) से मंजूरी मिलने की संभावना है. आने वाले वर्षों में राफेल विमान भारतीय वायुसेना की रीढ़ बनने जा रहे हैं और अगले 10 से 15 वर्षों में इनकी संख्या लगभग 200 तक पहुंचने की उम्मीद है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *