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मैं नहीं जानता था कि दिग्विजय सिंह जी क्या चाहते है। अब मैं बाहर हूं तो मैं कैसे जानूंगा – ज्योतिरादित्य सिंधिया

ग्वालियर. केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के राज्यसभा चुनाव नहीं लड़ने के बयान पर तंज कसा है। सिंधिया ने ग्वालियर में कहा है कि जब मैं कांग्रेस में था तब भी मैं नहीं जानता था कि दिग्विजय सिंह जी क्या चाहते है। अब मैं बाहर हूं तो मैं कैसे जानूंगा कि वह क्या चाहते है।
गौरतलब है कि वर्ष 2020 में मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार गिरने के पीछे राज्यसभा चुनावएक बड़ी वजह थी। उस वक्त लोकसभा चुनाव हारने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया के राज्यसभा जाने की चर्चा थी। लेकिन दिग्विजय सिंह के राज्यसभा जाने पर दिग्गी राजा और महाराजा सिंधिया केबीच तल्खियां बढ़ गयी थी।
दिग्विजय सिंह द्वारा वर्तमान कार्यकाल पूरा होने पर राज्यसभा न जाने की इच्छा जाहिर किये जाने के सवाल के जबाव देते हुए सिंधिया ने कहा है कि यह उनकी और कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी बात है। उन्होंनें कहा है कि मैं इस पर क्या टिप्पणी करू, मैं क्या जानूं वह क्या चाहते है। जब मैं कांग्रेस मेंथा तब भी मैं नहीं जानता था दिग्विजय सिंह क्या चाहते थे। अब मैं बाहर हूं तो मैं कैसे जानूंगा कि वह क्या चाहते है। वहीं, पिछले दिनों दिग्विजय सिं द्वारा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा की तारीफ किये जाने पर सिंधिया ने टिप्पणी की। देर आये पर दुरूस्त आये। यह अच्छी बात है कि राहुल गांधी के 17 तारीख को इन्दौर दौरे के सवाल पर सिंधिया ने कहा है कि वह जरूर जाये। इसमें कोई कठिनाई नहीं है। यह प्रजातंत्र है।
क्या है मामला
आपको बता दे कटारे फार्म के पास स्मार्ट सिटी द्वारा निर्मित थीम पार्क का जायजा लेने पहुंचे थे सिंधिया ।उन्होंने कहा कि आज शौर्य स्मारक का भी निरीक्षण किया है,एक बहुत अच्छा भविष्य की पीढ़ी के लिए एक नया स्थल बन रहा है और भविष्य की पीढ़ी भी अपने पूर्वजों के बलिदान याद रखें इसलिए यह स्मारक भी बनाया जा रहा है,बहुत सुंदर डिजाइन ग्वालियर के पत्थर से हम लोग बनाने की कोशिश कर रहे हैं,इसकी आकृति में भी ग्वालियर की संस्कृति और परंपरा रहे सारे शहीदों जिन्होंने पिछले हजार वर्षों से अपने जीवन का बलिदान दिया है उनके लिए यह स्मारक यहां बनेगी, ग्वालियर चंबल की धरती ने भी बहुत सारे वीर सूरमाओं को जन्म दिया है जिन्होंने सरहद पर देश की एकता और अखंडता के लिए बलिदान दिया है, उनको भी याद किया जाएगा और भविष्य यहां प्रवेश करेगा तो वह भविष्य अपने पूर्वजों को सामने माथा टेक कर फिर अपने भविष्य का भी निर्माण करेगा।

 

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