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ग्वालियर में पेट्रोल के दाम बढते ही शहरवासी तेजी से इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की ओर शिफ्ट हो रहे

ग्वालियर. मिडल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच बढते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को बढा दिया है। नतीजा घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम आम आदमी के बजट को प्रभावित कर रहे है। लेकिन ग्वालियर के सूझबूझ वाले वाहन चालकों ने इस संकट का एक तोड निकाल लिया है। तेल के इस खेल से तंग आकर शहरवासी अब तेजी से इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की ओर शिफ्ट हो रहे है। आलम यह है कि शहर के शोरूम्स पर पैर रखने की जगह नहीं है और कई स्कूटर्स पर तो एक-एक महीने की लंबी वेटिंग चल रही है।
डिमांड बढते ही कीमते बढना भी शुरू
ग्वालियर के ऑटोमोबाइल बाजार में इन दिनों गजब का यू-टर्न देखने को मिल रहा है। जनवरी सेपहले तक जिन शोरूम्स में सन्नाटा पसरा रहता था वहां अब ग्राहकों का मेला लग रहा है। जब डिमांड बढती है तो कीमते बढना भी तय है। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की आसमान छूती लोकप्रियता को देखते हुए प्रमुख कंपनियों ने भी मौके पर चौका मार दिया। पिछले दो से तीन महीनों के भीतर ही अलग-अलग मॉडल्स पर 8 से 10 हाजर रुपए तक दाम बढा दिए गए है। इसके बावजूद ग्राहकों का उत्साह कम नहीं हो रहा है क्योंकि लोगों को समझ आ गया है कि एक बार की यह जेब ढीली, भविष्य की बडी बचत की गारंटी है।

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ग्वालियर निर्माण कार्यों से प्रदूषण में टॉप पर पहुंचा

ग्वालियर. शहरवासियों के लिए एक तरफ आसमान से बरसती आग और भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है तो दूसरी तरफ शहर की आबो-हवा इतनी जहरीली हो चुकी है कि सांस लेना भी दूभर हो गया है। प्रदूषण के मामले में ग्वालियर ने एक बार फिर पूरे मध्य प्रदे श को पीछे छोड दिया है और सूबे के सबसे प्रदूषित शहर के रूप में टॉप पर पहुंच गया है। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के समीर ऐप के ताजा आंकडों के अनुसार ग्वालियर का ओवरऑल एयर क्वालिटी इंडेक्स 138 दर्ज किया गया है जो प्रदे श के सभी बडे महानगरों में सबसे अधिक और चिंताजनक है।
शहर के अलग-अलग मॉनिटरिंग सेंटरों के आंकडे फेफडों पर सीधे अटैक की गवाही दे रहे है। डीडी नगर में एक्यूआई 172, महाराज बाडा में 165 और सिटी सेंटर में 150 दर्ज किया गया है जो खराब श्रेणी में आता है। विडंबना देखिए कि शहर के बीचों-बीच स्थित फूलबाग एयर मॉनिटरिंग सेंटर पिछले 1 साल से तकनीकी खराबी के कारण बंद पडा है। ऐसे में शहर के सबसे व्यस्त और संवेदनशील इलाके की वास्तविक स्थिति का डेटा ही सामने नहीं आ पा रहा है।

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चैंबर ऑफ कॉमर्स के चुनाव में व्हाइट हाउस से पारस जैन अध्यक्ष पद के दावेदार, प्रवीण अग्रवाल का टिकट कटा

ग्वालियर. प्रतिष्ठित व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ कॉमर्स के चुनाव की मैदानी तैयारी अब शुरू हो गई है। चैंबर चुनाव के लिए दावेदारों के नामों पर चर्चा से लेकर मुहर लगने का काम शुरू कर दिया गया है। चैंबर ऑफ कॉमर्स के व्हाइट हाउस के पदाधिकारियों की बैठक का आयोजन होटल में किया गया। जिसमें व्हाइट हाउस की ओर से अध्यक्ष पद के लिए पारस जैन का नाम तय किया गया है। वर्तमान में चैंबर के सचिव दीपक अग्रवाल को इस बार भी मौका दिया जाएगा। वहीं कोषाध्यक्ष पद के लिए मनोज अग्रवाल का नाम लगभग तय माना जा रहा है। इसके अलरावा संयुक्त अध्यक्ष के लिए फिलहाल संभावित प्रत्याशियों में आशुतोष माहेश्वरी, रामकुमार गोयल व सुनील अग्रवाल का नाम है। संयुक्त सचिव के लिए विपुल गुप्ता, दीपक पमनानी और बसंत अग्रवाल में से एक नाम जल्द तय होगा। वहीं क्रिएटिव हाउस भी अपने प्रत्याशियों के ताने बाने बुनने की तैयारी कर रहा है और जल्द बैठक का आयोजन किया जाएगा।
प्रवीण अग्रवाल का टिकट कटा
व्हाइट हाउस चुनाव से पहले संगठन की बैठक में ऐसा फैसला हुआ, जिसने पूरी कारोबारी राजनीति को हिला दिया। लंबे समय से सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे निवर्तमान अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल का टिकट काट दिया गया। इस फैसले के बाद अब चेंबर की सियासत में बगावत और बड़े उलटफेर की चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार, प्रवीण अग्रवाल ने संगठन के सामने भावुक अपील करते हुए कहा था कि यह उनका आखिरी चुनाव होगा और उन्हें सम्मानजनक विदाई का मौका दिया जाए। लेकिन संगठन ने उनके नाम पर सहमति नहीं बनाई।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि टिकट कटने के बाद प्रवीण समर्थकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि प्रवीण अग्रवाल जल्द ही कोई बड़ा और चौंकाने वाला फैसला ले सकते हैं। यदि ऐसा हुआ, तो व्हाइट हाउस के मौजूदा समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।

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मुरैना पुलिस ने कोचिंग संचालक के गुम हुए 06 लाख रुपये खोजकर सुरक्षित लौटाए

तत्परता और तकनीकी जांच से 07 दिवस में मिली बड़ी सफलता, आमजन का बढ़ा पुलिस पर भरोसा
भोपाल, पुलिस द्वारा आमजन की सुरक्षा एवं विश्वास बनाए रखने हेतु लगातार संवेदनशील और प्रभावी कार्यवाहियां की जा रही हैं। इसी क्रम में मुरैना के थाना अम्बाह पुलिस ने तत्परता, सक्रियता एवं तकनीकी दक्षता का परिचय देते हुए कोचिंग संचालक के बैग से रास्ते में गुम हुई 06 लाख रुपये की राशि को बरामद कर सुरक्षित रूप से फरियादी के सुपुर्द किया है। पुलिस की इस सराहनीय कार्यवाही से आमजन में पुलिस के प्रति विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।
19 मई को फरियादी योगेंद्रसिंह तोमर निवासी चंबल कॉलोनी द्वारा थाना अम्बाह में उपस्थित होकर सूचना दी गई कि वह दोपहर लगभग 1:38 बजे अपने पुत्र के साथ बाइक से सेंट्रल बैंक में 06 लाख रुपये जमा करने जा रहे थे। बाइक पर उनका पुत्र रुपयों से भरा बैग टांगे बैठा था। पेट्रोल पंप के पास बैग की चेन खुल जाने से रुपयों का बंडल सड़क पर गिर गया, जिसे पीछे से आ रहे एक बाइक सवार युवक द्वारा उठाकर ले जाया गया।
सूचना प्राप्त होते ही पुलिस अधीक्षक मुरैना धर्मराज मीना ने थाना प्रभारी अम्बाह निरीक्षक वीरेश सिंह कुशवाह ने तत्काल पुलिस टीम गठित कर घटनास्थल का निरीक्षण किया गया। पुलिस टीम ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज का बारीकी से परीक्षण किया तथा पुलिस द्वारा लगातार की गई मेहनत, सूझबूझ एवं तकनीकी जांच के परिणामस्वरूप घटना के मात्र 07 दिवस के भीतर बाइक सवार युवक की पहचान कर उससे 06 लाख रुपये की संपूर्ण राशि बरामद कर ली गई।बरामद राशि को सुरक्षित रूप से फरियादी योगेंद्र सिंह तोमर को सुपुर्द किया गया।

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दायित्वों में लापरवाही बरतने वाले 2 पटवारी निलंबित

ग्वालियर- कलेक्टर रुचिका चौहान ने पदीय दायित्वों के प्रति उदासीनता एवं आबादी सर्वे (स्वामित्व) योजना के कार्य में अत्यंत धीमी प्रगति पाए जाने पर 2 पटवारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
कलेक्टर द्वारा जिले में लंबित आबादी सर्वे (स्वामित्व) प्रकरणों की समीक्षा के दौरान पाया गया कि भितरवार अनुभाग के ग्राम गाजना में ड्रोन फ्लाई सर्वे एवं ग्राउंड ट्रुथिंग कार्य पूर्ण होने के बाद भी पटवारी राजाराम आदिवासी द्वारा कुल 164 प्लॉटों में से केवल 18 प्लॉटों का आरओआर कार्य किया गया। इसी प्रकार घाटीगांव अनुभाग के ग्राम बरई में पटवारी रिचा शर्मा द्वारा कुल 1480 प्लॉटों में से केवल 290 प्लॉटों का आर.ओ.आर. कार्य किया गया, जो अत्यंत न्यूनतम प्रगति दर्शाता है।
इसे म.प्र. सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के प्रावधानों का उल्लंघन मानते हुए म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत दोनों पटवारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में दोनों का मुख्यालय कार्यालय भू-संसाधन प्रबंधन, जिला ग्वालियर निर्धारित किया गया है। साथ ही नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

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हर साल 50 से 75 हजार से भी ज्यादा बच्चों में कैंसर के नये मामले सामने आ रहे, समय रहते डाग्योनोसिस पर ठीक हो जाते हैं-डॉ. बीआर श्रीवास्तव

ग्वालियर -खून में होने वाले कैंसर रक्त कैंसर को मेडिकल भाषा में ल्यूकेमिया कहा जाता है। इंडियन कैंसर सोसायटी के अनुसार भारत में हर वर्ष 50,000 से लेकर 75,000 से भी अधिक बच्चों में कैंसर के नए मामले सामने में रहे हैं, जो कि एक गंभीर स्थिति है। इनमें से सामने आने वाले 25 से 30 प्रतिशत बच्चे ब्लड कैंसर से ग्रसित पाए गए हैं, क्योंकि हमारे देश में सही समय पर कैंसर का निदान नहीं हो पाता और कई मामलों का रजिस्ट्रेशन भी नहीं हो पाता। रक्त कैंसर पहली अवस्था में 90 से 80 प्रतिशत ही ठीक होने वाले कैंसर का उपचार होने के बाद भी यदि समय पर दवा न दी जाए तो 4 वर्षों के भीतर 20 प्रतिशत रोगियों में यह ठीक होने की दर (50%) से भी कम हो सकती है। इसका मुख्य कारण बीमारी की समय पर पहचान न होना तथा उपचार में निवेश कम है।
ध्यान देने योग्य मुख्य बात यह है कि बच्चों में होने वाले अधिकांश कैंसर पूर्ण ठीक किए जा सकते हैं, क्योंकि उनका उपचार संभव है। केवल यही नहीं, बल्कि बच्चे उपचार से जल्दी स्वस्थ भी हो जाते हैं। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का समय पर निदान अत्यंत जरूरी होता है।
इसी विषय पर ग्वालियर में कैंसर एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट द्वारा एक विशेष शैक्षणिक चिकित्सा कार्यक्रम (CME) आयोजित किया जा रहा है। यह CME मेवात अकैडमी ऑफ मेडिकल साइंस, इंडियन अकैडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स एवं CanKids NGO के संयुक्त प्रयासों से संभव हो रही है।
इस कॉन्फ्रेंस में संरक्षक (Patron) के रूप में अशोक गुप्ता, डॉ. बीआर श्रीवास्तव तथा डॉ. विनोद पुरोहित समिति में शामिल हैं। आयोजन समिति में डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव, डॉ. बीके शर्मा, डॉ. अनिल शर्मा एवं डॉ. विनय चतुर्वेदी शामिल हैं।
इस कार्यक्रम में देशभर से लगभग 15 से अधिक कैंसर विशेषज्ञ आएंगे और बच्चों में होने वाले महत्वपूर्ण कैंसर एवं ब्लड कैंसर पर विस्तार से चर्चा करेंगे। कॉन्फ्रेंस में अब तक 100 से अधिक रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं। कॉन्फ्रेंस में सम्मिलित होने वाली कैंसर टीम इस प्रकार है।
डॉ. अतुल श्रीवास्तव, डॉ. प्रवीण जैन, डॉ. अनूप पाटीदार, इंदौर; डॉ. आदित्य श्रीवास्तव, भोपाल; डॉ. गौरव जैन,  डॉ. अरविंद राघव, डॉ. अविनाश सिंह,  डॉ. दीपक अग्रवाल, डॉ. दीपक गुप्ता, डॉ. गौरव शर्मा, दिल्ली; डॉ. विजय अग्रवाल, ; डॉ. ज्योति शर्मा, डॉ. हेमंत जोशी, भोपाल; डॉ. योगेश राजौरिया, डॉ. अश्विनी शर्मा, डॉ. दीपक अग्रवाल, डॉ. दीपक शर्मा, डॉ. निखिल शर्मा, दिल्ली; डॉ. अनामिका कोहली, दिल्ली; डॉ. अमन अरोड़ा, डॉ. अमित बंसल, डॉ. मनीष सक्सेना, डॉ. उमेश चंद्र जैन,. विवेक चतुर्वेदी, डॉ. राकेश पाटीदार, डॉ. नरेश वर्मा, डॉ. राजीव अग्रवाल, डॉ. प्रियांशु सिंह, दिल्ली; डॉ. विवेक भार्गव, दिल्ली; डॉ. पूजा अग्रवाल, डॉ. अनुप अग्रवाल, डॉ. रवि पाठक, डॉ. मोहिनी लाल, दिल्ली; डॉ. राघव अग्रवाल, डॉ. डी. के. उपाध्याय, डॉ. नीरज चौरसिया, इंदौर; डॉ. कृष्ण गोपाल चतुर्वेदी।
इसके अतिरिक्त इस कार्यक्रम में 100 से अधिक पोस्टर प्रेजेंटेशन कार्यक्रम के आयोजन की योजना है तथा पोस्टर प्रेजेंटेशन भी आयोजित किए जाएंगे, जिनमें 3 श्रेष्ठ पोस्टर प्रेजेंटेशन कार्यक्रम में चयनित किए जाएंगे। प्रतियोगियों को कैश प्राइज देने के लिए भी कार्यक्रम में आयोजन किया गया है।
इस कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य बच्चों में होने वाले कैंसर का समय रहते निदान (Diagnosis) सुनिश्चित करना, सही समय पर उपचार उपलब्ध कराना तथा लोगों को जागरूक बनाना एवं प्रशिक्षण देना है, ताकि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बच्चों का जीवन सुरक्षित किया जा सके।
इस कॉन्फ्रेंस के मुख्य विषय जैसे— बच्चों में होने वाले सामान्य कैंसर, रेटिनोब्लास्टोमा, ब्लड कैंसर, मस्तिष्क के कैंसर, बोन कैंसर आदि पर विशेष रूप से केंद्रित किया जाएगा। कैंसर के निदान से लेकर पूर्ण उपचार तक की नवीन पद्धतियों पर चर्चा की जाएगी, जिसमें पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी से संबंधित नवीन चिकित्सा पद्धतियों को सम्मिलित किया गया है। साथ ही कीमोथेरेपी, रेडिएशन एवं सर्जरी के अतिरिक्त नई तकनीकों जैसे बोन मेरो ट्रांसप्लांट एवं फाइंडिंग एंड टारगेट थेरेपी (CAR-T Cell Therapy) पर भी विस्तार से चर्चा होगी। इस कार्यक्रम में आयोजित होने वाली विभिन्न प्रतियोगिताओं के परिणाम शाम को आयोजित वैलिडिक्टरी सेशन में घोषित किए जाएंगे।

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BJP ने चार राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष बदले

नई दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी ने अपने संगठनिक ढांचे में बडा बदलाव करते हुए चार प्रमुख राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों को बदल दिया है। पार्टी द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने जिन राज्यों के अध्यक्ष बदले गए है उनमें दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और त्रिपुरा शामिल है। इसके तहत हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली. अर्चना गुप्ता को हरियाणा, अभिषेक देबरॉय को त्रिपुरा और सरदार केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
दिल्ल- हर्ष मल्होत्रा
केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हर्ष मल्होत्रा पूर्वी दिल्ली सं सांसद है। अब उन्हें दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष की नई जिम्मेदारी दी गई है। वर्ष 2012 में राजनीतिक करियर की शुरूआत करने वाले मल्होत्रा वीरेंद्र सचदेवा की जगह लेंगे। वीरेंद्र सचदेवा के नेतृत्व में दिलली में पार्टी को 2025 के विधानसभा चुनाव में जती मिली थी। हर्ष मल्होत्रा पूर्वी दिल्ली नगर निगम के महापौर रह चुके है। 2024 के आम चुनावों में पूर्वी दिल्ली से 18वीं लोकसभा के लिए चुने गए थे।
हरियाणा- अर्चन गुप्ता
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने हरियाणा संगठन में बडा बदलाव किया है। उन्होंने मोहन लाल बडौली की जगह अर्चना गुप्ता को नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। पाटी हाईकमान के इस फैसले को आगामी संगठनात्मक और राजनीतिक रणनीति से जोडकर रेखा जा रहा है। यह फैसला तत्काल लागू कर दिया गया है।
पंजाब- केवल सिंह ढिल्लों
पंजाब में भाजपा को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल गया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने बरनाला के पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता केवल सिंह ढिल्लों को यह जिम्मेदारी दी है। उनका नाम सामने आने के बाद बीजेपी में नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई है। उन पर पार्टी को नए सिरे से मजबूत करने और ग्रामीणों क्षेत्रों में स्थिति बेहतर करने की जिम्मेदारी है।
त्रिपुरा- अभिषेक देबरॉय
पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी बीजेपी ने युवा अभिषेक देबरॉय को दी है। उन्हें राजीव भट्टाचार्य की जगह पर नियुक्त किया गया है। अभिषेक देबरॉय गोमती जिले के माताबाडी विधानसभा क्षेत्र से मौजूदा विधायक है। 2023 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार को बडे अंतर से हराक विधानसभा में कदम रखा था। वे युवाओं और कार्यकर्ताओं के बीच काफी लोकप्रिय है।

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8वें वेतन आयोग से पहले पेंशन को लेकर हो सकती है बड़ी घोषणा

नई दिल्ली. देशभर में 8वें वेतन आयोग को लेकर बैठक चल रही है। इस दौरान केन्द्र सरकार के कर्मचारियों के लिये पेंशन स्ट्रक्चर को लेकर एक बड़ा बदलाव हो सकता है। मौजूदा रिटायरमेंट सिस्टम के तहत सरकारी कर्मचारियों का अपनी पेंशन विकल्प चुनने में अधिक लचीलापन देने के संबंध में चर्चा चल रही है। केन्द्रीय सरकार कर्मचारी संघ के एक सदस्य ने बताया है कि अगर चर्चा सकारात्मक तौर पर जारी रहती है। अगले 2-4 माह के अन्दर प्रस्ताव पर आगे कार्यवाही हो सकती है। हालांकि तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गयी है।
पेंशन सेलेक्ट करने का विकल्प अपनी पसंद
पेंशन में लचीलेपन और कर्मचारियों की पसंद को लेकर पॉजिटिव चर्चा चल रही है। कर्मचारी रिटायरमेंट बेनीफिट्स के संबंध में अधिक क्लीयरटी और सुरक्षा चाहते हैं। अगर बातचीत सही रही है तो प्रस्ताव मान लिया जाता है तो आगे कर्मचारियों को अपनी पंसद का पेंशन सेलेक्ट करने का विकल्प मिल सकता है।
कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाली कर रहे हैं मांग
यह घटना अहम है क्योंकि चल रहे 8वें वेतन आयोग के परामर्शो के बीच एनपीएस वाले कर्मचारियों के बीच पेंशन संबंधी चिंतायें सबसे बड़े मुद्दों में से एक के रूप में उभरी है। इनमें से अधिकतर कर्मचारी पुराने पेंशन बहाली को लेकर आयोग से मांग कर रहे हैं।
UPS का विकल्प चुनने की अनुमति मिल सकती है
अभी हाल ही में सरकार ने यूनीफाइड पेंशन योजना (यूपीएस) शुरू की है। जो कंट्रीब्यूशन बेस्ड पेंशन को कुछ तय पेंशन सुरक्षा देती है। चर्चाओं में शामिल कर्मचारी प्रतिनिधियों के मुताबिक नये प्रस्ताव से कर्मचारियों को पेंशन सिस्टम के भीतर अलग-अलग पेंशन विकल्पों में से चुनने की अनुमति मिल सकती है।
NPS के जरिए मिलता है पेंशन
अभी 1 जनवरी 2004 के बाद भर्ती किए गए ज्‍यादातर केंद्रीय कर्मचारी नेशनल पेंशन सिस्‍टम के तहत आते हैं, जो कंट्रीब्‍यूशन बेस्‍ड है और मार्केट के प्रदर्शन पर रिटर्न मिलता है।  NPS  के तहत कर्मचारी अपने सैलरी का एक हिस्‍सा पेंशन में योगदान देता है, जबकि सरकार भी अलग से योगदान देती है।  इसके बाद, मार्केट रिटर्न और जमा फंड पर निर्भर करता है कि आपको कितना पेंशन मिलेगा. जबकि पुरानी पेंशन योजना (OPS) अंतिम प्राप्त वेतन और महंगाई भत्ता (DA) से जुड़ी गारंटीकृत पेंशन देती थी।

 

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सुप्रीम कोर्ट ने फिर लगाई MP सरकार को फटकार, कहा धड़ल्ले से हो रहा रेत परिवहन

नई दिल्ली. राष्ट्रीय चंबल घडियाल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों के संचालन पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार समेत राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकार को कडी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि अवैध खनन रोकने के लिए राज्यों की कार्रवाई अभी भी नाकाफी है और बिना नंबर प्लेट वाले वाहन खुलेआम रेत परिवहन कर रहे है। कोर्ट ने 6 महीने के भीतर निगरानी तंत्र विकसित करने, सीसीटीवी कैमरे लगाने और अवैध खनन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की जब्ती के निर्देश दिए है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टि संदीप मेहता की बेंच ने 20 मई की सुनवाई के बाद 26 मई को विस्तृत आदेश जारी किया। कोर्ट ने कहा कि अवैध खनन केवल कानून उल्लंघन का मामला नहीं बल्कि पर्यावरणीय विनाश, वन्यजीवों के आवास खत्म होने और संगठित अपराध का विषय बना चुका है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि कई महत्वपूर्ण फैसले और कार्रवाई तब शुरू हुई जब वरिष्ठ अधिकारियों की व्यक्तिगत पेशी तय की गई। कोर्ट ने कहा कि अवैध खनन जैसे गंभीर मामलों में प्रशासनिक तंत्र की यह सुस्ती चिंताजनक है।

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होर्मुज पर तनाव-अमेरिका ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर फिर से किये हमले, 3 धमाकों से हिल गया बंदर अब्बास

नई दिल्ली. अमेरिका-ईरान के बीच पाकिस्तानी मध्यस्थता से हुआ अस्थाई सीजफायर टूटने की दहलीज पर पहुंच गया गया है। वजह, अमेरिकी सेना ने एक बार फिर ईरान पर एयरस्ट्राइ की है। बुधवार-गुरूवार की रात ईरान के अन्दर एक और बड़े हवाई हमले को अंजाम दिया है। ऐसा बताया जा रहा है कि करीब रात 1.30 बजे स्थानीय समयानुसार बंदर अब्बास शहर के पूर्वी हिस्से से 3 धमाकों की आवाजें सुनाई दी। धमाकों का सटीक जगह और स्त्रोत अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है।
एक अमेरिकी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया है कि अमेरिकी सेना ने रातभर ईरान में नये हमले किये। जिसमें एक ऐसे सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया गया है। जिसके बारे में अधिकारियों का मानना था कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी सेना और कमर्शियल समु्रदी आवाजाही के लिये खतरा पैदा कर रहा था। यह कार्यवाही आत्मरक्षा में की गयी है। इस नये हमले के बीच अमेरिकी सेना ने ईरान द्वारा लांच किये गये कई घातक ड्रोन को भी बीच हवा में ही मार गिराया है।
ईरान समझौते पर ट्रंप के सख्त तेवर
गौरतलब है कि यह पूरी सैन्य कार्रवाई उस वक्त हो रही है जब दोनों देशों के बीच युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने के लिए ओमान और कतर की मध्यस्थता से बैक-चैनल कूटनीतिक बातचीत चल रही है।  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर एक कड़ा और दीर्घकालिक समझौता करने के लिए लगातार दबाव बना रहे है।
कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रंप के तेवर काफी सख्त नजर आए है। उन्होंने शांति वार्ता पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा, ‘मैं इस (प्रस्तावित समझौते) से अभी संतुष्ट नहीं हूं।  ईरान भले ही समझौता करना चाहता हो, लेकिन या तो हमें अपनी शर्तों पर इसे अंतिम रूप देना होगा, अन्यथा हमें वापस जाकर इस काम को पूरी तरह (सैन्य बल से) खत्म करना होगा ।’
साथ ही ट्रंप ने उन ईरानी दावों को भी सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि भविष्य के समझौते के तहत ईरान और ओमान मिलकर होर्मुज के शिपिंग रूट को नियंत्रित करेंगे. ट्रंप ने साफ किया कि यह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग हर हाल में पूरी दुनिया के व्यापार के लिए खुला रहेगा।