बिहार-देवबंद तक फैला आतंकी नेटवर्क, एटीएस ने पकड़ी स्लीपर सेल की कड़ी
भोपाल. पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों और हैंडलरों के इशारे पर भारत में बडी आतंकी साजिश रच रहे खतरनाक स्लीपर सेल का खुलासा हुआ है। मध्य प्रदेश और बिहार एटीएस आतंकवाद निरोध दस्ता की संयुक्त कार्रवाई में मधुबनी के नूर-ए-मोहम्मदिया मदरसे के शिक्षक इजहारूल की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियों के हाथ कई चौंकाने वाली जानकाररियां लगी है।
नेपाल में बैठे एजेंटों के जरिये पाकिस्तान पहुंचाता था सिमकार्ड
पूछताछ में यह साफ हुआ है कि इजहारूल बिहार के विभिन्न जिलों से पहचान पत्रों और आधार कार्ड के जुगाड से खरीदे गए भारतीय सिमकार्ड, नेपाल में बैठे एजेंटों के जरिये पाकिस्तान पहुंचाता था। इस सिंडिकेट को चलाने के लिए वह कई बार नेपाल की यात्री भी कर चुका था। इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश तब हुआ जब मध्य प्रदेश एटीएस ने भोपाल कांग्रेस नगर बैरसिया निवासी मुहम्मद फराज उर्फ खालिद सैफुल्लाह को दबोचा। एटीएस की सख्त पूछताछ में फराज जल्द ही टूट गया। उसके मोबाइल की वाट्सएप चैटिंग और गूगल मीट के डिजिटल साक्ष्य खंगालने पर यूपी के देवबंद सहारनपुर निवासी नईम अब्दुल्ला और मधुबनी के इजहारूल की देश विरोधी गतिविधियों में गहरी संलिप्तता उजागर हुई। पुख्ता सबूत हाथ लगते ही एटीएस ने देवबंद से नईम और फिर मधुबनी पहुंचकर इजहारूल को दबोच लिया।
इजहारूल को पाकिस्तानी से बिहार में नेटवर्क फैलाने की जिम्मेदारी मिली थी
सुरक्षा एजेंसियों की तफ्तीश में पता चला कि इजहारूल को पाकिस्तानी हैंडली से बिहार में नेटवर्क फैलाने की बडी जिम्मेदारी मिली थी। भागलपुर, बांका, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, दरभंगा और मधुबनी जैसे जिलों से सिमकार्ड खरीदकर उनकी तस्करी की जाती थी। इजहारूल मदरसे की तालीम की आड में युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें आतंकी गतिविधियों से जो रहा था।
पाकिस्तान में बैठे जैनुल आब्दीन के संपर्क में थे तीनों
इन तीनों आरोपितों के तार सीधे पाकिस्तान में बैठे आतंकी आका मुफ्ती जैनुल आब्दीन से जुड़े थे। मुफ्ती ने टेलीग्राम पर भड़काऊ आडियो बाइट भेजकर कहा था कि नबी की शान में जान देना फख्र की बात है। उसने इन युवकों को ऐसी ही ऑडियो रिकॉर्ड कर वफादारी साबित करने का निर्देश दिया था, जिसे फराज, नईम और इजहारुल ने रिकॉर्ड कर पाकिस्तान भेजा भी था।
मुफ्ती देश के धार्मिक स्थलों के बारे में भ्रामक और भड़काऊ जानकारी देकर इन्हें बड़ी साजिश के लिए तैयार कर रहा था। ये सभी टेलीग्राम और वाट्सएप के जरिये पाकिस्तानी व अन्य विदेशी मुजाहिदों के संपर्क में रहते थे और एजेंसियों की नजर से बचने के लिए बातचीत के तुरंत बाद चैट डिलीट कर देते थे। फिलहाल एटीएस सभी कड़ियों को जोड़कर स्लीपर सेल के अन्य गुर्गों की तलाश में जुटी है।

