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व्यापारी से 5 लाख रूपये की लूट, व्यापारी को 10 फीट तक घसीटा, घायल हुआ व्यापारी

ग्वालियर. मंगलवार की रात बालाजी नमकीन के एक डीलर से बाइक सवार बदमाश नगद कैश से भरा बैग लूट कर मौके से फरार हो गये। बदमाशों ने व्यापारी पर उस समय झपट्टा मारा, जब वह कलेक्शन का वापिस लौट रहे थे। व्यापारी ने बैग नहीं छोड़ा तो बदमाश उसे सड़क पर 10 फीट तक घसीटते हुए ले गये। जिससे वह घायल हो गया। व्यापारी ने बताया है कि बैग में 5 लाख रूपये थे। जबकि पुलिस ने 3,81,231 लाख रूपये होने की बात कहीं है।

सीसीटीवी फुटेज में व्यापारी अपने कर्मचारी के साथ निकलता हुआ।
घटना के बाद बाइक सवार बदमाशों को कुछ राहगीरों ने रोकने का प्रयास किया। जिस पर वह गोलियां चलाकर दहशत फैलाते हुए फरार गये। घटना महाराजपुरा थाना स्थित पटरी रोड की है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और नाकाबंदी कर लुटेरों की तलाश शुरू कर दी है।
व्यापारी को लुटेरों 10 फीट तक घसीटा
शहर के भगतसिंह नगर निवासी 60 वर्षीय राममोहन सेठ व्यापारी है। इस समय बालाजी नमकीन के डीलर है। शताब्दीपुर के टाइगर चौक परउनका बालाजी नमकीन का गोदाम है। मंगलवार की रात वह गोदाम से कलेक्शन के 5 लाख रूपये एक बैग में रखकर कर्मचारी रमन रावत के साथ निकले थे। जब वह पटरी रोड स्थित सदगुरू किराना स्टोर के सामने पहुंचे। तभी ब्रेकर आने पर कर्मचारी ने बाइक धीमी की। इस बीच 2 बाइक पर 3 नकाबपोश बदमाशों ने झपट्टा मारकर बैग छीनने की कोशिश की। व्यापारी ने बेग बचाने के लिये पकड़ मजबूत की तो वह बाइक से गिर गये और 10 फीट तक घिसटते चले गये। जिससे वह घायल हो गये। इस दौरान उनकी पकड़़ ढीली पड़ते ही बदमाश बैग छीनकर फरार हो गये।
पुलिस ने की नाकेबंदी, सफलता नहीं मिली
मामले का पता चलते ही महाराजपुरा थाना प्रभारी धर्मेन्द्र सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने बदमाशों की तलाश में शहर के साथ ही हाईवे पर नाकाबंदी कराई, लेकिन बदमाश हाथ नहीं आए। पुलिस अब CCTV कैमरे खंगाल रही है। जिससे बदमाशों को कोई सुराग लग सके।
लूट का तरीका मुरैना गैंग जैसा
पिछले कुछ समय में शहर में जितनी भी लूट हुई हैं। बदमाशों का कनेक्शन पड़ोसी जिले मुरैना से निकला है। यह गैंग भी पुलिस को मुरैना के होने के सबूत दे रही है। मुरैना की गैंग जब भी वारदात करती है तो फायरिंग जरूर करती है। पुलिस को सबूत तलाश रही है।
राहगीरों ने लुटेरों को रोकना चाहा तो फायरिंग करते हुए भागे
जब बदमाश भाग रहे थे तो कुछ अन्य बाइक सवार और राहगीरों ने उनको रोकने का प्रयास किया। जिस पर बदमाश कट्टे से गोलियां चलाते हुए भाग निकले। जिस तरह से बदमाशों ने गोलियां चलाई, आसपास के लोग घबरा गए और दहशत में आ गए। बदमाश लूट के बाद पटरी रोड से धर्मवीर पेट्रोल पंप की तरफ भागे हैं।

 

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नगरनिगम की फर्जी रसीद से2 दुकानदरों से की ठगी, फ्लैट और दुकान के नाम 66 लाख रूपये की ठगी

ग्वालियर. दो ठगों ने सरकारी दुकान और फ्लैट आवंटन के नाम पर 66 लाख रूपये की धोखाधड़ी की है। पीडि़तों ने मंगलवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय की सुनवाई में पहुंचकर शिकायती आवेदन देखकर न्याय की गुहार पुलिस अधिकारियों से लगाई है।
पुलिस अधिकारियों को किराना संचालक दशरथ सिंह राजपूत पुत्र लालसिंह राजपूत निवासी तिकोनिया टांगा ने बताया है कि वर्ष 2021 में जगत नारायण उर्फ बल्लू पाठक से उसकी मुलाकात हुई थी। उसने बताया था कि उसका एक दोस्त संतोष बाथम है। मैं और उसके नगरनिगम के अधिकारियों से बहुत अच्छी जान पहचान है। उसने बताया है कि प्रधानमंत्री आवास एवं शासकीय प्लॉट हजीरा मल्लगढ़ा पर बन आईएसबीटी अंर्तराष्ट्रीय बस अड्डा में दुकानें आवंटन करवा देगा। उसे दौरान उसने एक फर्जी नक्शा भी दिखाया था।
क्या है मामला
इससे पहले दशरथ सिंह को बल्लू पाठक एक सरकारी फ्लैट दिलवा चुका था। इसलिए वह उसपर विश्वास करके उसके झूठे जाल में फंस गया और दुकानें-फ्लैट के लिए बल्लू और संतोष को करीब 48 लाख रुपए ऑनलाइन ट्रांजैक्शन व नगदी के रूप में दे दिए थे, जिसके बदले बल्लू ने उसे कुछ नगर निगम की फर्जी रसीदे थमा थी। दशरथ 8 महीने पहले अपनी आवंटित कराई गई दुकान और फ्लैट पर कब्जा लेने पहुंचा तो वह मौजूद अधिकारी ने बताया कि उसके नाम से यहां पर कोई भी दुकान या फ्लैट आवंटित नहीं कराए गए है और जो रसीदें उसके पास हैँ वह फर्जी हैँ।
इतना ही नहीं दोनों आरोपियों ने दो अन्य लोगों से भी धोखाधड़ी की है।जिसमें जगदीश सिंह और एक अन्य व्यक्ति से 10-10 लाख रुपए भी ठगे हैं। पीड़ित पिछले 8 महीने से पुलिस थाने के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन अभी तक पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है। साथ ही दोनों आरोपी अपने घर से फरार हो गए हैं।

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सिंधिया राजघराने के सरदार आंग्रे की पोती की शादी का विवाद का सुप्रीम कोर्ट में हुआ समझौता, इंदौर घराने से जुड़े हैं अर्जुन काक पत्नी को देंगे 2.25 करोड़ रूपये

सुप्रीम कोर्ट - Dainik Bhaskar

ग्वालियर. सिंधिया राजघराने से सरदार आंग्रे की पोत्री कात्यायनी आंग्रे और इन्दौर राजघराने से संबंध रखने वाले अर्जुन काक के बीच 7 वर्षो से चले आ रहे विवाह संबंध विवाद का पटाक्षेप हो गया है। 29 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में दोनोंु ने आपसी सहमति से तलाक के मामले को सुलझा लिया है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरदार आंग्रे की पोत्री अर्जुन काक द्वारा 2.56 करोड़ रूपये 30 नवम्बर तक देने के लिये आदेश दिये है। एक करोड़ रूपये का ड्राफ्ट अर्जुन की तरफ से 26 अगस्त को दे दिया है। इसके साथही न्यायालय ने कहा है कि अर्जुन, आंग्रे परिवार की तरफ से दिये सभी उपहार वापिस करेंगे। जबकि अर्जुन की तरफ से दयिे गये उपहार कात्यायनी अपने पास ही रखेंगी। इसके बाद दोनों पक्ष मेंकोई सबंध नहीं रहेगा।
2 साल बाद हाईकोर्ट निरस्त कया विवाह प्रमाण पत्र
वर्ष 2019 में अर्जुन ने हाईकोर्ट में याचका दायर की और ग्वालियर नगरनगम द्वारा जारी विवाह प्रमाण पत्र निरस्त करने की मांग की। 2019 में दायर याचिका मार्च 2021 में स्वीकार की गयी। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अब माना कि अक्षम अधिकारी ने विवाह प्रमाण पत्र जारी किया। इसी आधार पर प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया गया।
रॉल्स रॉयस कार मांगी तो दर्ज हुआ दहेज एक्ट का केस
ग्वालियर के विश्वविद्यालय थाने में अर्जुनकी तरफ से धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराने के 2 साल के बाद 2 मार्च 2021 को सरदार आंग्रे की पोत्री कात्यायनी की तरफ से ग्वालियर के महिला थाने मे ंदहेज प्रताड़ना की रिपोर्ट दर्ज कराई गयी। इसमें आरोप लगाया कि पति अर्जुन काक और उसके परिजन रॉल्स रॉयस कार व मुंबई में फ्लैट की मांग कर प्रताडि़त कर रहे हैं। जिस पर महिला थाने में मामला दर्ज हो गया और बाद में अर्जुन की तरफ से न्यायालय में याचिका पर हाईकोर्ट ने माना कि जो महिला शादी के महज कुछ माह बाद तलाक मांग रही है। वह 2021 में दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज करवा रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस थाना विश्वविद्यालय में दर्ज धोखाधड़ी की एफआईआर का काउंटर करने के लिये दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया गया है।
ऐसे समझिए पूरा विवाद का पूरा मामला
ग्वालियर के सिंधिया राजघराने के सरदार रहे आंग्रे की पोत्री कात्यायनी पुत्र तुलाजीराव आंग्रे की शादी साल 2018 में इंदौर के अर्जुन काक (धार कोठी वाले) के साथ तय हुई थी। अर्जुन के पिता अनिल काक रिटायर्ड कर्नल हैं, जबकि मां मंगेश काक का संबंध इंदौर राजघराने से है। यही कारण है कि यह शादी हाई प्रोफाइल मानी जा रही थी।
18 अप्रैल 2018 को ऋषिकेश उत्तराखंड में शादी होना बताया गया था। ग्वालियर के राजघराने के सरदार आंग्रे के परिवार और इंदौर घराने से जुड़े परिवार के बीच विवाद की शुरुआत साल 2019 में हुई थी।
अर्जुन काक ने ग्वालियर के पुलिस थाना विश्वविद्यालय में 16 नवंबर 2019 को तुलाजीराव आंग्रे (सरदार आंग्रे के बेटे), पौत्री कात्यायनी समेत आठ लोगों के खिलाफ फर्जी विवाह प्रमाण पत्र तैयार कराने का आरोप लगाया।
FIR में बताया गया कि ग्वालियर नगर निगम ने फर्जी तरीके से प्रमाण पत्र जारी किया गया, जिसके अनुसार अर्जुन और कात्यायनी का 18 अप्रैल 2018 को ग्वालियर में विवाह हुआ है।
हाईकोर्ट में मध्यस्थता से नहीं हो सका था समझौता
इससे पहले भी अगस्त 2023 में मध्यस्थता से यह मामला सुलझाने का प्रयास किया गया था वह विफल रहा था। कोर्ट ने कहा था कि मराठा सरदार आंग्रे की पौत्री कात्यायनी और इंदौर के अर्जुन काक के बीच चल रहे विवाह के विवाद को मध्यस्थता से सुलझाने के रास्ते खत्म हो गए। हाईकोर्ट में एकल पीठ ने मध्यस्थता का अवसर समाप्त करते हुए वैवाहिक प्रकरण को सक्षम बैंच में भेजने का आदेश दिया था।मध्यस्थता के दौरान पति सभी विवाद खत्म कर पत्नी को डेढ़ लाख रुपए प्रति महीना देने को तैयार था, लेकिन अंतिम दौर की बातचीत में पत्नी ने स्थायी भरण पोषण के रूप में 36 करोड़ नकद व संपत्ति से हिस्सा भी मांगा था। इससे दोनों के बीच सुलह का रास्ता खत्म हो गया। इस केस को मध्यस्थता से न सुलझाते हुए सक्षम न्यायालय में सुना जाना तय हुआ था।

 

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जन उत्थान न्यास करेगा 7 सितम्बर को 2500 शिक्षक-शिक्षिकाओं का सम्मान

ग्वालियर। शहर की अग्रणी सामाजिक संस्था जन उत्थान न्यास के तत्वाधान में 7 सितम्बर को शाम 4 बजे से जीवाजी विश्वविद्यालय परिसर स्थित अटल सभागार में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी शिक्षक-शिक्षिकाओं का सम्मान समारोह आयोजित किया जा रहा है। सम्मान में शाॅल-श्रीफल, स्मृति चिंह के साथ प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। जन उत्थान न्यास के अध्यक्ष एवं विधायक डाॅ. सतीश सिकरवार ने पत्रकारों को दी।
न्यास के अध्यक्ष एवं विधायक डाॅ. सिकरवार ने कहा कि जन उत्थान न्यास संस्था द्वारा वर्ष भर सामाजिक हितार्थ के कार्यक्रम बढ़-चढ़ कर करती है। गरीबों की सेवा के लिए तत्पर यह संस्था हर वर्ष शिक्षक दिवस सप्ताह के तहत शिक्षक-शिक्षिका सम्मान समारोह भव्य रूप से आयोजित करती है। कार्यक्रम समापन के बाद सहभोज भी रखा गया है। पत्रकार वार्ता में कार्यक्रम संयोजक संजय कठठ्ल, चेम्‍बर ऑफ कॉमर्स के उपाध्‍यक्ष राकेश अग्रवाल, उपाध्यक्ष विनोद जैन, कोषाध्यक्ष अवध सिंह धाकरे, सचिव अवधेश कौरव एवं सुरेश प्रजापति मौजूद रहे।

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प्रतिमाओं के विसर्जन के लिये सागरताल के सामने तैयार हो रहा है विशाल अस्थायी जलाशय

श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिये होगी पुख्ता बेरीकेटिंग और संयुक्त दल रहेगा तैनात
ग्वालियर – भगवान श्रीगणेश की बड़ी व छोटी प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए जिला प्रशासन व नगर निगम द्वारा ग्वालियर शहर में सागरताल के सामने वैकल्पिक जलाशय तैयार कराए जा रहे हैं। कलेक्टर रुचिका चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह एवं नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय ने संबंधित अधिकारियों के साथ मंगलवार को अस्थायी जलाशयों का जायजा लिया। सागरताल के सामने बनाए गए अस्थायी जलाशयों में बड़ी प्रतिमाओं एवं छोटी प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए अलग-अलग व्यवस्था रहेगी। छोटी आकार की श्री गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए हर साल की तरह कटोरा ताल के कोने पर भी एक छोटा कुंड तैयार किया गया है।
सागरताल के सामने की मुख्य सड़क से वैकल्पिक जलाशय तक पर्याप्त चौड़ाई में बड़ी एवं छोटी प्रतिमाओं को ले जाने के लिये गिट्टीयुक्त अलग-अलग पहुंचमार्ग तैयार कराएँ। पहुँचमार्ग से लेकर विसर्जन स्थल तक पुख्ता बेरीकेटिंग भी कराई जाए। विसर्जन स्थल पर प्रतिमाओं की पूजा करने के लिये मजबूत प्लेटफॉर्म बनाने के निर्देश भी उन्होंने दिए। साथ ही कहा अस्थायी जलाशय सहित सम्पूर्ण पहुँच मार्ग पर रोशनी, माइक व टेंट की भी पुख्ता व्यवस्था की जाए। वैकल्पिक जलाशय के पास पर्याप्त संख्या में अस्थायी शौचालय व पार्किंग की व्यवस्था करने के निर्देश भी उन्होंने दिए। विसर्जन सम्पन्न होने तक निर्वाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये भी कहा। इस अवसर पर नगर निगम के अपर आयुक्त प्रदीप तोमर, एसडीएम ग्वालियर सिटी प्रदीप कुमार शर्मा व लोक निर्माण, विद्युत वितरण कंपनी तथा नगर निगम सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
विसर्जन कराने वाले केवट समुदाय के वॉलेन्टियर्स की सूची बनाएं
प्रतिमाओं का पारंपरिक रूप से विसर्जन कराने वाले केवट समुदाय के वॉलेन्टियर्स को सूचीबद्ध करने के निर्देश भी कलेक्टर एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने दिए। यह सुनिश्चित करें कि कोई भी वॉलेन्टियर विसर्जन के दौरान नशे में न रहे। यदि नशे की हालत में कोई वॉलेन्टियर पकड़ा गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी। कलेक्टर एवं एसएसपी ने बड़ी व छोटी प्रतिमाओं के विसर्जन का शुल्क भी तय करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा प्रतिमाओं का विसर्जन कराने के लिए किसी से भी अनावश्यक धनराशि की मांग न की जाए।
गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन मार्गों को दुरुस्त करने पर जोर
चलित जलाशय के निरीक्षण के बाद कलेक्टर, एसएसपी एवं नगर निगम आयुक्त ने सागरताल-बहोड़ापुर रोड का जायजा भी लिया। उन्होंने बहोड़ापुर रोड सहित गणेश प्रतिमा विसर्जन से संबंधित अन्य मार्गों पर अभियान बतौर पेचवर्क कराकर मार्गों को सुगम बनाने के निर्देश दिए।
चलित जलाशय की व्यवस्था
जन सहयोग से मुख्य मार्गों पर वाहनों के माध्यम से चलित जलाशय भी चलाए जाने की व्यवस्था भी हर साल की तरह की जा रही है। इन चलित जलाशयों के माध्यम से भगवान गणेश जी की छोटी प्रतिमाओं का विसर्जन किया जा सकेगा। यह व्यवस्था उन श्रद्धालुओं के लिए है जो विसर्जन स्थल पर नहीं पहुंच सकते हैं या जो अपने घर के समीप विसर्जन करना चाहते हैं।

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बंद कमरे में बीएल संतोष भाजपा नेताओं से मिले, नरोत्तम, वीडी और रीति पाठक से की चर्चा, भाजपा कार्यालय में हुई नारेबाजी

भोपाल. भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएस संतोष ने सोमवार को भोपाल में सरकार और संगठन को लेकर कई मंत्रियों, विधायकों और नेताओं से बंद कमरे में मुलाकात कर फीडबैक लिया है। सोमवार को सीएम मोहन यादव से मुलाकात के साथ-साथ संघ और पार्टी बैठकों में भी उन्होंने भाग लिया। इसी बची उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्डहाईवे प्रोजेक्ट से नाराज लगभग 50 कियसप भी भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंच गये और बीएल संतोष से मुलाकात की है। लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। मुलाकात नहीं होने से नाराज किसानों ने पार्टी कार्यालय में ही एमपीआरडीसी मुर्दाबाद और किसान एकता जिन्दाबाद के नारे लगाये। जिस पर पार्टी पदाधिकारियों ने नाराजगी जताई औरउन्हें संयम बरतने की सलाह दी है।
बंद कमरे में नेता और विधायकों से की मुलाकात
सेवा पखबाडे की बैठक के बाद बीएल संतोष ने पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा से चर्चा कीहै। इसके बाद सीधी विधायक रीति पाठक, भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा से अलग-अलग से चर्चा की है। बीएल संतोष ने आरएसएस और किसान संघ के पदाधिकारियों से भी मुलाकात की। सूत्र बताते हैं कि इस चर्चा के दौरान उज्जैन सिंहस्थ इलाके में जमीनों के स्थाई अधिग्रहण के मुद्दे पर जानकारी ली है।
ये नेता भी पहुंचे लेकिन, नहीं हो पाई मुलाकात
बीएल संतोष से मिलने के लिए आलोट विधायक डॉ चिंतामणि मालवीय, शहपुरा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे, छिंदवाड़ा सांसद बंटी साहू भी प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंचे, लेकिन मुलाकात नहीं हो पाई।
ओमप्रकाश धुर्वे बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के पास स्थानीय मुद्दों के दस्तावेज लेकर पहुंचे थे। वहीं, चिंतामणि मालवीय की करीब 40 मिनट तक इंतजार करने के बाद भी बीएल संतोष से मुलाकात नहीं हो पाई। शिवपुरी विधायक देवेन्द्र जैन, मंत्री दिलीप जायसवाल, पशुपालन मंत्री लखन पटेल भी बीजेपी ऑफिस पहुंचे।
उज्जैन के किसानों ने बीजेपी ऑफिस में की नारेबाजी
बीएल संतोष जब नेताओं, विधायकों से मुलाकात कर रहे थे। उसी दौरान उज्जैन से करीब 50 किसान भी प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंच गए। किसानों की बीएल संतोष से मुलाकात नहीं हो पाई। उन्होंने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को अपनी समस्या बताई।किसानों ने प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात के बाद बीजेपी ऑफिस के हॉल में ही नारेबाजी शुरू कर दी। उन्होंने कहा- किसान एकता जिंदाबाद, एमपीआरडीसी मुर्दाबाद। इस पर प्रदेश महामंत्री और विधायक भगवानदास सबनानी ने आपत्ति जताई और कहा कि आपकी प्रदेश अध्यक्ष जी से चर्चा हो गई है तो पार्टी के दफ्तर में नारेबाजी करना ठीक नहीं।

 

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UPS पेंशन को लेकर राज्य भी असमंजस में है, पेंशन वाले कॉर्पस फंड पर केन्द्र-राज्य में किसका है हक

भोपाल. यूनिफाड पेंशन स्कीम (यूपीएस) को लेकर कर्मचारियों क साथ राज्य सरकारें भी असमंजस में है। सोमवार को पेंशन फंड रेग्युलेटरी एंड डवलपमेंट (पीएफआरडीए) की बैठक में कई राज्यों ने यह सवाल उठाया है कि 8.50 हिस्सेदाी वाले कॉर्पस फंड पर केन्द्र राज्यमें से किसका अधिकार होगा और प्रबंधन कौन करेगा। क्योंकि यूपीएस की नियमावली में स्पष्ट जिक्र नहीं है। इस संबंध में राज्य सरकार पहलेभी 2 -3 बार पीएफआरडीएको पूछ चुकी है। यही वह हिस्सा जिससे कर्मचारियों को 50प्रतिशत पेंशन की गारंटी दी जानी है। दूसरी बड़ी परेशानी यह है कि कॉर्पस फंड में जो 4.5 हिस्सा जमा करना है। उसकी व्यवस्था कैसे होगी। मप्र से अपर संचालक पुष्पलता शेखर सहित वित्त विभाग के अन्य अधिकारी वीसी से जुड़े।
कॉर्पस फंड में क्या अंतर है?
NPS  : 1 लाख रुपए वेतन पर कर्मचारी (10%) और सरकार (14%) मिलकर 24 हजार रुपए हर महीने कार्पस फंड में डालते हैं। लंबे सेवाकाल में यह राशि ब्याज मिलाकर करीब 1 करोड़ तक पहुंच सकती है। रिटायरमेंट पर 50-60 हजार रु. मासिक पेंशन मिल सकती है।
UPS  : सरकार का योगदान 10% होगा, 8.50% अलग से पेंशन पूल में जाएगा। इससे सेवाकाल के अंत में कर्मचारी का कॉर्पस सिर्फ 64 लाख रुपए तक रह जाता है। इससे पेंशन तो गारंटीशुदा मिलेगी, पर रकम कम होगी।
एनपीएस में कर्मचारी व पत्नी की मृत्यु के बाद कॉर्पस राशि आश्रितों को मिलती है। यूपीएस में स्थिति स्पष्ट नहीं है।
राज्यों की उलझन का ये कारण भी… यूपीएस लागू करने पर मप्र सरकार को हर साल 1750 करोड़ अतिरिक्त खर्च करने होंगे
NPS… मप्र में करीब 4.50 लाख अफसर-कर्मचारी एनपीएस (न्यू पेंशन स्कीम) के तहत हैं। अभी हर साल करीब 10 हजार करोड़ रुपए एनपीएस में जमा होते हैं। इसमें कर्मचारी की 10% हिस्सेदारी (4500 करोड़ रुपए) और सरकार की 14% हिस्सेदारी (5500 करोड़ रुपए) कर्मचारियों के व्यक्तिगत खाते में जाती है।
वह 100% राशि अपनी पसंद के फंड मैनेजर के पास निवेश कर सकते हैं, बाकी आधा एनपीएस ट्रस्ट मैनेज करता है। रिटायरमेंट पर कर्मचारी इस कॉर्पस में से 60% राशि निकाल सकता है, 40% से एन्युटी खरीदकर पेंशन ले सकता है।
UPS... इसमें कर्मचारी का योगदान 10% रहेगा, पर सरकार का योगदान घटकर 10% कर दिया गया है। हालांकि सरकार 8.50% राशि अलग से पेंशन पूल में डालेगी। यानी कुल मिलाकर 28.50% जमा होगा।
इस पेंशन पूल से कर्मचारियों को 50% पेंशन की गारंटी दी जाएगी। लेकिन यह 8.50% हिस्सा कर्मचारी के खाते में नहीं आएगा, उस पर हक सिर्फ सरकार का रहेगा। पर किस सरकार का रहेगा, यह स्पष्ट नहीं।
यूपीएस लागू करने पर राज्य सरकार को हर साल 1750 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च करना होगा।
यह अतिरिक्त राशि कहां जमा होगी और इसका प्रबंधन कैसे होगा, इस पर असमंजस है। प्रदेश में इस मुद्दे पर अब तक सिर्फ एक मीटिंग हुई है।

 

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एलीवेटेड रोड के कार्य में तेजी लाएं, SDM को निर्माण में बाधा बन रहे अतिक्रमण हटाएं – कलेक्टर

ग्वालियर एलीवेटेड रोड के दोनों चरणों के काम में तेजी लाएं। सतत संपर्क कर एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) से जहाँ-जहाँ जरूरत है वहाँ निर्माण की अनुमतियां प्राप्त करें। पर्याप्त मशीनरी व संसाधन लगाएं, इसमें कोई ढ़िलाई नहीं होना चाहिए। यह निर्देश कलेक्टर रुचिका चौहान ने एलीवेटेड रोड की समीक्षा के दौरान लोक निर्माण विभाग (सेतु) के अधिकारियों को दिए।
बैठक में कार्यपालन यंत्री सेतु जोगिंदर सिंह यादव ने बैठक में जानकारी दी कि इस साल हुई अत्यधिक बारिश व कुछ स्थानों पर एएसआई की अनुमति मिलने में देरी होने से एलीवेटेड रोड के प्रथम चरण का काम प्रभावित हुआ है। इस वजह से प्रथम चरण का काम अब अगले साल जून माह तक पूर्ण हो पायेगा। अनुबंध के अनुसार यह काम 17 फरवरी तक पूरा होना था।
एसडीएम झांसी रोड को निर्देश दिए कि बरसात समाप्त होते ही एलीवेटेड रोड के प्रथम चरण के निर्माण में रानीपुरा क्षेत्र में बाधा बन रहे अतिक्रमण हटवाए जाएं। एलीवेटेड रोड के द्वितीय चरण से संबंधित जमीन अधिग्रहण के प्रस्ताव निर्धारित प्रपत्र में जल्द से जल्द उपलब्ध कराएं।
एलीवेटेड रोड के निर्माण से शहरवासियों को सड़क आवागमन में दिक्कत नहीं होना चाहिए। निर्माण के दौरान धूल व अन्य निर्माण सामग्री से लोगों को तकलीफ न हो, इसलिये महानगरों में बनाई जाने वाली मेट्रो रेल की तर्ज पर सड़क के दोनों ओर ढककर निर्माण कार्य कराया जाए।
बैठक में कार्यपालन यंत्री सेतु ने बताया कि एलीवेटेड रोड के प्रथम चरण का काम लगभग 70 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। प्रथम चरण का कार्य लगभग 447 करोड रूपए की लागत से स्वीकृत है। इसमें से लगभग 308 करोड़ रूपए की राशि खर्च हो चुकी है। प्रथम चरण का निर्माण स्वर्ण रेखा नदी पर ट्रिपल आईटीएम संस्थान से महारानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा तक लगभग 10 किमी लम्बाई में किया जा रहा है। प्रथम चरण में 13 लूप बनाए जा रहे हैं। इसी तरह द्वितीय चरण के लिये लगभग 926 करोड 21 लाख रूपए स्वीकृत हुए हैं। अनुबंधित 700 करोड़ की राशि में से लगभग 69 करोड रूपए की राशि खर्च की जा चुकी है। द्वितीय चरण का लगभग 18 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। द्वितीय चरण में 12 लूप बनाए जा रहे हैं।
बैठक में एसडीएम झांसी रोड अतुल सिंह, भू-अर्जन अधिकारी एवं एसडीएम ग्वालियर ग्रामीण सूर्यकांत त्रिपाठी, कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग (सेतु) जोगिंदर सिंह व अनुविभागीय अधिकारी सेतु प्रबल सिसोदिया सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद थे।
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पासपोर्ट कार्यालय के लिये भी ठाठीपुर पुनर्घनत्वीकरण ऑफिस कॉम्प्लेक्स में जगह दिलाएँ 

ग्वालियर – ठाठीपुर पुनर्घनत्वीकरण परियोजना के तहत बनाए गए ऑफिस कॉम्प्लेक्स में पासपोर्ट कार्यालय के लिये भी स्थान उपलब्ध कराएं। साथ ही ऑफिस कॉम्प्लेक्स में अन्य कार्यालयों के संचालन के लिये संबंधित एसडीएम की अध्यक्षता में मैनेजमेंट कमेटी भी गठित करें। यह निर्देश कलेक्टर रुचिका चौहान ने गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल (हाउसिंग बोर्ड) के अधिकारियों को दिए। उन्होंने ग्वालियर में ठाठीपुर पुनर्घनत्वीकरण परियोजनाओं के दोनों चरणों सहित हाउसिंग बोर्ड द्वारा ग्वालियर में निर्माणाधीन व प्रस्तावित योजनाओं की सोमवार को विस्तार से समीक्षा की, निर्देश दिए कि सभी आवासीय परियोजनाओं का काम तेजी से जारी रखें। साथ ही कहा जिला प्रशासन द्वारा परियोजनाओं के निर्माण में यदि कोई बाधा है तो उसे तत्परता से दूर कराया जायेगा।
निर्माणाधीन न्यू टाउनशिप ठाठीपुर फेज-1 व 2 क्षेत्र में सघन वृक्षारोपण कराएं। यहाँ से शिफ्ट किए गए पेड़ों के एवज में शहर की पहाड़ियों व अन्य जगहों पर सघन वृक्षारोपण कराएं। उन्होंने ठाठीपुर क्षेत्र से ट्रांसप्लांट किए गए वृक्षों की स्थिति के बारे में भी जानकारी ली। हाउसिंग बोर्ड की सभी आवासीय परियोजनाओं के पार्कों, सड़कों के किनारे एवं अन्य उपलब्ध स्थान पर सघन वृक्षारोपण कराया जाए।
ट्रांसप्लांट वाले अधिकांश पेड़  रोपे गए 4090 पौधे पेड़ बनने की ओर अग्रसर 
हाउसिंग बोर्ड के कार्यपालन यंत्री हरीश श्रीवास्तव ने बैठक में जानकारी दी कि ठाठीपुर क्षेत्र के 256 पेड़ों का ट्रांसप्लांटेशन ओहदपुर पहाड़ी पर किया गया था। इनमें से लगभग 70 प्रशि श त पेड़ अच्छी हालत में हैं। इसी तरह रमौआ क्षेत्र में 183 पेड़ों का ट्रांसप्लांटेशन किया गया था। उनमें से 81 प्रतिशत वृक्ष अच्छी स्थिति में हैं। कार्यपालन यंत्री ने बताया कि वन विभाग के माध्यम से विभाग के उपवन में 4090 पौधे रोपे गए थे, जो तेजी से पेड़ बनने की ओर अग्रसर हैं। इस साल भी ठाठीपुर पुनर्घनत्वीकरण परिसर में अब तक 250 बड़े पौधों का रोपण कराया गया है।
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डॉ राजकुमार आचार्य बोले -पुरातत्व हमारे अतीत को सहेज कर रखने का माध्यम है, संगोष्ठी में 42 से 45 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए,

ग्वालियर जीवाजी विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययनशाला जनजातीय अध्ययन एवं विकास केंद्र द्वारा 2 दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “पुरातत्व में नवीन अन्वेषण मध्य प्रदेश के विशेष संदर्भ में” आयोजित की गई। संगोष्ठी में विमर्श हेतु मध्य प्रदेश में मृदभांड परंपराएं, मध्य प्रदेश में नवीन अन्वेषण, प्राचीन जल प्रबंधन प्रणाली, पुरातत्व में डिजिटल शिक्षा आयाम, विरासत जागरूकता में सार्वजनिक सहभागिता जैसे अनेक मुख्य बिंदुओं पर प्रस्तावना प्रस्तुत की गई। दो दिन की संगोष्ठी में लगभग 42 से 45 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जिसमें विभिन्न राज्यों के शोधार्थियों ने भाग लिया। संगोष्ठी में 6 सेशन का आयोजन किया गया। इन सत्रों में डॉ. आलोक श्रोत्रिया, डॉ.चेतराम गर्ग, प्रो. मुकेश कुमार, प्रो. शिवाकांत बाजपेई, डॉ. अर्चना शर्मा, डॉ. मोहनलाल चंद्र सत्र में चेयरपर्सन के रूप में मौजूद थे। डॉ. विनय कुमार, डॉ. मनोज कुमार, प्रो. अवकाश जाधव, प्रो. महेश चंद्र श्रीवास्तव, डॉ. प्रियदर्शनी एम खोबरागड़े, डॉ अतुल कुमार प्रधान सत्र में को-चेयरपर्सन के रूप में उपस्थित थे। डॉ. राघवेंद्र यादव, डॉ.अतुल गुप्ता, डॉ. संजय पेकराऔ, डॉ. अशोक सरवड़े, डॉ. उत्सव आनंद, डॉ. वीरेंद्र सिंह, डॉ. गोविंद सिंह डांगी, डॉ. सुबोध डी गोंर्ल, डॉ .जितेंद्र सिंह आगरा, डॉ जितेंद्र सिंह कानपुर, संगोष्ठी में संसाधन व्यक्तित्व के रूप में उपस्थित थे।
संगोष्ठी में मध्य प्रदेश एवं भारत की पुरातत्व धरोहर पर प्रख्यात विद्वानों और शोधार्थियों ने अपने बहुमूल्य अनुभवों से अवगत कराया। इस कार्यक्रम में उत्खनन, शैलचित्र अध्ययन तथा पुरातत्व के विषय पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में डॉ. नारायण दास ने सुप्रसिद्ध पुरातत्वविद प्रोफेसर विष्णु वाकणकर के साथ किए गए क्षेत्रीय सर्वेक्षण और उत्खनन कार्यों के अनुभव साझा किये। उन्होंने भीमबेटका, कठोतिया तथा रायसेन जिले के कई स्थलों का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि शैल चित्रों के अध्ययन और उनके सही अर्थ निकालने की चुनौती आज की पीढ़ी के सामने भी बनी हुई है। उन्होंने पर्यटन और परिस्थितिकी को पुरातत्व से जोड़कर नए अवसर निर्मित किये जा सकते हैं ऐसी संभावनाओं को व्यक्त किया। डॉ. संजय कुमार मंजुल, अतिरिक्त महानिदेशक, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने कहा कि भारत की संस्कृति को मध्य प्रदेश को समझे बिना नहीं जाना जा सकता। उन्होंने पुरातत्व में शब्दावली संबंधी समस्याओं के समाधान पर बल दिया तथा यह भी बताया कि मानव पशु प्रवजन तथा सांस्कृतिक संबंधों के अध्ययन के लिए आधुनिक तकनीक का विशेष रूप से उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने ए.एस.आई. के शोधों का उल्लेख करते हुए बताया कि चालकोलिथिक काल में रथो के प्रमाण मिले हैं और यह भी कहा कि मध्य प्रदेश की शैल चित्र धरोहर का पुनः सर्वेक्षण आवश्यक है। ताकि इतिहास की इकाइयों को पांटा जा सके, उन्होंने उत्खनन और उसके विश्लेषण के लिए बहुविषयक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कुलगुरु प्रो. डॉ राजकुमार आचार्य, ने अपने उद्बोधन में कहा कि देश बदल रहा है और यह समय परिवर्तन का है। यदि हम इस समय नहीं बदले तो कुछ भी हासिल नहीं कर पाएंगे। उन्होंने रामसेतु पुल की पुष्टि उपग्रह चित्रों से होने का उदाहरण देते हुए कहा की नई तकनीकी हमेशा नई जानकारीयो को उजागर करने में सहायक होती है। उन्होंने यह भी बताया कि पुरातत्व हमारे अतीत को सहेज कर रखने का माध्यम है, तथा ग्वालियर क्षेत्र की पुरातात्विक धरोहर अभी भी शोधकर्ताओं की प्रतीक्षा कर रही है। अंत में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत की युवा पीढ़ी विश्व के लिए नए क्षितिज लेकर आएगी।
संगोष्ठी के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. एम. पी. अहिरवार, विभागाध्यक्ष भारतीय प्राचीन इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग बनारस हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी से उपस्थित थे। अपने उद्बोधन में उन्होंने भारतीय प्राचीन संस्कृति एवं पुरातत्व के नवीन अन्वेषण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मध्य प्रदेश पुरातात्विक संपदा की धरोहर है। मध्य प्रदेश को केंद्रीय स्तर पर जो पहचान मिलना चाहिए वह नहीं मिली है शोध क्षेत्र एवं अन्य विकास के क्षेत्र में पीछड़ रहा है।
पिछले 200 वर्षों की उपलब्धियां में सांची और खजुराहो ही प्रतिबिंबित हो पाए हैं। अतीत के लगभग 200 वर्षों का इतिहास भी लिखा जाना चाहिए ताकि प्राचीन पाठ्यक्रमों को भी नवीन अन्वेषण से जोड़ा जा सके। राज्य के हर विश्वविद्यालय को शोधो को संकलित करने की आवश्यकता है ताकि समाकलित उपलब्धियां राष्ट्रीय विकास से जोड़ी जा सके।
जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर राजकुमार आचार्य ने कहा कि शिक्षा को ग्रहण करने के साथ संगोष्ठियों द्वारा शोध चिंतन से व्यक्तित्व निर्माण में अवसर मिलते है। शोध पत्रों को सभी मानकों से कर उतारने का प्रयास किया जाना चाहिए। डॉ. अतुल प्रधान उड़ीसा ने सत्रों के अनुभव को साझा करते हुए कहा के मध्य प्रदेश का इतिहास भारत के इतिहास की मापनी है वही डॉ. महेश कुमार, ने मगध यूनिवर्सिटी तथा जीवाजी विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गठबंधन की घोषणा की। डॉ. अर्चना शर्मा बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी द्वारा शोध पत्रों की उत्कृष्टता और अनुप्रयोगिता की भूरी भूरी प्रशंसा की।
कार्यक्रम का आभार संगोष्ठी के संयोजक प्रोफेसर एसडी. सिसोदिया ने किया। उन्होंने 14 राज्यों से पधारे हुए संसाधन व्यक्ति, शोधार्थियों, छात्रों, प्राध्यापकों, टेक्नीशियन, मीडिया आदि का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।

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