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MP में 29 IAS अधिकारियों का तबादला

भोपाल. मध्य प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़ा फेरबदल करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा (भाप्रसे) के 29 वरिष्ठ अधिकारियों के तबादला आदेश जारी किए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी इस सूची में भोपाल और रीवा संभाग के कमिश्नरों को बदलने के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण विभागों के प्रमुख सचिवों, सचिवों और निदेशकों के प्रभार में भी बदलाव किया गया है।
भोपाल और रीवा संभाग को मिले नए कमिश्नर
आदेश के मुताबिक, भोपाल संभाग के वर्तमान कमिश्नर श्री संजीव सिंह (2005) को अब सचिव, खेल एवं युवा कल्याण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी जगह श्री कर्मवीर शर्मा (2010), जो वर्तमान में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के आयुक्त व सचिव थे, उन्हें भोपाल संभाग का नया कमिश्नर नियुक्त किया गया है।
वहीं, रीवा संभाग के कमिश्नर बाबू सिंह जामोद (2006) को भोपाल मंत्रालय में नगरीय विकास एवं आवास विभाग का सचिव बनाया गया है । उनकी जगह अब शीलेन्द्र सिंह (2010) रीवा संभाग के नए कमिश्नर होंगे ।
इन वरिष्ठ अधिकारियों के विभागों में हुआ बदलाव
मुकेश चन्द गुप्ता (1998): सचिव, मानव अधिकार आयोग से अब प्रमुख सचिव, जेल विभाग बनाए गए हैं।
डॉ. ई. रमेश कुमार (1999): प्रमुख सचिव, अनुसूचित जाति कल्याण विभाग से अब प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग तथा राहत एवं पुनर्वास आयुक्त नियुक्त किए गए हैं।
विवेक कुमार पोरवाल (2000): प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग से अब प्रमुख सचिव, खनिज साधन विभाग की जिम्मेदारी संभालेंगे।
दीपक सिंह (2007): आयुक्त-सह-पंजीयक, सहकारी संस्थाएं से अब मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव बनाए गए हैं।
अमित तोमर (2009): पंजीयन महानिरीक्षक से अब प्रबंध संचालक, ऊर्जा विकास निगम तथा आयुक्त, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे।
अपर मुख्य सचिवों को सौंपे गए अतिरिक्त प्रभार
तबादला सूची के साथ ही शासन ने कई वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी सौंपी हैं:
के.सी. गुप्ता (1992): अपर मुख्य सचिव, कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग को अपने वर्तमान कर्तव्यों के साथ-साथ कृषि उत्पादन आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
अनिरूद्ध मुकर्जी (1993): अध्यक्ष, राजस्व मण्डल ग्वालियर को पर्यावरण आयुक्त तथा महानिदेशक, एप्को का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
गुलशन बामरा (1997): प्रमुख सचिव, जनजातीय कार्य विभाग को प्रमुख सचिव, अनुसूचित जाति कल्याण विभाग का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है।
सोनिया मीना (2013): अपर सचिव, वित्त विभाग को आयुक्त-सह-संचालक, संस्थागत वित्त का अतिरिक्त प्रभार मिला है।
इसके साथ ही, नई नियुक्तियों के बाद अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल और मनु वास्तव सहित वरिष्ठ अधिकारी मनीष सिंह और अरविन्द कुमार दुबे कुछ अतिरिक्त प्रभारों से मुक्त होंगे।
ये अधिकारी भी बदले गए
मंत्रालय द्वारा जारी सूची में कई अन्य जिलों और विभागों के अपर सचिव, उप सचिव और निदेशकों के स्तर पर भी बदलाव हुए हैं:
नेहा मारव्या सिंह (2011) को उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण का आयुक्त-सह-संचालक बनाया गया है।
मनोज पुष्प (2011) को लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण का संचालक नियुक्त किया गया है।
रोहित सिंह (2012) अब बजट संचालक की जिम्मेदारी संभालेंगे।
हर्षिका सिंह (2012) को अपर सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग बनाया गया है।
भारती जाटव ओगरे (2012) को कोष एवं लेखा का आयुक्त नियुक्त किया गया है।

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RSS कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला

रांची. झारखंड की राजधानी रांची से एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां मंगलवार रात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय पर अज्ञात बदमाशों द्वारा पेट्रोल बम से हमले की कोशिश की गई। हमले की यह घटना कार्यालय के पास लगे सीसीटीवी कैमरा में रिकॉर्ड हो गई जिसके आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। सीसीटीवी की फुटेज में दो युवक निवारणपुर स्थित आरएसएस के प्रांत कार्यालय पर मोटरसाइकिल से पहुंचे और फिर पेट्रोल से भरी बोलते फेंक कर फरार हो गए। जानकारी के मुताबिक यह घटना रात 12:36 बजे हुई थी। कार्यालय पर हमला कर बदमाश मौके से फरार हो गए। सीसीटीवी की फुटेज की मदद से बदमाशों की पहचान की जा रही है।
केंद्रीय राज्य मंत्री ने घटना की आलोचना की
इस घटना ने राज्य में राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेताओं ने इसे गंभीर सुरक्षा चूक और संभावित साजिश करार दिया है। केंद्रीय राज्य मंत्री और झारखंड से BJP के वरिष्ठ नेता संजय सेठ ने इस घटना को साजिश बताते हुए कहा है कि यह कोई सामान्य घटना नहीं है। संजय सेठ ने प्रशासन से कार्यालय के पास स्थायी पुलिस पिकेट लगाने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि संघ कार्यालय संगठन के लिए बेहद महत्वपूर्ण स्थान है और उसकी सुरक्षा में किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। भारतीय जनता पार्टी नेताओं ने इस मामले को राज्य की कानून व्यवस्था से जोड़ते हुए सरकार पर सवाल उठाए हैं।
पुलिस और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी टीम जांच में जुटी
रांची शहर के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस केवी रमन ने मीडिया को बताया कि घटनास्थल से दो बोतलें बरामद की गई हैं, जिनकी जांच फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की टीम कर रही है। पुलिस ने साइबर डीएसपी समेत कई अधिकारियों को जांच में लगाया है। पुलिस कमिश्नर की अगुवाई में विशेष टीम गठित की गई है। अधिकारियों के अनुसार सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण में कुछ संदिग्धों की जानकारी मिली है और उनकी तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच के बाद ही घटना की प्रकृति और मकसद को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।

 

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बिहार-देवबंद तक फैला आतंकी नेटवर्क, एटीएस ने पकड़ी स्लीपर सेल की कड़ी

भोपाल. पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों और हैंडलरों के इशारे पर भारत में बडी आतंकी साजिश रच रहे खतरनाक स्लीपर सेल का खुलासा हुआ है। मध्य प्रदेश और बिहार एटीएस आतंकवाद निरोध दस्ता की संयुक्त कार्रवाई में मधुबनी के नूर-ए-मोहम्मदिया मदरसे के शिक्षक इजहारूल की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियों के हाथ कई चौंकाने वाली जानकाररियां लगी है।
नेपाल में बैठे एजेंटों के जरिये पाकिस्तान पहुंचाता था सिमकार्ड
पूछताछ में यह साफ हुआ है कि इजहारूल बिहार के विभिन्न जिलों से पहचान पत्रों और आधार कार्ड के जुगाड से खरीदे गए भारतीय सिमकार्ड, नेपाल में बैठे एजेंटों के जरिये पाकिस्तान पहुंचाता था। इस सिंडिकेट को चलाने के लिए वह कई बार नेपाल की यात्री भी कर चुका था। इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश तब हुआ जब मध्य प्रदेश एटीएस ने भोपाल कांग्रेस नगर बैरसिया निवासी मुहम्मद फराज उर्फ खालिद सैफुल्लाह को दबोचा। एटीएस की सख्त पूछताछ में फराज जल्द ही टूट गया। उसके मोबाइल की वाट्सएप चैटिंग और गूगल मीट के डिजिटल साक्ष्य खंगालने पर यूपी के देवबंद सहारनपुर निवासी नईम अब्दुल्ला और मधुबनी के इजहारूल की देश विरोधी गतिविधियों में गहरी संलिप्तता उजागर हुई। पुख्ता सबूत हाथ लगते ही एटीएस ने देवबंद से नईम और फिर मधुबनी पहुंचकर इजहारूल को दबोच लिया।
इजहारूल को पाकिस्तानी से बिहार में नेटवर्क फैलाने की जिम्मेदारी मिली थी
सुरक्षा एजेंसियों की तफ्तीश में पता चला कि इजहारूल को पाकिस्तानी हैंडली से बिहार में नेटवर्क फैलाने की बडी जिम्मेदारी मिली थी। भागलपुर, बांका, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, दरभंगा और मधुबनी जैसे जिलों से सिमकार्ड खरीदकर उनकी तस्करी की जाती थी। इजहारूल मदरसे की तालीम की आड में युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें आतंकी गतिविधियों से जो रहा था।
पाकिस्तान में बैठे जैनुल आब्दीन के संपर्क में थे तीनों
इन तीनों आरोपितों के तार सीधे पाकिस्तान में बैठे आतंकी आका मुफ्ती जैनुल आब्दीन से जुड़े थे। मुफ्ती ने टेलीग्राम पर भड़काऊ आडियो बाइट भेजकर कहा था कि नबी की शान में जान देना फख्र की बात है। उसने इन युवकों को ऐसी ही ऑडियो रिकॉर्ड कर वफादारी साबित करने का निर्देश दिया था, जिसे फराज, नईम और इजहारुल ने रिकॉर्ड कर पाकिस्तान भेजा भी था।
मुफ्ती देश के धार्मिक स्थलों के बारे में भ्रामक और भड़काऊ जानकारी देकर इन्हें बड़ी साजिश के लिए तैयार कर रहा था। ये सभी टेलीग्राम और वाट्सएप के जरिये पाकिस्तानी व अन्य विदेशी मुजाहिदों के संपर्क में रहते थे और एजेंसियों की नजर से बचने के लिए बातचीत के तुरंत बाद चैट डिलीट कर देते थे। फिलहाल एटीएस सभी कड़ियों को जोड़कर स्लीपर सेल के अन्य गुर्गों की तलाश में जुटी है।

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MP में बदलेंगे बिजली टैरिफ के नियम, उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

भोपाल. बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने और बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। मप्र विद्युत नियामक आयोग (एमपीईआरसी) ने 2027-28 से 2031-32 तक लागू होने वाले नए मल्टी ईयर टैरिफ (एमवाईटी) ढांचे पर काम शुरू कर दिया है। इस व्यवस्था के तहत बिजली कंपनियों के खर्च, बिजली खरीद, फ्यूल चार्ज, आधारभूत संरचना विकास, नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले वित्तीय भार की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। नए नियमों को वितरण विनियम-2026 के रूप में अधिसूचित किया जाएगा। आयोग का उद्देश्य बिजली क्षेत्र में मौजूद नियामकीय बाधाओं को दूर करना, कंपनियों की कार्यप्रणाली में जवाबदेही बढ़ाना और उपभोक्ताओं को न्यायसंगत दरों पर बिजली उपलब्ध कराना है।
इन प्रमुख बिंदुओं पर बनेगा रोडमैप
फ्यूल चार्ज की तकनीकी जांचः वर्तमान व्यवस्था में बिजली उत्पादन और खरीद की लागत बढ़ने पर कंपनियां हर माह फ्यूल कॉस्ट एडजस्टमेंट फ्यूल चार्ज के माध्यम से अतिरिक्त राशि उपभोक्ताओं से वसूलती हैं। आयोग अब यह परखेगा कि ईंधन लागत के नाम पर लगाए जाने वाले शुल्क वास्तव में कितने उचित हैं।
पांच वर्षों की जरूरतः नया मल्टी ईयर टैरिफ केवल बिजली दरें तय करने तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें अगले पांच वर्षों की बिजली मांग, बिजली खरीद लागत, बिक्री का पूर्वानुमान, नवीकरणीय ऊर्जा की खरीद, संचालन एवं रखरखाव खर्च, मूल्यह्रास (डिप्रिसिएशन), क्रॉस सब्सिडी अधिभार जैसे विषयों का व्यापक अध्ययन किया जाएगा।
मूल्यह्रास और अनुदान खर्च पर निगरानीः बिजली कंपनियां अपनी परिसंपत्तियों के मूल्यह्रास को भी टैरिफ में शामिल करती हैं। जैसे मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में 384 करोड़ की परिसंपत्तियों का मूल्यह्रास दर्ज था, जिसका असर बिजली दरों पर पड़ता है। नए नियमों में ऐसे खर्चों की समीक्षा होगी। वहीं अनुदान की भी समीक्षा होगी।
सोलर ऊर्जा को मिलेगा बढ़ावाः आयोग सौर ऊर्जा को बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है। यदि बिजली मिश्रण में नवीकरणीय ऊर्जा का अनुपात बढ़ता है तो दीर्घकाल में बिजली उत्पादन लागत नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। इससे पर्यावरणीय लाभ के साथ-साथ उपभोक्ताओं को भी प्रतिस्पर्धी दरों पर बिजली उपलब्ध हो सकेगी।

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MP के 9 पुलिस अफसर बनेंगे IPS, प्रमोशन के लिए 25 जून को भोपाल में बडी मीटिंग, ग्वालियर से सुमन गुर्जर व सत्येंद्र सिंह तोमर पर विचार किया गया

भोपाल. साल 2025 के लिए राज्य पुलिस सेवा के नौ अधिकारी इस वर्ष आईपीएस संवर्ग में पदोन्नत होंगे। इसके लिए 25 जून को भोपाल में डीपीसी होगी, जिसमें संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य भी सम्मिलित होंगे। इसके लिए 1997 बैच के सीताराम, अमृत मीणा, वर्ष 1998 बैच के निमिषा पांडेय, राजेश मिश्रा, मलय जैन, अमित सक्सेना, मनीषा सोनी, सुमन गुर्जर, संदीप मिश्रा, सब्यसाची सर्राफ, समर वर्मा, सत्येंद्र सिंह तोमर समेत कुल 27 नामों को विचार में लिया गया है।
राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस में 13 अधिकारियों की पदोन्नति
उधर, राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस में 13 अधिकारियों की पदोन्नति होनी है, जिसमें 2007 और 2008 बैच के अधिकारियों को विचार की परिधि में रखा गया है। हालांकि, डीपीसी की तारीख अभी तय नहीं है।
देशमुख और मीनाक्षी केंद्र के लिए इंपैनल
डीजी विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त योगेश देशमुख और मप्र भवन दिल्ली में पदस्थ एडीजी मीनाक्षी शर्मा को केंद्र में प्रतिनियुक्ति के लिए इंपैनल किया गया है। दोनों अधिकारी केंद्र में जाते हैं तो उन्हें डीजी स्तर का पद मिलेगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 33 आईपीएस अधिकारियों की सूची जारी की है, जिसमें मप्र के दो हैं।

 

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ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में 10 लाख कैश छोड़कर उतरा इंजीनियर, बैग में भरकर दिल्ली से लाया था कैश

ग्वालियर. ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर एक कंपनी के इंजीनियर का करीब 10 लाख रुपए से भरा सूटकेस गायब हो गया। सूचना मिलते ही जीआरपी पुलिस सक्रिय हो गई और 2 से 3 घंटे के भीतर सूटकेस को बरामद कर लिया है। दरअसल, जिंदल कंपनी में इंजीनियर पद पर कार्यरत राजीव खन्ना दिल्ली से ग्वालियर के लिए गतिमान एक्सप्रेस से सफर कर रहे थे। वे ट्रेन के कोच नंबर सी-8 की सीट नंबर 30 पर यात्रा कर रहे थे। उनके पास एक सूटकेस था, जिसमें करीब 10 लाख रुपए नकद रखे हुए थे। ग्वालियर रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद जब वे ट्रेन से उतरे तो उन्हें ध्यान आया कि उनका सूटकेस गायब है।

जीआरपी ने बैग बरामद कर इंजीनियर को सौंप दिया। - Dainik Bhaskar
रेलवे स्टेशन पर लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाली
सूटकेस में बड़ी रकम होने के कारण राजीव खन्ना घबरा गए और तत्काल जीआरपी बीजी थाना पुलिस को सूचना दी। शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी। रेलवे स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई और ट्रेन में मौजूद स्टाफ तथा अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ की गई।

500 के नोटों की 20 गड्डियों में ₹10 लाख रुपए थे।
पुलिस ने सूटकेस को अपने कब्जे में लेकर पुष्टि कराई
जांच में पता चला कि सूटकेस ट्रेन में ही रह गया था। संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर ट्रेन की लोकेशन ट्रेस की गई। जांच के दौरान ग्वालियर और दतिया के बीच ट्रेन में ही सूटकेस सुरक्षित मिल गया। पुलिस ने सूटकेस को अपने कब्जे में लेकर उसकी पुष्टि कराई और बाद में राजीव खन्ना को सौंप दिया।
करीब 10 लाख रुपए से भरा सूटकेस सुरक्षित वापस मिलने के बाद राजीव खन्ना के चेहरे पर खुशी लौट आई। उन्होंने पुलिस और रेलवे अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता था।

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MP में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी, 155 अफसर और 723 पटवारियों के तबादले

भोपाल. सरकार ने राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों की तबादला सूची जारी कर दी है। इंदौर में बड़ा फेरबदल किया गया, जिसमें सबसे चौंकाने वाला नाम एडीएम रोशन राय का है। उन्हें मैहर अपर कलेक्टर बनाया गया, तो रिंकेश वैश्य को अधिकृत अपर कलेक्टर नियुक्ति किया गया। एसडीएम के अलावा 20 से अधिक पटवारी विभिन्न जिलों से इंदौर पदस्थ किए गए।
155 अफसरों को इधर से उधर
सरकार के तबादलों से रोक हटने के बाद लंबे समय से राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों की सूची का इंतजार किया जा रहा है। आखिरकार देर रात को आदेश जारी हो गया, जिसमें कुल 155 अफसरों को इधर से उधर किया गया तो 723 पटवारियों के भी जिले बदले गए। माना जा रहा है कि पहली बार इतनी लंबी सूची जारी की गई है, जिसमें इंदौर को ही 20 नए पटवारी मिल गए हैं, जबकि जाने वाले की संख्या सिर्फ एक ही है। आदेश में सबसे चौंकाने वाला नाम एडीएम रोशन राय का है। उन्होंने ब्रिक्स सम्मेलन से लेकर पूर्व कई बड़े आयोजन का प्रोटोकॉल अच्छे से संभाला तो साफ सुथरी छवि होने की वजह से उन्हें पसंद भी किया जाता है।
इधर, एक साल पहले संभागायुक्त दीपक सिंह के आदेश के बाद से नागरिक आपूर्ति निगम में पदस्थ रिंकेश वैश्य अपर कलेक्टर का दायित्व संभाल रहे थे, अब उन्हें अधिकृत नियुक्त कर दिया गया। इसके अलावा नरेंद्र नाथ पांडे को नगर निगम से एमपीआइडीसी इंदौर का एमडी बनाया गया तो पिछले दिनों प्रमोशन से अपर कलेक्टर बने गोपाल वर्मा व राकेश मोहन त्रिपाठी का भी इंदौर से तबादला कर दिया गया।
चर्चित 8 उपयंत्रियों का फिर तबादला
व्यापमं के जरिए नगर निगम में भर्ती हुए तकरीबन 13 उपयंत्रियों को सालभर पहले यानी 13 जून-2025 को इंदौर से बाहर कर दिया गया था, जो कि निगम के जोनों पर बिल्डिंग परमिशन शाखा में बिल्डिंग अफसर (बीओ) और बिल्डिंग इंस्पेक्टर (बीआइ) बनकर नक्शे पास करने का काम करते थे। नगरीय आवास एवं विकास विभाग के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायकों, एमआइसी मेंबरों और कई पार्षदों की शिकायतों के साथ लोगों का काम न करने के चलते इन उपयंत्रियों का तबादला हुआ था। जिन 13 उपयंत्रियों का तबादला हुआ था, उनमें से 8 हाईकोर्ट से स्टे लाने के साथ किसी न किसी जुगाड़ से निगम में वापस आ गए।
थोड़े दिन तक उपयंत्री लूप लाइन में रहे, लेकिन किसी न किसी तरीके से महत्वपूर्ण विभागों में पदस्थ हो गए। साथ ही बिल्डिंग परमिशन शाखा में नक्शा पास करने के लिए फिर से बीओ बन गए, लेकिन कल रात जारी हुए तबादला आदेश में उपयंत्रियों को दो साल की प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है।
किस उपयंत्री को कहां भेजा
उपयंत्री अंकेश बिरथरिया को सागर, शैलेंद्र मिश्रा को रतलाम, शिवराज यादव को सतना, उद्देश्य तिवारी को सिंगरौली, अंकुश चौरसिया को खंडवा, राहुल रघुवंशी को जबलपुर, प्रभात तिवारी को रीवा, विनोद अग्रवाल को छिंदवाड़ा नगर निगम में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है।
इंदौर सेंट्रल जेल अधीक्षक अलका सोनकर का ट्रांसफर हो गया है। उन्हें जेल मुख्यालय भोपाल में पदस्थ किया गया है। उनके स्थान पर भोपाल मुख्यालय में पदस्थ दिनेश नरगांवे को सेंट्रल जेल भेजा गया है। भोपाल जेल अधीक्षक को भी ट्रांसफर कर दिया है। उनके स्थान पर किसी की नियुक्ति नहीं हुई है। इधर देपालपुर जेल के सहायक अधीक्षक रामसहाय कुशवाह और जिला जेल में पदस्थ हेमंत नागर का तबादला जिले से बाहर कर दिया गया है।

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PCC में दिग्विजय- पटवारी के इशारे पर उठे, दूसरी कुर्सी पर बैठे

भोपाल. मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का 9 जून को नामांकन पत्र निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई थी, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के बीच मनमुटाव साफ दिखाई दिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दोनों नेताओं के बीच जिस तरह की भाव-भंगिमाओं में बातचीत हुई, उससे यह स्पष्ट नजर आया कि हरीश चौधरी के व्यवहार से दिग्विजय सिंह नाराज हैं। अब इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का एक और वीडियो सामने आया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में जीतू पटवारी इशारे से दिग्विजय सिंह को दूसरी चेयर पर बैठने को कहते हैं।
जिसमें दिग्विजय सिंह से पीसीसी चीफ जीतू पटवारी कुर्सी से उठकर दूसरी चेयर पर बैठने के लिए कहते हुए दिख रहे हैं। इसके बाद दिग्विजय सिंह कुर्सी से उठते हैं और एक साइड की कुर्सी पर बैठ जाते हैं। हालांकि, जैसे ही दिग्विजय सिंह कुर्सी से उठकर एक तरफ जाने लगते हैं, जीतू फिर कहते हैं, “आप इधर ही रहना सर” लेकिन दिग्विजय सिंह किनारे वाली कुर्सी पर ही बैठ जाते हैं। फिर दिग्विजय सिंह के बगल में हरीश चौधरी और उनके बाद मीनाक्षी नटराजन बैठती हैं। वहीं, इस पूरे मामले पर भाजपा का कहना है कि कांग्रेस में बुजुर्गों का सम्मान नहीं है। पार्टी गुटों में बंटी हुई है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिग्विजय सिंह जीतू पटवारी से जेपी धनोपिया को बुलाने के लिए कहते हैं।

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देश के प्रमुख ठिकानों पर ड्रोन अटैक की आशंका, सरकार का एजेंसियों को अलर्ट इन जगहों पर सुरक्षा बढ़ाएं

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने चेतावनी दी है कि सीमाओं पर मौजूद महत्वपूर्ण ठिकानों पर दुश्मन ड्रोन हमला कर सकता है। ‘द हिंदू’ की खबर के मुताबिक जहाज और जलमार्ग मंत्रालय के समुद्री सुरक्षा विंग ने जमीन और समुद्री सीमाओं के पास मौजूद महत्वपूर्ण संपत्तियों और ठिकानों पर ड्रोन अटैक को लेकर अलर्ट जारी किया है।
एंटी ड्रोन सिस्टम को जांचने के लिए टीम बनाई
गृह मंत्रालय ने भी सीमा सुरक्षा बल के तहत एक खास कमेटी बनाई है। इस कमेटी का काम भारत के लिए सबसे अच्छे एंटी-ड्रोन सिस्टम को जांचना और पास करना है। सूत्रों ने बताया कि बीएसएफ पाकिस्तान सीमा से सटे पंजाब के इलाकों में इन सिस्टमों को लगाने की तैयारी कर रही है, और इसके लिए बाकायदा ट्रायल भी शुरू हो चुके हैं। इसके साथ ही केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल ने भी एक टीम बनाई है। इस टीम में रक्षा अनुसंधान संगठन, इंटेलिजेंस ब्यूरो, एयरपोर्ट अथॉरिटी और बीएसएफ के अधिकारी शामिल हैं, जो देश के महत्वपूर्ण ठिकानों का दौरा कर रहे हैं। इस टीम की रिपोर्ट और गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद ही तय होगा कि किस ठिकाने पर कौन सा एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाया जाएगा।

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सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद भी चंबल में त्रिपाल से ढंके ट्रकों से हो रही रेत की तस्करी, रातों रात कॉलोनियों में बन रहे डंपिंग स्टेशन

ग्वालियर. चंबल नदी से रेत उत्खनन पर सुप्रीम कोर्ट की रोक और मुरैना-भिंड से ग्वालियर में रेत की आवाजाही पर प्रतिबंध के बावजूद अवैध रेत कारोबार थमता नजर नहीं आ रहा है। प्रशासन ने सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाते हुए चार प्रमुख मार्गों पर पुलिस बल तैनात कर रखा है, लेकिन रेत माफिया ने भी अपने तौर-तरीके बदल लिए हैं। नतीजा यह है कि शहर से सटी कॉलोनियां अब अवैध रेत के नए डंपिंग स्टेशन बनती जा रही हैं। जानकारी के अनुसार, भिंड और मुरैना की सीमाओं से जुड़े रास्तों पर पुलिस ने तंबू लगाकर चौबीसों घंटे निगरानी शुरू की है। रेत की अवैध ढुलाई रोकने के लिए तीन शिफ्टों में कुल 52 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और डंपरों की सघन जांच भी की जा रही है, लेकिन इसके बावजूद रेत तस्करी के मामले सामने आ रहे हैं।
त्रिपाल ढंके ट्रकों से हो रही तस्करी
रेत कारोबार की गतिविधियों पर नजर रखने वाले लोगों का कहना है कि पुलिस की निगाह मुख्य रूप से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और डंपरों पर रहती है। इसका फायदा उठाकर रेत माफिया अब बड़े ट्रकों, विशेषकर एलपी ट्रकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें रेत भरने के बाद ऊपर से त्रिपाल कसकर बांध दिया जाता है, जिससे बाहर से देखने पर सामान्य मालवाहक वाहन प्रतीत होते हैं। ऐसे में कई बार जांच चौकियों पर तैनात पुलिसकर्मी भी ट्रकों में लदी रेत का अंदाजा नहीं लगा पाते और वाहन आसानी से निकल जाते हैं।
कॉलोनियां बनीं नया ठिकाना
शहर की सीमा से लगे कई आवासीय क्षेत्रों में इन दिनों रात के अंधेरे में रेत की खेप पहुंचाई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले रेत से भरे वाहन सीधे शहर के विभिन्न निर्माण स्थलों तक पहुंचते थे, लेकिन अब सख्ती बढ़ने के बाद माफियाओं ने रणनीति बदल दी है। वे आबादी वाले इलाकों और सुनसान प्लॉटों में रेत का भंडारण कर रहे हैं, जहां से जरूरत के अनुसार छोटे वाहनों के जरिए इसकी आपूर्ति की जा रही है।
रहवासियों का आरोप है कि देर रात भारी वाहनों की आवाजाही से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। सुबह होते ही खाली प्लॉटों और कॉलोनियों के किनारों पर रेत के बड़े-बड़े ढेर दिखाई देते हैं, जिससे स्पष्ट है कि रातभर डंपिंग का काम जारी रहता है।
पाबंदी से बढ़े दाम, जमाखोरों को फायदा
रेत की उपलब्धता घटने और प्रशासनिक सख्ती के कारण बाजार में इसके दाम बढ़ने लगे हैं। ऐसे में पहले से रेत का भंडारण करने वाले कारोबारियों और जमाखोरों को आर्थिक लाभ मिल रहा है। निर्माण कार्यों से जुड़े लोगों का कहना है कि रेत की कमी का असर मकान निर्माण और अन्य परियोजनाओं पर पड़ रहा है।

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