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MP में कैबिनेट विस्तार की सुगबुगाहट, CM के पास पहुंचे 12 महकमे

भोपाल. मध्य प्रदेश में जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार की भ्अटकलें तेज हो गई है। मध्य प्रदेश सरकार ने मंत्री लखन पटेल से पशुपालन एवं डेयरी विभाग का प्रभार वापस ले लिया। यह विभाग अब मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास रहेगा। उनके पास गृह, सामान्य प्रशासन सहित 11 विभाग है। पिछले कुछ दिनों स ेचल रही अटकलों के बीच सिर्फ एक ही मंत्री के विभाग में फेरबदल किया गया है। सूत्रों के अनुसार जल्द ही विस्तार किया जाएगा। जैास की पिछले कुछ निों पहलं सीएम मोहन यादव ने भी मंत्रिमंडल विस्तार की बात कही थी। जिसमें नए चेहरों को भी मौका देने की बात कही गई थी।
बताया जा रहा है कि किसानों की आय बढाने के लिए इस विभाग के जरिए सरकार कई योजनाएं संचालित कर रही है। गोशालाओं के विस्तार के साथ दुग्ध उत्पादन बढाने के लिए सहकारी समितियों के विस्तार के साथ कई कदम उठाए जा रहे है। लखन पटेल ने इस बारे में मीडिया से कहा कि कौन सा विभाग किसे देना है यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। मुझसे यह विभाग वापस क्यों लिया गया यह मुझे नहीं पता है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है।
मुख्यमंत्री के पास रहेगा विभाग
सीएम मोहन यादव के पास अब पशुपालन एवं डेयरी विभाग भी रहेगा। इससे पहले सीएम मोहन यादव के पास सामान्य प्रशासन, गृह, जेल, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, जनसंपर्क, नर्मदा घाटी विकास, विमानन, खनिज साधन, लोक सेवा प्रबंधन, प्रवासी भारतीय और ऐसे सभी विभाग है जो किसी मंत्री को नहीं दिए गए है।

 

 

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MP में प्रमोशन की प्रक्रिया तेज, जल्‍द जारी होगी लिस्‍ट

भोपाल. हाईकोर्ट द्वारा पदोन्नति नियमों पर रोक लगाने से इनकार के बाद प्रदेश में पदोन्नति प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी क्रम में जनजातीय कार्य विभाग में हजारों शिक्षकों को पदोन्नति मिलने वाली है। विभाग ने उच्च माध्यमिक और माध्यमिक शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया शुरू कर दी है। जल्द ही 400 उच्च माध्यमिक शिक्षकों और करीब 11 हजार माध्यमिक शिक्षकों की वरिष्ठता सूची जारी की जाएगी। इसके बाद पदोन्नति आदेश दिए जाएंगे। इस मुद्दे को लेकर जनजातीय कार्य आयुक्त तरूण राठी के साथ ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन की बैठक हुई। इसमें लंबित पदोन्नति, वरिष्ठता सूची, सीआर, ट्राइबल भत्ता और एचआरए पर चर्चा हुई।
विभाग ने प्रक्रिया जल्द पूरी करने का आश्वासन दियाहै। उधर सहकारिता विभाग ने पदोन्नति नियम-2025 के तहत 15 संवर्गों के 613 अधिकारियों-कर्मचारियों को पदोन्नति दी है। इसमें प्रथम श्रेणी के 41, द्वितीय के 84, तृतीय के 486 और चतुर्थ श्रेणी के 2 कर्मचारी शामिल है। प्रमुख रूप् से 22 संयुक्त आयुक्त, 19 उप आयुक्त, 13 सहायक आयुक्त, 71 अंकेक्षण अधिकारी, 196 वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक आश्र 106 सहकारी निरीक्षक प्रमोट हुए है। अधिकारियों का कहना है कि इससे कर्मचारियों का मनोबल बढेगा और विभागीय कामकाज में गति आएगी।

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ग्वालियर में देर रात हादसा, चलती कार में लगी आग, चालक ने कूदकर बचाई जान

ग्वालियर. गोला का मंदिर थाना क्षेत्र स्थित सूर्य मंदिर रोड पर बुधवार देर रात एक चलती कार में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरी कार को अपनी चपेट में ले लिया। कुछ ही देर बाद कार में जोरदार धमाका हुआ जिससे आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। घटना के कारण कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ। प्रत्यक्षदशियों के अनुसार कार से धुआ उठता देख चालक ने तुरंत वाहन रोक्कर बाहर छलांग लगा दी जिससे उसकी जान बच गई। इसके बाद आग तेजी से फैल गई और पूरी कार धू-धूकर जलने लगी।

इस तरह जल गई कार।
पुलिस ने घटना की जांच शुरू की
जानकारी के अनुसार सूचना मिलते ही गोला का मंदिर थाना पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची। दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाया। प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी मानी जा रही है। जली हुई कार का नंबर एमपी-07-टीएच-1239 है जो प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ऋषभ राजपूत के नाम पर पंजीकृत बताई जा रही है। पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है। वहीं हादसे का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

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शासकीय अभिलेखों में हेराफेरी पड़ी भारी =रिकॉर्ड रूम के 2 कर्मचारियों एवं आरोपी वादी धर्मवीर के खिलाफ FIR दर्ज 

प्रकरण से संबंधित पटवारी पहले ही हो चुका है निलंबित
ग्वालियर,  शासकीय अभिलेखों में षड्यंत्रपूर्वक हेराफेरी करने, राजस्व अभिलेखों एवं खसरा पंजी को फाड़कर नष्ट करने तथा न्यायालय में विचाराधीन प्रकरण में शासन के हितों के विपरीत कार्य करने के मामले में जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान के निर्देश पर रिकॉर्ड रूम में पदस्थ सहायक वर्ग-3 सतपाल कुशवाह, भृत्य वीरेन्द्र कुशवाह तथा आरोपी वादी धर्मवीर के विरुद्ध विश्वविद्यालय थाना में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण (FIR) दर्ज कराए गए हैं। इस मामले में ग्वालियर ग्रामीण तहसील के पटवारी कुलदीप चाहर को पूर्व में ही निलंबित किया जा चुका है।
अपर कलेक्टर कुमार सत्यम ने बताया कि ग्राम महू की भूमि से संबंधित एक दीवानी प्रकरण व्यवहार न्यायालय में विचाराधीन है। जिला प्रशासन के संज्ञान में आया था कि संबंधित पटवारी एवं रिकॉर्ड रूम के कर्मचारियों द्वारा शासन के हितों के प्रतिकूल कार्य करते हुए वादी पक्ष को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। मामले की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच कराई।
अपर कलेक्टर  ने बताया कि विस्तृत जांच में यह भी सामने आया कि वादी धर्मवीर से मिलीभगत कर रिकॉर्ड रूम में पदस्थ सहायक वर्ग-3 सतपाल कुशवाह एवं भृत्य वीरेन्द्र कुशवाह द्वारा शासकीय अभिलेखों में हेराफेरी करने तथा महत्वपूर्ण अभिलेखों को नष्ट करने का प्रयास किया गया। इस गंभीर अनियमितता को दृष्टिगत रखते हुए दोनों कर्मचारियों एवं आरोपी वादी धर्मवीर के विरुद्ध विश्वविद्यालय थाना में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई है।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि शासकीय अभिलेखों से छेड़छाड़ तथा शासन के हितों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की अनियमितता या कदाचार को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के विरुद्ध विधि संवत कठोर कार्रवाई की जायेगी।
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भारत के न्यूक्लीयर पॉवर प्लांट से जुड़ी फाइलों में सेंधमारी, गोपनीय जानकारी डार्क वेब पर पोस्ट

नई दिल्ली एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रेन समवेयर ग्रुप वर्ल्ड लीक्स ने डार्क वेब पर भारत के सबसे पड़े परमाणु ऊर्जा संयुत्र कुडनकुलम न्यूक्लीयर पॉवर प्लांट से जुड़े हजारों कागजात अपलोड किये हैं। इन कागजातों में संयंत्र के कुछ हिस्सों के कथित ब्लूप्रिंट, सप्लायर्स की जानकारी, बैठकों के ब्यौरे और बीमा के दस्तावेज शामिल बताये जा रहे है।
वर्ल्ड लीक्स का दावा है कि यह डेटा अनिल अंबानी अंबानी के रिलायंस इंफ्रस्ट्रक्चर का है। हालांकि इन दस्तावेजों की प्रामणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है। रिपोर्ट के अनुसार, रिलायसं ग्रुप ने स्वीकार किया है कि तीसरे पक्ष के डेटा सेंटर सर्विस प्रोवाइडर वायओटीटीए (योटा) के सर्वर पर उसके डेटा में आंशिक सेंध की गयी थी। कम्पनी ने कहा है कि इसघटना की जानकारी सरकार को दे दी गयी है। लेकिन यह नहीं बताया है कि कौना सा डेटा प्रभावित हुआ।
आपको बता दें कि कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र भारत के 7 परमाणु संयंत्रों में सबसे बड़ा और पीएम नरेन्द्र मोदी की देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की योजना महत्वपूर्ण हिस्स है। रिलायस इंफ्रास्ट्रक्चर इस परियोजना की यूनिट -3 और यूनिट-4 के बुनियादी ढांचे के निर्माण का ठेकेदार है। दोनों इकाईयों के 2027 तक चालू होने की उम्मीद है। इनसे संयुक्त रूप से 2 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन होगा।
सूत्रों के अनुसार, NPCIL इस घटना को लेकर रिलायंस के संपर्क में है और भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In भी मामले की जांच कर रही है. हालांकि, परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE), CERT-In, NPCIL और प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
बता दें कि वर्ल्ड लीक्स वही रैनसमवेयर ग्रुप है, जिसने पहले नाइकी और टाटा समूह को भी निशाना बनाया था।  जून में इस ग्रुप ने दावा किया था कि उसने टाटा समूह से चुराए गए डेटा के बदले 15 लाख डॉलर की फिरौती मांगी थी। उसके अनुसार, फिरौती न मिलने पर उसने डेटा सार्वजनिक कर दिया था।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में साइबर हमलों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। साइबर सुरक्षा कंपनी Surfshark के अनुसार, पिछले वर्ष 2.89 करोड़ भारतीय खातों का डेटा लीक हुआ, जिससे भारत दुनिया में डेटा उल्लंघनों के मामले में तीसरे स्थान पर रहा।  बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब कुडनकुलम संयंत्र का नाम किसी साइबर घटना से जुड़ा हो।   2019 में भी इस संयंत्र के प्रशासनिक नेटवर्क पर उत्तर कोरिया से जुड़े एक हैकर समूह के मैलवेयर का पता चला था।

 

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मंत्री लखन पटेल से छीना पशुपालन विभाग , सीएम के पास11 विभाग

भोपाल. मध्यप्रदेश सरकार के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल से पशुपालन विभाग वापिस ले लिया गया है। यह विभाग अब सीएम अपने पास रखेंगे। इसके बाद लखन पटेल सिर्फ आनंद विभाग के मंत्री रह गये है। सीएम के फैसले के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने इसका नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। जानकारी के अनुसार मंत्री लखन पटेल को आज सुबह सीएम हाउस बुलाया गया और वह लगभग 10 बजे सीएम हाउस पहुंचे। सीएम के साथ बैठक के दौरान उनसे पशुपालन विभाग का प्रभार वापि लेने को लेकर चर्चा हुई। हालांकि गजट नोटिफिकेशन कल ही जारी हा गया था।


सीएम के पास पशुपालन सहित अब 11 विभाग
सीएम मोहन यादव के पास सामान्य प्रशासन विभाग, गृह, जेल , औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, जनसंपर्क, नर्मदा घाटी विकास, विमानन, खनिज साधन, लोक सेवा प्रबंधन, प्रवासी भारतीय, पशुपालन एवं डेयरी विभाग सहित वह सभी विभाग रहेंगे, जो किसी अन्य मंत्री को नहीं सौंपे गये है। इस तरह सीएम के पास अब 11 विभाग हो तय है। हालांकि नोटिफिकेशन में वन विभाग का जिक्र नहीं है।
गोशालाओं के लिए जमीन आवंटन मुसीबत बना
मध्य प्रदेश में स्वावलंबी गोशालाएं शुरू होनी थीं। इनके लिए चुनी गई कई संस्थाओं की स्थिति से सरकार संतुष्ट नहीं थी। इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों और मंत्री की सहमति से उन्हें काम देने की तैयारी की जा रही थी। पिछले तीन-चार महीने से सीएम इस मुद्दे पर मंत्री को कई बार समझा चुके थे। स्वावलंबी गोशालाओं के लिए संस्थाओं को जमीन आवंटन के मामले की शिकायत संघ और बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंची थी। सूत्रों के अनुसार, इसके बाद यह बड़ा फैसला लिया गया है।

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शरद पवार ने डिलिमिटेशन बिल पर मोदी सरकार को समर्थन करेगी-NCP

मुंबई. महाराष्ट्र के दिग्गज नेता और एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने विपक्षी दलों को गच्चा देते हुए संसद में डिलिमिटेशन बिल को सपोर्ट करने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सूत्रों के मुताबिक एनसीपी (एसपी) संसद डिलिमिटेशन बिल का समर्थन करेगी। यह फैसला राजनीतिक गलियारों में काफी अहम माना जा रहा है। क्यों कि एनसीपी (एसपी) विपक्षी खेमे की प्रमुख पार्टियों में शामिल है।
एनसीपी (एसपी) के इस फैसले से महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गयी है। पार्टी के इस कमद को कुछ रणनीतिक माना जा रहा है। जबकि कुछ इसे केन्द्र सरकार के साथ सकारात्मक रूख के तौर पर देख रहे है। अभी तक एनसीपी (एसपी) की तरफ से इस मुद्दे पर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। लेकिन सूत्र इस खकर को पुष्ट करते हुए बता रहे हैं कि पार्टी परिसीमन बिल के पक्ष में वोट करने या समर्थन जताने की तैयारी में है।
प्रिसीमन बिल देश में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमा निर्धारण (डिलिमिटेशन) की प्रक्रिया से संबंधित है। जो जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों को नये सिरे से निर्धारित किया जायेगा। इस बिल के पास होने से संविधान के कुछ अनुच्छेद में बदलाव किया जायेगा। ताकि सीटों का बंटवारा मौजूदा जनसंख्या के अनुसार हो सके। अप्रैल में पेश किये विधेयक के मुताबिक, लोकसभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या बढ़ाकर 815 हो सकती है। इसके अलावा केन्द्र शासित प्रदेशों के लिये 35 तक सीटें हो सकती है। जिसके लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़कर कुल 850 हो सकती है।
अभी सीटों की संख्या 1971 की जनगणना के आधार पर तय है, जबकि देश की आबादी और हालात काफी बदल चुके हैं।  सरकार का कहना है कि लंबे समय से सीटों का नया बंटवारा रुका हुआ था।  इस विधेयक से वह रोक हटेगी और एक परिसीमन आयोग बनेगा, जो नए चुनावी क्षेत्र तय कर सकेगा।  इस विधेयक के तहत नवीनतम जनगणना के आंकड़ों के आधार पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलने वाली सीटों की संख्या बदली जाएगी। साथ ही संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं नए सिरे से तय की जाएंगी, ताकि हर क्षेत्र में जनसंख्या के अनुसार संतुलन बनाया जा सके।
अप्रैल में गिरा था बिल
आपको बता दें कि इस साल अप्रैल में संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा संवैधानिक संशोधन बिल पेश किया था, तब विपक्ष ने एकजुटता दिखाते हुए बिल का जोरदार विरोध किया और संसद में बिल के खिलाफ वोट कर विधेयक को गिरा दिया था।  बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े थे, जबकि विरोध में 230 वोट पड़े थे।  बिल को पेश करने के दौरान सदन में कुल 528 सांसद मौजूद थे. पारित होने के लिए 352 वोट चाहिए थे। तब सरकार 54 वोट से चूक गई थी. तब बिल के गिरने के बाद PM मोदी ने कहा था कि हमारे पास नंबर नहीं थे, इसका मतलब ये नहीं कि हम हार गए. आगे और मौके आएंगे।

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अब कॉलोनियों में खुल सकेंगे अस्पताल, होटल और उद्योग, MP सरकार मिक्स्ड लैंड यूज नियमों में बदलाव करने की तैयारी

भोपाल. मध्य प्रदेश सरकार अपने लैंड यूज नियमों में एक बडा और महत्वपूर्ण बदलाव करने की तैयारी में है। नए नियमों के तहत अब केवल प्रतिबंधित गतिविधियांे की एक लिस्ट जारी की जाएगी जिसका मतलब है कि जिन कामों पर रोक नहीं है उन सभी को आवासीय क्षेत्रों में संचालित करने की अनुमति मिल सकेगी। इस नए ड्राफ्ट फ्रेमवर्क के लागू होने से नए प्रोजेक्ट्स की आवासीय कॉलोनियों में अस्पताल, होटल, कोचिंग सेंटर और रेस्त्रां के साथ प्रदूषण न फैलाने वाले छोटे उद्योगों को भी स्थापित किया जा सकेगा।
यह बदलाव केवल नए विकसित होने वाले क्षेत्रों ग्रीन फील्ड एरिया पर ही प्रभावी होगा और पहले से बसे हुए इलाकों या पुरानी कॉलोनियों के स्वीकृत लेआउट में कोई फेरबदल नहीं करेगा। हालांकि शहरी योजनाकारों ने इस नीति पर चिंता जताई है। इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर्स इंडिया, मप्र के सचिव सुमित गोठी ने चेतावनी दी है कि बिना किसी स्पष्ट और कडे मानकों के आवासीय क्षेत्रों में व्यावासयिक गतिविधियों की अनुमति देने से शहरी अव्यवस्था बढेगी, कॉलोनियों की शांति भंग होगी और नियोजित विकास पर बुरा असर पडेगा।

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MP में मेडिकल नियमों में बड़ा फेरबदल, एनआरआई सीटों के लिए दिखाना होगा कानूनी गार्जियन होने का सबूत

भोपाल. मध्य प्रदेश सरकार चिकित्सा शिक्षा प्रवेश प्रक्रिया में एक बडा बदलाव करने जा रही है। शैक्षणिक सत्र 2026 से एमबीबीएस और पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अलग-अलग नियम लागू किए जाएंगे। इस नए बदलाव का मुख्य उद्देश्य एनआरआई कोटे के गलत इस्तेमाल को रोकना और पात्रता शर्तों को कडा करना है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के आधार पर अब राज्य में एनआरआई कोटे के लिए ब्लड रिलेशन को स्पष्ट रूप से परिभाषित कर दिया गया है।
एनआरआई रिश्तेदार के नाम का हवाला देकर इस कोटे का लाभ नहीं उठा सकेगा
अब कोई भी छात्र महज किसी एनआरआई रिश्तेदार के नाम का हवाला देकर इस कोटे का लाभ नहीं उठा सकेगा। नए नियमों के तहत उम्मीदवारों को यह कानूनी रूप से साबित करना होगा कि संबंधित एनआरआई व्यक्ति ही उनका वास्तविक अभिभावक है। इसके लिए छात्रों को एक शपथ पत्र के साथ गार्जियन एंड वाडर््स एक्ट 1890 के तहत कानूनी अभिभावक होने का प्रमाण पत्र भी जमा करना होगा। न्यायिक गाइडलाइन के अनुसार इस कोटे का लाभ केवल उन्हीं उम्मीदवारों को मिलेगा जिनके माता-पिता, सागे भाई-बहन, दादा-दादी, चाचा-चाची, मामा-मामी या प्रथम श्रेणी के चचेरे-ममेरे भाई-बहन वास्तविक रूप् से एनआरआई है और विदेश में रहते है।
सीएम से मिल चुकी है मंजूरी
चिकित्सा शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव को राज्य के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला की सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है और फिलहाल इसे कानूनी समीक्षा के लिए भेजा गया है। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी आगामी नीट-यूजी और पीजी काउंसलिंग सत्र 2026-27 से इस नई व्यवस्था को प्रभावी बनाने की तैयारी में है। इसके साथ ही प्रशासन शुरूआती दो चरणों के बाद बचने वाली सीटों के लिए होने वाली कॉलेज लेवल काउंसलिंग को भी ऑनलाइन मोड में आयोजित करने की योजना बना रहा है। काउंसलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और सीटों को बेवजह ब्लॉक करने या बीच में कोर्स छोडने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए सीट लीविंग बॉण्ड के तहत जुर्माने के नियमों को भी और अधिक स्पष्ट किया जाएगा।

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डेढ़ साल हालात बदलने की संभावना फिर से नरोत्तम की सत्ता में होगी वापिसी, आगे मजबूत राजयोग के संकेत

भोपाल. मध्यप्रदेश की विधानसभा 6 बार परचम लहराने वाले विधायक, सबसे ताकतवर मंत्रियों में शुमार, बीजेपी के बड़े रणनीतिकार…फिर भी दतिया उपचुनाव में टिकट नहीं मिला। आखिर ऐसा क्या हुआ कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम अंतिम समय तक चर्चा में रहने के बावजूद पार्टी ने किसी और पर भरोसा जताया। क्या यह सिर्फ राजनीतिक समीकरणों का फैसला था। या समय ने भी उनका साथ छोड़ दिया। इन सवालों के जवाब तलाशन के लिये एक वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य और भोपाल स्थित मठ संस्थान के संचालक एवं ज्योतिषाचार्य पं. विनोद गौतम से नरोत्तम मिश्रा की जन्म कुंडली का विश्लेषण कराया। कुंडली में उस वक्त की ग्रह दशा, टिकट कटने के पीछे ज्योतिषीय वजह को लेकर जो बातें सामने आई। वह काफी दिलचस्प हैं ज्योतिषाचार्य का दावा है कि मौजूदा ग्रह स्थिति भले ही प्रतिकूल रही हो। लेकिन कुण्डली में सत्ता और राजनीतिमें दोबारा मजबूत वापिसी के याग भी स्पष्ट दिखाई दे रहे है।

आशुतोष तिवारी के लिए वोट मांगते समय नरोत्तम मिश्रा भावुक हो गए।

10 जुलाई को आखिर क्या हुआ
10 जुलाई को बीजेपी ने दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिये आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित कर दिया। इस फैसले ने सभी राजनीतिक अटकलों को पलट दिया। क्योंकि पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था। नरोत्तम मिश्रा ने चुनाव की तैयारी शुरू कर दी थी। नामांकन फॉर्म भी खरीद लिया था और लगातार क्षेत्र में बैठकें कर रहे थे। लेकिन पार्टी ने अंतिम समय में आशुतोष तिवारी पर भरोसा जताया। टिकट कटने के बाद नरोत्तम समर्थकों ने दतिया में प्रदर्शन करते हुए हाइवे जाम किया और बाद में नरोत्तम मिश्रा ने स्वयं सामने आकर कार्यकर्त्ताओं से शांत रहने और आशुतोष तिवारी को जिताने की अपील की।
पंडित गौैतम के अनुसार डॉ. नरोत्तम मिश्रा का जन्म 15 अप्रैल 1960 को ब्रह्ममुहूर्त के समय, सूर्योदय काल में अश्विनी नक्षत्र के अंतिम चरण में हुआ था। उनका कहना है कि जन्म के समय चन्द्रमा मेष राशि में तथा सूर्य वृश्चिक राशि क प्रभाव में था। इसी आधार पर तैयार जन्मपत्री में वर्तमान समय में गुरू महादशा प्रभावी है।
2023 से शुरू हुई गुरु महादशा
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक डॉ. मिश्रा की जन्मकालीन दशा केतु से शुरू हुई, जिसके बाद क्रमशः शुक्र, सूर्य, चंद्र, मंगल और राहु की महादशाएं चलीं। उनका दावा है कि वर्ष 2023 में राहु महादशा समाप्त होने के बाद गुरु महादशा प्रारंभ हुई, जिसके दौरान वर्तमान में शनि का अंतर चल रहा है। उनके अनुसार यही समय राजनीतिक और व्यक्तिगत चुनौतियों का कारण बन रहा है।
बुध और शनि से बढ़ रहीं चुनौतियां
पं. गौतम का कहना है कि वर्तमान में गुरु महादशा में बुध तथा शनि के प्रभाव से पराक्रम में कमी, अनावश्यक व्यय, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां और विरोधियों की सक्रियता बढ़ने के योग बन रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मंगल और राहु की परस्पर दृष्टि कुंडली में षड्यंत्र योग का निर्माण कर रही है, जिसके कारण राजनीतिक विरोध और विवाद की स्थितियां लगातार बनी रह सकती हैं।

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