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कांग्रेस -भाजपा कार्यकर्त्ता आमने-सामने भिंडे, कांग्रेस कार्यालय पर भाजपा ने किया राहुल गांधी का किया पुतलादहन

ग्वालियर. बिहार के दरभंगा में के मंच से पीएम प्रधानमंत्री मोदी को गाली दिये जाने के विरोध में भाजपा ने ग्वालियर में कांग्रेस कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। इस बीच हंगामे की स्थिति बन गयी। एक ओर भाजपा कार्यकर्त्ताओं ने राहुल गांधी का पुतलादहन किया। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस कार्यकर्त्ता वोट चोर गद्दी छोड़ के नारे लगा रहे थें। भाजपा ने पहले सोमवार को प्रदर्शन का ऐलान कर दिया था। जिसके बाद कांग्रेस कार्यकर्त्ता भी तैयार थे। इधर, पुलिस हंगामे की सभावना को देखते हुए पहले से ही कांग्रेस कार्यालय का चारों ओर से बेरीकेड्स लगाकर घेर लिया था।
भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने
भाजपा और महिला मोर्चा के कार्यकर्त्ता दोपहर में रैली के रूप में कांग्रेस कार्यालय के सामने पहुंचा और राहुल गांधी के साथ ही जीतू पटवारी के खिलाफ नारेबाजी शयुरू कर दिया। राहुल गांधी, जीतू पटवारी का पुतला दहन किया गया। इस बीच डीडी मॉल की ओर से कांग्रेस कार्यकर्त्ताओं भी वहां पहुंच गये। कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्त्ताओं के आमने -सामने आने पर हंगामा की स्थिति बन गयी।

प्रदर्शन की 4 तस्वीरें देखिए 

भाजपा और भाजपा महिला मोर्चा के कार्यकर्ता कांग्रेस दफ्तर के सामने प्रदर्शन करने पहुंचे थे।
भाजपा और भाजपा महिला मोर्चा के कार्यकर्ता कांग्रेस दफ्तर के सामने प्रदर्शन करने पहुंचे थे।
भाजपा कार्यकर्ताओं राहुल गांधी और जीतू पटवारी के पुतले दहन किए।
भाजपा कार्यकर्ताओं राहुल गांधी और जीतू पटवारी के पुतले दहन किए।
कांग्रेस कार्यकर्ता भी प्रदर्शन करते हुए वहां पहुंच गए।
कांग्रेस कार्यकर्ता भी प्रदर्शन करते हुए वहां पहुंच गए।
कांग्रेस नेताओं ने 'वोट चोर गद्दी छोड़' के नारे लगाए।
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लवमैरिज करने पर की दामाद की हत्या, पंचायत में पिता बोला था अगर गांव में लौटे तो जान से मार देंगे, बीमार मां से मिलने आया तो मार डाला

ग्वालियर. अंर्तजातीय विवाह (लवमैरिज) के लिये एक लड़की मंडप के दिन ही भाग गयी। इससे परिवार की समाज में बदनामी हुई तो वह बौखला गये। दोनों ही एक ही गांव का होने पर पंचायत बुूलाई गयी। जिसमें प्रेमी के बहिष्कार की बात कहीं गयी। पंचायत में लड़की के पिता ने चेतावनी दी कि लौटकर गांव मत आना, वरना मार डालेंगे। लड़के की मां बीमार हुई तो उसे गांव लौटना पड़ा। लड़की के परिवार वालों ने गांव के बाहर ही उसे घेर लिया। पंचायत में दी गयी चेतावनी को पूरा करते हुए लाठी डंडों और कुल्हाडी से हमला कर दिया। गंभीर चोट लगने के बाद 25 अगस्त का उसने दम तोड़ दिया। युवक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ गयी। मृतक के सिर, माथे और चेहरे पर 7 गंभीर जख्म थै। जो कुल्हाडी और लाठी के थे। इसके अलावा शरीर पर कुल 13 चोटें पायी गयी और यही मौत का कारण बनी। अभी डिटेल पीएम रिपोर्ट आनी बाकी है। पुलिस ने मृतक के ससुर, साले समेत 6 लोगों पर हत्या का मामला दर्ज किया गया है।
प्यार से शुरू हुई कहानी हत्या से हुई खत्म
ग्वालियर देहात के बेलगढ़ा स्थित हरसी गांव में रहने वाले ओमप्रकाश बाथम 25, गांव में ट्रेक्टर किराये पर चलाकर जीवनयापन करता था। लगभग 3 वर्ष पूर्व पहले गांव में रहने वाली 22 वर्षीय शिवानी झा से उसे प्रेम हो गया। अफेयर की खबर परिवार का लगी तो विरोध शुरू हो गया। लेकिन ओमप्रकाश और शिवानी एक दूसरे के साथ जीने-मरने की कसमें खा चुके थे। विरोध बढ़ा तो दोनों सारी हदें तोड़कर घर से भाग गये। दोनों के परिवार वालों ने बेलगढ़ा थाने में गुमशुदगी दर्ज करा दी। वर्ष 2024 में पुलिस ने दोनो को बरामद कर यिा। इसके बावजूद दोनों ने अपने-अपने घरों में कह दिया कि वह शादी करेंगे।
ओमप्रकाश की पत्नी की शिकायत पर मामला दर्ज
शिवानी के अनुसार, उसके पति पर उसके पिता द्वारिका झा, मां उमा, चाचा राजू झा, भरत लाल ने अपने पड़ोसी भगवान धानुक, संदीप, लखन बाथम और अन्य लोगों के साथ मिलकर हमला किया था। गंभीर हालत में उसे जयारोग्य अस्पताल ले पहुंचे। यहां भर्ती कराने के बाद इसकी सूचना पुलिस को दी।
पुलिस ने पहले मारपीट की धाराओं में मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। लेकिन 6 दिन बाद ओमप्रकाश ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। युवक की मौत की खबर मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। इसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है।

 

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सूर्योदय से सूर्यास्त तक हो समय की गणना, CM हाउस में लगी वैदिक घड़ी, CM बोले रात 12 बजे दिन बदलने का कोई मतलब नहीं

राष्ट्रगान का सामूहिक गायन किया गया।
भोपालण् मुख्यमंत्री निवास के नवनिर्मित प्रवेश द्वार पर स्थापित की गयी विक्रमादित्य वैदिक घड़ी सोमवार की दोपहर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अनावरण किया है। इस अवसर पर प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवालए मंत्री कृष्णा गौरए विधायक रामेश्वर शर्मा और महेन्द्र यादव मौजूद रहें। कार्यक्रम में सीएम ने विक्रमादित्य वैदिक घड़ी से जुडे मोबाइल एप का भी लोकार्पण किया। कार्यक्रम में मंत्री विश्वास सांरग ने कहा है कि अगर हम मंत्रियों को एक.एक घड़ी भेंट कर दी जाये तो हम भी अपने घरों में इसे स्थापित कर सकें।

भारत के समय की पुनर्स्थापना' की पहल विषय पर युवा संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।
सूर्योदय से दिन की गणना होनी चाहिये
सीएम ने कहा है कि हमारे सभी त्यौहार अंग्रेजी तिथियों के आधार पर नहीं आते हैं। वर्ष की गणना भी तिथियों और 6 ऋतुओं के आधार पर की गयी है। इसलिये समय की गणना सूर्योदय तक होनी चाहिये। रात 12 बजे दिन बदलने का कोई औचित्य नहीं है। हमारी प्राचीन गणना पद्धति में 60 सेकेण्ड का मिनट नहीं। बल्कि 30 घंटे में मुहूर्त माने जाते हैं। यह कोई बंधन नहींए बल्कि हमारी सनातन संस्कृति की धरोहर औरा विचार का विषय हैै । उन्होंने कहा है कि अतीत के इतिहास में खगोल विज्ञान को सूर्य की छाया से समण जाता था। भारत का सेंटर प्वॉइंट उज्जैन माना गया है। लेकिन यह भी समय के साथ दोलायमान हुआ और 32 किमी दूर डोंगला तक पहुंचा। भगवान श्रीकृष्ण भी समय गणना का केन्द्र तलाशने डोंगला के पास नारायणा गांव आये थे। जहां उनके साथ बलराम और सुदामा भी मौजूद थे।
सीएम ने आगे कहा कि 10 हजार साल पहले सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण कब हुआ था, इसकी गणना आज का कंप्यूटर भी नहीं कर पाएगा, लेकिन हमारी वैदिक काल गणना तुरंत सटीक जवाब देती है। सावन के महीने में छाता लेकर चलने की परंपरा भी इसी अनुभवजन्य गणना का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि ग्रह, नक्षत्र और तिथियों के आधार पर जीवन के सभी निर्णय तय किए जाते थे। हमने विधानसभा में भी यही परंपरा अपनाने का प्रयास किया है- रात में भी काम हो सकता है, लेकिन अमावस्या के दिन अवकाश होना चाहिए।
पश्चिम का समय जब तक था, तब तक था। अब पूर्व का समय आया है। दुनिया में भारत की अच्छाइयों को लेकर जाने का यही समय सही समय है। 2014 में सरकार बनाने के 6 महीने में ही पीएम मोदी ने दुनिया मे योग को पुर्नस्थापित करने का काम किया। भारत का ज्ञान कौशल समूची मानवता के लिए है। ये घड़ी भारत की हलचल दुनिया को दिखा रही है। सबकी गति अलग- अलग है लेकिन हमारी ज्ञानगंगा की धारा और आगे तक जाए। हम सब इस घड़ी का उपयोग करते हुए इसकी चर्चा करेंगे। सीएम ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से कहा- मोबाइल ऊपर करके क्यूआर कोड से घड़ी डाउनलोड करो। CM ने सबके मोबाइल की टॉर्च ऑन करवाई।

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धौलपुर से झांसी के बीच चौथी रेल लाइन डालने की तैयारी

ग्वालियर. रेल यात्रियों के लिये अच्छी खबर है। झांसी से धौलपुर के बीच चौथी रेल लाइन बिछाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। इस परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रेलवे बोर्ड को भेज दी गयी है। 320 किमी लम्बी रेलवे लाइन बिछाई जायेगी। जिसकी लागत करीब 4,869 करोड़ रूपये होगी। बोर्ड से स्वीकृति मिलने पर बजट प्राप्त होने के बाद लाइन का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जायेगा। इस लाइन के बनने से सवारी और माल गाडि़यां अलग-अलग गुजरेगी। जिससे ट्रेनों की रफ्तार तेज होगी और यात्रियों के समय की बचत होगी।
ग्वालियर और धौलपुर, झांसी के बीच बढ़ेगी कनेक्टिविटी
चौथी लाइन को ग्वालियर से भी जोडा जायेगा। जिससे प्रमुख शहरों के बीच रेल यातायात सुगम होगा। नयी लाइन से झांसी, ग्वालियर, मुरैना और धौलपुर के बीच ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी। इस वक्त हर दिन ग्वालियर स्टेशन से करीब 200 के आसपास ट्रेनों का संचालन होता है। इस लाइन के बनने से नयी ट्रेनें शुरू होने का भी रास्ता खुलेगा।

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अफगानिस्तान में भूकंप से 800 लोगों की हुई मौत, 2500 से अधिक घायल कई गांव तबाह

नई दिल्ली. अफगानिस्तान के दक्षिण पूर्वी इलाके में रविवार-सोमवार की मध्य रात्रि का भूकंप के तेज झटके महसूस किये गये। एक सितम्बर 2025 की रात पूर्वी अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत में 6.0 तीव्रता का भूकंप आया है। जिससे 800 लोगों की मौत हो गयी और 2500 से अधिक लोग जख्मी हो गये। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियासाइंसेज (जीएफजेड) के मुताबिक भूकंपका केन्द्र जलालाबाद शहर से 27 किमी दूर पूर्व में था। इसकी गहराई मात्र 10 किमी थी। भूकंप से कई गांव पूरी तरह से तबाह हो गये।
अफगान के नांगरहार जान स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता नकीबुल्लाह रहीमी ने रॉयटर्स को बताया कि भूकंप के तेज झटकों के चलते कम स कम 9 लोगों की मौत हो गयी जबकि 15 घायल है। सभी घायलों का उपचार के लिये पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। भूकंप के बाद की तस्वीरें भी सामने आयी है। जिनमें साफ दिखाई दे रहा है कि अफगानिसतान में धरती हिलने के बड़ी संख्या में घर मलबे में बदल गये। भूकंप जलालाबाद से 27 किमी दूर पूर्व उत्तरपूर्व मे 19.17.34 यूटीसी (1 सितम्बर को 12.47 पूर्वान्ह आईएसटी) पर 8 किमी की गहराई पर दर्ज किया गया है। इस भूकंप से दिल्ली-एनसीआर के लोगों में दहशत हो गयी ।नोएडा में भी भूकंप महसूस किया गया है। जिसके चलते कई लोग अपने-अपने घरों से बाहर निकल आये है। हालांकि इसमें भारत में किसी भी तरह के जानमाल के नुकसान खबर नहीं है।
भूकंप क्यों और कैसे आता है?
वैज्ञानिक रूप से समझने के लिए हमें पृथ्‍वी की संरचना को समझना होगा. पृथ्‍वी टैक्टोनिक प्लेटों पर स्थित है. इसके नीचे तरल पदार्थ लावा है और इस पर टैक्टोनिक प्लेट्स तैरती रहती हैं. कई बार ये प्लेट्स आपस में टकरा जाती हैं. बार-बार टकराने से कई बार प्लेट्स के कोने मुड़ जाते हैं और ज्‍यादा दबाव पड़ने पर ये प्‍लेट्स टूटने लगती हैं. ऐसे में नीचे से निकली ऊर्जा बाहर की ओर निकलने का रास्‍ता खोजती है. जब इससे डिस्‍टर्बेंस बनता है तो इसके बाद भूकंप आता है.
कैसे मापी जाती है तीव्रता?
भूकंप को रिक्टर स्केल पर मापा जाता है. रिक्‍टर स्‍केल भूकंप की तरंगों की तीव्रता मापने का एक गणितीय पैमाना होता है, इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है. रिक्टर स्केल पर भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है. ये स्‍केल भूकंप के दौरान धरती के भीतर से निकली ऊर्जा के आधार पर तीव्रता को मापता है.

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सैर करने निकली महिला पर ब्लेड से हमला कर धमकी देकर आरोपी फरार

ग्वालियर. हजीरा थाना इलाके में इन्द्रानगर में शनिवार की शाम को एक महिला पर उसके पड़ोसी ने ब्लेड से हमला कर दिया। घटना उस वक्त हुई जब महिला अपनी देवरानी और बच्चों के साथ सैर के लिये जा रही थी। हमलावर ने ताबड़तोड ब्लेड से हमाल किया। जिसमें एक हमला महिला के गले पर और दूसरा हाथ पर लगा। घायल महिला को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।
धमकी देकर फरार हुआ आरोपी
हमले के बाद आसपास लोग इकट्ठा होने लगे तो आरोपी जान से मारने की धमकी देकर वहां से भाग गया। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायल महिला को अस्पताल पहुंचाया। उसकी शिकायत पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया। हजीरा थाना प्रभारी शिवमंगल सिंह सेंगर ने बताया कि आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। वह फिलहाल फरार है और पुलिस की टीम उसकी तलाश में दबिश दे रही है। जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

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वीरपुर का बांध हो रहा है ओवरफ्लो, पानी के निकासी के रास्ते पर अतिक्रमण

ग्वालियर. वीरपुर बांध से हनुमान बांध जाने वाले रास्ते में एक गिरवाई नाके स्थित एक गुफा से पानी वह पूरी तरह से बंद है। लेकिन आपसी राजनीतिक चलते एक पक्ष हनुमान बांध जाने वाली गुफा को खुलवाना चाहता है तो दूसरा पक्ष गुफा को बंद रखने के लिये तटस्थ है। ऐसे में जल संसाधन विभाग दो पक्षों के बीच में झूल रहा है और क्षेत्रीय नागरिक जलभराव की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसी स्थिति में प्रशासन को दखल देना चाहिये। लेकिन वह भी शांत बैठा हुआ है।

वीरपुर बांध इस बार लबालब भर गया है। इसके बाद भी कुछ लोगों यहां आये दिन कचरा डालना जारी रखे हुए हे। इसके बाद स्थानीय लोगों ने मुहित चलाई है। पहले कचरे की सफाई की और इसके साथ ही बोर्ड लगाईये। जिस पर लिखा जल बनाया नहीं जा सकता है। इसे बचाया जा सकता और इसमें कचरा नहीं डाले। इस बार बीरपुर बांध के पानी ने सभी सीमायें लांघ दी है। आसपास इलाके के अलावा हाइवे तक पानी पार कर गया है।
15 वर्षो के बाद लबालब हुआ वीरपुर बांध
लगभग 15 वर्षो के बाद वर्षा के जल से 15 फीट तक वीरपुर बांध में अभी तक एक इंच पानी नहीं है। स्थानीय लोगों ने गूहूं की फसल बोने के लिये वर्षा में जमा हुए पानी को खंती खोदकर बहा दिया है। इस बांध के कैचमेंट एरिया में गेहूं के पौधे खड़े किये हुए है।
लेकिन पानी बहाने वाले किसानों पर कार्यवाही की बजाय अधिकारियों का तर्क है कि आसपास के जलस्त्रोत जीवित होने की वजह से बांध का पानी निकल गया है। लेकिन हकीकत यह है कि जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने इस और ध्यान दिया है। तो इसके आसपास पानी भरने से इलाका बच गया। गौरतलब है कि वीरपुर बांध के आसपास इलाके में किये अतिक्रमण का नगर निगम आयुक्त ने अतिक्रमण हटाया है।

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VISM में खेल दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया,  हुआ वाॅलीबाॅल प्रतियोगिता का आयोजन

ग्वालियर। VISM ग्रुप ऑफ  स्ट्डीज़ में राष्ट्रीय खेल दिवस बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर काॅलेज लेवल वाॅली-बाॅल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में डाॅ. वीपीएस जादौन, प्राचार्य साइंस काॅलेज, विशिष्ट अतिथि डाॅ. रोजेन्द्र सिंह, पूर्व डायरेक्टर, फिजिकल एज्युकेशन, जीवाजी विश्वविद्यालय उपस्थित रहें एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के चेयरमैन डाॅ. सुनील राठौर ने की। प्रतियोगिता में नर्सिंग, पैरामेडीकल एवं फार्मेसी महाविद्यालयों की दो -दो टीमों ने भागीदारी की। जिसमें कड़े मुकाबलो के बाद नर्सिंग महाविद्यालय की दोनो टीमें फाईनल में पहुची। फाईनल मैच नर्सिंग टीम ए कप्तान हितेश सिंह राणा एवं नर्सिंग टीम बी कप्तान दुष्यन्त तिवारी के बीच खेला गया। जिसमें नर्सिंग टीम ए कप्तान हितेश सिंह राणा ने विजय प्राप्त कर गोल्ड मेडल हासिल किया।
इस मौके पर मुख्य अतिथि डाॅ. वीपीएस जादौन ने कहा खेल हमेशा खेल भावना के साथ खेले जो टीम हारी है वह हारने के बाद अपने खेल को और बेहतर बनाने की कोशिश करें। तत्पश्चात् विशिष्ट अतिथि डाॅ. रोजेन्द्र सिंह ने उपस्थित छात्र-छात्राओं को बताया कि मेजर ध्यानचंद्र जी ने अपना परचम देश के साथ -साथ बिदेशों में भी लहराया था। उन्होंने यह भी कहा कि मनुष्य को जीवन में एक घंटे प्रतिदिन खेल खेलना चाहिए जो मनुष्य अपनी दिनचर्या में खेल को शामिल करता है वह कम बीमार होता है और बह शारीरिक रूप के साथ -साथ मानसिक रूप से भी मजबूत होता है। जीवन में धन दौलत के साथ-साथ स्वास्थ्य भी एक बहुत बड़ी पूंजी है। अगर आपको स्वस्थ रहना है तो खेल एवं एक्सरसाइज को अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करना होगा। अंत में संस्थान के चेयरमैन डाॅ. सुनील राठौर ने अपने उदबोधन में कहा कि धयानचंद्र का नाम ध्यानच्रदं इसलिये पड़ा क्योकि उन्होंने चादनी रात में मेहनत करके भारत को 1928, 1932 एवं 1936 के ओलमपिक में भारत को स्वर्ण पदक जीता कर अन्तराष्ट्रीय स्तर पर हाॅकी के क्षेत्र में भारत का नाम रोशन किया। ऐसे ही आप सभी छात्र-छात्राऐं मेहनत करके अपने- अपने क्षेत्र में अपने माता-पिता एवं संस्थान के साथ-साथ देश का नाम रोशन करें। इस मौके पर संस्थान की चेयरपर्सन श्रीमती सरोज राठौर, ग्रुप निदेशक डाॅ. प्रज्ञा सिंह सहित समस्त स्टाॅफ व छात्र-छात्राऐं मौजूद रहें।

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रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव फिल्म उद्योग, निवेशक बोले -अब चम्बल का रास्ता पकडेंगे, बदलेगी चम्बल की तस्वीर, जंगल सफारी में पैर जमायेगी वेडिंग इंडस्ट्री

ग्वालियर. चम्बल की तस्वीर अब बदलने वाली है। क्योंकि ग्वालियर में आयोजित की गयी रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में आये देश विदेश के इन्वेस्टर्स को वेडिंग वेब सीरीज इंडस्ट्री और होटल एंड रिसोर्ट के लिये ग्वालियर चम्बल पसंद आया हैं चम्बल नदी, बीहड़ किनारे गांव का साफ-सुथरा वातावरण रास आ रहा है। दिल्ली की वेडिंग इंडस्ट्री के निवेशकों का कहना था कि हमें अभी वेडिंग डेस्टिनेशन के लिये केरल, राजस्थान का रूख करना पड़ता है। लेकिन चम्बल में अच्छे रिसोर्ट आ जाये तो इससे बढि़या कोई जगह नहीं होगी।
इसकी कई वजह है
डेस्टिनेशन नयी होगी और रियल फील करायेगी और साथ ही मध्यप्रदेश देश के बीच में है। ऐसे में कहीं से भी यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां की ऐतिहासिक विरासत भी खास है। यही वजह है कि रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में 35 हजार करोड़ से ज्यादा के प्रस्ताव होटल रिसोर्ट इंडस्ट्री मेंआये है। मध्यप्रदेश का यह अंचल जल्द टूरिज्म हब बनने जा रहा है।
निवेशकों को मानमंदिर पसंद आया
ग्वालियर रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में आये निवेशकों को ग्वालियर -चम्बल अंचल बेहद पसंद आया है। यहां आने-जाने वाले विजिटर इंवेस्टर्स को ग्वालियर का किला मानसिंह महल, बैजाताल यहां के हेरिटेज बिल्डिंग पसंद आयी है। चम्बल में रिवर साइटव्यू, बीहड की खामोशी भी बेहतर लगी है। वीहड के आसपास बसे गांव में वेब सीरीज की शूटिंग के लिये परफेक्ट जगह है।
चम्बल के कई गांव फिल्म स्टूडियों की तरह
कार्यक्रम में गीतकार व पटकथा लेखक पीयूष मिश्रा ने बताया है कि ग्वालियर-चंबल में बीहड़ व नदियों के आसपास के कई गांव ऐसे हैं। जैसे किसी फिल्म स्टूडियों का सेट हो। एकदम तैयार गांव है। यहां जाकर सिर्फ सेटअप लगाना है। फिल्म की शूटिंग कर सकते हैं। यही वजह है कि यहां वेब सीरीज व फिल्म की शूटिंग के लिये फिल्मी दुनिया के लोग आ रहे है।
350 फिल्म की शूटिंग, ग्वालियर में 39 फिल्में बनीं
रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में बताया गया कि मध्यप्रदेश इस समय टूरिज्म हब बन गया है।
मध्य प्रदेश में अभी तक 350 वेब सीरीज व मूवी की शूटिंग हो चुकी है।
39 फिल्म व वेब सीरीज की शूटिंग ग्वालियर में हो चुकी है।
चर्चित निर्देशक प्रकाश झा की एक मूवी की शूटिंग मुरैना में चल रही है।
मध्यप्रदेश में पर्यटन की बेहद संभावनाएं
टूरिज्म कॉन्क्लेव में आए फिक्की नेशनल टूरिज्म एंड कल्चर कमेटी के सदस्य असद लालजी ने कहा-मैं काफी रोमांचित हूं, यहां पर्यटन के क्षेत्र में बहुत संभावनाएं हैं। मध्य प्रदेश देश के सेंटर में है। इसलिए यहां आसानी से सभी जगह से आया जा सकता है। यहां हेरिटेज विरासत के अलावा कान्हा वाइल्ड लाइफ जैसा विश्व विख्यात नेशनल पार्क हैं। इसके साथ ही ग्वालियर-चंबल में टूरिज्म की बहुत सारी संभावनाएं देख रहा हूं। फ्यूचर में मध्य प्रदेश टूरिज्म की एक बड़ी डेस्टिनेशन बनकर उभर रही है और उभरने वाली है।

 

 

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मध्यप्रदेश को समझे बिना भारत की संस्कृति को नहीं जान सकते: डॉ. मंजुल

डॉ. शांतिदेव सिसोदिया द्वारा लिखित सनातन धर्म: इंडियन नॉलेज सिस्टम पुस्तक का विमोचन
ग्वालियर। मध्यप्रदेश को समझे बिना भारत की संस्कृति को नहीं जाना जा सकता। क्योंकि किसी भी प्रकार के ऐतिहासिक और पुरातात्विक विकास को समझने के लिए भारत के हृदय प्रदेश को समझना आवश्यक है। यह बात भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. संजय कुमार मंजुल ने जीवाजी विश्वविद्यालय के गालव सभागार में कही। वह जीवाजी विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययनशाला, जनजातीय विकास एवं अध्ययन केन्द्र और प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-उषा) के संयुक्त तत्वावधान में मध्यप्रदेश के विशेष संदर्भ में पुरातत्व में नवीन प्रवृत्तियां विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। अध्यक्षता जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य ने की। मुख्य वक्ता सेवानिवृत्त अधीक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण डॉ. नारायण व्यास, जेयू के कुलसचिव प्रो. राकेश कुशवाह एवं आयोजन सचिव डॉ. शांतिदेव सिसोदिया मंचासीन रहे।
मुख्य अतिथि डॉ. मंजुल ने पुरातत्व में शब्दावली संबंधी समस्याओं के समाधान पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मानव-पशु प्रव्रजन तथा सांस्कृतिक संबंधों के अध्ययन के लिए आधुनिक तकनीक का विशेष रूप से उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने एएसआई के शोधों का उल्लेख करते हुए कहा कि कि चाल्कोलिथिक काल में रथों के प्रमाण मिले हैं। इसके लिएमध्यप्रदेश की शैलचित्र धरोहर का पुन: सर्वेक्षण आवश्यक है, ताकि इतिहास की खाइयों को पाटा जा सकें। इसके साथ ही उत्खनन और उसके विश्लेषण के लिए बहुविषयक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। आयोजन सचिव डॉ. शांतिदेव सिसोदिया ने संगोष्ठी की अवधारण एवं उद्देश्य पर प्रकाश डाला।
मुख्य वक्ता डॉ. नारायण व्यास ने सुप्रसिद्ध पुरातत्वविद् प्रो. विष्णु वाकणकर के साथ किए गए क्षेत्रीय सर्वेक्षण और उत्खनन कार्यों के अनुभव साझा किए। उन्होंने भीमबेटका, कठोतिया तथा रायसेन के कई स्थलों का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि शैलचित्रों के अध्ययन और उनके सही अर्थ निकालने की चुनौती आज की पीढ़ी के सामने भी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि पर्यटन और पारिस्थितिकी को पुरातत्व से जोड़कर नए अवसर निर्मित किए जा सकते हैं। अध्यक्षता कर रहे कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य कहा कि देश बदल रहा है और यह समय परिवर्तन का है। यदि हम इस समय नहीं बदले तो कुछ भी हासिल नहीं कर पाएंगे। उन्होंने रामसेतु पुल की पुष्टि उपग्रह चित्रों से होने का उदाहरण देते हुए कहा कि नई तकनीक हमेशा नई जानकारियों को उजागर करने में सहायक होती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत की युवा पीढ़ी विश्व के लिए नए क्षितिज लेकर आएगी। इस अवसर पर डॉ. शांतिदेव सिसोदिया द्वारा लिखित सनातन धर्म: इंडियन नॉलेज सिस्टम पुस्तक का विमोचन किया गया। साथ ही हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला एवं मगध विश्वविद्यालय गया के साथ एमओयू साइन किये गए। संगोष्ठी में 15 राज्यों के 70 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. समीक्षा भदौरिया ने किया। इस मौके पर कृतिका प्रधान, आशीष जैन, अमिता खरे, राहुल कुमार, राहुल बरैया, पूर्णिमा पाल, प्रिया सुमन, रचना पाल, वैशाली गुर्जर, डॉ. दीप्ती राठौर, मुक्ता जैन, आनंद कुशवाह, अमित यादव, गंगौत्री मिश्रा सहित विश्वविद्यालय प्राध्यापक, अधिकारी व छात्र छात्राएं मौजूद थे।
दो तकनीकी सत्र में 45 शोधपत्र पढ़े
सेमीनार में दो तकनीकी सत्र हुए। पहले सत्र में प्रो. आलोक श्रोत्रिय अमरकंटक विवि एवं प्रो. एमसी श्रीवास्तव अवधेश प्रताप विवि रीवा ने अध्यक्षता एवं सह अध्यक्षता की। इस सत्र में अर्चना शर्मा, विजय कुमार, स्मिता कुमार, शंभूनाथ यादव, आकाश गेडाम, आशीष शेंडे सहित 30 लोगों ने पेपर प्रस्तुत किए। वहीं दूसरे सत्र में डॉ. चेतराम गर्ग निदेशक डॉ. रामसिंह इतिहास शोध संस्थान हिमाचल प्रदेश एवं प्रो. अवकाश जाधव ने विभागध्यक्ष संत जेवियर कॉलेज मुंबई ने अध्यक्षता एवं सह अध्यक्षता की। इस सत्र में 15 शोधपत्रों पढ़े गए।

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